राजनीति
केंद्रीय मंत्री शेखावत भी कोरोना पॉजिटिव, अस्पताल में होंगे भर्ती
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी कोरोना पॉजिटिव हुए हैं। वह अस्पताल में भर्ती होंगे। करीबी सूत्रों के मुताबिक डॉक्टरों की सलाह पर वह गुरुग्राम के मेदांता में इलाज कराएंगे।
दरअसल, शेखावत को कुछ समय से अस्वस्थ महसूस हो रहे थे। जिस पर उन्होंने गुरुवार को कोरोना टेस्ट कराया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
डॉक्टरों की सलाह के बाद गजेंद्र सिंह शेखावत ने अस्पताल में भर्ती होने का निर्णय लिया।
करीबी सूत्रों ने बताया कि उन्हें गुरुग्राम के मेदांता ले जाया गया है।
शेखावत ने संपर्क में आने वाले सभी लोगों से खुद को आइसोलेट कर कोरोना की जांच कराने की अपील की है ताकि उनके संपर्क में आने पर अगर कोई वायरस की चपेट में आया तो पता चल सके।
केंद्रीय मंत्री के पॉजिटिव होने के बाद स्टाफ के लोग जांच कराएंगे।
इससे पूर्व कुछ और केंद्रीय मंत्री भी कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। कोरोना पॉजिटिव हुए गृहमंत्री अमित शाह अब स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अर्जुन राम मेघवाल का इलाज चल रहा है।
राजनीति
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता के बीच टीएमसी की पकड़ कमजोर हुई।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती मतगणना रुझानों से संकेत मिलता है कि मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा अब पहले के चुनावों की तरह नहीं रहा है। 293 सीटों में से 43 ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है और वहां चुनावी माहौल में बदलाव दिख रहा है।
शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, टीएमसी और उसके सहयोगी दल इन 30 सीटों पर आगे चल रहे हैं, जो पहले के प्रदर्शन की तुलना में 12 की गिरावट है। भारतीय जनता पार्टी नौ सीटों पर आगे है, जबकि अन्य दलों की चार-चार सीटें हैं, जो मामूली बढ़त दर्शाती हैं।अतीत के प्रभुत्व से एक विचलन
मौजूदा रुझान 2021 के विधानसभा चुनावों से बिलकुल अलग है, जब टीएमसी ने मुस्लिम बहुल 44 सीटों में से 43 पर जीत हासिल की थी और लगभग 58 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त किया था। भाजपा को उस समय 21 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर मिलने के बावजूद इनमें से किसी भी सीट पर जीत हासिल करने में सफलता नहीं मिली थी। वामपंथी और अन्य दलों का प्रभाव सीमित ही रहा था।
मौजूदा रुझान इन निर्वाचन क्षेत्रों में वोटों के विखंडन का संकेत देते हैं, जिससे पता चलता है कि पहले से समेकित समर्थन में आंतरिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
मतगणना जारी रहने के बीच नेताओं की प्रतिक्रिया
शुरुआती रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि हिंदू मतदाताओं में एकजुटता दिख रही है, जबकि मुस्लिम मतदाता इस बार अधिक विभाजित नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने कुछ ऐसे बूथों पर भी अपनी पकड़ मजबूत की है जहां पहले उसे संघर्ष करना पड़ता था।
अधिकारी ने आगे कहा कि मतगणना के शुरुआती दौर के बाद कई निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को श्रेय देते हुए पार्टी के सरकार बनाने का विश्वास व्यक्त किया।
भवानीपुर प्रतियोगिता ने खींचा ध्यान
भाबानीपुर के बारे में बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि शुरुआती दौर के मतदान में अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों में उन्हें नुकसान हुआ था, लेकिन बाद के दौर के मतदान में उनके पक्ष में रुझान बदल गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पीछे चल रही हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
मतगणना अभी जारी है, इसलिए राजनीतिक विश्लेषक सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, शुरुआती रुझान पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित करते हैं, जहां मतदाताओं का व्यवहार पिछले चुनावों की तुलना में अधिक भिन्न प्रतीत होता है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी जारी, पीएमआई अप्रैल में 54.7 रहा

भारत में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अप्रैल में 54.7 रहा है, जो कि मार्च में 53.9 था। इसकी वजह नए ऑर्डर (निर्यात सहित) और रोजगार के अवसर में वृद्धि थी। यह जानकारी एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई डेटा में सोमवार को दी गई।
अप्रैल का डेटा दिखाता है कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और नए बिजनेस में तेजी जारी है। वहीं, निर्यात ब्राइट स्पॉट बना हुआ है और वृद्धि दर पिछले सितंबर से सबसे तेज रही है।
रिपोर्ट में कंपनियों ने संकेत दिया है कि मध्य पूर्व में तनाव के कारण महंगाई के दबाव में इजाफा हुआ है। इनपुट और आउटपुट दोनों में क्रमश: 44 और छह महीनों में सबसे तेज वृद्धि हुई है।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मध्य पूर्व संघर्ष के प्रभाव अधिक स्पष्ट होते जा रहे हैं, विशेष रूप से महंगाई के रूप में, जिससे इनपुट लागत अगस्त 2022 के बाद से सबसे तेज गति से बढ़ी है, और आउटपुट कीमतें छह महीनों में सबसे तेज दर से बढ़ी हैं।”
