अपराध
इटावा थाने से 3 ट्रक चोरी…
उत्तर प्रदेश पुलिस की नाक के नीचे से पुलिस थाने पर खड़े 3 ट्रक चोरी करके चोर फरार हो गए और थाना पुलिस को भनक तक नही लगी, जब थाने पर ट्रकों की गिनती हुई तब 3 ट्रक कम पाए जाने पर चोरी की बात पुलिस के संज्ञान में आई, दरअसल थानों में खड़े वाहनों से सामान चोरी होने की बात अब पुलिस के लिए आम हो चली है आये दिन थानों पर खड़े वाहनों की बैटरी व अन्य सामान चोरी हो जाने की बाते सामने आती रहतीं है, लेकिन इस बार चोर मौरंग से ओवरलोड 3 ट्रक ही चोरी कर ले गए,जब पुलिस को इसकी जानकारी हुई तो पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए, पुलिस ने आनन-फानन में टीम बनाकर ट्रकों की तलाश शुरू कर दी,पुलिस की मानें तो 2 ट्रक अभी तक पुलिस के द्वारा बरामद भी कर लिए गए हैं।
ब्यूरो चीफ-कमर आलम इटावा
मामला इटावा जनपद के बकेवर थाने का है जहां थाना पुलिस द्वारा सघन चेकिंग करते हुए बड़ी संख्या में मोरंग से लगे हुए ओवरलोड ट्रकों को सीज करने के बाद थाने में खड़ा किया गया था,थाना परिसर में सीज ट्रकों की संख्या के मुताबिक पार्किंग की व्यवस्था न होने के कारण कुछ ट्रकों को थाने के बाहर ही खड़ा किया गया था,क्योंकि जब भी इस तरह से ट्रक सीज किये तो इसमें एआरटीओ,व्यापारकर, व खनन विभाग द्वारा इनको वेरिफाई किया जाता है इसी क्रम में सीज किये गए ट्रकों में से कुछ ट्रक जब सम्बंधित विभागों से क्लीयरेंस मिलने के बाद रिलीज किये गए तो खड़े सभी ट्रकों की गिनती की गई तो उसमें 3 ट्रक कम पाए जाने के बाद मामला थाना पुलिस के संज्ञान में आया,जब थाने से 3 ट्रक चोरी हो जाने की बात पुलिस की नजर में आई तो पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई,और थाना पुलिस द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को मामले से अवगत करवाया गया,आनन-फानन में मामले में अभियोग पंजीकृत करके उनकी रिकवरी हेतु टीम को लगाया गया,जिनमे 2 ट्रकों की अन्य जनपदों से बरामदगी की बात भी पुलिस द्वारा कही जा रही है।
एसपी ग्रामीण ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बकेवर थाना पुलिस को सूचना थी कि हाइवे से ओवरलोडेड मौरग के ट्रक वहां से निकलते हैं थाना पुलिस द्वारा सघन चैकिंग की जा रही है जिसमे चैकिंग करके काफी संख्या में ट्रकों को सीज करके थाने पर लाये गए थे थाना परिसर में इतनी जगह नही है कि सारे ट्रक वहां खड़े हो सकें तो 30-35 ट्रक ऐसे थे जो बाहर खड़े हुए थे,जब भी इस तरह से ट्रक सीज किये तो इसमें एआरटीओ,व्यापारकर, व खनन विभाग द्वारा इनको वेरिफाई किया जाता है इसी क्रम में सीज किये गए ट्रकों में से कुछ ट्रक जब सम्बंधित विभागों से क्लीयरेंस मिलने के बाद रिलीज किये गए,तो उनमें 3 ट्रक कम मील जो सीज किये गए थे और उनका विभिन्न विभागों से अभी क्लीयर नही हुआ था,उस पर तत्कार बकेवर टाने पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत करके उनकी रिकवरी के लिए टीम भेज दी गई थी इनमें से 2 ट्रकों की बरामदगी अन्य जनपदों में हो गयी है वे लेकर आ रहे हैं, तीसरे के लिए टीम लगी हुई है,इन ट्रकों को पुनः सीज करके जो भी वैधानिक कार्यवाही होगी वो की जाएगी साथ ही पकड़े गए लोगों को जेल भेजा जाएगा।
अपराध
दिल्ली पुलिस ने 1073 किलोग्राम से अधिक पटाखे जब्त किए, 10 एफआईआर दर्ज

त्योहारों के मौसम को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पटाखों की अवैध बिक्री और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने पांच थाना क्षेत्रों में 10 एफआईआर दर्ज की हैं और 1,073.426 किलोग्राम पटाखे जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार, त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों के तहत लाहौरी गेट, बुराड़ी, कोतवाली, बारा हिंदू राव और सब्जी मंडी थाना क्षेत्रों में ये बरामदगी की गई है। सबसे ज्यादा 622.88 किलोग्राम पटाखे सब्जी मंडी इलाके से बरामद हुए।
इसके बाद बारा हिंदू राव से 178.5 किलोग्राम, कोतवाली से 107.6 किलोग्राम, लाहौरी गेट से 88.916 किलोग्राम और बुराड़ी से 75.53 किलोग्राम पटाखे जब्त किए गए।
