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टी20 विश्व कप 2026 में बड़ी टीमों की परीक्षा और छोटी टीमों का बेखौफ अंदाज

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नई दिल्ली, 9 फरवरी : टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत बेहद रोमांचक रही है। 20 टीमों के इस बड़े टूर्नामेंट से पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि बड़ी टीमें कमजोर मानी जाने वाली टीमों के खिलाफ आसानी से जीत दर्ज करेंगी। लेकिन अब तक खेले गए मुकाबलों ने इन धारणाओं को काफी हद तक चुनौती दी है। कई मैच ऐसे रहे हैं, जहां अप्रत्याशित नतीजे बहुत ही कम अंतर से टल गए और बड़ी टीमें किसी तरह शर्मिंदगी से बच पाईं।

क्रिकेट जैसे खेल के किसी भी वैश्विक आयोजन में 20 टीमों की मौजूदगी किसी भी स्तर पर काफी ज्यादा है। विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं में यह तर्क अक्सर दिया जाता रहा है कि कम टीमों के साथ टूर्नामेंट कराने से गुणवत्ता बेहतर रहती है और दर्शकों को उच्च स्तर का क्रिकेट देखने को मिलता है। बड़े प्लेटफॉर्म पर छोटी टीमों को अक्सर दरकिनार भी किया जाता रहा है, लेकिन टी20 विश्व कप 2026 ने अपनी शुरुआत से ही यह दिखा दिया है कि टी20 फॉर्मेट को हल्के में नहीं लिया जा सकता और परिणामों की अनिश्चितता ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।

अगर ग्रुप स्टेज पर नजर डालें, तो हर ग्रुप में एक या दो मजबूत टीमों के साथ कई ऐसी टीमें शामिल हैं जिन्हें कागजों पर कमजोर माना जाता है। भारत के ग्रुप में नामीबिया, नीदरलैंड और अमेरिका जैसी टीमें हैं। ग्रुप बी में श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के साथ जिम्बाब्वे, ओमान और आयरलैंड को रखा गया है। ग्रुप सी में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के साथ इटली, नेपाल और स्कॉटलैंड हैं, जबकि ग्रुप डी में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ अफगानिस्तान, यूएई और कनाडा शामिल हैं। कागजों पर ये मुकाबले एकतरफा लग सकते हैं, लेकिन जब टी20 फॉर्मेट में टीमें मैदान पर उतरती हैं, तो यही मुकाबले रोमांचक और प्रतिस्पर्धी बन जाते हैं।

विश्व कप की शुरुआत ने ही यह संदेश दे दिया था। ओपनिंग मुकाबले में पाकिस्तान को नीदरलैंड जैसी टीम को हराने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। नीदरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 19.5 ओवर में 147 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान की टीम लक्ष्य तक तो पहुंच गई, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब वह मुकाबले में काफी पिछड़ती नजर आ रही थी। अनुभव ने अंत में पाकिस्तान की मदद जरूर की, लेकिन यदि नीदरलैंड की ओर से फील्डिंग में कुछ कम गलतियां हुई होतीं या मौके बेहतर तरीके से भुनाए गए होते, तो नतीजा पलट सकता था।

उसी दिन एक और मुकाबले में मेजबान और डिफेंडिंग चैंपियन भारत की टीम अमेरिका के खिलाफ उतरी। भारत ने यह मैच 29 रनों से जीता, लेकिन स्कोरलाइन इस मुकाबले की असली तस्वीर नहीं दिखाती। वास्तव में भारतीय टीम एक समय गंभीर दबाव में थी। 14 ओवर में भारत का स्कोर 6 विकेट पर 77 रन था और 16.4 ओवर में 118 रन पर सात विकेट गिर चुके थे। ऐसे हालात में सूर्यकुमार यादव की 49 गेंदों पर 84 रनों की कप्तानी पारी निर्णायक साबित हुई, जिसने न केवल भारत को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया बल्कि टीम को शुरुआती शर्मिंदगी से भी बचाया।

रविवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड आमने-सामने थे। अफगानिस्तान भले ही अब क्रिकेट का नया नाम न हो, लेकिन बुनियादी ढांचे, संसाधनों और अनुभव के लिहाज से वह अब भी शीर्ष टीमों से पीछे है। इसके बावजूद अफगान टीम ने जिस तरह का खेल दिखाया, वह काबिले-तारीफ रहा। अफगानिस्तान ने 20 ओवर में छह विकेट पर 182 रन बनाए और न्यूजीलैंड के शुरुआती दो विकेट सिर्फ 14 रन पर गिरा दिए। भारत के खिलाफ हालिया सीरीज से मिले अनुभव और मानसिक मजबूती ने न्यूजीलैंड को इस मुकाबले में वापसी का रास्ता दिखाया, लेकिन अफगान खिलाड़ियों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

