राजनीति
दिल्ली में बनेगा रोजगार व व्यवसाय दिलाने वाला ‘विश्वविद्यालय’
दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य अपने हर छात्र को रोजगार दिलाना अथवा व्यवसाय शुरू करने योग्य बनाना है। इस यूनिवर्सिटी में बच्चों को नौकरी लायक कौशल (स्किल) देकर ऐसा प्रशिक्षण कराया जाएगा, जिससे उन्हें यूनिवर्सिटी से बाहर निकलते ही तुरंत नौकरी मिल सके। इसी तरह, जो बच्चे बिजनेस करना चाहते हैं, उन बच्चों को बिजनेस करने के लिए तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली निवासियों के लिए यह एक बहुत अच्छी और बड़ी खुशखबरी है। हमारा सपना था कि हर युवक को रोजगार मिले। देश में बहुत बेरोजगारी है। एक वो युवा हैं, जिनको पढ़ाई-लिखाई नसीब नहीं होती है। दूसरे वो युवा हैं, जो पढ़-लिखकर भी बेरोजगार हैं। हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी है, जो बच्चों को रोजगार के लिए तैयार नहीं करती।”
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय शुरू करने का हमारा सपना था। हमने आज उस सपने को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है। आईआईएम की प्रोफेसर रहीं नेहारिका वोहरा विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर बनाई गई हैं। डॉ. प्रमथ राज सिन्हा, प्रमोद भसीन, संजीव बिकचंदानी, श्रीकांत शास्त्री, प्रो. के.के. अग्रवाल और प्रो. जी. श्रीनिवासन बोर्ड के मेंबर बनाए गए हैं। यह सभी अपने-अपने क्षेत्र में काफी अनुभव रखते हैं।”
इस यूनिवर्सिटी का पहला एकेडमिक सत्र अगले साल से शुरू होने की उम्मीद है। बोर्ड मेंबर, कंपनियों से सलाह लेकर ऐसा कोर्स तैयार करेंगे, ताकि युवाओं को कंपनियां बुलाकर नौकरी दे सकें।
दिल्ली सरकार द्वारा बनाए जा रहे इस नए विश्वविद्यालय को लेकर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, “दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय में गुणवत्ता और मात्रा पर जोर होगा। इसमें पारंपरिक कौशल से लेकर भविष्य तक के कौशल प्रशिक्षण के प्रकार के उच्च गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम होंगे। साथ ही, मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के लिए मांग के अनुरूप पर्याप्त संख्या में सीटें होंगी।”
सीएम केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय की शुरूआत हो गई है। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और बोर्ड मेंबर नियुक्त कर दिए गए हैं। मैंने सभी से एक ही बात कही। इस इंडस्ट्री की एक ही विचारधारा होगी, इस यूनिवर्सिटी का एक ही उद्देश्य होगा, कि इससे निकलने वाले हर एक बच्चे को जो नौकरी चाहता है, उसे नौकरी मिलनी ही चाहिए और जो अपना बिजनेस करना चाहता है, वह कोर्स पूरा करने के बाद तुरंत अपना बिजनेस कर सके।”
प्रोफेसर नेहारिका वोहरा इस यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर नियुक्त की गई हैं। प्रो. नेहारिका वोहरा ने आईआईएम अहमदाबाद में काफी समय तक प्रोफेसर का काम किया। इनके पास करीब 20 साल तक पढ़ाने का अनुभव है। प्रो. वोहरा आईआईएम अहमदाबाद के सेंटर फॉर इनोवेशन इंक्यूवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप की चेयरपर्सन थीं।
यूनिवर्सिटी के बोर्ड मेंबर में शामिल डॉ. प्रमथ राज सिन्हा, जिन्होंने अशोका यूनिवर्सिटी समेत दो बड़े इंस्टीट्यूट शुरू किए। बोर्ड मेंबर में प्रमोद भसीन हैं, जिन्होंने जेनपैक 1997 शुरू किया था, उन्होंने अपना एक स्किल सेंटर भी चलाया है। साथ ही वो देश की कई कंपनियों के बोर्ड मेंबर हैं। वो सॉफ्टवेयर संस्था नैसकॉम के चेयरमैन रहे और उनको आईटी मैन ऑफ द इयर अवॉर्ड मिला है।
मेंबर में शामिल संजीव बिकचंदानी नौकरी डॉट कॉम के फाउंडर हैं। मेंबर श्रीकांत शास्त्री, जो कई सारे स्टार्टअप शुरू करा चुके हैं और कई सारे नए-नए इवेंचर्स शुरू करा चुके हैं। प्रोफेसर केके अग्रवाल, जो आईटी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रह चुके हैं और प्रोफेसर जी. श्रीनिवासन बोर्ड मेंबर में शामिल हैं। इस तरह एक-एक व्यक्ति को चुन करके यूनिवर्सिटी का बोर्ड मेंबर बनाया गया है।
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि, “सबसे अहम होगा कि यह विश्वविद्यालय किस तरह से इंडस्ट्री के साथ तालमेल करके कोर्स शुरू करेगा। नौकरी देने वाली कंपनियां एक तरह से इनके एक कस्टमर हैं। यूनिवर्सिटी जो भी कोर्स डिजाइन करे, इनको पहले कंपनियों को दिखा लेना चाहिए। कंपनियों से पूछें कि अगर हम यह कोर्स पढ़ाएंगे, तो क्या आप नौकरी देंगे। अगर कंपनी कहती है कि हम नौकरी नहीं देंगे, अगर इंडस्ट्री कहती है कि हम नौकरी नहीं देंगे, अगर बिजनेस वाले कहते हैं कि हम नौकरी नहीं देंगे, इसका मतलब है कि वह कोर्स सही नहीं है।”
