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Tuesday,25-August-2026
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विदेशों में चीन को टक्कर देने के लिए निजी क्षेत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा अमेरिका

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वॉशिंगटन, 10 अप्रैल : संयुक्त राज्य अमेरिका को वैश्विक बाजारों में अपने निजी क्षेत्र को अधिक आक्रामक तरीके से उतारना चाहिए ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके। उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ ने वाणिज्यिक कूटनीति को अमेरिकी विदेश नीति की “मुख्य आधारशिला” बताया।

आर्थिक जुड़ाव को भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक वैश्विक स्थिरता दोनों के केंद्र में रखते हुए लैंडाउ ने तर्क दिया कि वाशिंगटन को अपने व्यवसायों को विदेशों में प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर तरीके से सक्रिय करना होगा।

उन्होंने अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल प्रॉस्पेरिटी फोरम में अपने संबोधन में कहा, “हर दिन मैं जिस एक सवाल के साथ उठता हूँ…वह यह है कि हम कैसे सुनिश्चित करें कि अमेरिकी निजी क्षेत्र दुनिया के हर कोने में चीनी संस्थाओं को पछाड़ रहा हो?”

लैंडाउ ने स्वीकार किया कि कई देश अमेरिकी कंपनियों को पसंद करते हैं, लेकिन चीन की निरंतर मौजूदगी और वित्तीय सहायता के कारण अक्सर उसकी ओर रुख करते हैं। उन्होंने कहा, “आप किसी चीज़ को ‘कुछ नहीं’ से नहीं हरा सकते। चीनी यहाँ मौजूद हैं… अमेरिकी निजी क्षेत्र कहाँ है?”

उन्होंने तर्क दिया कि वाशिंगटन को उन बाधाओं को दूर करना होगा-जैसे जोखिम की धारणा, जानकारी की कमी और जटिल नियम जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशों में निवेश से रोकती हैं। उन्होंने कहा, “हम कुछ जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर आंक सकते हैं,” और जोड़ा कि सरकार को कंपनियों की मदद करनी चाहिए ताकि वे “जोखिमों का सही आकलन” कर सकें और “उन्हें कम कर सकें।”

उनके दृष्टिकोण के केंद्र में “तीन स्तंभों” वाली वाणिज्यिक कूटनीति है: निर्यात बाजारों का विस्तार, अमेरिकी निवेश को विदेशों में बढ़ावा देना और अमेरिका में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित करना।

लैंडाउ ने कहा, “समग्र उद्देश्य यह है कि हम अपने देश को अधिक समृद्ध बनाएं” और जोर दिया कि आर्थिक जुड़ाव शून्य-योग खेल नहीं है। पूरी बात यह है कि ऐसे ‘विन-विन’ समाधान खोजे जाएं जो दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाएं।

उन्होंने इस आलोचना को भी खारिज किया कि मजबूत वाणिज्यिक फोकस से अमेरिकी विदेश नीति अत्यधिक लेनदेन आधारित हो जाती है। उन्होंने कहा, “सभी संबंध किसी न किसी पारस्परिक लाभ की भावना पर आधारित होते हैं।”

लैंडाउ ने कहा कि पश्चिमी गोलार्ध अमेरिका की भागीदारी का “स्वाभाविक केंद्र” बना हुआ है, जिसका कारण निकटता और आपूर्ति श्रृंखला का एकीकरण है।

उन्होंने वेनेजुएला को दीर्घकालिक अवसर के रूप में बताया, इसे “बहुत, बहुत समृद्ध देश” कहा, जिसकी अर्थव्यवस्था में तेज गिरावट आई है।

विस्तृत रूप से उन्होंने तर्क दिया कि आर्थिक विकास राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों को स्थिर करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, “आर्थिक समृद्धि लगभग सभी संघर्षों का प्रमुख तत्व है,” और उदाहरण दिए जहाँ निवेश परियोजनाओं ने राजनीतिक विभाजन को कम करने में मदद की।

वैश्विक संघर्षों पर लैंडाउ ने कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में “स्थायी और प्रभावी युद्धविराम” की दिशा में काम कर रहा है और जोड़ा कि वाशिंगटन ने विरोधियों की क्षमताओं को कम करने के अपने सैन्य उद्देश्यों को “प्रभावी रूप से हासिल” कर लिया है।

उन्होंने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी तक पहुंच के महत्व पर भी जोर दिया, इसे “पूरे तंत्र की जीवनरेखा” बताया।

उन्होंने सरकार और व्यवसायों के बीच बेहतर समन्वय की अपील की। उन्होंने कॉर्पोरेट नेताओं के लिए अपने संदेश का वर्णन करते हुए कहा, “मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ जिससे आपका काम आसान हो?”

इस फोरम में नीति निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों के बीच यह बढ़ती सहमति भी सामने आई कि वैश्विक विकास के लिए निजी पूंजी बेहद महत्वपूर्ण होगी। वक्ताओं ने कहा कि उभरते बाजारों में अधिकांश नई नौकरियां सरकारों से नहीं बल्कि निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है।

हाल के वर्षों में अमेरिका ने पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ आर्थिक रणनीति पर अधिक जोर दिया है, खासकर चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के जवाब में। वाशिंगटन ने विदेशी निवेश को समर्थन देने और जोखिम प्रबंधन के लिए यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन जैसे साधनों का विस्तार किया है।

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मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

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तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।

फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।

ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।

इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।

ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”

आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।

इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।

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