राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री रावत के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच के निर्देश देने के नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हाईकोर्ट के आदेश की आलोचना की, जिसमें न्यायाधीश एम.आर. शाह और आर. सुभाष रेड्डी भी शामिल थे।
वेणुगोपाल ने कहा कि उच्च न्यायालय ने सभी आधारों को मिला दिया है और जिस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, वह विशेष रूप से एक व्यक्ति के मामले में सुनवाई के लिए बाध्य है, जो एक सार्वजनिक कार्यालय रखता है। उन्होंने शिवकुमार मामले का हवाला दिया, जहां यह कहा गया कि चूंकि इस मामले में कोई व्यक्ति पक्षकार नहीं है, इसलिए जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता।
न्यायमूर्ति भूषण ने कहा कि ऐसा कठोर आदेश पारित किया गया, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया और इसमें मुख्यमंत्री भी एक पार्टी नहीं थे। न्यायाधीश शाह ने भी कहा कि इस आदेश ने तो सभी को ही आश्चर्य में डाल दिया है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था।
दरअसल उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक पत्रकार उमेश शर्मा द्वारा उत्तराखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया था।
मुख्यमंत्री पर भाजपा के झारखंड प्रभारी होते हुए गौ सेवा आयोग में उम्मीदवार का समर्थन करने के लिए उनके रिश्तेदारों के बैंक खाते में धन हस्तांतरित करने का आरोप लगाया गया है।
शीर्ष अदालत ने मुख्यमंत्री के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाया, जब राज्य सरकार और मुख्यमंत्री याचिका में पक्षकार भी नहीं हैं।
मंगलवार को हाईकोर्ट ने दो पत्रकारों उमेश शर्मा और शिव प्रसाद सेमवाल द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर फैसला सुनाया।
पत्रकारों ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की, जो इस साल जुलाई में आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत विद्रोह, जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप में दर्ज की गई थी।
राजनीति
नंदीग्राम कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर भड़के संजय राउत, बोले- डर गए, इसलिए पुराने केस में किया गिरफ्तार

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने नंदीग्राम उपचुनाव के उम्मीदवार मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत और दिल्ली में एसआईआर के दौरान 31 लाख वोटर्स को नोटिस जारी होने पर भाजपा पर निशाना साधा।
नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत पर संजय राउत ने कहा, “भाजपा क्या कहती है, इससे क्या फर्क पड़ता है? जिस तरह से नंदीग्राम से कांग्रेस के उम्मीदवार को गिरफ्तार किया गया है, यह कैसा न्याय है? आप डर गए, है ना? आप नंदीग्राम में डरे हुए हैं। इसीलिए आपने हमारे उम्मीदवार को 6-10 साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया।”
बता दें कि 19 सितंबर को नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के एक दिन बाद पुलिस ने शनिवार को रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार शफीउल इस्लाम को भी एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया था।
वहीं, दिल्ली में एसआईआर के दौरान 31 लाख वोटर्स को नोटिस जारी होने (जिसमें आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार का नाम भी शामिल है) पर भी संजय राउत ने केंद्र सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा, “जहां बड़ी पार्टियों के चुनाव चिह्न चोरी हो जाते हैं और पूरी की पूरी पार्टियां चोरी हो जाती हैं, वहां अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट से गायब हो जाए तो किसी को हैरान नहीं होना चाहिए। यह तो होना ही है। केजरीवाल जी का नाम गायब है। महाराष्ट्र और पूरे देश में हजारों, लाखों और करोड़ों लोगों के नाम गायब हो जाते हैं। यह सरकार कुछ भी कर सकती है। वे दिखाना चाहते हैं कि केवल वही वोट करेंगे जिन्हें वे चाहते हैं, और जिन्हें वे नहीं चाहते, वे वोट नहीं करेंगे। यह सरकार की नीति है।”
संजय राउत ने आरोप लगाया कि सरकार वोटर लिस्ट से नाम हटाकर चुनिंदा लोगों को ही वोट देने देना चाहती है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव चिह्न और पार्टियां ही चोरी हो सकती हैं तो वोटर लिस्ट से नाम गायब होना कोई नई बात नहीं है।
राष्ट्रीय समाचार
सरकार की पहलों के कारण बेरोजगारी दर घटकर 3.2 प्रतिशत हुआ : डॉ. एल. मुरुगन

