राष्ट्रीय समाचार
7/11 मुंबई ट्रेन विस्फोट मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की इंडियन मुजाहिद्दीन थ्योरी की जांच करने से इनकार किया
मुंबई: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 7/11 श्रृंखलाबद्ध ट्रेन विस्फोट मामले में अपने फैसले में बचाव पक्ष के वकीलों द्वारा प्रस्तावित वैकल्पिक परिकल्पना पर कोई निष्कर्ष देने से इनकार कर दिया है – कि विस्फोट कथित तौर पर इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) के सदस्यों द्वारा किए गए थे, जैसा कि इसके एक कथित कार्यकर्ता सादिक शेख ने दावा किया था।
मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष ने कथित तौर पर आईएम के सह-संस्थापक शेख से गवाह के रूप में पूछताछ की थी, जो 2008 में मुंबई पुलिस द्वारा कथित तौर पर दर्ज किए गए उसके इकबालिया बयान पर आधारित था। शेख को उसी वर्ष भारत भर में हुए कई विस्फोटों में कथित भूमिका के लिए 24 सितंबर, 2008 को कुर्ला से गिरफ्तार किया गया था।
अपने कबूलनामे में, शेख ने दावा किया कि 2005 के बाद से हुए कई बम विस्फोटों के लिए आईएम ज़िम्मेदार था, जिनमें 2006 के ट्रेन विस्फोट भी शामिल हैं। हालाँकि, बाद में उसने अदालत को बताया कि यह कबूलनामा ज़बरदस्ती लिया गया था—उसे कैमरे के सामने एक लिखी हुई कहानी याद करने और सुनाने के लिए मजबूर किया गया था।
इस कहानी के अनुसार, बम सेवरी की एक दुकान से खरीदे गए प्रेशर कुकरों में रखे गए थे। इन कुकरों में डेटोनेटर और विस्फोटक थे जो रियाज़ भटकल ने मँगवाए थे, टाइमर आजमगढ़ से लाए गए थे, और इन्हें शेख ने अमीन, डॉ. शाहनवाज़, साजिद और अबू आशिफ के साथ मिलकर लगाया था।
शेख ने अदालत को बताया, “मुझे जो कहानी सुनाई गई थी, उसके अनुसार मैंने प्रथम श्रेणी के ट्रेन पास का इंतज़ाम किया, उन्हें योजना दिखाई और हमने तय जगहों पर बम लगा दिए। विस्फोट के बाद, अबू रशीद ने बम बनाने की सामग्री माहिम खाड़ी में फेंक दी।”
बाद में उसे पक्षद्रोही घोषित कर दिया गया। इसके बावजूद, बचाव पक्ष ने इस बयान के आधार पर एक वैकल्पिक सिद्धांत प्रस्तुत किया, जो एक अन्य जाँच एजेंसी द्वारा एक अलग आतंकवादी हमले की जाँच के दौरान सामने आया था। हालाँकि, उच्च न्यायालय ने इस सिद्धांत पर गहराई से विचार करने से इनकार कर दिया और कहा: “हम पहले ही यह मान चुके हैं कि अभियोजन पक्ष ने ठोस सबूतों के माध्यम से अभियुक्त के विरुद्ध अपराध को संदेह से परे साबित नहीं किया है। इन परिस्थितियों में, हम वैकल्पिक परिकल्पनाओं के मुद्दे पर विचार करना आवश्यक नहीं समझते।”
राष्ट्रीय समाचार
अदाणी ग्रीन एनर्जी 20 गीगावाट की ऑपरेशनल क्षमता वाली भारत की पहली रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बनी

अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने बुधवार को घोषणा की कि उसने 20 गीगावाट की ऑपरेशनल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही, वह ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट के जरिए यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बन गई है।
बयान के अनुसार, अदाणी ग्रीन हर साल 52 अरब यूनिट से ज्यादा क्लीन एनर्जी बना रही है और यह उत्पादन भारत की कुल बिजली खपत का लगभग 3 प्रतिशत है।
एजीईएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा, “20 गीगावाट का आंकड़ा पार करना यह दिखाता है कि अनुशासित काम और दूर की सोच से क्या हासिल किया जा सकता है। आज, एजीईएल अपनी कुशल टीम और लंबे समय से साथ काम कर रहे पार्टनर्स के साथ मिलकर इतनी रिन्यूएबल बिजली पैदा कर रहा है जो लगभग मुंबई और नई दिल्ली की सालाना बिजली की कुल जरूरत के बराबर है। इससे देश की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत हो रही है और साथ ही क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ने की रफ्तार भी तेज़ हो रही है।”
यह उपलब्धि 2016 में तमिलनाडु के कामुथी में एजीईएल के पहले रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट के शुरू होने के एक दशक के भीतर हासिल हुई है, जो इसे भारत की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ने वाली ग्रीनफील्ड रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बनाती है।
कंपनी ने वित्त वर्ष 26 में 5,051 मेगावाट क्षमता जोड़ी, जो चीन के बाहर किसी भी कंपनी द्वारा सालाना जोड़ी गई सबसे अधिक रिन्यूएबल क्षमता है।
एजीईएल के ऑपरेशनल पोर्टफोलियो में लगभग 14.2 गीगावाट सोलर, 2.7 गीगावाट विंड और 3.3 गीगावाट विंड-सोलर हाइब्रिड क्षमता शामिल है।
इसके अलावा, एजीईएल ने 3.55 गीगावाट का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) शुरू किया है, जो चीन के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा डिप्लॉयमेंट है और दुनिया भर में सबसे तेजी से पूरा किए गए प्रोजेक्ट्स में से एक है।
सागर अदाणी ने कहा, “जैसे-जैसे भारत के पावर मिक्स में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ रही है, भरोसेमंद और जरूरत के हिसाब से उपलब्ध होने वाली क्लीन पावर देने के लिए बैटरी स्टोरेज अहम होता जा रहा है।”
एजीईएल की योजना वित्त वर्ष 27 में 10 गीगावाट बैटरी स्टोरेज जोड़ने और अगले पांच वर्षों में अपने पोर्टफोलियो को 50 गीगावाट तक बढ़ाने की है, ताकि 2030 तक 50 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।
राष्ट्रीय समाचार
यूपीआई से लेनदेन में जून में 23 प्रतिशत की वृद्धि, वैल्यू करीब 29 लाख करोड़ रुपए रही

