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Sunday,13-September-2026
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जोहान्सबर्ग टेस्ट क्यों हार गया भारत?

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सेंचुरियन में अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज करने के बाद भारत जोहान्सबर्ग में दूसरा टेस्ट खेलने गया, एक ऐसी जगह जहां वह पहले कभी भी नहीं हारा था, क्योंकि यहां खेले गए पांच मैचों में दो में जीत और तीन बार ड्रॉ किया था।

हालांकि, चार दिनों के भीतर दक्षिण अफ्रीका ने उन्हें सात विकेट से हरा दिया। भारत की वांडर्स में यह पहली हार थी। हम उन कारणों का पता लगाएंगे, जहां भारत ने 11 जनवरी से केप टाउन में होने वाले निर्णायक मुकाबले से पहले जोहान्सबर्ग में मैच गंवा दिया।

1. बल्लेबाजों का खराब प्रदर्शन (खासकर पहली पारी में)

“मैं कुछ गलत नहीं कहना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि टॉस जीतकर बल्लेबाजों को पहली पारी में अधिक रन बनाने चाहिए थे,” मैच के कप्तान केएल राहुल के इन शब्दों ने उन सबसे बड़े कारणों में से एक को अभिव्यक्त किया, जहां भारत जोहान्सबर्ग में लड़खड़ा गया था।

पहले टेस्ट में भारत के पास केएल राहुल और मयंक अग्रवाल के बीच 117 रनों की साझेदारी की वजह से मजबूत बढ़त थी, जो कि मध्य क्रम के बल्लेबाजों के न चलने के बावजूद 327 रन बने थे। दूसरे टेस्ट में राहुल, अग्रवाल, पुजारा और रहाणे जल्दी आउट हो गए, जिससे भारत एक समय में 91/4 पर था। भारत के लिए 200 पार करने के लिए रविचंद्रन अश्विन ने 46 रनों की शानदारी पारी खेली थी।

दूसरी पारी में पुजारा और रहाणे के साथ मिलकर शार्दुल ठाकुर और हनुमा विहारी ने भारत का स्कोर 266 रनों तक पहुंचा दिया, लेकिन पहली पारी में हुए नुकसान अंतत: महंगा साबित हुआ।

2. दूसरी पारी में पंत का न चलना :

ऋषभ पंत ऐसे खिलाड़ी हैं जो पल भर में खेल को पलटने की क्षमता रखते हैं। वह अपने अच्छे और बुरे दिनों में फर्क देख सकते हैं। दूसरी पारी में चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे के आउट होने के बाद पंत की भूमिका अच्छे काम को आगे बढ़ाने की थी।

लेकिन कगिसो रबाडा की गेंद पर खराब शॉट खेलकर वह भी जल्द ही पवेलियन लौट गए, जिस पर मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने कहा कि वे युवा खिलाड़ी के साथ कुछ शॉट्स खेलने पर चर्चा कर सकते हैं। उन्होंने पहली पारी में 12 रन पर कीगन पीटरसन का कैच भी छोड़ दिया था, जो महंगा साबित हुआ।

3. रनों का ज्यादा न बनना :

केएल राहुल भारत के लिए पहली पारी में 123 के साथ पहला टेस्ट जीतने में एक बड़ी भूमिका निभाने का प्रमुख उदाहरण थे। दूसरे टेस्ट में राहुल अर्धशतक तक पहुंचे, लेकिन आउट हो गए। इसके विपरीत, दक्षिण अफ्रीका के कप्तान डीन एल्गर ने एक कप्तानी पारी खेल मैच को अपने नाम कर लिया था और उन्होंने अपनी टीम की जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की।

4. बड़ी साझेदारियों का अभाव :

पहले टेस्ट के पहले दिन के बाद सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल ने कहा था कि साझेदारी करना और उन्हें बड़ा बनाना अहम था। लेकिन दूसरे टेस्ट में भारत ने कुछ बड़ी साझेदारियां नहीं कीं, जैसे पहली पारी में भारत की सर्वश्रेष्ठ तीन साझेदारियां 42, 40 और 36 थीं, जबकि दक्षिण अफ्रीका की पहले पारी में सर्वश्रेष्ठ तीन साझेदारियां 74, 60 और 38 थीं।

दूसरी पारी में पुजारा और रहाणे के बीच 111 रनों की साझेदारी को छोड़कर, कोई भी बल्लेबाजों ने अर्धशतकीय साझेदारी भी नहीं की थी। दक्षिण अफ्रीका ने 240 रनों का पीछा करते हुए नाबाद 47, 46, 84 और 68 रनों की साझेदारी कर मैच जीत लिया था।

भारत उम्मीद कर रहा होगा कि वे केप टाउन में बड़ी साझेदारी कर सीरीज पर कब्जा कर सकता है, जिस पर द्रविड़ ने भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था, “हमें निश्चित रूप से कुछ बड़ी साझेदारी करनी होगी, जिससे हमें बड़ा स्कोर बनाने में मदद मिलेगी।”

5. सिराज की चोट :

भारत के गेंदबाजी आक्रमण में मोहम्मद सिराज को चोट लग गई थी। हालांकि, सिराज दूसरे दिन गेंदबाजी करने के लिए वापस आए, लेकिन वह अपना सौ प्रतिशत नहीं दे रहे थे, क्योंकि दूसरी पारी में सिराज ने सिर्फ छह ओवर फेंके। चोटिल होने से पहले सिराज ने एल्गर के खिलाफ बेहतर गेंदबाजी की थी।

6. कप्तान कोहली की कमी :

शायद, कोहली की सेवाओं के न होने से भारत जोहान्सबर्ग में मैच गंवा दिया। कोहली के दूसरे टेस्ट की शुरुआत से पहले बाहर होने के कारण केएल राहुल के पास सोचने के लिए ज्यादा समय नहीं था।

दूसरी पारी में कप्तान राहुल नौ ओवर देरी से ठाकुर को लाए, जो गेंद को स्विंग करा सकते थे। वहां, भारत एक चाल चूक गया, क्योंकि स्विंग गेंदबाज पिच पर नमी का इस्तेमाल कर सकता था। दक्षिण अफ्रीका के आसानी से रन बनाने के कारण उनकी फील्डिंग ने कई मौके भी गंवाए थे।

अंतरराष्ट्रीय

कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

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कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।

कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।

इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।

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अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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