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Sunday,04-October-2026
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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस : माइक्रोन के सेमीकंडक्टर प्लांट को 48 घंटे साप्ताहिक कार्य सीमा के साथ 12 घंटे की शिफ्ट की मंजूरी

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भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में गुजरात की स्थिति अधिक मजबूत बने, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। इस निर्णय के अंतर्गत माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साणंद स्थित प्लांट में 12 घंटे की कार्य शिफ्ट चलाने की मंजूरी दी गई है।

गुजरात में इस प्रकार की यह पहली मंजूरी है। राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग को प्रोत्साहन देकर नए रोजगार पैदा होंगे। इस 12 घंटे की शिफ्ट में कर्मचारियों के लिए सप्ताह में कुल कामकाज का समय 48 घंटे ही रहेगा।

यह मंजूरी ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (ओएसएच) कोड, 2020 के प्रावधानों के तहत दी गई है, जो 21 नवंबर, 2025 से समग्र देश में लागू हुआ है। यह कोड राज्य सरकारों को आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों के साथ कुछ परिस्थितियों में फैक्ट्रियों को निश्चित प्रावधानों से छूट देने का अधिकार देता है, परंतु यह भी सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों के साप्ताहिक कार्य के घंटे निर्धारित सीमा से अधिक न हों।

गुजरात के श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री कुंवरजी बावलिया ने कहा, ”ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (ओएसएच) कोड का मुख्य उद्देश्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ कंप्लायंस को प्रोत्साहन देना है। कोड में सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे के कामकाज का प्रावधान है, लेकिन उपयुक्त सरकार को फैक्ट्रियों के संदर्भ में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। गुजरात सरकार ने राज्य के व्यापक सार्वजनिक हित, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को ध्यान में रखते हुए इस प्रावधान का उपयोग किया है।”

बावलिया ने स्पष्टता करते हुए जोड़ा, “किसी भी औद्योगिक इकाई को कर्मचारियों के लिए 12 घंटे की शिफ्ट रखने के लिए सरकार की पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है। मंजूरी के बिना कोई भी औद्योगिक समूह कर्मचारियों से 12 घंटे की शिफ्ट नहीं करा सकेगा। इस प्रकार का प्रावधान निश्चित उद्योगों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।”

गुजरात भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपना नेतृत्व अधिक मजबूत करने के प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में यह मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अग्रसर बनाने के विजन में सेमीकंडक्टर को रणनीतिक क्षेत्र के रूप में स्थान दिया है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सेमीकंडक्टर क्षेत्र में देश का सबसे आकर्षक निवेश केंद्र बना है, जहां फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन जैसे क्षेत्रों में निरंतर निवेश हो रहा है।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी का साणंद प्लांट कंपनी के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रोजेक्ट के पहले चरण में 5 लाख वर्ग फीट से अधिक क्लीनरूम क्षेत्र शामिल होगा, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-फ्लोर सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट क्लीनरूम में से एक क्लीनरूम होगा। वर्ष 2026 के दौरान यहाँ करोड़ों सेमीकंडक्टर चिप्स की असेंबली एवं टेस्टिंग शुरू होने की अपेक्षा है, जबकि 2027 से उत्पादन क्षमता हर वर्ष सैकड़ों मिलियन चिप्स तक पहुंचने की संभावना है।

सेमीकंडक्टर उत्पादन परंपरागत फैक्ट्रियों से अलग है, क्योंकि यहां अत्यंत नियंत्रित क्लीनरूम परिस्थिति में उत्पादन प्रक्रिया निरंतर चलती है। चिप असेंबली तथा टेस्टिंग के लिए अत्याधुनिक ऑटोमेटेड मशीनें 24 घंटे कार्यरत रहती हैं, जिसके कारण निरंतर उत्पादन बनाए रखना कार्यदक्षता एवं गुणवत्ता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार 12 घंटे की शिफ्ट विश्वभर की सेमीकंडक्टर उत्पादन इकाइयों में स्वीकृत कार्य पद्धति है। लंबी शिफ्ट के कारण शिफ्ट बदलने की संख्या कम होती है, क्लीनरूम में प्रवेश कम होता है, मशीनों का अधिक कार्यक्षम उपयोग होता है और अरबों रुपए के निवेश वाले प्लांट में निरंतर उत्पादन बनाए रखा जा सकता है। साथ ही, कर्मचारी सप्ताह में कम दिन काम करते हैं, जिससे कुल साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे ही रहता है।

