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Monday,28-September-2026
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यूपी सरकार का दावा : 46 जिलों में 215 उद्योग लगे, 1,32,951 लोगों को रोजगार

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Yogi-Adityanath

 बेरोजगारी और आर्थिक संकट की खबरों के बीच यूपी सरकार का दावा है कि प्रदेश में 46 जिलों 215 उद्योग लगे हैं और इन उद्योगों से 1,32,951 लोगों को रोजगार मिला है। सरकार के मुताबिक नोएडा सहित राज्य के 46 जिलों में बड़े उद्योगपतियों ने अपने उद्यम स्थापित कर उनमें उत्पादन भी शुरू कर दिया है। कुल 51,710.14 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। इसके अलावा अब चंद महीनों में ही 37698.63 करोड़ रुपए का निवेश करके स्थापित किए जा रहे 132 उद्यमों में भी उत्पादन शुरू हो जाएगा। इन 132 उद्यमों में 2,16,236 लोगों को रोजगार मिलेगा।

राज्य सरकार से मिली जानकारी के अनुसार महज साढ़े तीन साल में देश तथा विदेश के बड़े -बड़े उद्योगपति 89,408.82 करोड़ रुपए का निवेश कर अपनी फैक्ट्री लगा रहे हैं। जिसमें से सूबे के 46 जिलों में 51,710.14 करोड़ रुपए के हुए निवेश का परिणाम दिख रहा है। इन जिलों में उद्योगपतियों के स्थापित किए गए उद्यम (फैक्ट्री) में उत्पादन शुरू हो गया है। औद्योगिक विकास विभाग में कार्यरत अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से ही यह संभव हुआ है। मुख्यमंत्री ने राज्य के औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया था। जिसके तहत उन्होंने फरवरी 2018 में इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया। इस आयोजन में देश के सभी प्रमुख औद्योगिक घरानों के मुखिया आए। इस इन्वेस्टर्स समिट में बड़े उद्योगपतियों ने यूपी में निवेश करने में रूचि दिखाते हुए 4.28 लाख करोड़ रुपए के 1045 निवेश प्रस्ताव सरकार को सौपे थे। उद्योगपतियों के यह निवेश प्रस्ताव राज्य में लगे, इसके लिए मुख्यमंत्री ने करीब दर्जन भर अलग-अलग विभागों की नीतियां बनवाईं। इसके अलावा प्रदेश में लॉ एंड आर्डर और बुनियादी ढांचे को सु²ढ़ करने पर काम किया। यहीं नहीं विभिन्न क्षेत्रों में रिकॉर्ड 186 सुधारों को लागू किया गया। राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों का ही यह असर है कि महज साढ़े तीन वर्षों के भीतर ही प्रदेश में बड़े उद्योगपतियों ने 215 उद्यमों में 51710.14 करोड़ रुपए का निवेश कर उत्पादन शुरू कर दिया है। इन उद्यमों में 1,32,951 लोगों को रोजगार मिला है।

औद्योगिक विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिन 215 उद्यमों में उत्पादन शुरू हुआ है, वह सूबे के 46 जिलों में स्थापित किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 38 उद्यम गौतमबुद्धनगर (नोयडा) में स्थापित किए गए हैं। लखनऊ में 20, गाजियाबाद में 14, मेरठ में 10, बाराबंकी में 9, कानपुर में 8, गोरखपुर तथा वाराणसी में 7-7, पीलीभीत, बदायूं तथा हरदोई में 6-6, झांसी में 5, बस्ती, एटा, शाहजहांपुर, बिजनौर, बहराइच, संभल में 4-4, तथा कानपुर देहात, उन्नाव, अलीगढ़, हाथरस, सीतापुर, मैनपुरी, संतकबीर नगर में 3-3 तथा लखीमपुरखीरी, बरेली, फिरोजाबाद, मथुरा, गाजीपुर तथा बलरामपुर में 2-2 उद्यम स्थापित किए गए हैं। सुल्तानपुर, कन्नौज, हापुड़, रामपुर, श्रावस्ती, प्रतापगढ़, मिजार्पुर, देवरिया, आगरा, चंदौली, बुलंदशहर तथा प्रयागराज में एक-एक उद्यम स्थापित किया गया है। जिन 215 उद्यमों में उत्पादन होने लगा है, उनमें सबसे अधिक 101 उद्यम (फैक्ट्री) फूड प्रोसेसिंग से संबंधित हैं। फूड प्रोसेसिंग की इन 101 यूनिटों की स्थापना में 4074.02 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है और इन यूनिटों में 20,176 लोगों को रोजगार मिला है। मैन्युफैक्च रिंग से संबंधित 62 उद्यमों की स्थापित कर उसमें 12,378 लोगों को रोजगार दिया गया है। मैन्युफैक्च रिंग से संबंधित 62 उद्यमों की स्थापना पर 4819.45 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्च रिंग की 16 यूनिटों में 23762.67 करोड़ रुपए का निवेश कर उसमें 61195 लोगों को रोजगार दिया गया है और टेलिकॉम सेक्टर में भी दो उद्यमों की स्थापना पर 15,000 करोड़ रुपए का निवेश कर उसमें दो हजार लोगों को रोजगार दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इसी प्रकार 6 डिस्टिलरी, 7 टेक्सटाइल्स फैक्ट्री, दो चीनी मिल तथा एक डेयरी फैक्ट्री की स्थापना भी की गई है।

