राष्ट्रीय समाचार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाणे में अतिक्रमित भूमि पर अवैध दरगाह संरचना को गिराने के आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाणे में एक कथित रूप से अनधिकृत दरगाह संरचना को गिराने के अपने पिछले आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया है। अदालत ने गाजी सलाउद्दीन रहमतुल्ला हूले उर्फ परदेशी बाबा ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी है। ट्रस्ट ने 30 मई के आदेश को पलटने की मांग करते हुए दावा किया था कि इसमें महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की गई है।
ट्रस्ट पर बिना मंजूरी के 17,000 वर्ग फुट से अधिक जमीन हड़पने का आरोप
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खता की पीठ ने 9 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि ट्रस्टियों ने निजी ज़मीन “हड़प” ली है और बिना किसी नागरिक अनुमति के दरगाह का क्षेत्रफल 160 वर्ग फुट से बढ़ाकर 17,000 वर्ग फुट कर दिया है। आदेश की विस्तृत प्रति 22 जुलाई को उपलब्ध कराई गई।
“हमारे विचार में, आवेदकों ने न तो भूमि अधिग्रहण के लिए कोई प्रतिफल दिया है और न ही संरचना के निर्माण के लिए कोई अनुमति ली है। यह स्पष्ट रूप से अधिकारों का हनन है,” अदालत ने स्वामित्व का दावा करने के लिए सहायक चैरिटी आयुक्त द्वारा जारी सार्वजनिक नोटिस पर ट्रस्ट के भरोसे को खारिज करते हुए टिप्पणी की।
पीठ ने अपने पहले के निष्कर्षों को दोहराते हुए कहा कि “भीड़ का गुस्सा” या “किसी ज़मीन के टुकड़े पर लोगों का आना-जाना” किसी संरचना की वैधता स्थापित नहीं करता। पीठ ने आगे कहा, “यह ज़मीन हड़पने का एक उत्कृष्ट मामला है, और इस तरह के तरीके के लिए अदालत अपनी अनुमति नहीं दे सकती।”
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को हाईकोर्ट में दोबारा जाने की अनुमति दी थी; याचिका फिर भी खारिज
उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल को मूलतः विध्वंस को बरकरार रखा था। हालांकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रस्ट को पुनः उच्च न्यायालय में जाने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी, तथा यह इंगित किया कि ट्रस्ट के मुकदमे को खारिज करने वाले सिविल न्यायालय के फैसले को उसके संज्ञान में नहीं लाया गया था।
सिविल कोर्ट ने ट्रस्ट के स्वामित्व के दावे को पहले ही खारिज कर दिया था
इसके जवाब में, ट्रस्ट ने एक अंतरिम आवेदन दायर किया, जिसमें कहा गया कि दरगाह 1982 से पहले से ही उस स्थान पर मौजूद थी। लेकिन उच्च न्यायालय ने पाया कि ट्रस्ट स्वामित्व या निर्माण के लिए नगरपालिका की मंजूरी साबित करने वाले कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहा है।
न्यायाधीशों ने 5 अप्रैल के सिविल कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें पाया गया था कि ट्रस्ट ने निजी ज़मीन पर अतिक्रमण किया था और हस्तांतरण या प्रतिकूल कब्जे के ज़रिए स्वामित्व स्थापित करने में विफल रहा था। गौरतलब है कि ट्रस्ट ने उस कार्यवाही में खुद स्वीकार किया था कि 1982 के सरकारी राजपत्र में जिस दरगाह का ज़िक्र किया गया था, वह एक अलग ज़मीन पर थी।
टीएमसी ने कई नोटिस जारी किए, कोई जवाब नहीं मिला
प्रक्रियागत अनुचितता के तर्कों को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि ठाणे नगर निगम ने ट्रस्ट को विध्वंस नोटिस का जवाब देने के लिए पर्याप्त अवसर दिया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
न्यायाधीशों ने ज़ोर देकर कहा, “अदालत में आने वाले पक्ष को साफ़ हाथों से आना चाहिए। बेशक, तथाकथित ढाँचे का आकार 20,000 वर्ग फुट से भी ज़्यादा बड़ा हो गया है… ऐसा पक्ष किसी भी तरह के अधिकार का दावा नहीं कर सकता।”
राष्ट्रीय समाचार
‘सीएजी रिपोर्ट पर पीएसी की टिप्पणियों को गंभीरता से लें अधिकारी’, विधानसभा अध्यक्ष का विभागों को आदेश

दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को सरकारी खर्च में जवाबदेही पर जोर देते हुए दिल्ली सरकार के विभागों को आवश्यक निर्देश दिए। स्पीकर ने कहा कि विभाग पिछले साल की सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) रिपोर्ट पर पीएसी (पब्लिक अकाउंट्स कमिटी) की टिप्पणियों पर ध्यान दें और तय समय के अंदर ‘एक्शन टेकन नोट्स’ (की गई कार्रवाई की रिपोर्ट) जमा करें।
आठवीं दिल्ली विधानसभा के छठे सत्र के पहले दिन एक बयान में स्पीकर गुप्ता ने कहा, “पिछले साल से, पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) लगातार उन सीएजी रिपोर्टों की जांच कर रही है, जिन्हें पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान सदन के सामने पेश नहीं किया गया था।”
उन्होंने कहा, “कमेटी ने अब उन सीएजी रिपोर्टों पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जो पिछले साल पेश की गई थीं।”
उन्होंने कहा, “मुझे भरोसा है कि इस साल पेश की गई सीएजी रिपोर्टों की जांच भी साल के आखिर तक पूरी हो जाएगी। मैंने विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिया है कि वे इन रिपोर्टों को संबंधित विभागों को भेजें ताकि जल्द से जल्द ‘एक्शन टेकन नोट्स’ मिल सकें।”
स्पीकर ने आगे कहा, “जैसा कि मैंने पहले कहा है, सीएजी की टिप्पणियां केवल कुछ मामलों की जांच पर आधारित होती हैं। इसलिए, संबंधित विभागों को इन टिप्पणियों को एक चेतावनी के तौर पर लेना चाहिए और भविष्य में ऐसी कमियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि सरकार के सीमित संसाधनों का सबसे अच्छे तरीके से इस्तेमाल हो सके।”
उन्होंने कहा कि ये रिपोर्टें सिर्फ कमियों का ब्योरा नहीं हैं, बल्कि सुधार का रास्ता भी दिखाती हैं। मैं सभी विभागों से आग्रह करता हूं कि वे इन निष्कर्षों को पूरी गंभीरता से लें, तय समय के भीतर अपने ‘एक्शन टेकन नोट्स’ जमा करें और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाएं ताकि जनता के पैसे का एक-एक रुपया सिर्फ उसी मकसद के लिए इस्तेमाल हो जिसके लिए वह है।
इससे पहले, शुक्रवार को आठवीं दिल्ली विधानसभा का छठा सत्र शुरू हुआ। मानसून सत्र में 10 और 11 अगस्त को कम से कम दो और बैठकें होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय समाचार
हर घर तिरंगा अभियान: जौनपुर में 300 महिलाओं ने संभाली झंडा बनाने की जिम्मेदारी

स्वतंत्रता दिवस नजदीक आने के साथ ही जौनपुर के ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाएं ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत 62 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 300 महिलाओं ने ‘हर घर तिरंगा’ और ‘तिरंगा यात्रा’ अभियान में सरकार के विशाल राष्ट्रव्यापी ध्वजारोहण अभियान से पहले राष्ट्रीय ध्वज बनाने का कार्य अपने हाथ में लिया है।
जिले के लिए पांच लाख झंडे तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और इन झंडों को सभी ब्लॉकों में 62 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 300 महिलाएं तैयार कर रही हैं। बजरंग स्वयं सहायता समूह की महिला विजयलक्ष्मी मौर्या ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि उसके समूह को 17 हजार झंडे बनाने का लक्ष्य मिला है। हमने छह हजार झंडों की सिलाई पूरी करके उन्हें आगे ब्लॉक कार्यालय में भेज दिया है।
विजयलक्ष्मी मौर्या ने बताया कि समूह में 10 से अधिक महिलाएं हैं, जो इस कार्य को कर रही हैं। हम लोग झंडों की सिलाई का कार्य कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य में उन्हें 30 से 40 हजार रुपए की कमाई होगी।
स्वतः रोजगार उपायुक्त जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार हमारे जनपद को पांच लाख झंडे बनाने का लक्ष्य मिला है। मुख्य कार्य संकुल स्तरीय स्वयं सहायता समूह से किया जा रहा है। सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के लक्ष्य सरकार की ओर से दिए गए लक्ष्य को पूरा कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एक झंडे पर डेढ़ से दो रुपया समूह की महिलाओं को मिल जाता है, क्योंकि यह महिलाएं सिर्फ सिलाई करती हैं। मुख्य रूप से संकुल को एक झंडा बनाने के लिए 20 रुपए दिया जा रहा है और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एक झंडे पर 2 से 3 रुपए तक जरूर मिल जाएगा।
राजनीति
राहुल गांधी को महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए : रिजिजू

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महिलाओं की आजादी और भागीदारी पर बयान दिया। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि जब तक महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पाएंगी, तब तक कोई भी देश पूरी तरक्की नहीं कर सकता।
राहुल गांधी के इस बयान पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि कांग्रेस को अब संसद में महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
दरअसल, राहुल गांधी ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट कर में अपनी बात रखी। गुरुवार को भी ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र में भी उन्होंने इसी मुद्दे पर बात की थी।
उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मैं सोच रहा था कि भारत की महिलाओं की ऊर्जा फंसी हुई है, उसे व्यक्त करने की इजाजत नहीं है, कल्पना करने की आजादी नहीं है। मेरे लिए कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक वहां की महिलाएं खुद को व्यक्त न कर सकें।”
वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की आवाज दबने से देश की तरक्की पर असर पड़ता है। मेरी राजनीति का एक बड़ा हिस्सा यही है कि लोग समझें कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा है।
राहुल गांधी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण सिर्फ बिजनेस या राजनीति तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह सिर्फ इस बारे में नहीं है कि महिलाएं बिजनेस या राजनीति में अच्छा करें, बल्कि यह भी है कि वे अपने घरों में, परिवार में और सार्वजनिक जगहों पर खुलकर बोल सकें और सड़कों पर आराम से चल सकें।
उन्होंने आगे कहा, “महिलाओं को यह आजादी होनी चाहिए कि वे दूसरों से अलग राय रख सकें, अपने माता-पिता, पति, भाई-बहन से सवाल कर सकें। भारत को सच में विकसित होना है तो पितृसत्ता और पुरुषों के कड़े नियंत्रण से महिलाओं को थोड़ी आजादी मिलनी ही चाहिए।”
राहुल गांधी के इस वीडियो बयान पर किरेन रिजिजू ने कहा कि यह कांग्रेस के नजरिए में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
यह कांग्रेस पार्टी का सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी के दिल में महिलाओं को लेकर बदलाव दिख रहा है। अब मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी।
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 या नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है, एक ऐतिहासिक कानून है। इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। फिलहाल महिला आरक्षण को लेकर सियासी बहस तेज है और सभी की नजर संसद के अगले कदम पर है।
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