महाराष्ट्र
मिला 750 करोड़ का चंदा, मालामाल हुई बीजेपी, शिवसेना ने पूछा- टेबल के नीचे का हिसाब कहां?
शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिये बीजेपी पर तीखा हमला किया है। इस बार हमले की वजह बना है बीजेपी को मिला 750 करोड़ का चंदा। ‘सामना’ ने लिखा है कि ताजा खबरों के अनुसार सिर्फ एक साल में भारतीय जनता पार्टी को 750 करोड़ रुपये का ढेर सारा चंदा मिला है। यह अधिकृत चंदे का आंकड़ा है, बाकी टेबल के नीचे का अलग है! इतना बेशुमार चंदा कॉर्पोरेट कंपनियों के अलावा व्यक्तिगत स्वरूप में भी मिला है। वर्तमान राजनीति सिर्फ पैसों का खेल बन गई है। नीति, विचारधारा, राष्ट्र आदि संकल्पना पीछे छूट गई है।
पैसा फेंको, तमाशा देखो यह नया खेल बीते कुछ वर्षों में शुरू हो गया है। तुम्हारी जाति क्या है, यह पहला सवाल उम्मीदवार से पूछा जाता है। खर्च करने का सामर्थ्य कितना है? यह दूसरा सवाल है। इसलिए वर्तमान चुनावी राजनीति में जाति और पैसा इन दो प्रमुख बातों का जोर है। उम्मीदवार मालामाल होना चाहिए। उसी से राजनीतिक पार्टी भी अपने स्तर पर मालामाल हो रही हैं। ‘सामना’ ने लिखा है कि 2019 -20 इस एक साल का यह बेहद छुटपुट हिसाब है। इस दौर में सोनिया गांधी (Sonia Gnadhi) की राष्ट्रीय कांग्रेस को 139 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। तीसरे क्रमांक पर अमीर पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) नजर आती है, उन्हें 59 करोड़ रुपये का चंदा मिला है।
तृणमूल कांग्रेस को 8 करोड़ रुपये, सीपीएम को 19. 6 करोड़ और सीपीआई को 1.9 करोड़ रुपये चंदे के रूप में मिलने का अधिकृत आंकड़ा सामने आया है। बीजेपी के 750 करोड़ का यह आंकड़ा वास्तव में अधिक बड़ा हो सकता है, क्योंकि चुनाव आयोग के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट में 20 हजार से ज्यादा रकम चंदे के नाम पर ही पेश की जाती है इसलिए 20 हजार वाले करोड़ों लोग हो सकते हैं। ‘सामना’ ने लिखा है कि इस बार सबसे बड़ा दानी प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट है, उसने 217.75 करोड़ रुपये बीजेपी (BJP) को दान दिए हैं। आईटीसी ग्रुप ने 76 करोड़, जन कल्याण ट्रस्ट ने 45.95 करोड़। इसके अलावा महाराष्ट्र के बीजी शिर्के कंस्ट्रक्शन का 35 करोड़, लोढ़ा डेवलपर्स का 21 करोड़, गुलमण डेवलपर्स, ज्युपिटर कैपिटल का 15 करोड़ आदि बड़े आंकड़े हैं। देश के 14 शैक्षणिक संस्थाओं ने बीजेपी की दानपेटी में करोड़ों रुपये डाले हैं।
बीजेपी सत्ता में है और उद्योगपतियों की चाबी बीजेपी के व्यापारी मंडल के पास है। 2014 और 2019 के आम चुनावों में पैसों का अपार और अंधाधुंध इस्तेमाल किया गया। पैसा लाने-ले जाने के लिए विमानों व हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल हुआ। ‘सामना’ ने लिखा है कि सत्ता और पैसा यह एक अलग नशा है। पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसा। उसी पैसे से बार-बार सत्ता। इस दुष्चक्र को भेदना अब हमारे लोकतंत्र में किसी के लिए भी संभव होगा, ऐसा नहीं लगता। उद्योगपति, बिल्डर, ठेकेदार, व्यापारी मंडल, करोड़ों रुपये का चंदा किसी राजनीतिक पार्टी को देते हैं, वह क्या सिर्फ खैरात के लिए? इन चंदों की वसूली अगले पांच वर्षों में सही ढंग से होती ही है। उद्योगपतियों के लिए कानून बदले जाते हैं। नियमों को मरोड़ा जाता है और उनके दिए चंदे की पूरी तरह से वसूली वे कर पाएं, इसका उचित प्रबंध किया जाता है।