लाहौरी गेट थाना क्षेत्र में 16 अक्टूबर को बीएनएस की धारा 223(बी) और 288, तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 5 और 9बी के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई। सर शोभा सिंह पॉलीक्लिनिक के सामने वाले इलाके से कुल 88.916 किलोग्राम पटाखे बरामद किए गए।
बुराड़ी इलाके में, 18 अक्टूबर को बीएनएस की धारा 223(ए) और 288, तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 9बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने हिमगिरी के इलाके से 75.53 किलोग्राम पटाखे बरामद किए।
कोतवाली पुलिस ने इन बरामदगी के संबंध में दो एफआईआर दर्ज की हैं। 18 अक्टूबर को, प्रभा धर्मशाला के पास अंगूरी बाग फूल वाला रोड से 93 किलोग्राम पटाखे बरामद होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद, 27 अक्टूबर को चांदनी चौक में मोती सिनेमा के पास 14.6 किलोग्राम पटाखे मिलने पर एफआईआर दर्ज की गई।
नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने कहा कि पटाखों का अनधिकृत भंडारण और असुरक्षित तरीके से उन्हें संभालना आग लगने और चोट लगने का गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, खासकर भीड़-भाड़ वाले बाजारों और रिहायशी इलाकों में।
निवासियों, व्यापारियों, दुकानदारों और संपत्ति मालिकों से नियमों का पालन करने और पटाखों की अनधिकृत बिक्री, उन्हें अपने पास रखने या उनका भंडारण करने से बचने की अपील की गई है। नागरिकों से यह भी कहा गया है कि वे नियमों के उल्लंघन का कोई भी मामला सामने आने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
पुलिस ने लोगों की जान-माल की सुरक्षा करने और त्योहारों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से मनाना सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराया। इन मामलों में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही है।
अपराध
झारखंड पुलिस में सब-इस्पेक्टर बताकर युवती से दुष्कर्म का आरोपी गयाजी से गिरफ्तार

झारखंड पुलिस में दरोगा होने का झूठा रौब दिखाकर एक युवती को अपने जाल में फंसाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपी को बिहार के गया जिले से गिरफ्तार किया गया है। रांची पुलिस और गया के मुफस्सिल थाना की संयुक्त टीम ने मानपुर इलाके में एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार किया।
आरोपी की पहचान अविनाश कुमार उर्फ राज शर्मा के रूप में हुई है, जो गया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित विष्णु विहार कॉलोनी निवासी बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले आई है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर इसी वर्ष 15 मई को रांची महिला थाने में भारतीय न्याय संहिता और संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की कांड संख्या 15/26 के तहत दर्ज इस मुकदमे में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता युवती के अनुसार, आरोपी ने खुद को झारखंड पुलिस में सब-इस्पेक्टर (दारोगा) बताकर सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के जरिए उससे संपर्क साधा था। आरोप है कि वर्दी और पद का खौफ तथा झूठा प्रभाव दिखाकर उसने युवती को विश्वास में लिया और उसका यौन शोषण किया।
आरंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि जब पीड़िता को आरोपी के दावों की पोल खुलने और उसकी असली पहचान का पता चला, तो उसने हिम्मत जुटाकर रांची महिला थाने का दरवाजा खटखटाया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही रांची पुलिस और महिला थाना की विशेष टीम आरोपी की सुरागकशी में जुटी हुई थी। तकनीकी अनुसंधान और सर्विलांस के जरिए रांची पुलिस को यह पुख्ता सुराग मिला कि नाम बदलकर छिप रहा आरोपी वर्तमान में बिहार के गया जिले में शरण लिए हुए है।
इसके बाद रांची पुलिस की एक विशेष टीम गया पहुंची और स्थानीय मुफस्सिल थाना पुलिस के सहयोग से मानपुर क्षेत्र में घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।
