राजनीति
उपराष्ट्रपति चुनाव : ईसीआई ने रिटर्निंग और सहायक रिटर्निंग अधिकारी किए नियुक्त
नई दिल्ली, 25 जुलाई। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उपराष्ट्रपति पद के चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी की नियुक्ति कर दी है। ईसीआई ने शुक्रवार को पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी है।
ईसीआई ने बयान में कहा, “भारत निर्वाचन आयोग को अनुच्छेद 324 के तहत भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचन कराने का अधिदेश प्राप्त है। भारत के उपराष्ट्रपति के पद का निर्वाचन राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952 और उसके अधीन बनाए गए नियमों, अर्थात् राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति निर्वाचन नियम, 1974 द्वारा शासित होता है। राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952 की धारा 3 के अंतर्गत, निर्वाचन आयोग, केंद्र सरकार से परामर्श करके एक रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त करेगा, जिसका कार्यालय नई दिल्ली में होगा और निर्वाचन आयोग एक या एक से अधिक सहायक रिटर्निंग अधिकारी भी नियुक्त कर सकता है।”
बयान में आगे कहा गया, “रीति के अनुसार, लोकसभा के महासचिव या राज्यसभा के महासचिव को बारी-बारी से रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया जाता है। पिछले उपराष्ट्रपति निर्वाचन के दौरान लोकसभा के महासचिव को रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसलिए, निर्वाचन आयोग ने विधि और न्याय मंत्रालय से परामर्श करके तथा राज्यसभा के उपसभापति की सहमति से राज्यसभा के महासचिव को आगामी उपराष्ट्रपति निर्वाचन, 2025 के लिए रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया है। इसके अलावा, राज्यसभा सचिवालय की संयुक्त सचिव गरिमा जैन और राज्यसभा सचिवालय के निदेशक विजय कुमार को उपराष्ट्रपति निर्वाचन, 2025 के दौरान सहायक रिटर्निंग अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया है।”
भारत निर्वाचन आयोग ने बताया कि आवश्यक राजपत्र अधिसूचना अलग से जारी की जा रही है।
बता दें कि भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बीते सोमवार को स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा था कि वह स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं।
इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था।
महाराष्ट्र
पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी कनेक्शन: मुंबई एटीएस ने पूरे महाराष्ट्र में सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें 9 जिले शामिल हैं, 57 संदिग्ध गिरफ्तार

ARREST
मुंबई; मुंबई महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने राज्य भर के 9 जिलों में छापेमारी कर 57 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से संबंध होने का आरोप है। एटीएस इन लोगों से लगातार पूछताछ कर रही है। एटीएस ने आज सुबह 8 बजे से छापेमारी की कार्रवाई शुरू की थी। छापेमारी के दौरान एटीएस ने संदिग्धों से पूछताछ की और उनके इलेक्ट्रिक गजट और दूसरे दस्तावेज जब्त किए। एटीएस सूत्रों ने बताया कि संदिग्धों ने शहजाद भट्टी से संबंध के दौरान क्या-क्या सीक्रेट जानकारी दी, साथ ही और कितने लोग पाकिस्तानी गैंगस्टर के संपर्क में हैं, इसकी जांच चल रही है। नाला सोपारा, नासिक, बीड, मीरा रोड समेत करीब 9 जिलों में कार्रवाई की गई। एटीएस सूत्रों ने बताया कि ये संदिग्ध शहजाद भट्टी के ऑनलाइन संपर्क में भी थे। इसके साथ ही वे शहजाद भट्टी को क्या-क्या जानकारी देते थे, इसकी भी जांच की जा रही है। हालांकि, एटीएस की छापेमारी के दौरान बीड में भी दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। संदिग्धों को हिरासत में ले लिया गया है। इस छापेमारी से सनसनी फैल गई है। सुबह-सुबह जांच एजेंसियों ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क में शामिल होने के शक में कई जगहों पर छापेमारी की और कोऑर्डिनेटर को गिरफ्तार किया। बीड जिले में दो संदिग्धों से पूछताछ की गई है। उनकी पहचान बीड जिले के तालुका आष्टी के रहने वाले बालू रंगनाथ पाठाडे और बीड जिले के तालुका आष्टी के आस्ता के रहने वाले किरण जगन्नाथ भोर के तौर पर हुई है। सर्च ऑपरेशन के दौरान दोनों के पास से कोई आपत्तिजनक कंटेंट बरामद नहीं हुआ है, जबकि एटीएस ने इन संदिग्धों के पास से मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं और आगे की जांच चल रही है। मोबाइल फोन पर कोऑर्डिनेटर के कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। एटीएस के ऑपरेशन के बाद पूरे राज्य में गैंगस्टर भट्टी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
राष्ट्रीय समाचार
गुजरात में 20,667 करोड़ रुपए की डबल लाइन रेलवे परियोजना को मिली कैबिनेट की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को अहमदाबाद (सरखेज)-धोलेरा सेमी-हाईस्पीड डबल लाइन रेलवे परियोजना को मंजूरी दे दी। यह भारतीय रेलवे की पहली ऐसी परियोजना होगी, जिसे स्वदेशी तकनीक के जरिए विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 20,667 करोड़ रुपए होगी।
