अंतरराष्ट्रीय समाचार
वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने मार्को रुबियो से उठाई उइगरों की सुरक्षा की मांग
वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (डब्ल्यूयूसी) ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अपील की है कि अगले सप्ताह उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान वह मध्य एशिया में रह रहे उइगर समुदाय की बढ़ती असुरक्षा और चीन की सीमाओं के बाहर होने वाले दबाव और दमन के मुद्दे को उठाएं।
डब्ल्यूयूसी के अनुसार, मध्य एशिया एक तरफ उन उइगरों के लिए शरणस्थली बनी है, जो चीन के शिनजियांग क्षेत्र में कथित उत्पीड़न से बचकर आए हैं, लेकिन दूसरी तरफ यहां भी वे निगरानी, धमकी, मनमानी हिरासत और चीन वापस भेजे जाने जैसे खतरों का सामना कर रहे हैं।
संगठन ने कहा कि उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों में रहने वाले उइगर लंबे समय से दबाव झेल रहे हैं। उनका कहना है कि बीजिंग इन देशों से उइगरों की राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के खिलाफ सहयोग की मांग करता रहा है।
डब्ल्यूयूसी ने याद दिलाया कि अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 2019 में मध्य एशियाई नेताओं के साथ बैठक के दौरान सार्वजनिक रूप से उइगरों का मुद्दा उठाया था और उनसे उइगरों को चीन वापस न भेजने की अपील की थी। उन्होंने 2020 में कजाकिस्तान की यात्रा के दौरान भी यही चिंता दोहराई थी।
संगठन का कहना है कि अब मार्को रुबियो के पास भी एक महत्वपूर्ण मौका है कि वह इसी तरह उइगरों के अधिकारों के समर्थन में अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराएं।
डब्ल्यूयूसी ने रुबियो से मांग की कि वह मध्य एशियाई सरकारों से कहें कि उइगरों को जबरन चीन न भेजा जाए। संगठन का कहना है कि चीन लौटाए जाने पर उन्हें उत्पीड़न, मनमानी हिरासत, यातना और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है।
संगठन ने आग्रह किया कि अमेरिका मध्य एशिया के देशों पर दबाव डाले कि वे उइगरों की निगरानी करने, उन्हें डराने-धमकाने, हिरासत में लेने या उनकी आवाज दबाने से जुड़े चीनी अनुरोधों को स्वीकार न करें। खासकर तब, जब वे सिर्फ अपने राजनीतिक विचार, शांतिपूर्ण सामाजिक गतिविधियां, धार्मिक आस्था या विदेश में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क बनाए रखते हों।
पिछले महीने डब्ल्यूयूसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से भी अपील की थी कि 24 सितंबर को राष्ट्रपति शी चिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान शिनजियांग में उइगरों के कथित नरसंहार और विदेशों में रह रहे उइगर समुदाय पर चीनी अधिकारियों के दबाव का मुद्दा उठाया जाए।
डब्ल्यूयूसी के अध्यक्ष तुर्गुनजान अलाउडुन ने कहा, “शी चिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा केवल उइगर नरसंहार की निंदा करने तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने का एक अहम अवसर है। अमेरिका लंबे समय से उइगर लोगों का मजबूत और मुखर समर्थक रहा है, और डोनाल्ड ट्रंप को इस अवसर का उपयोग कर यह समर्थन जारी रखना चाहिए।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
यूएस ट्रेजरी में चीन की घटी हिस्सेदारी, भारत की होल्डिंग बढ़कर 219 अरब डॉलर के पार

यूएस ट्रेजरी में चीन की हिस्सेदारी अगस्त में तेजी से गिरी है, जबकि भारत की होल्डिंग में लगातार तीसरे महीने इजाफा दर्ज किया गया है। यह जानकारी अमेरिकी सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा में दी गई।
ट्रेजरी इंटरनेशनल कैपिटल (टीआईसी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि अगस्त के अंत में चीन की होल्डिंग्स जुलाई के 618 अरब डॉलर से घटकर 590.7 अरब डॉलर रह गई हैं। यह आंकड़ा एक साल पहले अगस्त 2025 में 699.7 अरब डॉलर पर था। यह दिखाता है कि बीते 12 महीनों में चीन की यूएस ट्रेजरी होल्डिंग्स में लगभग 109 अरब डॉलर की कमी आई है।
अगस्त में भारत की होल्डिंग्स जुलाई के 202.6 अरब डॉलर से बढ़कर 219.7 अरब डॉलर हो गई हैं, जो एक ही महीने में लगभग 17 अरब डॉलर की बढ़ोतरी को दिखाता है। इस साल अप्रैल में भारत की होल्डिंग्स गिरकर 181 अरब डॉलर के निचले स्तर पर आ गई थीं, लेकिन उसके बाद इनमें लगातार सुधार हुआ है और मई में ये 181.3 अरब डॉलर, जून में 186.4 अरब डॉलर और जुलाई में 202.6 अरब डॉलर तक पहुंच गईं। अब ये लगभग उसी स्तर पर वापस आ गई हैं, जहां एक साल पहले थीं।
ताजा आंकड़ों के बाद, दो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की होल्डिंग्स के बीच का अंतर, जो एक साल पहले लगभग 480 अरब डॉलर था, अब घटकर लगभग 371 अरब डॉलर रह गया है।
अमेरिकी ट्रेजरी की प्रमुख विदेशी धारकों की सूची में, भारत 14वें स्थान पर है। इस सूची में हांगकांग 261.5 अरब डॉलर के साथ भारत से आगे है, जबकि नॉर्वे 214 अरब डॉलर के साथ भारत के ठीक पीछे है।
जापान 1,068.3 अरब डॉलर की होल्डिंग के साथ सबसे बड़ा विदेशी धारक बना हुआ है, हालांकि जुलाई में इसकी होल्डिंग 1,103.9 अरब डॉलर थी। यूनाइटेड किंगडम 1,009.5 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। चीन (मुख्य भूमि) तीसरे स्थान पर है। इसके बाद बेल्जियम 490.5 अरब डॉलर, कनाडा 464.6 अरब डॉलर, केमैन आइलैंड्स 463 अरब डॉलर और लक्जमबर्ग 448.2 अरब डॉलर का स्थान है।