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026: मुंबई में संवैधानिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों की चिंताओं पर अहम सेमिनार; जस्टिस अभय थप्से और कानूनी विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।

मुंबई: “भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और फैलाने का पूरा अधिकार देता है, लेकिन सरकार की ‘कहने की एक बात और करने की दूसरी’ परंपरा बन गई है। ‘महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल 2026’ का नाम तो ‘धार्मिक आजादी’ है, लेकिन इसका असली मकसद धर्म पर सख्त पाबंदियां लगाना और माइनॉरिटीज को दबाना है। जब कानून की भाषा साफ नहीं होती, तो यह सुरक्षा के बजाय चिंता का कारण बन जाती है, और यह साफ न होना सामाजिक ताने-बाने और आपसी सहनशीलता को नुकसान पहुंचाता है।” ये विचार बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय थापसे ने अंधेरी वेस्ट के मेयर हॉल में ‘यूनाइटेड अगेंस्ट इनजस्टिस एंड डिस्क्रिमिनेशन’ (यूएआईडी) और ‘एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ (एपीसीआर) द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। सेमिनार में अलग-अलग विचारधाराओं के 250 से ज़्यादा बुद्धिजीवियों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सेमिनार में बात करते हुए मशहूर वकील एडवोकेट लारा जेसानी ने बिल के नियमों पर डिटेल में रोशनी डाली और कहा कि देश में हेट क्राइम को सिस्टमैटिक तरीके से बढ़ावा दिया जा रहा है। इस कानून के नियम इतने साफ़ नहीं हैं कि ‘लालच’ की आड़ में पढ़ाई, शादी, चैरिटी, नौकरी और खासकर माइनॉरिटी स्कूलों के राहत कामों को क्रिमिनल बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत शादी के नाम पर या लालच देकर धर्म बदलने पर 10 साल तक की सज़ा और 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, कोई भी तीसरा पक्ष या पुलिस अपनी मर्ज़ी से एफआईआर दर्ज कर सकता है, और सबसे खतरनाक बात यह है कि बेगुनाही साबित करने की ज़िम्मेदारी आरोपी पर डाल दी गई है, जो बिना दोषी साबित हुए नागरिकों को सालों तक जेलों में रखने की एक गंभीर संवैधानिक साज़िश है।
पुलिस रिफॉर्म्स वॉच की डॉल्फी डिसूज़ा ने बताया कि इस सेंसिटिव बिल का ड्राफ्ट सिर्फ़ 72 घंटों के अंदर, बिना किसी पब्लिक कंसल्टेशन के, चुपके से तैयार किया गया था, इसलिए मेजॉरिटी और माइनॉरिटी सभी को एक साथ आकर इस ‘फूट डालो और राज करो’ की पॉलिटिक्स के खिलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए। जमात-ए-इस्लामी हिंद की सेंट्रल एडवाइजरी काउंसिल के मेंबर डॉ. सलीम खान ने कहा कि आस्था और भरोसा दिल का मामला है जिसे कानूनों से नहीं बदला जा सकता। उन्होंने मौलाना उमर गौतम और मौलाना कलीम सिद्दीकी का ज़िक्र करते हुए सरकार की जनविरोधी और गैर-लोकतांत्रिक नीतियों की कड़ी आलोचना की और इसे राजनीतिक नाकामी का सबूत बताया। इससे पहले, एपीसीआर महाराष्ट्र के जनरल सेक्रेटरी शाकिर शेख ने प्रोग्राम को डायरेक्ट करते हुए देश के हालात, बुलडोजर ऑपरेशन, मॉब लिंचिंग और यूसीसी का ज़िक्र किया और कहा कि यह ड्राफ्ट भी इसी चेन की एक कड़ी है। जाने-माने बुद्धिजीवी इरफान इंजीनियर ने साफ किया कि यह कानून सिर्फ मुस्लिम या ईसाई विरोधी ही नहीं, बल्कि पिछड़े वर्गों को दबाने वाला ‘हिंदू विरोधी’ कानून भी है, जिसे सेक्युलरिज्म को खत्म करने के लिए लाया गया है। सेमिनार के आखिर में जमात-ए-इस्लामी हिंद मुंबई के पीआर सेक्रेटरी सैयद शरीफ यूनुस ने सभी मेहमानों और पार्टिसिपेंट्स का शुक्रिया अदा किया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ट्रंप और पीएम मोदी के बीच होगी द्विपक्षीय बातचीत; व्यापार, एआई और वैश्विक सुरक्षा पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को जी7 नेताओं, आउटरीच पार्टनर्स और प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित वर्किंग लंच से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
बैठक के दौरान दोनों नेता आर्थिक विकास, सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), निवेश साझेदारी और विभिन्न वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
इससे पहले मंगलवार को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया।
‘नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को पुनर्स्थापित करना’ विषय पर आयोजित जी7 वर्किंग सत्र से पहले दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की। इस सत्र में जी7 देशों, साझेदार देशों, विश्व बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
