राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली में अवैध प्रवासियों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, हिरासत में छह अफ्रीकी नागरिक
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर : दिल्ली के निहाल विहार इलाके में पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे छह अफ्रीकी नागरिकों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई बाहरी जिला पुलिस के विशेष अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अवैध प्रवास पर रोक लगाना और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
10 अक्टूबर को निहाल विहार पुलिस थाने की गश्ती टीम को चंदर विहार में अवैध प्रवासियों की मौजूदगी की सूचना मिली। हेड कांस्टेबल गजानंद, दलवीर, जगपाल, सरदार मल और कांस्टेबल महेंद्र की टीम ने तुरंत कार्रवाई की। मौके पर पहुंचने पर छह विदेशी नागरिकों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
पूछताछ में इनकी पहचान फ्रैंक फॉचिंग (कैमरून), रोमियो लुसिएन (कैमरून), सैमुनेल (नाइजीरिया), माल्क फैराडे (नाइजीरिया), इवांस डांसो (घाना), और इनौसा (नाइजीरिया) के रूप में हुई। सत्यापन के दौरान पता चला कि इनके पास वैध वीजा या पासपोर्ट नहीं थे और ये सभी वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे थे।
पुलिस ने विदेशी नागरिक अधिनियम, 1946 की धारा 14(सी) के तहत मकान मालिक के खिलाफ अवैध शरण देने का मामला दर्ज किया। इसके बाद विदेशी नागरिक क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय के सहयोग से निर्वासन प्रक्रिया शुरू की गई। वर्तमान में सभी छह व्यक्तियों को लामपुर, नरेला के हिरासत केंद्र में रखा गया है, जहां से उनकी निर्वासन प्रक्रिया पूरी होगी।
बाहरी जिला पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा (आईपीएस) ने बताया कि दिल्ली में अवैध प्रवास के खिलाफ सख्त नीति अपनाई जा रही है। पुलिस नियमित गश्त, सत्यापन और खुफिया जानकारी के आधार पर ऐसे मामलों पर नजर रख रही है। यह अभियान स्थानीय लोगों की सुरक्षा और आव्रजन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें। अवैध प्रवासियों की पहचान और कार्रवाई के लिए पुलिस का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु में धान और गन्ना उत्पादकों को बड़ी राहत, सरकार ने बढ़ाई प्रोत्साहन राशि

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को धान और गन्ना किसानों के लिए ज्यादा प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों का बेहतर दाम दिलाने की कोशिश कर रही है, जिसके तहत खरीद की प्रभावी कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।
विधानसभा में नियम 110 के तहत बयान देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सरकार फसलों के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अलावा, अच्छी किस्म के धान के लिए 289 रुपए प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के धान के लिए 150 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त प्रोत्साहन देगी।
इस बदलाव के बाद अच्छी किस्म का धान बेचने वाले किसानों को 2,750 रुपए प्रति क्विंटल मिलेंगे, जबकि सामान्य किस्म के धान की खरीद कीमत बढ़कर 2,600 रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बढ़ी हुई सहायता का मकसद किसानों पर आर्थिक बोझ कम करना और उनकी उपज के लिए उन्हें अच्छी कीमत दिलाना है।
इस घोषणा से पूरे तमिलनाडु में धान उगाने वाले बड़ी संख्या में किसानों को फायदा होने की उम्मीद है, खासकर उन किसानों को जो अपनी फसल बेचने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों पर निर्भर हैं।
धान राज्य की मुख्य फसलों में से एक है और खरीद की कीमतों का खेती के मौसम के दौरान किसानों की कमाई पर काफी असर पड़ता है।
मुख्यमंत्री विजय ने राज्य की चीनी मिलों को अपनी उपज बेचने वाले गन्ना किसानों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन में भी काफी बढ़ोतरी की घोषणा की।
केंद्र सरकार अभी मिलों को बेचे जाने वाले गन्ने के लिए 3,290.50 रुपए प्रति टन देती है। तमिलनाडु सरकार 709.50 रुपए प्रति टन का अतिरिक्त प्रोत्साहन देगी, जिससे किसानों को मिलने वाली कुल रकम 4,000 रुपए प्रति टन हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार है जब तमिलनाडु में गन्ने की कुल खरीद कीमत 4,000 रुपए प्रति टन के स्तर पर पहुंची है। मुख्यमंत्री ने धान के लिए बदले हुए प्रोत्साहन को भी किसानों के लिए एक अहम कदम बताया और कहा कि सामान्य किस्म के धान के लिए प्रोत्साहन राशि 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाई गई है।
ये घोषणाएं ऐसे समय में की गई हैं जब किसान खेती के सामान, मजदूरी और खेती की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए खरीद की कीमतें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसान समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य भर में खेती को मजबूत करने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए उपाय करती रहेगी।
राष्ट्रीय समाचार