यूएस ट्रेजरी ने बताया कि अगस्त में 199.8 अरब डॉलर का नेट टीआईसी इनफ्लो हुआ। इसमें कहा गया है, “विदेशी निवासियों ने अगस्त में दीर्घकालिक अमेरिकी सिक्योरिटीज में अपनी होल्डिंग बढ़ाई, उनकी शुद्ध खरीदारी 300.7 अरब डॉलर रही।” वहीं दूसरी ओर, “विदेशी निवासियों ने अमेरिकी ट्रेजरी बिलों में अपनी होल्डिंग 47.8 अरब डॉलर कम कर दी।”
ट्रेजरी के अनुसार, सितंबर महीने के आंकड़ों को कवर करने वाली अगली टीआईसी रिपोर्ट 18 नवंबर को जारी की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जी-20 बैठक में शामिल होना चाहता है रूस, पुतिन का स्वागत करूंगा : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस ने इस साल अमेरिका की मेजबानी में होने वाली जी20 बैठकों में शामिल होने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।
व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या पुतिन जी20 बैठक में शामिल होने वाले हैं। इस पर ट्रंप ने कहा, “नहीं, उन्होंने सिर्फ शामिल होने इच्छा जताई है। मुझे नहीं पता कि पुतिन खुद आएंगे या नहीं लेकिन अगर वे आते हैं तो मैं जरूर उनका स्वागत करूंगा।”
ईंधन की कीमतों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने खुद जी20 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जी20 बैठकों में रूस के प्रतिनिधि पहले भी शामिल होते रहे हैं।
अमेरिका 2026 में जी20 की अध्यक्षता कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 30 और 31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेंगे। इसके बाद 14 और 15 दिसंबर को ट्रंप फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोरल में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।
रूस और भारत दोनों जी20 के सदस्य हैं। इससे पहले भारत ने सितंबर 2023 में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।
ट्रंप ने कहा कि वह चीन और रूस दोनों के साथ परमाणु समझौता करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने माना कि उन्हें नहीं लगता कि ऐसा इस साल हो पाएगा।
यूक्रेन युद्ध को लेकर जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह भूल गए हैं कि युद्ध की शुरुआत पुतिन ने की थी, तो उन्होंने कहा, “देखिए, मुझे सभी बातें पता हैं। किसी समय मैं सारी जानकारी सार्वजनिक करूंगा। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह युद्ध खत्म होना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “औसतन हर महीने करीब 25,000 सैनिक मारे जा रहे हैं। पिछले महीने यह संख्या 32,000 थी। मैं दोनों पक्षों से बात करता हूं। मुझे लगता है कि दोनों इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं और मेरा पूरा ध्यान इसी पर है कि यह युद्ध समाप्त हो।”
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने यूक्रेन की ओर से ‘स्टारशील्ड’ के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध लगाया है, तो उन्होंने साफ कहा, “नहीं, हमने ऐसा बिल्कुल नहीं किया है।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान में महसूस हुए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.8 दर्ज की गई

पाकिस्तान में शनिवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.8 दर्ज की गई। भूकंप के चलते किसी तरह के नुकसान के बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
एनसीएस के अनुसार, शनिवार सुबह 10:37 बजे लोगों ने भूकंप के तेज झटके महसूस किए। भूकंप का केंद्र मध्य बलूचिस्तान के शहर खुजदार के पास जमीन से 15 किलोमीटर नीचे गहराई में बताया गया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.8 दर्ज की गई। भूकंप के झटकों के बाद लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। हलचल महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थान की ओर भागे।
पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के आसपास के क्षेत्रों में भूकंप के कई दौर महसूस किए गए हैं। खासकर अफगानिस्तान के क्षेत्र में। इस महीने कई बार अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। एक अक्टूबर को भी अफगानिस्तान में 5.3 तीव्रता के तेज झटके महसूस किए गए थे। हालांकि, इस भूकंप में किसी तरह के नुकसान की जानकारी नहीं है।
इससे पहले 7 सितंबर को सुबह 5 बजकर 36 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.1 मापी गई थी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन से 130 किलोमीटर की गहराई पर था। भूकंप से किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं आई।
इससे पहले अगस्त में ही पूर्वी नंगरहार प्रांत में लोगों ने भूकंप के झटकों का सामना किया। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 मापी गई। इस दौरान तेज झटकों की वजह से 15 लोग घायल हुए थे।
इसी वर्ष जून महीने में भी अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। 27 जून को 7 बजकर 19 मिनट और 51 सेकेंड पर 6.2 तीव्रता के भूकंप के झटके लोगों ने महसूस किए। इसका असर दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत के कई अन्य राज्यों में भी पड़ा। यहां भी लोगों ने झटके महसूस किए।
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