राष्ट्रीय समाचार
नरसरावपेट में विनायक विसर्जन कार्यक्रम के दौरान करंट लगने से एक व्यक्ति की मौत
आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के नरसरावपेट इलाके से एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है जिसमें विनायक विसर्जन कार्यक्रम के दौरान करंट लगने से एक शख्स की मौत हो गई. यह घटना कैमरे में कैद हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि बिजली के खंभे के संपर्क में आने से एक शख्स की करंट लगने से मौत हो जाती है. वह व्यक्ति बिजली के खंभे के संपर्क में तब आया जब वह विनायक विसर्जन कार्यक्रम के तहत सत्तेनपल्ली रोड पर रंगा आकृति पर भगवान बेल को देखने गया था। वह आदमी एक मंच पर खड़ा था जो एक बिजली के खंभे के करीब बनाया गया था। युवक पोल के संपर्क में आ गया और करंट लगने से पोल से चिपक गया। पोल के संपर्क में आने के बाद युवक को देखकर मौके पर मौजूद भीड़ घबरा गई। उन्होंने युवक को बिजली के खंभे से अलग करने का प्रयास किया। शख्स कुछ देर तक बिजली के खंभे से चिपका रहा और फिर एक शख्स बांस लेकर आया. उन्होंने उस शख्स को बांस से धक्का दे दिया जिसके बाद वह मंच से गिर गया. बिजली के खंभे से अलग होते ही भीड़ उस व्यक्ति के पास पहुंच गई। वे उस व्यक्ति को पास के अस्पताल में ले गए जहां अधिकारियों ने उसे मृत घोषित कर दिया। करंट लगने से जिस व्यक्ति की मौत हुई वह नरसरावपेट इलाके के चंद्रबाबू नायडू कॉलोनी का रहने वाला था। बिजली के खंभे के संपर्क में आने से करंट लगने से उसकी मौत हो गयी. आंध्र प्रदेश में बिजली के झटके से मौतें अक्सर होती रहती हैं। राज्य में अनेक स्थानों पर विद्युत लाइनें हैं। राज्य में करंट लगने से कई लोगों की जान चली गई. सरकार को बिजली के झटके से होने वाली मौतों की ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कदम उठाने की जरूरत है।
राजनीति
कर्नाटक बंद के बीच हिरासत में लिए गए कन्नड़ कार्यकर्ता, स्कूल और बाजार खुले

कर्नाटक बंद का आह्वान कन्नड और किसान समर्थित संगठनों की ओर से किया गया है। यह बंद तमिलनाडु की ओर से कावेरी जल जारी किए जाने को लेकर बुलाया गया है। इस बंद को लेकर गुरुवार को राज्यभर से मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है।
कन्नड कार्यकर्ताओं पुलिस की एहतियाती कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया। वहीं स्कूल, कॉलेज, दुकान, बाजार और व्यावसायिक संस्थान सामान्य रूप से चलते नजर आए।
यह बंद मुख्य रूप से कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति की ओर से बुलाई गई है। इस बंद का मुख्य उद्देश्य यह है कि तमिलनाडु कावेरी का जल जारी करें। इस दौरान पुलिस ने राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करके रखी और यह सुनिश्चित किया कि राज्यभर में शांति व्यवस्था बनी रहे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कोई बंद को प्रभावी करने के लिए बलपूर्वक रास्ते का इस्तेमाल नहीं करें।
कन्नड़ संगठनों के महासंघ के अध्यक्ष (जिसे कन्नड़ ओक्कूटा के नाम से भी जाना जाता है) और कन्नड़ चालुवली वटल पक्ष के अध्यक्ष वटल नागराज ने जैसे बंद के समर्थन में विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया, तो उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
इस बीच कन्नड और किसान संगठनों से जुड़े कई नेता मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात करने वाले थे। इस मुलाकात के दौरान इस संगठन से जुड़े नेता मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने वाले हैं। यह ज्ञापन मुख्य रूप से तमिलनाडु की ओर कावेरी नदी पानी छोड़े जाने के संबंध में है।
बेंगलुरू में स्कूल और कॉलेज सामान्य रूप से चलते रहे। जहां बड़ी संख्या में स्टूडेंट बड़ी संख्या में क्लास अटेंड करते हुए नजर आए। राज्यभर में किसी भी शिक्षण संस्थान में बंद का ऐलान नहीं किया गया। बच्चों के माता पिता ने यह फैसला किया है कि किसी भी सूरत में बंद का समर्थन नहीं किया जाए, क्योंकि बच्चों की परीक्षाएं नजदीक आ रही है। ऐसी स्थिति में उनके लिए यह जरूरी हो जाता है कि वो परीक्षा की तैयारी पूरी ईमानदारी से करें।
