अंतरराष्ट्रीय समाचार
ऐसा लगता है कि तालिबान के हक्कानी से टीटीपी का उठ गया है भरोसा : रिपोर्ट

ऐसा लगता है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का अफगान तालिबान के ‘हक्कानी गुट’ से भरोसा उठ गया है। अब वह खुद को अफगान रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब के नेतृत्व में प्रतिद्वंद्वी कंधारी गुट तालिबान के साथ जोड़ना चाहता है। । द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्रालय द्वारा कहा गया कि उप विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार तालिबान अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए काबुल में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी।
अफवाहें हैं कि अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी द्वारा टीटीपी को भी काबुल में आमंत्रित किया गया था, लेकिन संगठन ने निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया कि कुछ अफगान मीडिया रिपोटरें ने यह भी दावा किया कि मुल्ला याकूब ने काबुल में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया।
हालांकि रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस तरह की बैठक की योजना से इनकार किया।
इस बात की संभावना है कि खार और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी बातचीत में दबाव की रणनीति के रूप में इसका इस्तेमाल करने के लिए काबुल शासन द्वारा टीटीपी के कदम को कोरियोग्राफ किया गया हो, क्योंकि उनका मानना है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने में लगा है।
जनरल कमर जावेद बाजवा द्वारा अपने उत्तराधिकारी जनरल असीम मुनीर को सेना की कमान सौंपे जाने से एक दिन पहले टीटीपी ने संघर्षविराम टूटने की घोषणा की।
यह नए सेना प्रमुख के लिए बातचीत की प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने के लिए एक अनुस्मारक हो सकता है, जो लेफ्टिनेंट जनरल के स्थानांतरण के बाद से रुकी हुई है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक रूप से अस्थिर और आर्थिक रूप से लगभग दिवालिया देश में जनरल मुनीर को बहुत सारी चुनौतियां विरासत में मिली हैं।
एक संभावना यह भी हो सकती है कि अफगानिस्तान में हाल के महीनों में अपनी कुछ बड़े हथियारों के नुकसान के बाद टीटीपी अफगान तालिबान से अलग होना चाहता है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया, अगर ऐसा है तो हम अगली बार टीटीपी के इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकी समूह खुरासान की ओर बढ़ने की उम्मीद कर सकते हैं और अगर ऐसा होता है, तो तालिबान शासन का सबसे बुरा सपना सच हो जाएगा।
टीटीपी जानता है कि आईएस के साथ उसका गठजोड़ तालिबान शासन के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा कर सकता है और वह इसे किसी भी कीमत पर रोकने की कोशिश करेगा। टीटीपी ने इस्लामाबाद को यह संदेश देने के लिए खार के काबुल आगमन के साथ संघर्ष विराम की अपनी घोषणा को समयबद्ध किया कि तालिबान अब अपनी ओर से बात बातचीत नहीं करेगा। या यह काबुल के लिए टीटीपी के साथ समझौते के लिए पाकिस्तानी पक्ष पर दबाव बनाने का संदेश भी हो सकता है।
इसके नवीनतम कदम का कारण जो भी हो, टीटीपी द्वारा हिंसा छोड़ने की संभावना बहुत कम है। विशेष रूप से अगस्त 2021 में तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने के बाद। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक उसे उम्मीद है कि वह पाकिस्तान सरकार को भी घुटनों पर ला सकता है।
यही कारण था कि संगठन ने काबुल के पतन के बाद पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में हमले तेज कर दिए। यह केवल सरकार के साथ जुड़ने के लिए सहमत हुआ, क्योंकि इस प्रक्रिया में हक्कानी द्वारा मध्यस्थता की गई थी, जिनके साथ संगठन ने तालिबान विद्रोह के दौरान घनिष्ठ वैचारिक संबंध और संगठनात्मक संबंधों का आनंद लिया था।
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कनाडा में भारतीय नागरिक की चाकू घोंपकर हत्या

ओटावा, 5 अप्रैल। कनाडा के ओटावा के निकट रॉकलैंड इलाके में एक भारतीय नागरिक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की। कनाडा में भारतीय दूतावास ने शनिवार सुबह घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है।
भारतीय दूतावास ने एक बयान जारी कर घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवार को सहायता देने का भी ऐलान किया।
दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “ओटावा के निकट रॉकलैंड में चाकू घोंपने से एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत से हम बहुत दुखी हैं। पुलिस ने बताया है कि एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है। हम शोक संतप्त परिजनों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए स्थानीय सामुदायिक संघ के माध्यम से निकट संपर्क में हैं।”
हालांकि चाकू मारने की घटना का विवरण अभी भी अस्पष्ट है, लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि यह घटना सुबह-सुबह क्लेरेंस-रॉकलैंड क्षेत्र में हुई।
अधिकारियों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है कि क्या यह वही मामला है जिसका उल्लेख भारतीय दूतावास ने किया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हत्या की चल रही जांच के तहत ओन्टारियो प्रांतीय पुलिस (ओपीपी) ने क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है।
पुलिस ने रॉकलैंड निवासियों को भी चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्हें सलाह दी गई है कि वे कानून प्रवर्तन की गतिविधियों में वृद्धि की अपेक्षा करें, जबकि अधिकारी अपराध से जुड़ी परिस्थितियों की जांच जारी रखेंगे।
कनाडा स्थित दूतावास ने जनता को आश्वासन दिया कि वह इस कठिन समय में पीड़ित परिवार को सभी आवश्यक सहायता प्रदान कर रहा है।
चाकू घोंपने के पीछे का मकसद अभी भी स्पष्ट नहीं है और जांच जारी है। दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने का वादा किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परिवार को उनकी ज़रूरत के मुताबिक सहायता मिले और मामले से जुड़ी आगे की कार्रवाई में मदद मिले।
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प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ाने के लिए यूपीआई लिंक का दिया प्रस्ताव

