अंतरराष्ट्रीय समाचार
मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा संकेत, मतदाता पहचान के लिए लगा सकते हैं राष्ट्रीय आपातकाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह संकेत दिया है कि वह अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाता पहचान और नागरिकता सत्यापन को अनिवार्य बनाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करने की संभावना पर विचार कर सकते हैं।
ट्रंप ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके इस बयान ने चुनावी नियमों, मतदाता अधिकारों और संघीय सरकार की शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ट्रंप ने ‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ पर वेन एलिन रूट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “इससे भी ज्यादा असामान्य चीजें पहले हो चुकी हैं। फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा।”
रूट ने ट्रंप से कहा कि अगर सीनेट ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को मंजूरी नहीं देती, तो उन्हें आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। रूट ने सुझाव दिया कि ऐसी शक्तियों के जरिए फोटो पहचान पत्र, नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य किया जा सकता है और डाक के जरिए भेजे जाने वाले मेल-इन बैलेट पर भी सीमाएं लगाई जा सकती हैं।
ट्रंप ने इस प्रस्ताव का साफ तौर पर समर्थन नहीं किया, लेकिन उन्होंने बार-बार कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों पर सीनेट को कार्रवाई करनी चाहिए।
ट्रंप ने कहा, “सीनेट को ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पर आगे बढ़ना होगा। मुझे सच में लगता है कि ऐसा होना चाहिए, क्योंकि लोग इसकी उम्मीद कर रहे हैं और यह जरूरी भी है।”
उन्होंने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि नागरिकता का प्रमाण हो। और मतदाता पहचान पत्र भी होना चाहिए।
ट्रंप ने दावा किया कि कुछ रिपब्लिकन सीनेटर इन उपायों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन की तारीफ की और कहा कि प्रतिनिधि सभा इस कानून को पांच बार मंजूर कर चुकी है, लेकिन यह हर बार सीनेट में जाकर अटक जाता है।
राष्ट्रपति ने डाक से मतदान की व्यवस्था की भी फिर से आलोचना की। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि यह प्रणाली धोखाधड़ी के लिए संवेदनशील है और खास तौर पर कैलिफोर्निया की चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधा। ट्रंप ने कहा कि मेल-इन बैलेट्स बहुत भ्रष्ट हैं।
उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया चुनावों के मामले में सबसे भ्रष्ट जगहों में से एक है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में रिपब्लिकन मतदाताओं को मतपत्र प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
रूट ने ट्रंप से कहा कि चुनाव संबंधी यह कानून शायद सीनेट से मंजूरी न पा सके। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस इसे पारित कर भी दे, तब भी इसे तुरंत कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
इसके बाद रूट ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे अगले एक महीने के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करें। रूट का दावा था कि इससे प्रशासन सीनेट की मंजूरी का इंतजार किए बिना फोटो पहचान पत्र, नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता और मेल-इन वोटिंग पर सीमाएं लागू कर सकेगा।
ट्रंप की प्रतिक्रिया ने इस संभावना को जिंदा रखा, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की ओर से इस रास्ते को अपनाने की कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस कानून को पारित कर देती है तो इसे अदालत में चुनौती देना ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।
इंटरव्यू में जिस चुनावी प्रस्ताव पर चर्चा हुई, वह रिपब्लिकन पार्टी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत संघीय चुनावों में वोटर पंजीकरण करवाते समय अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य किया जाए।
समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावी सुरक्षा और मजबूत होगी। वहीं विरोधियों का तर्क है कि जिन योग्य नागरिकों के पास जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें वोटर पंजीकरण कराने में परेशानी हो सकती है।
अमेरिकी संघीय कानून पहले से ही गैर-नागरिकों को संघीय चुनावों में मतदान करने से रोकता है। अमेरिका में चुनाव मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन की ओर से कराए जाते हैं, जो अमेरिकी संविधान और संघीय कानूनों द्वारा तय ढांचे के तहत काम करते हैं।