राज्य सरकार ने इस मंजूरी के साथ श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए कड़ी शर्तें लागू की हैं। वयस्क कर्मचारी प्रतिदिन अधिकतम 12 घंटे काम कर सकेंगे, परंतु सप्ताह में कुल कामकाज का समय 48 घंटे से अधिक नहीं होगा। शेष दिनों को सवेतन अवकाश माना जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल अपनी स्वैच्छिक लिखित सहमति देने वाले कर्मचारी ही 12 घंटे की शिफ्ट में काम कर सकेंगे। राज्य सरकार ने यह भी निर्धारित किया है कि आराम के अंतराल सहित कुल कार्य समय प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक नहीं होगा।

कंपनी के लिए इस व्यवस्था के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों का अलग रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। साथ ही फैक्ट्रियों के चीफ इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर द्वारा लागू की गईं अतिरिक्त शर्तों का भी पालन करना होगा। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होगा, तो दी गई मंजूरी रद्द कर दी जाएगी और संबंधित संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया ने कहा, ”यह छूट राज्य की औद्योगिक प्रगति को गति देने, आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने, नए रोजगार का सृजन करने और विशेष रूप से राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व वाले सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है।”

सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए विशेष नीति घोषित करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य था। इस नीति के तहत उद्योगों को व्यापक प्रोत्साहन एवं सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके परिणामस्वरूप इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत मंजूर हुए छह बड़े प्रोजेक्ट गुजरात को मिले हैं, जिनके माध्यम से लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इन प्रोजेक्टों से लगभग 50,000 प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की अपेक्षा है, जो भारत के उभरते सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के केन्द्र के रूप में गुजरात की स्थिति को और मजबूत बनाएगा।

राजनीति

इंदौर जल संकट: गायब दस्तावेजों और प्रशासनिक देरी को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

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मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल संकट की न्यायिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और प्रशासनिक स्तर पर हुई लंबी देरी पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार को स्पष्ट रूप से जवाबदेही तय करनी चाहिए।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को इंदौर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि न्यायिक जांच रिपोर्ट ने केवल पानी के दूषित होने पर ही सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि यह भी सामने आया है कि शहर की जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था की योजना कैसे बनाई गई, उसका रखरखाव कैसे हुआ और उसकी निगरानी किस तरह की गई।

सिंघार ने कहा, “महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग रिकॉर्ड आयोग के सामने उपलब्ध नहीं कराए गए। सरकार को बताना चाहिए कि ये रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं थे और इस चूक के लिए किसकी जवाबदेही तय होगी।”

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय आयोग ने भागीरथपुरा में पानी के दूषित होने, लोगों के बीमार पड़ने और मौतों के कारणों के साथ प्रशासनिक एवं तकनीकी खामियों की जांच की थी। आयोग ने अगस्त में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी थी।

कांग्रेस के मुताबिक, रिपोर्ट में पाया गया कि भागीरथपुरा में सीवरेज का पानी पेयजल पाइपलाइनों में प्रवेश कर गया था, जिससे लोगों तक पहुंचने वाला पानी दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त हो गया।

