राजनीति
स्थिर रोजगार बाजार ने 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के पीछे की सच्चाई को किया उजागर : शिवसेना (यूबीटी)
शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को दावा किया कि सत्तारूढ़ प्रशासन वैश्विक अस्थिरता के बावजूद मजबूत आर्थिक और औद्योगिक विकास को बनाए रखने का बार-बार दावा करता है लेकिन संसद में पेश किए गए सरकार के आधिकारिक आंकड़ों ने इन दावों को गंभीर चुनौती दी है।
शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में रोजगार के अवसरों में पिछले एक वर्ष के दौरान न तो बढ़ोतरी हुई और न ही कमी आई। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आंकड़े बताते हैं कि देश का रोजगार बाजार पूरी तरह स्थिर बना हुआ है।
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि मंत्रालय की रिपोर्ट देश में रोजगार की मौजूदा स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतक सामने रखती है। मौजूदा तिमाही में बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत है जबकि एक साल पहले यह 5.6 प्रतिशत थी। वेतनभोगी कर्मचारियों की हिस्सेदारी जून में 51.4 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष जून में दर्ज 51.2 प्रतिशत से मामूली अधिक है। महिला श्रमिकों की हिस्सेदारी भी 32 प्रतिशत से बढ़कर 32.7 प्रतिशत हुई है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में लगातार गिरावट जारी है।
संपादकीय में कहा गया कि सरकार के समर्थक जहां स्थिर बेरोजगारी दर को अर्थव्यवस्था की मजबूती और लचीलेपन का संकेत बता रहे हैं, वहीं आलोचक शिक्षित युवाओं के बीच गहराते संकट की ओर ध्यान दिला रहे हैं। इसमें कहा गया कि भारत में स्नातक युवाओं की संख्या बढ़कर 6.30 करोड़ हो गई है। चार दशकों में यह संख्या 13 गुना बढ़ी है, जबकि बेरोजगार स्नातकों की संख्या इसी अवधि में 16 गुना बढ़ गई है। संपादकीय के अनुसार, वर्तमान में हर 10 स्नातक युवाओं में से छह बेरोजगार हैं।
अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए संपादकीय में कहा गया कि बेरोजगार युवाओं में से हर तीन में दो के पास डिग्री है। यानी उनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता तो है लेकिन रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इसमें दावा किया गया कि नौकरी की तलाश कर रहे हर 1,000 युवाओं में केवल 12 को स्थायी रोजगार मिल पाता है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़े केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हालिया दावे से सीधे तौर पर विरोधाभास पैदा करते हैं। मांडविया ने कहा था कि सरकार ने अपने 12 साल के कार्यकाल में हर साल 1.7 करोड़ नए रोजगार पैदा किए हैं। पार्टी ने कहा कि ताजा आंकड़े प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से युवाओं में बेरोजगारी को लेकर उठाई गई चिंताओं को भी सही ठहराते हैं।
ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि जो सरकार ‘पांच ट्रिलियन’ की अर्थव्यवस्था का दावा करती है, वह पिछले एक वर्ष में एक भी नया रोजगार पैदा करने में विफल रही है। पार्टी ने कहा कि सरकार हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा करने के अपने वादे को पूरा करने में नाकाम रही है और इसके कारण लाखों योग्य स्नातकों का भविष्य अनिश्चितता में है।
संपादकीय में कहा गया, “यह मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का ‘आईना’ है और इसे उसी के एक मंत्रालय ने दिखाया है।”
संपादकीय में केंद्रीय गृह मंत्री के उस कथित सुझाव पर भी निशाना साधा गया, जिसमें रोजगार नहीं मिलने पर पकौड़े तलने की बात कही गई थी। साथ ही प्रधानमंत्री की युवाओं को संबोधित करने वाली “हैलो फ्रेंड्स” रील का जिक्र करते हुए कहा गया कि सरकार को इस आईने में खुद को देखना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि आर्थिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद रोजगार सृजन के मोर्चे पर जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक बनी हुई है और शिक्षित युवाओं के लिए पर्याप्त तथा स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती लगातार गहरी होती जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
इजरायली फ्लाइट सऊदी एयरपोर्ट पर हुई लैंड, हाईजैकिंग की आशंका से तेल अवीव का इनकार

इजरायल ने बुधवार को 150 से ज्यादा यात्रियो को लेकर दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाइट के सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड होने का ऐलान किया। इससे पहले आशंका जताई गई थी कि प्लेन को हाइजैक कर लिया गया है।
इजरायली सुरक्षा सूत्रों के हवाले से द टाइम्स ऑफ इजरायल ने बताया कि पायलटों के बीच हुई बहस के परिणामस्वरूप विमान को “गैर-कानूनी दखल” और एक सामान्य इमरजेंसी सिग्नल जारी करना पड़ा था। सेना का कहना है कि आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने इस घटना पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