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सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद और अहम रणनीतिक साझेदार: वित्त मंत्री सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद और अहम रणनीतिक साझेदार है। उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी पर जोर दिया।
निर्मला सीतारण ने दोहा में ‘एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) 2026 सालाना बैठक’ के दौरान सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान से मुलाकात की। अल-जदान ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और बेहतर होते निवेश माहौल के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री को बधाई दी और सऊदी अर्थव्यवस्था के बारे में अपनी राय रखी।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने भारत-सऊदी अरब द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर बातचीत के सफल समापन का स्वागत किया। इससे द्विपक्षीय निवेश के लिए एक मजबूत और अधिक भरोसेमंद ढांचा मिलेगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। अल-जदान ने कहा कि सऊदी अरब इसके जल्द लागू होने का इंतजार कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब की राजकीय यात्रा के दौरान बताई गई सोच को याद करते हुए दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।
अलजदान ने भारत से निवेश का स्वागत करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई। स्विट्जरलैंड से एआईआईबी गवर्नर और राजदूत पिएत्रो लाजेरी के साथ अपनी बैठक में उन्होंने भारत में मौके तलाश रहे विदेशी निवेशकों के लिए ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ (एनआईआईएफ) को एक भरोसेमंद पार्टनर बताया, जो गवर्नेंस और पारदर्शिता के ऊंचे स्टैंडर्ड्स का पालन करता है। साथ ही, स्विस निवेशक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश के लिए एनआईआईएफ इंफ्रास्ट्रक्चर फंड पर विचार कर सकते हैं।
राजदूत लाजेरी ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत में पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और निवेश के लिए बड़े मौके देखता है। उन्होंने भारत की आगामी राजकीय यात्रा और नई दिल्ली में होने वाले दूसरे यूरोपीय मुक्त व्यापार संगठन (ईएफटीए) प्रॉस्पेरिटी समिट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में स्विस फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) की ग्रोथ ग्लोबल एफडीआई से ज्यादा तेजी से हो रही है और ‘बायलैटरल इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन एग्रीमेंट’ को अंतिम रूप देने के लिए सहयोग मांगा।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, लाजेरी ने फाइनेंशियल सेक्टर और सस्टेनेबल फाइनेंस में सहयोग करने में भी दिलचस्पी दिखाई।
वित्त मंत्री सीतारमण ने स्विस निवेशकों और फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों को जीआईएफटी आईएफएससी में भारत के अपने फाइनेंशियल सर्विस सेंटर में निवेश के मौके तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया, जो वित्तीय सेवा और उत्पाद, टैक्स लाभ और बिजनेस के अनुकूल माहौल देता है।
सीतारमण ने नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले से भी मुलाकात की। दोनों मंत्री दोबारा मिलकर खुश थे और उन्होंने नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान बातचीत को आगे बढ़ाने के मौके पर चर्चा की।
बातचीत में बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण और रिकवरी के लिए नेपाल के आकलन और प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। साथ ही, इस मुश्किल समय में भारत जो भी मदद दे सकता है, उसकी बारीकियों पर काम करने के लिए दोनों देशों की टीमों के बीच लगातार बातचीत जारी रखने पर जअर दिया गया।
मंत्रियों ने नई दिल्ली बैठक में शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर भी चर्चा की और लगातार बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया। बयान में कहा गया है कि यूपीआई-एनपीआई लिंकेज को जल्द शुरू करने और इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई, क्योंकि यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद पहल है।
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नेपाल में बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने से 27 की मौत, चार लोग लापता

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई है कि 24 सितंबर से 28 सितंबर तक लगातार बारिश के कारण आई बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, तेज हवाओं और बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं में नेपाल में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए।