रिपोर्ट में सीवरेज और गंदे पानी की पाइपलाइन से जुड़े कार्यों में हुई देरी की भी जांच की गई। इसमें टेंडर प्रक्रिया, फाइलों की आवाजाही और काम के क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को देखा गया। सिंघार ने कहा कि लेआउट प्लान, ब्लूप्रिंट, डिजाइन ड्रॉइंग और पाइपलाइन अलाइनमेंट मैप जैसे तकनीकी दस्तावेज किसी भी शहरी जल नेटवर्क को समझने और उसके रखरखाव के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे दस्तावेजों का उपलब्ध नहीं होना गंभीर विषय है।

कांग्रेस ने सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी एक फाइल में हुई देरी का मुद्दा भी उठाया। सिंघार ने दावा किया कि यह फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिनों तक लंबित रही। उन्होंने पूछा कि फाइल के निस्तारण में इतनी देरी क्यों हुई।

उन्होंने सवाल किया, “देश के सबसे स्वच्छ शहर में दूषित पेयजल के कारण मौतें कैसे हुईं?” हालांकि, मीडिया रिपोर्टों में उद्धृत जांच के निष्कर्षों के अनुसार, केवल इस आधार पर कि फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए लंबित रही थी, आयोग ने व्यक्तिगत रूप से मेयर की जिम्मेदारी तय नहीं की है। कांग्रेस की ओर से उठाया गया सवाल प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी और उसकी जवाबदेही से संबंधित है।

जांच आयोग ने कुल 36 मौतों की जांच की थी। सिंघार द्वारा उद्धृत रिपोर्ट के विवरण के अनुसार, इनमें 22 मौतों को दूषित पानी से संबंधित माना गया। हालांकि, इस घटना से जुड़ी मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।

सिंघार ने प्रभावित परिवारों और मरीजों के लिए आयोग की सिफारिशों को लागू करने की भी मांग की। आयोग ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये और प्रभावित मरीजों के लिए आर्थिक एवं चिकित्सकीय सहायता की सिफारिश की है।

सिंघार ने कहा, “भागीरथपुरा के लोगों को पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय मिलना चाहिए।” उन्होंने सरकार से पूछा कि आयोग की सिफारिशें कब लागू की जाएंगी और प्रभावित परिवारों को मुआवजा कब जारी किया जाएगा।

भागीरथपुरा जल त्रासदी दिसंबर 2025 में सामने आई थी। उस समय दूषित पानी पीने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग बीमार पड़ गए थे। न्यायिक आयोग ने पानी के नमूनों में ई. कोली और टोटल कोलीफॉर्म समेत बैक्टीरिया पाए जाने की बात कही थी। रिपोर्ट के अनुसार, दूषित पानी के कारण गैस्ट्रोएंटेराइटिस, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी जलजनित बीमारियां हुईं।

जांच में यह भी कहा गया कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को समय पर बदल दिया जाता तो इस त्रासदी को रोका जा सकता था। ऐसे में प्रशासनिक देरी का मुद्दा जांच के प्रमुख पहलुओं में शामिल रहा।

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अपराध

8 लाख कीमत का 41 किलो 400 ग्राम गांजा बरामद, तस्करी के आरोप में युवक गिरफ्तार

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नोएडा के थाना फेस-2 की पुलिस ने अवैध गांजे की बिक्री और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 41 किलो 400 ग्राम अवैध गांजा, गांजा बिक्री से प्राप्त 1,800 रुपए नकद और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस के अनुसार बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपए बताई गई है। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 को थाना फेस-2 पुलिस की टीम इलाके में चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम को शमशान घाट भंगेल के पास गंदे नाले की पटरी पर एक संदिग्ध व्यक्ति के मौजूद होने की जानकारी मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की और संदिग्ध गतिविधियां मिलने पर युवक को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।

पुलिस ने आरोपी की पहचान प्रिन्स कुमार साहू पुत्र बैजू प्रसाद साहू, उम्र करीब 28 वर्ष, के रूप में की है। आरोपी मूलरूप से ग्राम फिरोजपुर, थाना महरमा, जनपद गोड्डा, झारखंड का रहने वाला बताया गया है। वर्तमान में वह थाना बिसरख क्षेत्र में तिगरी गोल चक्कर के पास किराये के कमरे में रह रहा था।

आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह ट्रेन के माध्यम से बिहार से गांजा सस्ते दामों पर लाता था और नोएडा में उसे महंगे दामों पर बेचता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर गांजा तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा कहां से लाया गया था और इसे नोएडा-एनसीआर में किन लोगों को सप्लाई किया जाना था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से टीवीएस स्पोर्ट्स मोटरसाइकिल बरामद की है।

पुलिस के अनुसार इसी वाहन का इस्तेमाल गांजे की तस्करी में किया जाता था। वाहन को सीज कर दिया गया है। इसके अलावा गांजा बिक्री से प्राप्त 1,800 रुपए नकद भी बरामद किए गए हैं। बरामदगी के संबंध में थाना फेस-2 में आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही आरोपी से पूछताछ के आधार पर तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई में बरामद 41 किलो 400 ग्राम गांजे की अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपए है। भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद होने के बाद पुलिस अब इसके सप्लाई नेटवर्क और इसके पीछे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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अपराध

चिकबल्लापुर के रेजिडेंशियल स्कूल में 15 साल की छात्रा का यौन उत्पीड़न, प्रिंसिपल के खिलाफ मामला दर्ज

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कर्नाटक के चिकबल्लापुर जिले में सरकारी मोरारजी देसाई मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल के 9वीं कक्षा की 15 वर्षीय छात्रा के साथ स्कूल के प्रिंसिपल ईश्वर रेड्डी ने कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया।

शिडलघट्टा तालुका के गोरलुम्मनहल्ली गांव में स्थित स्कूल में हुई कथित घटना के सिलसिले में प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

छात्रा के बयान के मुताबिक, यह घटना कथित तौर पर 26 सितंबर को दोपहर 2:30 बजे स्कूल के मेडिसिन रूम में हुई थी।

छात्रा ने बताया कि वह छठी कक्षा के एक बीमार छात्र को दवा देने गई थी, तभी प्रिंसिपल ने उसे कमरे में बुलाया, गलत व्यवहार किया और यौन उत्पीड़न किया। उसने यह भी आरोप लगाया कि प्रिंसिपल ने उसे घटना के बारे में किसी को न बताने की धमकी दी थी।

खबरों के मुताबिक, छात्रा ने अपने सहपाठियों को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद यह जानकारी शिक्षकों और उसके माता-पिता तक पहुंची।

एफआईआर के अनुसार, छात्रा के माता-पिता 27 सितंबर को स्कूल गए, घटना के बारे में पता चला और फिर वे पुलिस के पास गए। 28 सितंबर को चिक्कबल्लापुर में बाल कल्याण अधिकारियों की मौजूदगी में छात्रा का बयान दर्ज किया गया।

शिडलघट्टा तालुक की डिब्बुराहल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कथित यौन उत्पीड़न की जांच शुरू कर दी है।

अपनी शिकायत में 15 साल की पीड़िता ने कहा, “मैं मोरारजी देसाई मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में नौवीं कक्षा की छात्रा हूं। मैं स्कूल में पढ़ने वाले 250 छात्रों में से एक हूं। स्कूल के प्रिंसिपल ने शनिवार (26 सितंबर) को और इस सप्ताह भी मेरे साथ गलत व्यवहार किया। उन्होंने मुझे किस किया, मेरी कमर पर हाथ रखा और मुझे गलत तरीके से छुआ। उन्होंने मेरा मुंह भी बंद कर दिया था।”

उसने बताया, “ये यादें मेरे दिमाग में छप गई हैं। ऐसी स्थिति में, किसी को भी उस अनुभव से नहीं गुजरना चाहिए, जिससे मैं गुजरी हूं। किसी के साथ भी वह अन्याय नहीं होना चाहिए जिसका मैंने सामना किया। कृपया मुझे न्याय दिलाने में मदद करें।” इस मामले में और जानकारी अभी आनी बाकी है।

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