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बिलावल भुट्टो ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ‘सीधी कार्रवाई’ की दी चेतावनी

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Bilawal Bhutto

न्यूयॉर्क , 17 दिसम्बर : पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) या अन्य आतंकवादी समूहों द्वारा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सीधी कार्रवाई की चेतावनी दी है। जियो न्यूज ने बताया कि मंत्री ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए आतंकवादी हमले की आठवीं बरसी पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।

उन्होंने बताया, “पाकिस्तान टीटीपी या बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे अन्य आतंकवादी समूहों द्वारा इस तरह के सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। हम उनके खिलाफ सीधी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखते है।”

गुरुवार को अफगान सीमा पार से की गई गोलीबारी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। चमन में अफगान बलों द्वारा गोलाबारी का सहारा लेने के बाद कम से कम सात लोगों की जान चली गई और 16 अन्य घायल हो गए, जिसके चार दिन बाद यह घटना हुई।

कार्यक्रम का आयोजन पाकिस्तान ने आतंकवाद के पीड़ितों की याद अभियान के हिस्से के रूप में आयोजित किया था।

कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश, पीड़ित, विशेषज्ञ, शिक्षाविद, नागरिक समाज संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधिय शामिल हुए।

अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने कहा कि उस हमले में 132 बच्चे और स्कूल के आठ शिक्षक और कर्मचारी मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे।

उन्होंने कहा कि हमले का दावा तथाकथित टीटीपी ने किया था, जो सुरक्षा परिषद और कई सदस्य देशों द्वारा आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध है।

बिलावल ने कहा, यह आतंकवादी हमला विशेष रूप से जघन्य था क्योंकि आतंकवादियों का स्पष्ट उद्देश्य बच्चों को मारना था। इस अर्थ में, यह पाकिस्तान के लोगों के मनोबल को गंभीर झटका देने के लिए लक्षित हमला था।

उन्होंने सभा को बताया कि इसके बजाय, एपीएस नरसंहार के सदमे ने पाकिस्तानी राष्ट्र को लामबंद कर दिया और उसे सभी को खत्म करने के लिए प्रेरित किया। जियो न्यूज ने बताया कि टीटीपी और संबद्ध आतंकवादी समूहों की सीमाओं को साफ करने के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए गए थे।

हालांकि, बिलावल ने कहा कि दुर्भाग्य से टीटीपी और कुछ अन्य आतंकवादी समूहों को सुरक्षित पनाहगाह मिल गई और इससे भी अधिक लगातार पाकिस्तान के सैन्य और नागरिक ठिकानों के खिलाफ हमले किए गए हैं।

उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के पास टीटीपी को प्रदान किए गए वित्तीय और संगठनात्मक समर्थन और निर्देश के ठोस सबूत हैं।

हमने महासचिव और सुरक्षा परिषद के साथ एक व्यापक डोजियर साझा किया है, जिसमें टीटीपी और पाकिस्तान के खिलाफ सक्रिय अन्य आतंकवादी समूहों को इस तरह के बाहरी समर्थन के ठोस सबूत हैं।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

अधिकार सुरक्षित रहे तो ईरान युद्ध खत्म करने को तैयार: राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि उनका देश अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ते अपनाने को तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के अधिकारों की सुरक्षा पर भी जोर दिया है।

ईरानी राष्ट्रपति के दफ्तर की वेबसाइट के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बुधवार (लोकल टाइम) को फोन पर बातचीत के दौरान पेजेश्कियन ने अमेरिका पर गहरा भरोसा नहीं दिखाया।

उन्होंने हाल की दुश्मनी भरी कार्रवाइयों का जिक्र किया, जिसमें द्विपक्षीय बातचीत के दौरान ईरान पर दो हमले भी शामिल हैं। ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका की ओर से की गई इस कार्रवाई को ईरान की पीठ में छुरा घोंपना बताया।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच यह फोन पर बातचीत तब हुई, जब एक्सियोस ने रिपोर्ट दी कि अमेरिका और ईरान लड़ाई खत्म करने के लिए एक पेज के मेमो पर काम कर रहे हैं।

इसमें कहा गया है कि एक संभावित डील में ईरान न्यूक्लियर संवर्धन पर रोक लगाने का वादा करेगा और अमेरिकी प्रतिबंध हटाने पर सहमत होगा। डील के तहत दोनों पक्ष होर्मुज स्ट्रेट से ट्रांजिट पर लगी रोक हटा देंगे।

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 40 दिनों की लड़ाई के बाद 8 अप्रैल को दो हफ्ते के लिए सीजफायर हुआ था। यह लड़ाई 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुई थी।

सीजफायर के बाद, ईरान और अमेरिका ने 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता की, लेकिन इस बातचीत का कोई हल नहीं निकला था।

पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों ने लड़ाई खत्म करने के लिए कई प्रस्तावित प्लान शेयर किए हैं, जिनमें से सबसे नए प्लान का ईरान अभी समीक्षा कर रहा है। इसके अलावा, ईरान ने कहा कि उसने अमेरिका के साथ कोई नया लिखित संदेश एक्सचेंज नहीं किया है।