इन अधिकारियों में इजरायली वायु सेना के प्रमुख मेजर जनरल ओमर टिशलर, ऑपरेशन्स डायरेक्टरेट के प्रमुख मेजर जनरल इत्जिक कोहेन और इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट के प्रमुख मेजर जनरल श्लोमी बाइंडर शामिल थे। दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रही फ्लाइट ने उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही इमरजेंसी का सिग्नल दिया था। विमान ने ट्रांसपोंडर पर 7700 कोड इस्तेमाल किया। इसका मतलब होता है कि विमान में किसी तरह की इमरजेंसी है।
कुछ फ्लाइट-ट्रैकिंग वेबसाइटों पर थोड़ी देर के लिए 7500 कोड भी नजर आया। आमतौर पर यह कोड विमान के हाइजैक होने पर इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इस कोड के इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि नहीं की गई है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, फ्लाईदुबई की फ्लाइट ने शुरू में 7700 का “स्क्वॉक कोड” भेजा, जो एक इंटरनेशनल इमरजेंसी सिग्नल है।
इसके कुछ समय बाद, उसने 7500 कोड भेजा, जिसका मतलब हाईजैकिंग या गैर-कानूनी दखल होता है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इजरायली वायु सेना ने तुरंत फाइटर जेट्स को प्लेन की ओर भेजा था।
इजरायल का एयरस्पेस भी कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था, और बाद में सऊदी अरब में विमान के उतरने के बाद उसे फिर से खोल दिया गया।
राष्ट्रीय समाचार
आठ सरकारी विभागों पर 38,000 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया: कर्नाटक ठेकेदार संघ

कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने बुधवार को आरोप लगाया कि आठ सरकारी विभागों में लगभग 38,000 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है। संघ ने चेतावनी दी कि अगर नवंबर तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वे कमीशन के तौर पर ली गई रिश्वत से जुड़े दस्तावेज जारी करेंगे। संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके फंड का इस्तेमाल कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं के लिए किया गया है।
एसोसिएशन ने यह भी दावा किया है कि जिन ठेकेदारों ने कमीशन दिया, उनके बिलों के भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही थी।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन के अध्यक्ष आर. मंजूनाथ ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार की तुलना में ठेकेदारों से मांगे जाने वाले कमीशन में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि ठेकेदारों के बकाया भुगतान का इस्तेमाल राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं के लिए किया जा रहा है।
मंजूनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पहले ठेकेदारों को भरोसा दिलाया था कि उनके बकाया बिल 30 जून तक चुका दिए जाएंगे लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपना वादा पूरा करने में नाकाम रही।
उन्होंने ठेकेदारों की चिंताओं को संभालने के तरीके को लेकर कांग्रेस सरकार की आलोचना भी की। उन्होंने पिछली भाजपा सरकार के खिलाफ 40 प्रतिशत कमीशन के आरोपों को लेकर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष केम्पाना के नेतृत्व में हुए आंदोलन का भी जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद भी हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।अध्यक्ष ने कहा कि शिवकुमार और पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली ने आंदोलन के दौरान ठेकेदारों से मुलाकात की थी और भरोसा दिलाया था कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद सभी बकाया भुगतान कर दिए जाएंगे।
मंजूनाथ ने सरकार से आग्रह किया कि ठेकेदारों के बिलों के लिए तय फंड का इस्तेमाल गारंटी योजनाओं के लिए न किया जाए। उन्होंने कहा कि गारंटी योजनाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। सरकार को दूसरे स्रोतों से फंड का इंतजाम करना चाहिए और हमारा पैसा जारी करना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार नवंबर तक बकाया भुगतान जारी नहीं करती है, तो एसोसिएशन कथित कमीशन भुगतान से जुड़े दस्तावेज जारी करेगी।
एसोसिएशन ने जिला स्तर पर अपने आंदोलन को तेज करने की योजना की भी घोषणा की। मंजूनाथ ने कहा कि अगर शिवकुमार उनके साथ बैठक नहीं बुलाते हैं, तो ठेकेदार डिप्टी कमिश्नर के कार्यालयों तक पदयात्रा करेंगे और ज्ञापन सौंपेंगे। एक और मुद्दा उठाते हुए मंजूनाथ ने कर्नाटक वन विभाग द्वारा 13बी और 13सी प्रावधानों के तहत काम सौंपने की प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि सैकड़ों करोड़ रुपए के काम अधिकारियों को सौंपे गए थे और कहा कि एसोसिएशन के पास पिछले चार वर्षों में इस प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने हाल ही में इस प्रथा को रोक दिया था और बताया कि 13बी और 13सी प्रावधानों में टेंडर के जरिए काम देने के बजाय सीधे काम सौंपने की व्यवस्था थी।
