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Thursday,30-July-2026
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जोहान्सबर्ग टेस्ट क्यों हार गया भारत?

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सेंचुरियन में अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज करने के बाद भारत जोहान्सबर्ग में दूसरा टेस्ट खेलने गया, एक ऐसी जगह जहां वह पहले कभी भी नहीं हारा था, क्योंकि यहां खेले गए पांच मैचों में दो में जीत और तीन बार ड्रॉ किया था।

हालांकि, चार दिनों के भीतर दक्षिण अफ्रीका ने उन्हें सात विकेट से हरा दिया। भारत की वांडर्स में यह पहली हार थी। हम उन कारणों का पता लगाएंगे, जहां भारत ने 11 जनवरी से केप टाउन में होने वाले निर्णायक मुकाबले से पहले जोहान्सबर्ग में मैच गंवा दिया।

1. बल्लेबाजों का खराब प्रदर्शन (खासकर पहली पारी में)

“मैं कुछ गलत नहीं कहना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि टॉस जीतकर बल्लेबाजों को पहली पारी में अधिक रन बनाने चाहिए थे,” मैच के कप्तान केएल राहुल के इन शब्दों ने उन सबसे बड़े कारणों में से एक को अभिव्यक्त किया, जहां भारत जोहान्सबर्ग में लड़खड़ा गया था।

पहले टेस्ट में भारत के पास केएल राहुल और मयंक अग्रवाल के बीच 117 रनों की साझेदारी की वजह से मजबूत बढ़त थी, जो कि मध्य क्रम के बल्लेबाजों के न चलने के बावजूद 327 रन बने थे। दूसरे टेस्ट में राहुल, अग्रवाल, पुजारा और रहाणे जल्दी आउट हो गए, जिससे भारत एक समय में 91/4 पर था। भारत के लिए 200 पार करने के लिए रविचंद्रन अश्विन ने 46 रनों की शानदारी पारी खेली थी।

दूसरी पारी में पुजारा और रहाणे के साथ मिलकर शार्दुल ठाकुर और हनुमा विहारी ने भारत का स्कोर 266 रनों तक पहुंचा दिया, लेकिन पहली पारी में हुए नुकसान अंतत: महंगा साबित हुआ।

2. दूसरी पारी में पंत का न चलना :

ऋषभ पंत ऐसे खिलाड़ी हैं जो पल भर में खेल को पलटने की क्षमता रखते हैं। वह अपने अच्छे और बुरे दिनों में फर्क देख सकते हैं। दूसरी पारी में चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे के आउट होने के बाद पंत की भूमिका अच्छे काम को आगे बढ़ाने की थी।

लेकिन कगिसो रबाडा की गेंद पर खराब शॉट खेलकर वह भी जल्द ही पवेलियन लौट गए, जिस पर मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने कहा कि वे युवा खिलाड़ी के साथ कुछ शॉट्स खेलने पर चर्चा कर सकते हैं। उन्होंने पहली पारी में 12 रन पर कीगन पीटरसन का कैच भी छोड़ दिया था, जो महंगा साबित हुआ।

3. रनों का ज्यादा न बनना :

केएल राहुल भारत के लिए पहली पारी में 123 के साथ पहला टेस्ट जीतने में एक बड़ी भूमिका निभाने का प्रमुख उदाहरण थे। दूसरे टेस्ट में राहुल अर्धशतक तक पहुंचे, लेकिन आउट हो गए। इसके विपरीत, दक्षिण अफ्रीका के कप्तान डीन एल्गर ने एक कप्तानी पारी खेल मैच को अपने नाम कर लिया था और उन्होंने अपनी टीम की जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की।

4. बड़ी साझेदारियों का अभाव :

पहले टेस्ट के पहले दिन के बाद सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल ने कहा था कि साझेदारी करना और उन्हें बड़ा बनाना अहम था। लेकिन दूसरे टेस्ट में भारत ने कुछ बड़ी साझेदारियां नहीं कीं, जैसे पहली पारी में भारत की सर्वश्रेष्ठ तीन साझेदारियां 42, 40 और 36 थीं, जबकि दक्षिण अफ्रीका की पहले पारी में सर्वश्रेष्ठ तीन साझेदारियां 74, 60 और 38 थीं।

दूसरी पारी में पुजारा और रहाणे के बीच 111 रनों की साझेदारी को छोड़कर, कोई भी बल्लेबाजों ने अर्धशतकीय साझेदारी भी नहीं की थी। दक्षिण अफ्रीका ने 240 रनों का पीछा करते हुए नाबाद 47, 46, 84 और 68 रनों की साझेदारी कर मैच जीत लिया था।

भारत उम्मीद कर रहा होगा कि वे केप टाउन में बड़ी साझेदारी कर सीरीज पर कब्जा कर सकता है, जिस पर द्रविड़ ने भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था, “हमें निश्चित रूप से कुछ बड़ी साझेदारी करनी होगी, जिससे हमें बड़ा स्कोर बनाने में मदद मिलेगी।”

5. सिराज की चोट :

भारत के गेंदबाजी आक्रमण में मोहम्मद सिराज को चोट लग गई थी। हालांकि, सिराज दूसरे दिन गेंदबाजी करने के लिए वापस आए, लेकिन वह अपना सौ प्रतिशत नहीं दे रहे थे, क्योंकि दूसरी पारी में सिराज ने सिर्फ छह ओवर फेंके। चोटिल होने से पहले सिराज ने एल्गर के खिलाफ बेहतर गेंदबाजी की थी।

6. कप्तान कोहली की कमी :

शायद, कोहली की सेवाओं के न होने से भारत जोहान्सबर्ग में मैच गंवा दिया। कोहली के दूसरे टेस्ट की शुरुआत से पहले बाहर होने के कारण केएल राहुल के पास सोचने के लिए ज्यादा समय नहीं था।

दूसरी पारी में कप्तान राहुल नौ ओवर देरी से ठाकुर को लाए, जो गेंद को स्विंग करा सकते थे। वहां, भारत एक चाल चूक गया, क्योंकि स्विंग गेंदबाज पिच पर नमी का इस्तेमाल कर सकता था। दक्षिण अफ्रीका के आसानी से रन बनाने के कारण उनकी फील्डिंग ने कई मौके भी गंवाए थे।

अंतरराष्ट्रीय

ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

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तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।

फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।

ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।

इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।

ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”

आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।

इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।

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अंतरराष्ट्रीय

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

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हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।

इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।

अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”

वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।

सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

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