प्रधानमंत्री सचिवालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान चार लोग लापता हो गए और मॉनसून से जुड़ी 513 घटनाओं से 1,065 परिवार प्रभावित हुए। इन आपदाओं में 225 घर पूरी तरह और 137 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। सत्ताइस पशुशालाएं और 114 मवेशी भी प्रभावित हुए।
सरकार की ओर से कहा गया कि उसने बचाव, राहत और पुनर्वास के प्रयासों को तेज कर दिया है और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और सामान्य जीवन बहाल करने के लिए अपनी एजेंसियों को काम पर लगा दिया है। देश भर में बाढ़ और भूस्खलन से हाईवे और मुख्य सड़कों पर 147 जगहों पर नुकसान पहुंचा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 125 जगहों की मरम्मत कर उन्हें फिर से खोल दिया गया है।
पश्चिमी नेपाल में बेनी-जोमसोम, पाल्पा, बाग्लुंग और नवलपरासी जिलों के कुछ हिस्सों में भूस्खलन, सड़क धंसने और पुल के एप्रोच (पुल तक पहुंचने वाले रास्ते) को नुकसान पहुंचने के कारण कालीगंडकी कॉरिडोर पर भी यातायात बाधित हुआ है। अधिकारियों का अनुमान है कि सड़क को पूरी तरह बहाल करने में तीन दिन से ज्यादा का समय लग सकता है।
बाढ़ से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। कालीगंडकी, मार्स्यांगडी और सेती-माडी नदी कॉरिडोर में राष्ट्रीय ट्रांसमिशन सिस्टम के जरिए कुल 1,013.2 मेगावाट बिजली की आपूर्ति बाधित हुई।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, बीते महीने 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर पर बने लगभग एक दर्जन पनबिजली प्रोजेक्ट भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इस बाढ़ में 1,400 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और लगभग 5,000 लोग लापता हो गए थे।
सरकारी बिजली कंपनी, नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (एनईए) ने कहा कि वह आने वाले सर्दियों के मौसम में भारत से 1,100 मेगावाट से ज्यादा बिजली आयात करने की योजना बना रही है। सर्दियों में घरेलू बिजली उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट की आशंका है क्योंकि ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ पनबिजली प्रोजेक्ट कम बिजली पैदा करते हैं।
एनईए ने कहा कि जनवरी के बाद घरेलू बिजली उत्पादन लगभग 1,218 मेगावाट रहने की उम्मीद है, जबकि मांग 2,293 मेगावाट रहने का अनुमान है। एनईए के मैनेजिंग डायरेक्टर दीर्घायु कुमार श्रेष्ठ ने सोमवार को कहा, “इसीलिए हमने बिजली सप्लाई को मैनेज करने के लिए आने वाले सूखे मौसम में भारत से 1,155 मेगा वाट बिजली इंपोर्ट करने का प्लान बनाया है।”
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नेपाल: हेमलुंग बेस कैंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार, 12 लापता

नेपाल स्थित माउंट हिमलुंग के बेस कैंप इलाके में हिमस्खलन की चपेट में आए चार लोगों के मौत की पुष्टि कर दी गई है।12 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।
मनांग के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (प्रमुख जिलाधिकारी) मुक्ति प्रसाद खनल ने आईएएनएस को बताया, “अब तक घटना वाली जगह से चार शव बरामद किए गए हैं। बरामद किए गए दो शव काठमांडू भेजे गए हैं, जबकि दो अन्य को घटना वाली जगह से एयरलिफ्ट करके मनांग के जिला मुख्यालय, चामे लाया गया है।”
माना जा रहा है कि जब उस इलाके में बर्फीला तूफान (एवलांच) आया, तो 7,126 मीटर ऊंचे पहाड़ के बेस कैंप पर अलग-अलग अभियान कंपनियों के 24 से ज्यादा गाइड और कर्मचारी मौजूद थे। वे चढ़ाई शुरू होने से पहले रस्सियां लगाने और टेंट लगाने के लिए वहां गए थे।
खनल ने बताया कि आपदा के बाद 11 लोगों से संपर्क हो पाया है। हमारा अनुमान है कि पहाड़ के बेस कैंप पर कुल 27 लोग मौजूद थे।
सोमवार सुबह से ही बचाव कार्य जारी रहा और बेस कैंप पर बचाव अभियान चलाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। खनल ने कहा कि मौसम में काफी सुधार हुआ है, जिससे बचाव कार्यों में मदद मिली है। इससे पहले कई दिनों तक लगातार बारिश हुई थी, जिसके कारण मनांग सहित देश के कई हिस्सों में भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी।
यह घटना नेपाल-चीन सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ के ठीक एक महीने बाद हुई है। उस बाढ़ की वजह एक बड़े ग्लेशियर का टूटना और भूस्खलन था, जिसमें 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 5,000 से अधिक लोग लापता बताए गए।
नेपाल की आय के मुख्य स्रोतों में से एक पर्यटन है। भोटेकोशी बाढ़ आपदा के बाद, देश पर्यटकों से नेपाल आने का आग्रह कर रहा है और कह रहा है कि देश के अन्य हिस्से सुरक्षित हैं।
इससे पहले, मनांग जिला प्रशासन कार्यालय ने हिमालय के ऊंचे इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश और बर्फबारी के पूर्वानुमान के कारण 25 से 27 सितंबर तक कई ऊंचाई वाले इलाकों में ट्रेकिंग पर रोक लगा दी थी।
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