जीईएम ने बदली सार्वजनिक खरीद की तस्वीर, 10 साल में 422 करोड़ से 1.55 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचा कारोबार: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने सार्वजनिक खरीद की व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने बताया कि एक दशक पहले जहां इस प्लेटफॉर्म का सकल व्यापारिक मूल्य (जीएमवी) केवल 422 करोड़ रुपए था, वहीं आज यह बढ़कर 1.55 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए एक पोस्ट में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जीईएम आज देश में पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और डिजिटल सरकारी खरीद प्रणाली का मजबूत आधार बन चुका है। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर 12.28 लाख से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) पंजीकृत हैं, जिनमें 2.25 लाख से ज्यादा महिला उद्यमियों द्वारा संचालित इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा 42,000 से अधिक स्टार्टअप्स भी इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि यह साबित करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर सशक्तीकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की वास्तविक प्रतिबद्धता है।
उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में जीईएम ने प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है, बेहतर मूल्य खोज सुनिश्चित की है, खरीद प्रक्रिया की अवधि को कम किया है, सरकार के लिए बड़ी बचत पैदा की है और एंड-टू-एंड डिजिटल खरीद प्रक्रिया के माध्यम से जवाबदेही को मजबूत किया है।”
मंत्री ने बताया कि जीईएम ने सरकारी खरीद बाजार को एमएसएमई, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), कारीगरों और बुनकरों के लिए अधिक सुलभ बनाया है। साथ ही यह ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों को भी मजबूती दे रहा है।
उन्होंने कहा कि जीईएम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है और ‘विकसित भारत’ की नींव को मजबूत कर रहा है।
वर्ष 2016 में शुरू किया गया जीईएम अब अपने 11वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। वर्तमान में यह प्लेटफॉर्म 1.37 लाख से अधिक सरकारी खरीदार संगठनों को लगभग 25 लाख विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं से जोड़ता है।
एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, जीईएम अब केवल खरीद-बिक्री का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत के डिजिटल प्रोक्योरमेंट इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। पोर्टल पर 10,660 से अधिक उत्पाद श्रेणियां और 350 सेवा श्रेणियां उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं की जरूरतें पूरी की जाती हैं।
सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और व्यापक भागीदारी के जरिए जीईएम को और अधिक स्मार्ट एवं एकीकृत बनाया जाएगा, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।
राष्ट्रीय समाचार
भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हुई : रिपोर्ट

भारत ने क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता 31 जुलाई, 2026 तक बढ़कर 300 गीगावाट से अधिक हो गई है। यह देश में स्थापित कुल ऊर्जा क्षमता 552 गीगावाट का करीब 54 प्रतिशत है। यह जानकारी नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से रविवार को दी गई।
केंद्र सरकार ने कहा कि क्लीन एनर्जी के उत्पादन में बढ़ोतरी कई सेक्टर के योगदान से हुई है। सोलर एनर्जी, रिन्यूएनबल एनर्जी में विकास का मुख्य इंजन बनी हुई है। 2014 में इसकी क्षमता सिर्फ 2.8 गीगावाट थी जो अब बढ़कर लगभग 165 गीगावाट हो गई है। साथ ही, विंड एनर्जी सेक्टर में भी तेजी आई है और इसकी क्षमता 2014 के 21 गीगावाट से बढ़कर 58 गीगावाट से ज्यादा हो गई है।
साल 2025-26 के दौरान, देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा उत्पादन की रिकॉर्ड 55.29 गीगावाट क्षमता स्थापित की गई, जिसमें 44.6 गीगावाट सोलर पावर और 6 गीगावाट विंड पावर का मुख्य योगदान रहा।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता हासिल करने के लक्ष्य का 60 प्रतिशत पहले ही पूरा कर लिया है।
रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में हुई बढ़ोतरी देश में रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन में भी दिखती है, जो 2014-15 में 190.96 बिलियन यूनिट (बीयू) से बढ़कर 2025-26 में 477.79 बीयू हो गया है।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता हासिल करने के लक्ष्य का 60 प्रतिशत पहले ही पूरा कर लिया है, क्योंकि देश एक आत्मनिर्भर ऊर्जा इकोसिस्टम बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस तेजी से हो रहे विस्तार को सहारा देने और सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए, भारत ने अपनी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में बदलाव किया है।
देश में ज्यादा क्षमता वाले और घरेलू स्तर पर बने मॉड्यूल के साथ सोलर इंस्टॉलेशन पर ध्यान केंद्रित करने वाली ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ (पीएलआई) स्कीम की वजह से, सोलर पीवी मॉड्यूल के लिए ‘अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स’ (एएलएमएम) के तहत रजिस्टर्ड क्षमता 2014 में सिर्फ 2.3 गीगावाट से बढ़कर ऐतिहासिक 200 गीगावाट के आंकड़े को पार कर गई है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ को लागू करके बड़े पैमाने पर औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को भी बढ़ावा दे रहा है। इससे भारत ग्रीन हाइड्रोजन और उससे बनने वाले उत्पादों के उत्पादन, इस्तेमाल और निर्यात के लिए एक ग्लोबल हब बनने की स्थिति में आ रहा है।
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