कैबिनेट के बयान के अनुसार, यह रेलवे परियोजना अहमदाबाद, धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (एसआईआर), आगामी धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (एनएचएमसी) के बीच तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।
अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यह नई रेल लाइन यात्रियों के सफर का समय कम करेगी, जिससे लोग आरामदायक दैनिक यात्रा और एक ही दिन में आने-जाने की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यह सेमी-हाईस्पीड रेलवे न केवल दोनों शहरों को करीब लाएगी, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों को भी फायदा पहुंचाएगी।
सरकार ने कहा कि यह परियोजना देश भर में चरणबद्ध तरीके से सेमी-हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए एक मॉडल परियोजना के रूप में काम करेगी।
गुजरात के अहमदाबाद जिले में बनने वाली इस परियोजना से भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 134 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। प्रस्तावित रेल लाइन से लगभग 284 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जहां करीब 5 लाख लोग रहते हैं।
नई रेल लाइन से सीधी कनेक्टिविटी और आवाजाही में सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की कार्यक्षमता और सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। बयान में कहा गया कि यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के ‘न्यू इंडिया’ विजन के अनुरूप है, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के जरिए आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद करेगी।
यह परियोजना पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है, जिसमें मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वित योजना बनाई गई है।
सरकार के अनुसार, यह परियोजना लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही को सुगम बनाएगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद करेगा।
इस परियोजना से तेल आयात में लगभग 0.48 करोड़ लीटर की कमी आएगी और करीब 2 करोड़ किलोग्राम सीओ2 उत्सर्जन कम होगा। यह प्रभाव लगभग 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर माना गया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
चीन दौरे से पहले ट्रंप ने शी जिनपिंग की तारीफ की, बोले- अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन दौरे पर रवाना होने से पहले राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने रिश्तों की तारीफ की और कहा कि उन्हें इस यात्रा के दौरान बेहतरीन मुलाकात की उम्मीद है। ईरान संकट, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।
व्हाइट हाउस से चीन रवाना होने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें हैं और दोनों देशों के बीच रिश्ते ‘मजबूत और स्थिर’ हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मेरे संबंध शानदार हैं। हम हमेशा अच्छी तरह साथ रहे हैं और चीन के साथ काम करना बहुत अच्छा रहा है।”
ट्रंप ने संकेत दिया कि इस शिखर वार्ता में व्यापार सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा। उन्होंने कहा, “हमारे चीन के साथ बड़े संबंध हैं। हम दोनों सुपरपावर हैं और कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है। सबसे ज्यादा फोकस व्यापार पर रहेगा।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी खुलासा किया कि शी जिनपिंग इस साल के अंत तक अमेरिका का दौरा कर सकते हैं। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति शी इस साल के आखिर में अमेरिका आएंगे। यह भी काफी रोमांचक होगा।”
ईरान संकट पर भी ट्रंप ने चीन की संभावित भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर शी जिनपिंग इस मामले में मदद कर सकते हैं, तो उसका स्वागत होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित कर रहा है। ट्रंप ने कहा, “ईरान सैन्य रूप से कमजोर हो चुका है। या तो वे सही रास्ता अपनाएंगे या हम बाकी काम पूरा करेंगे।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका-चीन आर्थिक संबंधों को दोनों देशों के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा, “हम चीन के साथ बहुत बड़ा व्यापार करते हैं। हम भी फायदा उठा रहे हैं और चीन भी। हमारे रिश्ते अच्छे हैं।”
अपनी यात्रा के मकसद पर ट्रंप ने कहा कि यह दौरा सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन के हिसाब से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अमेरिका को दुनिया की सबसे मजबूत सैन्य ताकत बताते हुए कहा कि चीन को दूसरा सबसे शक्तिशाली देश माना जाता है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के रिश्तों में व्यापार, तकनीक, ताइवान, सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर कई मतभेद रहे हैं। इसके बावजूद दोनों देश लगातार उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए हैं, ताकि रिश्तों में और तनाव न बढ़े। वहीं भारत भी इस बदलते अमेरिका-चीन समीकरण पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर पड़ सकता है।
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