अर्ध सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने हाल की मीडिया रिपोर्ट्स को मनगढ़ंत बताया और कहा कि उन्हें जमीनी हालात दिखाने के बजाय ग्लोबल मार्केट पर असर डालने और तेल की कीमतें कम करने के लिए डिजाइन किया गया था।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में बातचीत के लिए तैयार: राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इराक के प्रधानमंत्री-नामित अली अल-जैदी के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान पेजेशकियान ने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह किसी भी दबाव के आगे झुकेगा नहीं।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, एक आधिकारिक बयान में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा, “हमारी समस्या यह है कि एक ओर अमेरिका देश पर दबाव की नीति अपना रहा है और दूसरी ओर वह चाहता है कि ईरान बातचीत की मेज पर आए और आखिरकार उसकी एकतरफा मांगों के सामने आत्मसमर्पण कर दे। लेकिन यह असंभव है।”

उन्होंने कहा कि ईरान मूल रूप से युद्ध और असुरक्षा को किसी भी तरह से उचित विकल्प नहीं मानता। इसके साथ ही, पेजेशकियान ने कहा कि ईरान को परमाणु तकनीक से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिका ऐसे व्यवहार कर रहा है जैसे ईरान को परमाणु उद्योग रखने का अधिकार ही नहीं है। वह अत्यधिक मांगें सामने रखकर देश पर अतिरिक्त दबाव डालता है।”

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने आगे कहा कि पिछली सभी वार्ताओं में ईरान पूरी तरह तैयार था कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैश्विक निगरानी के तहत जो भी आवश्यक हो, वह सब कुछ उपलब्ध कराए ताकि उसके परमाणु गतिविधियों के शांतिपूर्ण स्वरूप को सुनिश्चित किया जा सके।

दूसरी ओर, अल-जैदी ने इराक की ओर से ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने की तत्परता जताई, ताकि क्षेत्रीय संकटों को कम किया जा सके। अल-जैदी के मीडिया कार्यालय के एक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने भविष्य में आधिकारिक यात्राओं के आदान-प्रदान पर भी सहमति जताई, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया जा सके।

बता दें कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे, जिसमें तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडरों और नागरिकों की मौत हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ, जिसके बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई, लेकिन वह बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी। फिलहाल, अमेरिका और ईरान लगातार समझौते के तहत युद्धविराम को जारी रखने की कोशिशों में जुटे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात, हासिल किया परिचय पत्र

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चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से अपने परिचय पत्र प्राप्त किए हैं। चीन में भारतीय दूतावास ने इसकी जानकारी दी। मार्च में 1992 बैच के आईएफएस अधिकारी दोराईस्वामी को चीन में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया था।

चीन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विक्रम दोराईस्वामी को चीन में राजदूत के तौर पर उनके असाइनमेंट के लिए भारत की राष्ट्रपति से क्रेडेंशियल्स मिले।” 1992 बैच के आईएफएस अधिकारी विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के मुताबिक उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर डिग्री ली।

1992-1993 में नई दिल्ली में अपनी इन-सर्विस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, दोराईस्वामी मई 1994 में हांगकांग में भारतीय दूतावास में थर्ड सचिव नियुक्त हुए। उन्होंने हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय के न्यू एशिया येल-इन-एशिया लैंग्वेज स्कूल से चीनी भाषा में डिप्लोमा पूरा किया।

विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी में बताया गया कि विक्रम दोराईस्वामी अभी ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर हैं और उन्हें चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। उम्मीद है कि वह जल्द ही यह काम संभाल लेंगे।

सितंबर 1996 में उन्हें बीजिंग में भारतीय दूतावास में नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने लगभग चार साल तक जिम्मेदारी संभाली। फिर 2000 में नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में लौटने पर दोराईस्वामी ने डिप्टी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल (ऑफिशियल) नियुक्त की भूमिका निभाई। दो साल बाद उन्हें प्रधानमंत्री के ऑफिस में प्रमोट किया गया। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी सचिव के तौर पर काम किया।

2006 में दोराईस्वामी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में राजनीतिक सलाहकार के तौर पर और अक्टूबर 2009 में जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में भारत के महावाणिज्य दूत के तौर पर कार्यभार संभाला।

जुलाई 2011 में दोराईस्वामी नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में वापस आ गए, जहां उन्होंने साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (एसएएआरसी) विभाग का नेतृत्व किया। इस दौरान वे मार्च 2012 में नई दिल्ली में चौथे ब्रिक्स समिट के कोऑर्डिनेटर भी थे।

फिर अक्टूबर 2012 से अक्टूबर 2014 तक दोराईस्वामी विदेश मंत्रालय के अमेरिकी विभाग में संयुक्त सचिव थे। अप्रैल 2015 में कोरिया में भारत के राजदूत नियुक्त होने से पहले वे अक्टूबर 2014 में उज्बेकिस्तान में भारत के राजदूत बने।

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