मार्च में 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 होने के बावजूद, मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) – जो नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ता वितरण समय और खरीद के स्टॉक के उपायों से प्राप्त समग्र स्थितियों का एक सूचक है – ने लगभग चार वर्षों में समग्र परिचालन स्थितियों में दूसरी सबसे धीमी सुधार का संकेत दिया।
सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने संकेत दिया कि विज्ञापन और मांग में स्थिरता ने बिक्री और उत्पादन को समर्थन दिया, लेकिन प्रतिस्पर्धी माहौल, मध्य पूर्व में युद्ध और ग्राहकों द्वारा लंबित कोटेशन को मंजूरी देने में अनिच्छा के कारण विकास बाधित हुआ।
भारतीय निर्माता विकास की संभावनाओं को लेकर आशावादी बने रहे। सकारात्मक भावना का समग्र स्तर मार्च से थोड़ा कम हुआ, हालांकि यह नवंबर 2024 के बाद से अपने दूसरे उच्चतम स्तर पर था।
राजनीति
शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा-सरकारी मशीनरी का ‘सायरन’ खामोश

शिवसेना के उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने सोमवार को महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ केंद्र सरकार ने देशभर में मोबाइल फोन पर इमरजेंसी सायरन टेस्ट करके लोगों को आपदा की चेतावनी देने की कोशिश की, वहीं महाराष्ट्र में जब महिलाओं और छोटी बच्चियों के साथ रोजाना बलात्कार और अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं, तो सरकारी मशीनरी का ‘सायरन’ खामोश है।
दरअसल, शिवसेना गुट के मुखपत्र ‘सामना’ में सोमवार को छपे एक संपादकीय में पुणे जिले के भोर तहसील के नसरापुर में चार साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या की घटना का जिक्र किया गया है। इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में भारी गुस्सा फैल गया। गुस्साए लोग बच्ची का शव सड़क पर लेकर आए और आरोपी को तुरंत उनके हवाले करने की मांग करने लगे ताकि वे खुद न्याय कर सकें, लेकिन इसके बजाय पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया।
लेख में कहा गया है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने ‘मिसिंग लिंक’ टनल प्रोजेक्ट के उद्घाटन के दौरान लगे ट्रैफिक जाम के लिए जनता से माफी मांगी। नसरापुर, चाकन और नागपुर में छोटी बच्चियों के साथ हुए अमानवीय यौन अत्याचार गृह विभाग की विफलता को दर्शाते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री को राज्य की सभी छोटी बच्चियों और उनकी माताओं से माफी मांगनी चाहिए।
संपादकीय में कहा गया है कि भोर तालुका के नसरापुर गांव में, चार साल की एक बच्ची से बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई। पुणे में अत्याचार और हत्या की घटनाएं चिंताजनक रूप से तेजी से बढ़ रही हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री के अपने शहर नागपुर में भी अत्याचार का शिकार हुई महिलाओं की दिल दहला देने वाली चीखें सुनी जा सकती हैं। सांगली में भी इसी तरह के अत्याचार के मामले सामने आए हैं। महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों को लेकर सरकार निष्क्रिय बनी हुई है और अपराधियों को अब कानून का कोई डर नहीं रहा।
आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री फडणवीस राज्य के गृह मंत्री के तौर पर पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। वह राज्य की कानून-व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय दूसरे राज्यों में राजनीतिक प्रचार में व्यस्त रहे। इसमें पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु के दौरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि महाराष्ट्र की छवि चमकाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। राज्य के भीतर भ्रष्टाचार और अपराध बढ़ रहे हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुकी है।
लेख में भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा गया है कि जब पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में भाजपा ने जोरदार विरोध किया था, तब महाराष्ट्र में हो रही घटनाओं पर वे राजनीति न करने की सलाह दे रहे हैं यानी जहां विपक्ष शासित राज्य होता है, वहां विरोध तेज होता है, लेकिन अपने राज्य में ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साध ली जाती है।
संपादकीय में यह भी सवाल उठाया गया है कि सरकार बार-बार फास्ट ट्रैक कोर्ट और फांसी की सजा की बात करती है, लेकिन वास्तव में कितने दोषियों को सजा मिली है। जनता का गुस्सा बढ़ रहा है और लोग पूछ रहे हैं कि सिर्फ बयानबाजी से क्या बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी?
लेख में सरकार की ‘लड़की बहन योजना’ पर भी तंज कसा गया है, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता दी जाती है। सवाल उठाया गया है कि क्या सिर्फ 1,500 रुपए देने से सरकार को उन महिलाओं की बेटियों की सुरक्षा की अनदेखी करने का लाइसेंस मिल जाता है?”
संपादकीय में कहा गया है कि अगर किसी को इन घटनाओं का असली जिम्मेदार ठहराना हो तो वह गृह विभाग और राज्य सरकार की व्यवस्था है, जो कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है।
लेख के अनुसार यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवता और महिलाओं की गरिमा का सवाल है। सरकार से मांग की गई है कि वह सिर्फ ट्रैफिक या प्रशासनिक मुद्दों पर माफी मांगने के बजाय महाराष्ट्र की महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में असफल रहने के लिए सार्वजनिक माफी मांगे।
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