महाराष्ट्र
मुंबई मानखुर्द एटीएम कार्ड फ्रॉड के दो आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर फ्रॉड करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। 5 अगस्त को शिकायत करने वाली महिला पैसे निकालने के लिए मंगल मूर्ति जंक्शन पर बने एटीएम सेंटर गई थी। एटीएम से पैसे निकालते समय उसके पीछे खड़े एक अनजान व्यक्ति ने कार्ड का पिन देख लिया। इसके बाद उसने चालाकी से एटीएम रॉड बदलकर 19,000 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने इस मामले में फ्रॉड का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में तीन संदिग्ध लोग दिखे थे जो एटीएम कार्ड से पैसे निकालते हुए पाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान कल्याण के रहने वाले 30 साल के कासिम अली बरकत अली और 38 साल के परवेज अकबर अली शेख के तौर पर हुई है। पुलिस दोनों से आगे की जांच कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उन्होंने पहले कितने लोगों को ठगा है। यह कार्रवाई एडिशनल कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी के निर्देश पर डीसीपी समीर शेख ने की।
महाराष्ट्र
ममता बनर्जी पर हमला लोकतंत्र पर सीधा आघात: ‘सामना’ शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने मंगलवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पर हुआ हमला केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक हस्ती पर हमला नहीं है, यह हमारे गणतंत्र के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर सीधा प्रहार है।
पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा, “पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस एक भीड़ ने उनके वाहन को घेर लिया, जिसका स्पष्ट उद्देश्य एक सशक्त विपक्षी आवाज को खत्म करना प्रतीत होता था। उनका बच जाना महज संयोग की बात है, लेकिन इस घटना से एक भयावह सच्चाई सामने आती है, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की स्थिति सभी स्वीकार्य सीमाओं को पार कर चुकी है।”
‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि राज्य में हाल ही में हुए राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। जिनमें अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे सांसद और विधायक शामिल हैं, सत्ताधारी दल के रवैये में यह विरोधाभास साफ तौर पर दिखाई देता है।
उन्होंने आगे लिखा कि जहां केंद्रीय नेतृत्व दलबदलुओं का गर्मजोशी से स्वागत करता है, वहीं राज्य में राजनीतिक आधार तैयार करने वाले नेता जानलेवा हमलों के शिकार हो रहे हैं। जब केंद्र सरकार ने पहले पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था के पतन का हवाला देकर अपने हस्तक्षेपों को उचित ठहराया था, तो यह सवाल उठता है, क्या अनियंत्रित शत्रुता और राज्य द्वारा स्वीकृत मनमानी का यह मौजूदा माहौल ही उनके लिए कानून व्यवस्था की परिभाषा है?