रविवार का सबसे चौंकाने वाला मुकाबला नेपाल के नाम रहा, जब उसने इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम को पूरी तरह चुनौती दी। इस मैच का स्कोरबोर्ड ही इसकी कहानी बयान करता है। इंग्लैंड ने 20 ओवर में सात विकेट पर 184 रन बनाए, जिसके जवाब में नेपाल ने छह विकेट पर 180 रन बनाकर मुकाबले को आखिरी ओवर तक खींच लिया। अंतिम ओवर में सैम करन की सधी हुई गेंदबाजी (जिसमें उन्होंने छह गेंदों पर सिर्फ पांच रन दिए) इंग्लैंड के काम आई। वरना नेपाल की झोली में एक ऐतिहासिक जीत जाती दिख रही थी।

इन शुरुआती नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि टी20 विश्व कप 2026 अब सिर्फ बड़ी टीमों का खेल नहीं है। भले ही अनुभव और परिस्थितियों का फायदा अभी भी मजबूत टीमों के पास हो, लेकिन छोटी टीमों के लिए यह विश्व कप जीत और हार से ज्यादा मुकाबले की टक्कर में टिके रहने की लड़ाई बन चुका है। अब तक वे इस कसौटी पर काफी हद तक सफल भी रही हैं। ग्रुप स्टेज आगे बढ़ने के साथ यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि यह विश्व कप कुछ बड़े उलटफेरों का भी गवाह बनेगा।

राजनीति

चाहे मजार हो या कोई और अवैध निर्माण, होगा एक्शन: मुंबई डिप्टी मेयर संजय घाडी

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मुंबई, 13 फरवरी : मुंबई के डिप्टी मेयर संजय घाडी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चाहे मजार हो या दूसरा कोई अवैध निर्माण, प्रशासन को कार्रवाई के लिए आदेश दिया जाएगा। उन्होंने अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों को भी मुंबई से बाहर करने का महायुति का वादा दोहराया है।

समाचार एजेंसी मीडिया से बात करते हुए डिप्टी मेयर संजय घाडी ने कहा, “चाहे वह ‘मजार’ हो या कोई और बिना इजाजत किया गया निर्माण, प्रशासन को उसके खिलाफ एक्शन लेने का आदेश देंगे।”

बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर उन्होंने कहा, “मेयर रितु तावडे ने अपने इंटरव्यू में पहले ही स्पष्ट किया था कि मुंबई शहर में बांग्लादेशी घुसपैठियों को हटाया जाना चाहिए। जल्द मुंबई पुलिस के बड़े अधिकारियों के साथ बीएमसी मेयर के नेतृत्व में बैठक होगी। इसके बाद अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों पर एक्शन लिया जाएगा।”

एआईएमआईएम को लेकर भी संजय घाडी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “किसी को भी अपने धर्म के बारे में इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए, न ही उन्हें जाति के आधार पर भेदभाव करना चाहिए। मुंबई सबकी है और हम सब मुंबई में एक साथ रहते हैं। यहां गुजराती, मराठी और उत्तर भारतीय हैं। सभी ने मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाने में योगदान दिया है। चुनावों के वक्त राजनीति ठीक है, लेकिन सभी को चुनावों के बाद मुंबई में विकास के लिए काम करना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई का मुस्लिम समुदाय पहले कांग्रेस का समर्थन करता था। धीरे-धीरे वे दूर हो गए और लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी के साथ रहने का फैसला किया। उसके बाद इस गठबंधन को भी छोड़ दिया और एआईएमआईएम में शामिल हो गए। नतीजतन, मुस्लिम-बहुल इलाकों से आठ कॉर्पोरेटर चुने गए हैं।

संजय घाडी ने आगे कहा, “हर नेता को हर चुनाव में कड़ी मेहनत करनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी व एकनाथ शिंदे और हमारी शिवसेना, हम सभी ने लगातार काम किया है और इसीलिए हम जीते हैं।”

‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस पर संजय घाडी बोले, “अगर केंद्र सरकार या राज्य सरकार कोई कानून बनाती है व उसे नागरिकों के लिए लागू किया जाता है, तो उसका पालन होना चाहिए। लेकिन हम किसी धर्म का विरोध करके ऐसा नहीं करेंगे। हमें एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए।”

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राजनीति

लोकसभा में विपक्ष ने किया हंगामा, सदन की कार्यवाही 9 मार्च तक के लिए स्थगित

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LOKSABHA

नई दिल्ली, 13 फरवरी : लोकसभा में शुक्रवार को लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके पहले कई मंत्रियों ने अपने मंत्रालय से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए।