वहीं, बेंगलुरू में सार्वजनिक वाहनों पर भी बंद का कोई असर नहीं पड़ा। सड़कों पर बड़ी संख्या में सार्वजनिक वाहन चलते नजर आए। वहीं दुकान, बाजार और अन्य व्यवसायिक संस्थान खुले रहे। उधर, कई जिलों में लोग बंद का समर्थन करते हुए भी नजर आए।
हालांकि, ऐहतियात बरतते हुए कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए बस की सेवा को निलंबित कर दिया गया। इससे पड़ोसी राज्यों के लोगों को सफर करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
रामनगर के इज़ुरु सर्कल में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। इजरू सर्कल को प्रमुख जंक्शन के रूप में जाना जाता है। करुणाडु सेना और कर्नाटक रक्षणा वेदिके (प्रवीण शेट्टी गुट) के कार्यकर्ताओं ने तमिलनाडु की तरफ से कावेरी नदी के पानी को जारी करने को लेकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों ने खाली बर्तन लेते हुए कावेरी नदी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से यह अपील की है कि वो अपना ध्यान पानी की किल्लत पर ध्यान दें। मौजूदा समय में कर्नाटक के कई हिस्सों में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।
हालांकि कर्नाटक में बंद के ऐलान कई बावजूद भी कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन सुचारू रूप से चल रहा है। बंद की वजह से प्रशासन की तरफ से सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा-व्यवस्था दुरूस्त कर दी गई है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राज्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति देखने को नहीं मिले।
राजनीति
खान एवं खनिज संशोधन विधेयक राज्यसभा में पारित, मानसून सत्र का समापन

खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 राज्यसभा में पारित हो गया। केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने विधेयक को सदन में पेश किया। विधेयक पेश किए जाने और चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सदन में जमकर नारेबाजी की। वहीं बिल पारित होने के साथ ही मानसून सत्र का भी समापन हो गया।
वहीं चर्चा का जवाब देते हुए जी. किशन रेड्डी ने कहा कि खनिज क्षेत्र से राज्यों को मिलने वाले राजस्व में नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि तेल के क्षेत्र में भी राज्यों को मिलने वाले राजस्व में काफी वृद्धि हुई है। रेड्डी ने कहा कि पहले राज्यों को करीब 50 प्रतिशत राजस्व मिलता था, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद राज्यों को करीब 96 प्रतिशत राजस्व मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार को केवल 4 प्रतिशत हिस्सा मिलता है।
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को राज्यों के हित की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मोदी सरकार राज्यों के हित के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गरीबों, किसानों और जरूरतमंदों के लिए लगातार काम कर रही है।
जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कराधान किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण साधन है। यदि संसद कराधान से जुड़े प्रावधानों पर सहमति नहीं बनाएगी तो देश के खनन और खनिज क्षेत्र का विकास प्रभावित होगा। इस विधेयक का उद्देश्य खनिज क्षेत्र का विकास करना और राज्यों के राजस्व को बढ़ाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि विधेयक के लागू होने से राज्यों का राजस्व बढ़ेगा और खनिज क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, ”मेरा विश्वास है कि खनिज क्षेत्र के विकास से राज्यों का राजस्व बढ़ेगा और देश को इसका लाभ मिलेगा।”
इससे पहले राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों को बताया कि उन्हें संसदीय कार्य मंत्री की ओर से लोकसभा से पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को विचार और पारित करने के लिए अनुरोध प्राप्त हुआ था। इस अनुरोध में कहा गया था कि इसके लिए शून्यकाल में उठाए जाने वाले विषयों और प्रश्नकाल को स्थगित कर विधेयक को तुरंत लिया जाए।
विधेयक के महत्व और इस तथ्य को देखते हुए कि मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल को स्थगित किया गया ताकि सदन विधेयक पर तत्काल विचार कर सके। वहीं पहले से सूचीबद्ध प्रश्नों के उत्तर सदन के पटल पर रखे हुए मान लिया गया।