संपादकीय में आगे कहा गया कि विधानसभा चुनावों के दौरान, केंद्र प्रशासन ने निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने और व्यवस्था बनाए रखने के बहाने लाखों केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया था। आज, जब लक्षित राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है, तो वह तत्परता स्पष्ट रूप से गायब हो गई है। शांति बहाल करने के लिए आवश्यक केंद्रीय बलों को तैनात करने में अनिच्छा एक चिंताजनक दोहरे मापदंड को उजागर करती है। जब पूर्व मुख्यमंत्री, मौजूदा सांसद और निर्वाचित प्रतिनिधि बार-बार सड़क हिंसा का शिकार होते हैं, तो यह संस्थागत शासन के पूर्ण पतन को दर्शाता है।”
संपादकीय में आगे कहा कि राज्य में विपक्षी नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी उतनी ही चिंताजनक है। एक वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती पर हुए हिंसक हमले को महज ‘जनता और एक राजनीतिक दल के बीच की लड़ाई’ बताकर पेश करना गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक दोनों है। इस तरह की बयानबाजी भीड़ हिंसा को तर्कसंगत ठहराती है और राज्य की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का संकेत देती है। इस गलत तर्क के आधार पर, जंतर-मंतर पर युवाओं के विरोध प्रदर्शन सहित किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन या शिकायत को नागरिकों और प्रधानमंत्री के बीच व्यक्तिगत संघर्ष के रूप में गलत तरीके से पेश किया जा सकता है, जिससे राज्य अपने व्यवस्था बनाए रखने के मूलभूत कर्तव्य से विमुख हो जाता है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने तर्क दिया कि एक कार्यशील लोकतंत्र में चुनावी जीत-हार मतपेटी में तय होती है। राजनीतिक सत्ता के लिए संयम, जवाबदेही और संवैधानिक मानदंडों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है। शिवसेना ने कहा कि वर्तमान स्थिति जहां असहमति को अत्यधिक बल प्रयोग से दबाया जाता है, छात्र आंदोलनों को कुचला जाता है और विपक्षी नेताओं को लगातार शारीरिक धमकियों का सामना करना पड़ता है। एक ऐसे वातावरण की ओर इशारा करती है जहां गैर-सरकारी संगठन राजनीतिक इच्छाशक्ति को लागू करने के लिए बेखौफ महसूस करते हैं।
ठाकरे खेमे का दावा था कि यदि विपक्ष को शासन का एक अनिवार्य स्तंभ मानने के बजाय शारीरिक रूप से समाप्त किए जाने वाले शत्रु के रूप में देखा जाए तो लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता। हिंसक तत्वों को बिना किसी दंड के सक्रिय रहने देना शक्ति का प्रदर्शन नहीं है; यह अराजकता की ओर ले जाने वाला संकेत है जो अंततः राष्ट्र को बनाए रखने के लिए गठित संस्थाओं को ही कमजोर कर देगा।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: टीईटी पेपर लीक मामले में पुलिस प्रशिक्षण संस्थान का संचालक गिरफ्तार, भिवंडी कोर्ट में किया जा सकता है पेश

ARREST
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में सोलापुर स्थित पुलिस प्रशिक्षण संस्थान के संचालक को गिरफ्तार किया गया है। मंगलवार को पुलिस उसको भिवंडी कोर्ट में पेश कर सकती है। भिवंडी जोन-2 के डीसीपी पवन बंसोड़ ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
भिवंडी पुलिस ने सोलापुर स्थित पुलिस प्रशिक्षण संस्थान के संचालक प्रकाश पवार को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक पुलिस 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। टीईटी पेपर लीक होने के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया था।
मामले की जांच भिवंडी पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की ओर से की जा रही है। कुछ दिन पहले ही पुलिस ने मामले के मुख्य सूत्रधार बिजेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार किया था।
शुरुआत में पुलिस ने दिल्ली, आगरा और बिहार से आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, जांच के दौरान इस मामले के तार महाराष्ट्र से भी जुड़े होने की जानकारी सामने आई। जांच में प्रकाश पवार का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, प्रकाश पवार सोलापुर में पुलिस भर्ती के साथ ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली प्रशिक्षण संस्था चलाता है। जांच में सामने आया है कि पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों को पवार ने कुछ विद्यार्थियों के दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। ये दस्तावेज किस उद्देश्य से दिए गए थे, इसकी जांच पुलिस कर रही है।
इसके अलावा, प्रकाश पवार का इस मामले में शामिल अन्य लोगों से कोई संबंध है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। टीईटी पेपर लीक मामले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस आर्थिक लेन-देन, विद्यार्थियों के दस्तावेज और परीक्षा में हुई अनियमितताओं से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
बिजेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने बताया था कि बिहार में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान बिजेंद्र गुप्ता, इंद्रजीत सिंह उर्फ पीकू और एक अन्य सहयोगी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना था कि बिजेंद्र गुप्ता ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए कई परीक्षा पेपर लीक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो सकती है। इसी वजह से वह महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले का सबसे वांछित आरोपी माना जा रहा था।
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