बैंकॉक, 4 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत के यूपीआई को बिम्सटेक देशों के पेमेंट सिस्टम से जोड़ने का प्रस्ताव दिया। इससे ग्रुप के सदस्य देशों के बीच व्यापार और पर्यटन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, सात देशों (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड) के समूह की छठी समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने स्थानीय करेंसी में रीजन में व्यापार बढ़ाने के लिए बिम्सटेक चेम्बर ऑफ कॉमर्स स्थापित करने का प्रस्ताव दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 28 मार्च को म्यांमार और थाईलैंड में आए
बिम्सटेक समिट में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समृद्धि, सुरक्षा और समावेशिता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए बैंकॉक विजन 2030 को अपनाया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक समूह के दायरे और क्षमताओं को लगातार बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, गृह मंत्रियों के तंत्र को संस्थागत बनाने का स्वागत किया और भारत में पहली बैठक आयोजित करने की पेशकश की।
उन्होंने आगे कहा कि यह मंच साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा खतरों, आतंकवाद, साथ ही नशीली दवाओं और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस संबंध में, मैं 2025 में इसकी पहली बैठक भारत में आयोजित करने का प्रस्ताव करता हूं।
थाईलैंड द्वारा आयोजित बिम्सटेक समिट में भारत, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और भूटान के शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि एक स्वतंत्र, खुला, सुरक्षित और संरक्षित हिंद महासागर हमारी साझा प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “आज साइन हुए समुद्री परिवहन समझौते से व्यापारिक नौवहन और माल परिवहन में सहयोग मजबूत होगा और व्यापार में तेजी आएगी।”
विनाशकारी भूकंप में हुई जानमाल की हानि पर अपनी संवेदना व्यक्त की और आपदा की तैयारी, राहत और पुनर्वास पर सहयोग के लिए भारत में बिम्सटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में एक सस्टेनेबल मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट सेंटर की स्थापना की भी बात की। उन्होंने कहा, “यह केंद्र समुद्री नीतियों में क्षमता निर्माण, अनुसंधान, नवाचार और समन्वय पर ध्यान केंद्रित करेगा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को भी बढ़ावा देगा।”
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के वरिष्ठ जनरल से की बात, कहा- मुश्किल वक्त में भारत साथ खड़ा है

नई दिल्ली, 29 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की। उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है।
एक्स पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा, “म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की। विनाशकारी भूकंप में हुई मौतों पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। एक करीबी दोस्त और पड़ोसी के रूप में, भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, खोज और बचाव दल को प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजा जा रहा है।”
म्यांमार और पड़ोसी थाईलैंड में शुक्रवार को उच्च तीव्रता वाला भूकंप आया, जिससे इमारतें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे नष्ट हो गए। म्यांमार में कम से कम 1,002 लोगों की मौत हुई।
भारत ने शनिवार को म्यांमार को 15 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा कि ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के हिस्से के रूप में, भारत ने शुक्रवार के भीषण भूकंप से प्रभावित म्यांमार के लोगों की सहायता के लिए पहले प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में काम किया। टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, भोजन के पैकेट, स्वच्छता किट, जनरेटर और जरूरी दवाओं सहित 15 टन राहत सामग्री की हमारी पहली खेप यांगून पहुंच गई है।”
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विनाशकारी भूकंप पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप के बाद की स्थिति से चिंतित हूं। सभी की सुरक्षा और खुशहाली के लिए प्रार्थना करता हूं। भारत हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। इस संबंध में, हमने अपने अधिकारियों से तैयार रहने को कहा है। साथ ही विदेश मंत्रालय से म्यांमार और थाईलैंड की सरकारों के साथ संपर्क में रहने को कहा है।”
म्यांमार में शुक्रवार दोपहर को 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, सागाइंग के पास आए इस भूकंप के बाद 2.8 से 7.5 तीव्रता के 12 झटके महसूस किए गए, जिससे प्रभावित इलाकों में हालात और खराब हो गए। म्यांमार के राज्य प्रशासन परिषद की सूचना टीम ने जानकारी दी है कि भूकंप में 1,002 लोग मारे गए, 2,376 लोग घायल हुए और 30 लोग अब भी लापता हैं।
म्यांमार के नेता वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समुदायों से मानवीय सहायता की अपील की है।
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