मंजूनाथ ने कहा कि जब टेंडर निकाले जाते थे, तो अक्सर कॉन्ट्रैक्टरों को यह पता नहीं होता था कि फंड मंजूर हुआ है या नहीं। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि अगर स्थानीय कॉन्ट्रैक्टर इसमें हिस्सा नहीं लेते, तो दूसरे राज्यों के ज्यादा मजबूत आर्थिक स्थिति वाले कॉन्ट्रैक्टर ये काम हासिल कर सकते थे।
उन्होंने दावा किया कि पेमेंट में देरी की वजह से पिछले चार-पांच सालों से लगभग 1.5 लाख कॉन्ट्रैक्टर आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
मंजूनाथ ने कहा कि पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली कॉन्ट्रैक्टरों के मददगार रहे हैं और पीडब्ल्यूडी उन्हें कुछ राहत दे रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा भी एसोसिएशन का सहयोग कर रहे हैं।
कॉन्ट्रैक्टरों की एसोसिएशन बकाया बिलों को लेकर कांग्रेस सरकार के साथ लंबे समय से विवाद में उलझी हुई है।
राष्ट्रीय समाचार
कर्नाटक: सौजन्या मामले में न्याय सुनिश्चित करेगी सरकार, एसआईटी अधिकारी ने मांगा तबादला

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार को कहा कि सरकार सौजन्या के परिवार या किसी अन्य की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती और 2012 के कथित धर्मस्थल सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी बीच मामले की नए सिरे से जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) में शामिल बेंगलुरु ग्रामीण के एएसपी वेंकटेश प्रसन्ना ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर टीम से खुद को मुक्त करने का अनुरोध किया है।
कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 24 सितंबर को मामले की नए सिरे से जांच के लिए पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता आईजीपी एन. शशिकुमार को सौंपी गई है। टीम में मंगलुरु सिटी के पुलिस आयुक्त सी.एच. सुधीर कुमार रेड्डी, इंटेलिजेंस एसपी निशा जेम्स, सीआईडी एसपी लोकेश जगलसर और बेंगलुरु ग्रामीण के एएसपी वेंकटेश प्रसन्ना शामिल हैं।
एसआईटी के गठन के बाद कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और सौजन्या के परिवार के सदस्यों ने टीम में शामिल कुछ अधिकारियों को लेकर आपत्ति जताई थी। खासतौर पर एएसपी वेंकटेश प्रसन्ना की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए और उनके खिलाफ आरोप लगाए गए। इसके बाद प्रसन्ना ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर विशेष जांच दल से उन्हें मुक्त करने का अनुरोध किया है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि एसआईटी का गठन मामले की निष्पक्ष और उचित जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है और सरकार की किसी को नुकसान पहुंचाने की कोई मंशा नहीं है।
उन्होंने कहा, “एसआईटी का गठन बेहतरीन इरादे से किया गया था। हमारी किसी के खिलाफ बुरी मंशा नहीं है और न ही किसी को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा है। एसआईटी के गठन के बाद कुछ लोगों, खासकर परिवार के सदस्यों ने आपत्तियां जताई हैं। यह बात मेरे संज्ञान में लाई गई है।”
खड़गे ने कहा कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य मामले को उसके निष्कर्ष तक पहुंचाना, सच्चाई सामने लाना और न्याय सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा, “हम किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते। हमारा उद्देश्य है कि इस मामले में निष्कर्ष निकले, आखिरकार सच्चाई सामने आए और न्याय सुनिश्चित हो।”
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर जनता और परिवार की ओर से उठाई गई चिंताओं पर सरकार विचार करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, “अगर जनता और परिवार को कुछ अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर कोई आपत्ति है तो सरकार उसे भी जांचने के लिए तैयार है। आखिरकार हम लोगों के लिए हैं। इस मामले में हमारा कोई कठोर रुख नहीं है। हम उनकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचा सकते। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्रवाई करेंगे।”
सौजन्या मामले में नए सिरे से एसआईटी जांच सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद शुरू हुई है, जिसमें मामले की दोबारा जांच की मांग वाली याचिका पर निर्देश दिए गए थे। एसआईटी को जांच पूरी कर सक्षम अदालत के समक्ष रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र2 years agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
महाराष्ट्र2 years agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