शुक्रवार को सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई। विपक्षी सदस्यों ने सदन में नारे लगाए और जेफरी एपस्टीन के साथ कथित संबंध को लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग करते हुए सदन के वेल तक पहुंच गए।

कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कोडीन सिरप से हुई ‘कई मौतों’ पर केंद्र से सवाल किया और मांग की कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों में पीड़ितों को पांच-पांच लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए और दोषियों को पकड़ने के लिए सीबीआई जांच भी कराई जाए।

प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा कफ सिरप के सेवन से हुई मौतों से संबंधित प्रश्न का जवाब देने के लिए खड़े हुए थे। उन्होंने हंगामे के बीच कांग्रेस नेता के सवाल पर जवाब दिया कि कोई मौत ‘कोडीन’ से नहीं हुई है, तो मुआवजा देने का कोई सवाल नहीं उठता है।

इसके बाद भी कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके समेत अन्य विपक्षी सदस्यों ने कार्यवाही को बाधित किया। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने विपक्षी सदस्यों से सदन को चलने देने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा। इसके चलते सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित की गई।

दोपहर बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और कई मंत्रियों ने अपने मंत्रालय से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद संध्या राय ने सदन को 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया।

लोकसभा की कार्यवाही से पहले विपक्षी सदस्यों ने एपस्टीन फाइलों को लेकर संसद परिसर में सदन के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। कथित तौर पर हरदीप सिंह पुरी और जेफरी एपस्टीन के बीच बातचीत को लेकर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरने के लिए मुद्दा उठाया। हालांकि, कांग्रेस के कथित दावों को केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने पूरी तरह से खारिज कर दिया।

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राजनीति

मुंबई: डिप्टी मेयर संजय घाडी बोले- दी जाएगी स्वास्थ्य, शिक्षा व विकास को प्राथमिकता, शिवसेना-यूबीटी पर साधा निशाना

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मुंबई, 13 फरवरी : बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के नवनियुक्त डिप्टी मेयर संजय घाडी ने कहा कि इस कार्यकाल में मुंबई में स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना-यूबीटी पर भी निशाना साधा है।

समाचार एजेंसी मीडिया से बातचीत में संजय घाडी ने कहा कि मुंबई में कूपर अस्पताल और नायर अस्पताल जैसे और हॉस्पिटल बनने चाहिए। छोटे अस्पतालों में भी मरीजों को अच्छी सुविधा मिलनी चाहिए। स्कूलों में भी और सुधार होना चाहिए। पुरानी इमारतों को तोड़कर नया स्ट्रक्चर बनाया जाना चाहिए और निजी स्कूलों से बेहतर पढ़ाई व सुविधाएं छात्रा को मिलनी चाहिए। इन सभी के लिए काम किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि मुंबई शहर में आवारा कुत्तों की समस्या है। इनके कारण लोगों को दिन-रात मुश्किलें हो रही हैं। बीएमसी को इस बारे में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस को लागू करना चाहिए। आने वाले दिनों में इस पर भी काम किया जाएगा।

संजय घाडी ने कहा कि मुंबई को पूरी तरह गड्ढा मुक्त बनाया जाएगा। विजन ऐसा है कि मुंबई शहर की सड़कें सीमेंट कंक्रीट से बनाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री के तौर पर एकनाथ शिंदे के कार्यकाल की बात करते हुए डिप्टी मेयर ने कहा, “मुंबई शहर गड्ढों से मुक्त होगा। इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने (एकनाथ शिंदे) एक पॉलिसी बनाई कि मुंबई की सड़कें सीमेंट कंक्रीट से बनाई जानी चाहिए। आज 80 प्रतिशत रास्ते सीमेंट कंक्रीट से बनाए जा चुके हैं। बाकी 20 प्रतिशत मार्गों को दुरुस्त करने के लिए नया टेंडर निकाला जाएगा।”

शिवसेना-यूबीटी पर निशाना साधते हुए डिप्टी मेयर संजय घाडी ने कहा, “यूबीटी के नेताओं को समझ नहीं आ रहा है कि वे क्या करें और क्या न करें, क्योंकि वे मराठियों और हिंदुत्व के मुद्दे उठाते रहते हैं, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ देते हैं। मुंबई और महाराष्ट्र की जनता देख रही है कि उनकी पार्टी ने क्या किया है। चुनाव से पहले वे क्या कह रहे थे और चुनाव के बाद उन्होंने क्या किया है?” संजय घाडी ने कहा कि यह यूबीटी के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है।

इसी बीच, डिप्टी मेयर संजय घाडी ने मांग उठाई कि कोविड काल के समय उद्धव ठाकरे सरकार में हुए घोटालों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे शिवसेना (यूबीटी) हो या कोई और पार्टी, जो भी घोटाला करेगा उसे नतीजे भुगतने होंगे।

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