व्हाइट हाउस ने शनिवार को कहा था कि यह बैठक उस समय होगी, जब दोनों नेता जी7 नेताओं, आउटरीच पार्टनर्स और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख अधिकारियों के साथ वर्किंग लंच में शामिल होने वाले होंगे।
एवियन पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह विश्व नेताओं से मिलने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने को लेकर उत्साहित हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “जी7 शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांस के एवियन पहुंच गया हूं। विश्व नेताओं के साथ बातचीत करने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए उत्सुक हूं। भारत अधिक टिकाऊ और समृद्ध विश्व के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
भारत को 15 से 17 जून तक आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भारत के साथ-साथ ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विश्व नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। यह जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की 13वीं और प्रधानमंत्री मोदी की लगातार सातवीं भागीदारी होगी।
16 और 17 जून को जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र आयोजित किए गए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी अन्य आमंत्रित देशों के नेताओं के साथ हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, चर्चा का मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और विकास के लिए एकजुटता को मजबूत करने, समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा देने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग पर रहेगा।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “जी7 समिट में भारत की नियमित भागीदारी शांति, सुरक्षा, विकास और पर्यावरण की स्थिरता से जुड़ी ग्लोबल चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका और योगदान को बढ़ती मान्यता को दर्शाती है। साथ ही, जी7 और जी20 व ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने लगातार ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं, चिंताओं और विकास संबंधी आकांक्षाओं को प्रमुखता से उठाया है।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
मस्कट: भारत भेजे गए एमटी सेट्टेबेलो हमले में मारे गए दो भारतीय नाविकों के पार्थिव शरीर

ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को बताया कि जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर हुए हमले में जान गंवाने वाले दो भारतीय समुद्री कर्मियों के पार्थिव शरीर भारत भेज दिए गए हैं।
दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
दूतावास ने कहा, “ आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया, जिन्होंने एमटी सेट्टेबेलो पर हुए दुखद हमले में अपनी जान गंवाई, उनके पार्थिव शरीर भारत वापस भेज दिए गए हैं। इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं।”
मंगलवार को दूतावास ने यह भी बताया था कि जहाज के सभी 21 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित रूप से ओमान से भारत लौट रहे हैं। रवाना होने से पहले भारत के ओमान में राजदूत प्रशांत पीसे ने चालक दल से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया।
ओमान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, पलाऊ ध्वज वाले जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर 30 समुद्री मील दूर सोहर के पास हमला हुआ था। इस घटना के बाद 21 भारतीयों को बचा लिया गया, जबकि 3 नाविकों की मौत हो गई।
दूतावास ने बताया कि ओमान मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया।
इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कूटनीतिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बात कर इस हमले पर विरोध दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर कहा था कि नागरिक जहाजों पर इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया था कि उसने उस जहाज को निशाना बनाया था, क्योंकि वह ईरान से तेल ले जाने और अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप था। सेना के अनुसार कार्रवाई के दौरान जहाज को निष्क्रिय किया गया।
भारत ने इस घटना को गंभीर बताते हुए नागरिक समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की अपील की है।
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