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने बताया कि सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलों के परिणामस्वरूप बेरोजगारी दर 6 प्रतिशत से घटकर 3.2 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने बताया कि देश में स्टार्टअप्स की संख्या, जो 2014 में लगभग 400 थी, बढ़कर 2.5 लाख से अधिक हो गई है और यह भी उल्लेख किया कि स्टार्टअप संस्थापकों में एक महत्वपूर्ण संख्या 30 वर्ष से कम आयु के युवाओं की है।
मुरुगन ने निरंतर सीखने, नई तकनीकों को अपनाने और पेशेवर कौशल के नियमित उन्नयन के महत्व पर भी जोर दिया।
उन्होंने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और परमाणु ऊर्जा जैसे अग्रणी क्षेत्रों में युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों के बारे में बताया साथ ही अंतरिक्ष, रक्षा, शिक्षा, शासन और सार्वजनिक प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि ‘रोजगार मेलों’ के माध्यम से अब तक 12.75 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं, जो युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने पर सरकार के समर्पित जोर को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में भर्ती होने वाले नए युवा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने भर्ती होने वाले लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को केवल रोजगार सुरक्षित करने के रूप में न देखें, बल्कि राष्ट्र की सेवा करने और इसके समग्र विकास में योगदान देने के अवसर के रूप में देखें।
उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र केवल नियुक्ति का आदेश नहीं है बल्कि राष्ट्र की सेवा करने का एक अवसर है और यह भी बताया कि सरकारी कर्मचारी नागरिकों के साथ बातचीत करते समय प्रतिनिधियों और सरकार के चेहरे के रूप में कार्य करते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईमानदारी, जवाबदेही, सहानुभूति और जनता के प्रति मानवीय दृष्टिकोण सार्वजनिक सेवा का अभिन्न अंग बने रहना चाहिए।
मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार की विभिन्न प्रमुख पहलों, जिनमें मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा ऋण योजना शामिल हैं, ने युवाओं को रोजगार चाहने वालों के साथ-साथ रोजगार सृजनकर्ता के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि
डॉ. मुरुगन ने कहा कि तमिलनाडु में नवोदय विद्यालय वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करेंगे, उनकी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा प्रदान करेंगे और छात्रों को विभिन्न भारतीय भाषाएं सीखने के अवसर प्रदान करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-अमेरिका युद्ध अभ्यास में गरजी एम777 तोप, तबाह किए सभी लक्ष्य

भारत और अमेरिका की सेनाएं अपनी तोपखाना क्षमता का जोरदार प्रदर्शन कर रही हैं। तोप की मारक क्षमता का यह प्रदर्शन भारत-अमेरिका के संयुक्त युद्धाभ्यास किया जा रहा है। भारत में जारी युद्धाभ्यास में एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर से फायरिंग की गई। एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों ने सीधे नजर आ रहे लक्ष्यों को डायरेक्ट फायरिंग पद्धति से निशाना बनाया।
इस बीच भारतीय सेना ने ‘हर पल सतर्क। हर समय तैयार।’ का अपना संदेश दोहराया है। सेना जय से विजय मिशन पर काम कर रही है। भारतीय सेना के मुताबिक राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज एम777 की तोप टुकड़ियों ने बेहद सटीक निशाना साधा। सभी निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इस दौरान जवानों ने अपनी पेशेवर दक्षता, सटीकता और युद्ध के लिए तैयार रहने की क्षमता का प्रदर्शन किया। फायरिंग खत्म होने के बाद अमेरिकी सैन्य दल ने एम777 की तैनाती वाली जगहों का दौरा किया।
अमेरिकी सैनिकों ने भारतीय तोप टुकड़ी के अधिकारियों और जवानों से बातचीत की। इस दौरान दोनों सेनाओं के बीच सैन्य अनुभव और बेहतर युद्धक प्रक्रियाओं को लेकर जानकारी का आदान-प्रदान हुआ। यह अभ्यास दोनों देशों के सैनिकों को बिलकुल युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्यास का अवसर दे रहा है। दोनों देश अपनी क्षमताओं को परखने के साथ-साथ एक-दूसरे के अनुभवों से सीख रहे हैं। दोनों सेनाओं का यह अभ्यास 16 सितंबर को राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ था। फायरिंग से कुछ दिन पहले यहां एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की तैनाती से जुड़ी गतिविधियों व संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रदर्शन किया था। इन गतिविधि के तहत एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की तैनाती पर व्याख्यान व प्रदर्शन किया गया।
इसमें सैन्य कर्मियों की जिम्मेदारियों, तोप की तैनाती की प्रक्रिया और स्थानीय रक्षा के समन्वय से जुड़े पहलुओं को समझाया गया था। दोनों देशों के जवानों को जवाबी गोलाबारी की स्थिति में वैकल्पिक स्थानों पर स्थानांतरण की प्रक्रिया पर बताई गई थी। इसके साथ ही ‘शूट एंड स्कूट’ अभ्यास किया गया। इस प्रक्रिया में निर्धारित कार्रवाई के बाद तोप को तेजी से उसकी स्थिति से हटाने की क्षमता पर जोर दिया जाता है। इस गतिविधि ने भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों को एक-दूसरे के अनुभवों और कार्यप्रणालियों को समझने का अवसर दिया। दोनों पक्षों के सैन्य कर्मियों के बीच संवाद हुआ और सैन्य अभियानों से जुड़े बेहतर तौर-तरीकों का आदान-प्रदान किया गया।
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच युद्धाभ्यास का 22वां संस्करण उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक एक साथ जारी है। अभ्यास में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इस अभ्यास में आधुनिक तकनीक भी केंद्र में है। सैनिक निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
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