नोएडा सहित 48 जिलों के 215 उद्यमों में उत्पादन शुरू होने के चलते अब 37698.63 करोड़ रुपए का निवेश करके स्थापित किए जा रहे 132 उद्यमों के निर्माण कार्य में भी तेजी आ गई है। अधिकारियों का कहना है कि चंद महीनों में उक्त 132 उद्यमों में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और इसी साल इन उद्यमों में उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। इन 132 उद्यमों में 2,16,236 लोगों को रोजगार मिलेगा। इन उद्यमों में भी सबसे अधिक 38 फैक्ट्री फूड प्रोसेसिंग से संबंधित हैं । उसके बाद 28 उद्यम मैन्युफैक्च रिंग से संबंधित हैं। उक्त फैक्ट्रियों में उत्पादन जल्दी से शुरू हो इसके लिए उक्त उद्यमों के निवेशकों से अधिकारी लगातार संपर्क में हैं।

राष्ट्रीय समाचार

भारत की औद्योगिक वृद्धि दर अगस्त में बढ़कर 8 प्रतिशत हुई, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर शीर्ष पर रहा

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भारत का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा है। इसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन करना था। यह जानकारी सोमवार को सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में दी गई।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अगस्त के दौरान 9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

आधिकारिक बयान के अनुसार, “रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने लगातार तीन महीनों में 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की है।”

यह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर 23 में से 18 उद्योग समूहों ने अगस्त में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इस दौरान सबसे अधिक योगदान देने वाले तीन प्रमुख उद्योगों में मोटर वाहनों का विनिर्माण, जिसमें 25.2 प्रतिशत वृद्धि हुई, इलेक्ट्रिकल उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 30.9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, और मशीनरी एवं उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 25.3 प्रतिशत वृद्धि हुई, शामिल हैं।

बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में अगस्त के दौरान 12.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

हालांकि, खनन क्षेत्र में अगस्त के दौरान 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों के अनुसार, कैपिटल गुड्स, यानी कारखानों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के उत्पादन में अगस्त में 16.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। यह खंड अर्थव्यवस्था में हो रहे वास्तविक निवेश को दर्शाता है, जिसका आगे चलकर रोजगार और आय के सृजन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

अगस्त के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी के उत्पादन में भी 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि हुई। यह बढ़ती आय के बीच इन वस्तुओं की उपभोक्ता मांग में वृद्धि को दर्शाता है। वहीं, साबुन और कॉस्मेटिक्स जैसे कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स के उत्पादन में महीने के दौरान 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में भी 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि हाईवे, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं में सरकार के बड़े निवेश से प्रेरित रही। ऐसी परियोजनाएं बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के साथ-साथ समग्र आर्थिक विकास दर को बढ़ावा देती हैं।

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राजनीति

शरद पवार ने रखीं 17 मांगें, किसानों पर मंडराया बड़ा संकट: एनसीपी नेता अनीश गवांडे

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एनसीपी (एसपी) नेता अनीश गवांडे ने शरद पवार की बैठक, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद, सीजेपी के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को अनुमति नहीं दिए जाने, आईआईटी मुंबई के छात्र की मौत और प्रवेश वर्मा के थप्पड़ मारने के विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन सभी मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाबदेही की मांग की।

शरद पवार की बैठक को लेकर अनीश गवांडे ने कहा कि पवार साहब ने एक पत्र के जरिए 17 मांगें सामने रखी हैं। इनमें कर्ज माफी, बिजली बिल और सूखा प्रभावित किसानों को सहायता देने जैसी मांगें शामिल हैं। कुछ महीने पहले ही शरद पवार ने आशंका जताई थी कि अगर इस साल बारिश ठीक नहीं हुई तो देश और खासकर महाराष्ट्र के किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ईरान में हुए युद्ध के बाद यूरिया खाद की कमी की बात सामने आ रही है। ऐसे में अगर बारिश कम होती है तो किसानों के सामने और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने किसानों के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई।

गवांडे ने कहा कि बैठक में अन्य राजनीतिक मुद्दों के साथ चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर भी चर्चा होगी और आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जाएगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर गवांडे ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज पर इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं, ऐसे में तीनों चुनाव आयुक्तों को एक साथ सामने आकर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने फॉर्म-6 में हुए बदलाव, वोटर लिस्ट के केंद्रीकरण और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गवांडे ने इन प्रक्रियाओं को ‘असंवैधानिक और गैरकानूनी’ बताते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर को लेकर राज्य चुनाव अधिकारियों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। साथ ही, अपील की प्रक्रिया में भी सभी चुनाव आयुक्तों को विश्वास में नहीं लिया गया।

उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाएगा। कांग्रेस के अलावा सिविल सोसाइटी के लोग भी इस मुद्दे पर सामने आए हैं। मुंबई में 2 तारीख को विरोध-प्रदर्शन और 4 तारीख को शिवसेना तथा मनसे के साथ प्रदर्शन की बात कही गई है। चुनाव आयोग देश की महत्वपूर्ण स्वतंत्र संस्था है और उसके कामकाज को लेकर सवाल उठने पर नागरिकों को आवाज उठानी चाहिए।

मुंबई पुलिस द्वारा 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रस्तावित सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने पर भी गवांडे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महात्मा गांधी के दांडी मार्च का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी किसी अनुमति का सवाल नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विरोध-प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं देना अपना सामान्य रवैया बना लिया है। विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने मराठा आरक्षण, चुनाव आयोग और पुणे में एमपीएससी छात्रों के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में अनुमति नहीं दी जाती, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ पक्ष के कार्यक्रमों को अनुमति मिलती है। जनता इसे अन्याय के रूप में देख रही है और लोग अनुमति मिले या नहीं मिले, विरोध के लिए सड़कों पर उतरेंगे।

आईआईटी मुंबई के छात्र की मौत के मामले पर अनीश गवांडे ने छात्र आत्महत्या को राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति बताया। उन्होंने 2024 के एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उस साल 14,500 छात्रों ने आत्महत्या की, जो 2014 के करीब 8,000 के आंकड़े से 80 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने आईआईटी में पिछले 20 वर्षों के दौरान 170 से अधिक छात्रों की आत्महत्या का भी दावा किया। गवांडे ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए संस्थानों में काउंसलरों की संख्या बढ़ाने और जातिगत भेदभाव के खिलाफ प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके साथ सरकार को बातचीत करनी चाहिए और उन्हें राजनीतिक विरोधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

प्रवेश वर्मा से जुड़े थप्पड़ विवाद पर गवांडे ने इसे गलत बताते हुए कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी आम नागरिक को सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मारना अपराध है। किसी भी व्यक्ति को अपने हाथ में कानून लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने भाजपा से प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि अगर पार्टी खुद को अलग तरह की पार्टी मानती है तो उसे अपने नेता के खिलाफ कार्रवाई करके यह दिखाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हो तो पुलिस को भी मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी आम नागरिक पर हाथ उठाना गलत है, खासकर तब जब ऐसा करने वाला व्यक्ति विधायक या किसी महत्वपूर्ण पद पर हो।

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राजनीति

थप्पड़ मारने वाले मंत्री को गिरफ्तार कराएं पीएम मोदी, जेन-जी का दिल जीत जाएंगे : केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तिलक नगर में जेन-जी के एक युवक को थप्पड़ मारने की घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्री प्रवेश वर्मा को गिरफ्तार करा दें और खराब सड़क निर्माण के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करें, तो इससे देश के युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेन-जी से जुड़ने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं, लेकिन उन्हें यह सोचना चाहिए कि युवा उनसे क्यों नहीं जुड़ रहे हैं।

उन्होंने तिलक नगर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले रेखा गुप्ता सरकार की ओर से बनाई गई एक सड़क को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए थे। केजरीवाल के मुताबिक, लोगों ने सड़क की गुणवत्ता दिखाते हुए बताया कि वह हाथ से ही टूट रही थी। इसी दौरान वहां मंत्री प्रवेश वर्मा भी मौजूद थे। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने वाले लोगों में मौजूद जेन-जी के एक युवक को मंत्री ने खींचकर थप्पड़ मारा।

उन्होंने सवाल किया कि जब किसी सरकार का मंत्री सार्वजनिक रूप से किसी युवा के साथ इस तरह का व्यवहार करेगा तो देश का जेन-जी प्रधानमंत्री से कैसे जुड़ेगा। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें युवाओं से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने या अन्य गतिविधियों के बजाय भ्रष्टाचार और गलत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी यदि अपने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करते हैं और सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार करने वालों को गिरफ्तार कराते हैं, तो उन्हें युवाओं से जुड़ने के लिए अलग से प्रयास करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश का जेन-जी ईमानदारी और स्पष्ट कार्रवाई की उम्मीद करता है। केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस पर ऊपर से दबाव है और इसी वजह से मंत्री को बचाने की कोशिश की जा रही है।

केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक तरफ युवाओं को अपने साथ जोड़ना चाहते हैं और दूसरी तरफ ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करते तो यह विरोधाभास पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि जेन-जी सरकार से ईमानदारी और सीधे तरीके से कार्रवाई की अपेक्षा करता है।

गौरतलब है कि तिलक नगर में सड़क की गुणवत्ता को लेकर सामने आई घटना के बाद मंत्री प्रवेश वर्मा और युवक से जुड़े थप्पड़ प्रकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और संबंधित मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

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