अपराध
दिल्ली पुलिस ने फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार, 2.5 करोड़ की संपत्ति जब्त

दिल्ली पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए बैंक खाताधारकों के रूप में फर्जीवाड़ा करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी ‘रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट’ (आरटीजीएस) निर्देशों के जरिए बैंक अधिकारियों को 22.56 लाख रुपए का चूना लगाया था।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ लगभग 2.50 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है, जिसमें सोने के आभूषण, 101 सोने के सिक्के, नकद और एक एसयूवी शामिल है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से एक ‘घोषित अपराधी’ है, जो नकली नोटों से जुड़े एक मामले में सात साल से अधिक समय से फरार चल रहा था।
यह मामला राजेंद्र प्लेस में स्थित बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच से जुड़ा है। ब्रांच मैनेजर ने एक शिकायत दर्ज कराई थी और बताया कि 5 अगस्त को एक व्यक्ति ने खुद को दीपक मल्होत्रा बताकर बैंक अधिकारियों से संपर्क किया। दीपक मल्होत्रा कई ऐसी कंपनियों के निदेशक हैं, जिनका इस शाखा में खाता है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पहले अधिकारियों का भरोसा जीतने के लिए 1 करोड़ रुपए की ‘फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट’ (एपडीआर) बनाने की बात की। बाद में उसने फिर संपर्क किया और दावा किया कि कंपनी को एक भुगतान करना है, लेकिन उनकी चेकबुक खत्म हो गई है। उसने अनुरोध किया कि इस लेनदेन को ईमेल के जरिए पूरा किया जाए।
आरोपी ने कंपनी के रजिस्टर्ड ईमेल पते से मिलता-जुलता एक ईमेल आईडी इस्तेमाल करके फर्जी भुगतान अनुरोध भेजा। ईमेल में कंपनी का जाली लेटरहेड लगा था और बैंक को 22,56,922 रुपए किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया था।
जब बैंक अधिकारियों ने जरूरी ‘इंडिमनिटी’ (क्षतिपूर्ति) दस्तावेजों की मांग की, तो फोन करने वाले ने यह कहकर दबाव डाला कि पहले भी ऐसे लेनदेन किए जा चुके हैं और भुगतान बहुत जरूरी है। इसके बाद बैंक ने वह फर्जी आरटीजीएस ट्रांसफर कर दिया।
शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू की। पुलिस को पता चला कि ठगी गई रकम पश्चिम बंगाल के बंधन बैंक में खुले एक ‘म्यूल’ खाते में गई थी। टेलीकॉम रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और बातचीत के विवरण के तकनीकी विश्लेषण से जांचकर्ताओं को संदिग्धों की पहचान करने में मदद मिली। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इनकी पहचान उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (लोनी) निवासी 36 वर्षीय विनय कुमार यादव और नोएडा निवासी 65 वर्षीय अनिल कुमार सहगल के रूप में हुई है।जांच से पता चला है कि आरोपी कॉर्पोरेट बैंक ट्रांजेक्शन को निशाना बनाने के लिए फर्जी कंपनी लेटरहेड, धोखेपूर्ण ईमेल आईडी, सोशल इंजीनियरिंग और ‘म्यूल अकाउंट्स’ का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद, इस पैसे को अन्य संपत्तियों में निवेश कर दिया जाता था, जिसमें पश्चिम बंगाल के एक जौहरी से खरीदा गया सोना भी शामिल है।
पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपी गाजियाबाद, सहारनपुर, अयोध्या और फरीदाबाद सहित कई जगहों पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पहले भी शामिल रहे हैं। बताया जाता है कि जेल में रहने के दौरान इनकी जान-पहचान हुई थी। इससे पहले ये लोग ‘मैजिक पेन’ का इस्तेमाल करके चेक से जुड़ी धोखाधड़ी में भी शामिल रह चुके हैं।
इन गिरफ्तारियों से पुलिस को गुरुग्राम, पलवल और दिल्ली में दर्ज छह अन्य मामलों को सुलझाने में भी मदद मिली है। इन मामलों में 16.65 लाख रुपए से लेकर 2.98 करोड़ रुपए तक की धोखाधड़ी हुई थी। साथ ही, 88 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने की एक कोशिश भी शामिल है।
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