अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान में महसूस हुए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.8 दर्ज की गई
पाकिस्तान में शनिवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.8 दर्ज की गई। भूकंप के चलते किसी तरह के नुकसान के बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
एनसीएस के अनुसार, शनिवार सुबह 10:37 बजे लोगों ने भूकंप के तेज झटके महसूस किए। भूकंप का केंद्र मध्य बलूचिस्तान के शहर खुजदार के पास जमीन से 15 किलोमीटर नीचे गहराई में बताया गया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.8 दर्ज की गई। भूकंप के झटकों के बाद लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। हलचल महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थान की ओर भागे।
पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के आसपास के क्षेत्रों में भूकंप के कई दौर महसूस किए गए हैं। खासकर अफगानिस्तान के क्षेत्र में। इस महीने कई बार अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। एक अक्टूबर को भी अफगानिस्तान में 5.3 तीव्रता के तेज झटके महसूस किए गए थे। हालांकि, इस भूकंप में किसी तरह के नुकसान की जानकारी नहीं है।
इससे पहले 7 सितंबर को सुबह 5 बजकर 36 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.1 मापी गई थी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन से 130 किलोमीटर की गहराई पर था। भूकंप से किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं आई।
इससे पहले अगस्त में ही पूर्वी नंगरहार प्रांत में लोगों ने भूकंप के झटकों का सामना किया। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 मापी गई। इस दौरान तेज झटकों की वजह से 15 लोग घायल हुए थे।
इसी वर्ष जून महीने में भी अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। 27 जून को 7 बजकर 19 मिनट और 51 सेकेंड पर 6.2 तीव्रता के भूकंप के झटके लोगों ने महसूस किए। इसका असर दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत के कई अन्य राज्यों में भी पड़ा। यहां भी लोगों ने झटके महसूस किए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जी-20 बैठक में शामिल होना चाहता है रूस, पुतिन का स्वागत करूंगा : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस ने इस साल अमेरिका की मेजबानी में होने वाली जी20 बैठकों में शामिल होने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।
व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या पुतिन जी20 बैठक में शामिल होने वाले हैं। इस पर ट्रंप ने कहा, “नहीं, उन्होंने सिर्फ शामिल होने इच्छा जताई है। मुझे नहीं पता कि पुतिन खुद आएंगे या नहीं लेकिन अगर वे आते हैं तो मैं जरूर उनका स्वागत करूंगा।”
ईंधन की कीमतों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने खुद जी20 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जी20 बैठकों में रूस के प्रतिनिधि पहले भी शामिल होते रहे हैं।
अमेरिका 2026 में जी20 की अध्यक्षता कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 30 और 31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेंगे। इसके बाद 14 और 15 दिसंबर को ट्रंप फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोरल में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।
रूस और भारत दोनों जी20 के सदस्य हैं। इससे पहले भारत ने सितंबर 2023 में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।
ट्रंप ने कहा कि वह चीन और रूस दोनों के साथ परमाणु समझौता करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने माना कि उन्हें नहीं लगता कि ऐसा इस साल हो पाएगा।
यूक्रेन युद्ध को लेकर जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह भूल गए हैं कि युद्ध की शुरुआत पुतिन ने की थी, तो उन्होंने कहा, “देखिए, मुझे सभी बातें पता हैं। किसी समय मैं सारी जानकारी सार्वजनिक करूंगा। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह युद्ध खत्म होना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “औसतन हर महीने करीब 25,000 सैनिक मारे जा रहे हैं। पिछले महीने यह संख्या 32,000 थी। मैं दोनों पक्षों से बात करता हूं। मुझे लगता है कि दोनों इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं और मेरा पूरा ध्यान इसी पर है कि यह युद्ध समाप्त हो।”
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने यूक्रेन की ओर से ‘स्टारशील्ड’ के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध लगाया है, तो उन्होंने साफ कहा, “नहीं, हमने ऐसा बिल्कुल नहीं किया है।”
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भारत-ब्रिटेन ने मिलकर जो हासिल किया, उस पर गर्व है: लिंडी कैमरन

भारत में ब्रिटेन की निवर्तमान उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें भारत और ब्रिटेन ने मिलकर दोनों देशों के लोगों के लिए जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन पर गर्व है। उन्होंने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर भी उत्साह जताया।
भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते संबंधों का उल्लेख करते हुए कैमरन ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया है। वहीं, ‘विजन 2035’ के रोडमैप ने रक्षा, शिक्षा, नवाचार, जलवायु और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत किया है।
भारत में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कैमरन ने कहा, “नमस्कार भारत, यह कितना शानदार सफर रहा। यहां सेवा देना मेरे लिए असाधारण सम्मान की बात रही है। मुझे लगता है कि भारत जैसा कोई दूसरा देश नहीं है। मुझे उन सभी उपलब्धियों पर गर्व है, जिन्हें हमने अपने दोनों महान देशों के लोगों के लिए मिलकर हासिल किया है। मुक्त व्यापार समझौते के जरिए अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने से लेकर भविष्य पर केंद्रित विजन 2035 तक, हमने रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, नवाचार और जलवायु के क्षेत्र में भारत-ब्रिटेन साझेदारी को मजबूत किया है।”
उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उन लोगों की है, जिन्होंने दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।
कैमरन ने भारत में अपने कार्यकाल के दौरान सरकार, कारोबार, शिक्षा और नागरिक समाज से जुड़े लोगों से मुलाकात के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि इन सभी लोगों की भारत-ब्रिटेन संबंधों को आगे बढ़ाने की साझा महत्वाकांक्षा रही है।
उन्होंने कहा, “भारत के अलग-अलग हिस्सों में मुझे सरकार, कारोबार, शिक्षा और नागरिक समाज से जुड़े लोगों से मिलने का अवसर मिला। इन सभी की इस रिश्ते को आगे बढ़ाने की साझा महत्वाकांक्षा है। आप सभी ने भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत करने और दोनों देशों के लोगों तथा कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा करने में मदद की है।” लंदन में नई जिम्मेदारी संभालने के लिए भारत से विदा होने जा रहीं कैमरन ने कहा कि भारत हमेशा उनके दिल में एक विशेष स्थान रखेगा।
उन्होंने कहा, “मैं यहां से इस गर्व के साथ जा रही हूं कि हमने मिलकर बहुत कुछ हासिल किया है। साथ ही, आगे क्या होने वाला है, इसे लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं। भारत-ब्रिटेन संबंधों में असाधारण गति है। मेरे शानदार डिप्टी बेन मिलर कार्यवाहक उच्चायुक्त के रूप में यह जिम्मेदारी संभालेंगे और मुझे भरोसा है कि यह रिश्ता सुरक्षित हाथों में है। आपकी मित्रता, सहयोग और कड़ी मेहनत के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी के साथ काम करना वास्तव में सम्मान की बात रही है।”
अपने संदेश के अंत में कैमरन ने कहा, “फिर मिलेंगे इंडिया, हम जल्द दोबारा मिलेंगे।” लिंडी कैमरन को ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (एफसीडीओ) में नए स्थायी अवर सचिव (पीयूएस) के रूप में नियुक्त किया गया है। वह इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला हैं।
ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने 10 सितंबर को उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए कहा था कि कैमरन के पास कूटनीति, विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में व्यापक अनुभव है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। भारत में उच्चायुक्त के रूप में उनकी हालिया भूमिका भी इसी अनुभव का हिस्सा रही है।
मिलिबैंड ने कहा था कि कैमरन ऐसे एफसीडीओ का नेतृत्व करेंगी, जो ब्रिटेन के मूल्यों और हितों को आगे बढ़ाने के लिए अपने समर्पित और अनुभवी कर्मचारियों की पूरी क्षमता का उपयोग करेगा। उन्होंने अंतरिम स्थायी अवर सचिव के रूप में काम करने वाले निक डायर के योगदान के लिए भी उनका आभार जताया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पनामा के विदेश मंत्री जेवियर से मिली राजदूत प्रतिभा पार्कर, द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर हुई चर्चा

पनामा में भारत की राजदूत प्रतिभा पार्कर और पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-आचा ने शुक्रवार को बैठक की। इस दौरान भारत और पनामा के साझा हितों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की और आपसी संबंधों को और मजबूत बनाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।
पनामा में भारतीय दूतावास ने इस मुलाकात की जानकारी देते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने विभिन्न पारस्परिक हितों के मुद्दों पर चर्चा की और भारत-पनामा संबंधों को और गहरा और मजबूत बनाने के उपायों पर विचार साझा किए।
प्रतिभा पार्कर ने हाल ही में पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो को अपना परिचय पत्र सौंपा। उन्होंने विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-अचा को भी अपने परिचय पत्र प्रस्तुत किए।
इससे पहले 29 सितंबर को प्रतिभा पार्कर ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से नियुक्त किए जाने के बाद पनामा में भारत की राजदूत के रूप में पदभार संभाला था।
इस साल जुलाई में पनामा के विदेश मंत्री जोवियर मार्टिनेज-अचा वास्केज आधिकारिक दौरे पर भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, विकास, व्यवसाय, समुद्री सहयोग, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इसके अलावा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी सहयोग को भी लेकर विचार-विमर्श हुआ।
उस समय जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा था, “नई दिल्ली में पनामा के विदेश मंत्री जोवियर मार्टिनेज-अचा वास्केज से मिलकर खुशी हुई। लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के प्रवेश द्वार के रूप में पनामा के साथ भारत की भागीदारी को और मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया गया।”
उन्होंने कहा था कि बातचीत में व्यापार, व्यवसाय, विकास, समुद्री सहयोग, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और डिजिटल सहयोग जैसे कई क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
भारत यात्रा के दौरान जोवियर मार्टिनेज-अचा वास्केज ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से भी मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल सहयोग और कारोबारी साझेदारी को मजबूत बनाने पर चर्चा की।
भारतीय दूतावास के अनुसार, इस बैठक में दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने, द्विपक्षीय व्यापार के नए अवसर तलाशने और भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर यूपीआई, का उपयोग करते हुए डिजिटल भुगतान और डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार किया गया।
कुल मिलाकर भारत और पनामा दोनों देश व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक, समुद्री सहयोग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
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