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से लेनदेन जून में सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 22.72 अरब पर पहुंच गया है। इस दौरान इनकी वैल्यू 20 प्रतिशत बढ़कर 28.92 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से बुधवार को जारी डेटा में दी गई।
औसत आधार पर यूपीआई से जून में 75.7 करोड़ लेनदेन प्रतिदिन हुए है। इस दौरान प्रतिदिन लेनदेन की औसत वैल्यू 96,405 करोड़ रुपए रही है।
मई में यूपीआई लेनदेन की संख्या 23.20 अरब थी और इनकी वैल्यू 29.90 लाख करोड़ रुपए रही थी। इस दौरान औसतन, यूपीआई ने मई में हर दिन लगभग 74.8 करोड़ लेनदेन प्रोसेस किए, और प्रतिदिन लेनदेन की औसत वैल्यू लगभग 96,465 करोड़ रुपए रही।
10 साल पहले आम आदमी को डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए शुरू हुआ यूपीआई अब पूरे भारत में रोजाना करोड़ों लेनदेन को आसान बनाता है। यूपीआई लेनदेन की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में सिर्फ 2 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई है।
यूपीआई अब यूएआई, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिससे ग्लोबल फिनटेक सेक्टर में भारत की मौजूदगी मजबूत हुई है।
हाल ही में ग्रीस में यूपीआई के शुरू होने के बाद ग्राहक तुरंत, सुरक्षित और आसानी से पैसे भेज सकते हैं और लेनदेन की लागत पारंपरिक तरीकों की तुलना में बहुत कम हो गई है।
पिछले महीने, अमेरिका के पेमेंट सिस्टम के भविष्य पर चर्चा करते हुए अमेरिकी सांसदों ने भारत के यूपीआई का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे आधुनिक पब्लिक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा दे सकता है। इस दौरान फिनटेक कंपनियों ने कांग्रेस से अमेरिका के पेमेंट नेटवर्क तक पहुंच से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करने की मांग की।
भारत के साथ यह तुलना ‘हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी’ की ‘फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर बनी सब-कमेटी’ की सुनवाई के दौरान की गई। इसमें सांसदों ने इस बात पर विचार किया कि क्या अमेरिका को अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को आधुनिक बनाना चाहिए, ताकि योग्य नॉन-बैंक पेमेंट कंपनियों को पारंपरिक बैंकिंग बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे फेडरल रिजर्व के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच मिल सके।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण : जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची

भारत रवाना होने से पहले आयोजित एक प्रेस वार्ता में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के साथ सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक हितों के आधार पर मजबूत साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं।
जापानी कैबिनेट के जनसंपर्क अधिकारी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट के जरिए इसकी जानकारी दी। पोस्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा,”अंतरराष्ट्रीय स्थिति में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच, भारत के साथ सहयोग का महत्व पहले से कहीं अधिक हो गया है। भारत और जापान मौलिक मूल्यों तथा रणनीतिक हितों को साझा करते हैं और यही हमारी साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।”
उन्होंने बताया कि इस यात्रा में जापान के कारोबारी जगत के 150 से अधिक प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। उनका उद्देश्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के सहयोग के माध्यम से भारत-जापान संबंधों का दायरा और व्यापक बनाना है।
जापानी प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि निवेश, व्यापार, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
ताकाइची ने विश्वास जताया कि भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी तथा सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की संयुक्त भागीदारी के जरिए एक मजबूत और टिकाऊ आर्थिक साझेदारी का निर्माण होगा।
जापान की प्रधानमंत्री बुधवार को तीन दिन के दौरे पर भारत आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संग उच्च स्तरीय वार्ता भी प्रस्तावित है। दोनों नेता 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
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