राजनीति
स्थिर रोजगार बाजार ने 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के पीछे की सच्चाई को किया उजागर : शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को दावा किया कि सत्तारूढ़ प्रशासन वैश्विक अस्थिरता के बावजूद मजबूत आर्थिक और औद्योगिक विकास को बनाए रखने का बार-बार दावा करता है लेकिन संसद में पेश किए गए सरकार के आधिकारिक आंकड़ों ने इन दावों को गंभीर चुनौती दी है।
शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में रोजगार के अवसरों में पिछले एक वर्ष के दौरान न तो बढ़ोतरी हुई और न ही कमी आई। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आंकड़े बताते हैं कि देश का रोजगार बाजार पूरी तरह स्थिर बना हुआ है।
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि मंत्रालय की रिपोर्ट देश में रोजगार की मौजूदा स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतक सामने रखती है। मौजूदा तिमाही में बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत है जबकि एक साल पहले यह 5.6 प्रतिशत थी। वेतनभोगी कर्मचारियों की हिस्सेदारी जून में 51.4 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष जून में दर्ज 51.2 प्रतिशत से मामूली अधिक है। महिला श्रमिकों की हिस्सेदारी भी 32 प्रतिशत से बढ़कर 32.7 प्रतिशत हुई है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में लगातार गिरावट जारी है।
संपादकीय में कहा गया कि सरकार के समर्थक जहां स्थिर बेरोजगारी दर को अर्थव्यवस्था की मजबूती और लचीलेपन का संकेत बता रहे हैं, वहीं आलोचक शिक्षित युवाओं के बीच गहराते संकट की ओर ध्यान दिला रहे हैं। इसमें कहा गया कि भारत में स्नातक युवाओं की संख्या बढ़कर 6.30 करोड़ हो गई है। चार दशकों में यह संख्या 13 गुना बढ़ी है, जबकि बेरोजगार स्नातकों की संख्या इसी अवधि में 16 गुना बढ़ गई है। संपादकीय के अनुसार, वर्तमान में हर 10 स्नातक युवाओं में से छह बेरोजगार हैं।
अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए संपादकीय में कहा गया कि बेरोजगार युवाओं में से हर तीन में दो के पास डिग्री है। यानी उनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता तो है लेकिन रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इसमें दावा किया गया कि नौकरी की तलाश कर रहे हर 1,000 युवाओं में केवल 12 को स्थायी रोजगार मिल पाता है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़े केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हालिया दावे से सीधे तौर पर विरोधाभास पैदा करते हैं। मांडविया ने कहा था कि सरकार ने अपने 12 साल के कार्यकाल में हर साल 1.7 करोड़ नए रोजगार पैदा किए हैं। पार्टी ने कहा कि ताजा आंकड़े प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से युवाओं में बेरोजगारी को लेकर उठाई गई चिंताओं को भी सही ठहराते हैं।
ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि जो सरकार ‘पांच ट्रिलियन’ की अर्थव्यवस्था का दावा करती है, वह पिछले एक वर्ष में एक भी नया रोजगार पैदा करने में विफल रही है। पार्टी ने कहा कि सरकार हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा करने के अपने वादे को पूरा करने में नाकाम रही है और इसके कारण लाखों योग्य स्नातकों का भविष्य अनिश्चितता में है।
संपादकीय में कहा गया, “यह मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का ‘आईना’ है और इसे उसी के एक मंत्रालय ने दिखाया है।”
संपादकीय में केंद्रीय गृह मंत्री के उस कथित सुझाव पर भी निशाना साधा गया, जिसमें रोजगार नहीं मिलने पर पकौड़े तलने की बात कही गई थी। साथ ही प्रधानमंत्री की युवाओं को संबोधित करने वाली “हैलो फ्रेंड्स” रील का जिक्र करते हुए कहा गया कि सरकार को इस आईने में खुद को देखना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि आर्थिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद रोजगार सृजन के मोर्चे पर जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक बनी हुई है और शिक्षित युवाओं के लिए पर्याप्त तथा स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती लगातार गहरी होती जा रही है।
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