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Friday,14-August-2026
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मध्य प्रदेश कांग्रेस में फिर बन रहे टकराव के हालात

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 मध्य प्रदेश में सत्ता से बाहर कांग्रेस में एक बार फिर भीतरी टकराव बढ़ने के आसार बनने लगे हैं क्योंकि हिंदू महासभा के बाबूलाल चौरसिया को पार्टी की सदस्यता दिलाने पर हमलावर हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल को छह साल के लिए निष्कासित किया गया है।

राज्य में कांग्रेस की हमेशा पहचान गुटों के कारण रही है, मगर विधानसभा के चुनाव से पहले पार्टी की कमान कमलनाथ को सौंपे जाने के बाद स्थितियां बदली थी और यही कारण था कि कांग्रेस ने विधानसभा के चुनाव में जीत दर्ज कर सत्ता हासिल की थी। महज 15 माह में ही हालात बिगड़े और कमलनाथ सरकार की विदाई हो गई, ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत कर अपने तत्कालीन 22 विधायकों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया था।

सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस अपनी जमीनी स्थिति को लगातार मजबूत करने में लगी है मगर इसी बीच हिंदू महासभा के नेता बाबूलाल चौरसिया को पार्टी की सदस्यता दिलाई जाने के बाद विरोध में आवाजें उठने लगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, विधायक लक्ष्मण सिंह, पूर्व मंत्री सुभाष कुमार सोजतिया सहित अनेक नेताओं ने चौरसिया को पार्टी में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए। सभी ने गांधी की रीति नीति पर चलने वाली कांग्रेस में गेाडसे समर्थक का अपरोक्ष रूप से विरोध किया था, वही पूर्व मीडिया विभाग के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी मानक अग्रवाल ने सीधे तौर पर कमल नाथ पर हमला बोला। यह मामला अनुशासन समिति में गया और अग्रवाल को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिए गए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानक अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई कर पार्टी ने उन नेताओं को संकेत दिया है जो सवाल उठाते हैं और उन्हें अनुशासन के दायरे में रहने की हिदायत भी दी है, तो वही इससे पार्टी के अंदर असंतोष गहरा जाए तो अचरज नहीं होगा, क्योंकि अग्रवाल की पहचान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी के तौर पर है। ऐसे में दिग्विजय समर्थक और कमलनाथ समर्थक आमने सामने तक हो सकते हैं।

राज्य के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने मानक अग्रवाल को पार्टी से निष्कासित किए जाने पर चुटकी ली है और कहा, “गोडसे मामले में कांग्रेस नेता माणक अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें ‘अमानक’ बना दिया गया। लेकिन इसी मुददे पर मुखर विरोध करने वाले ‘समरथ’ अरुण यादव के खिलाफ कुछ कहने की भी हिम्मत नहीं हुई। लगता है कांग्रेस में अब गोडसे की घुट्टी सख्ती से पिलाई जा रही है।”

पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि मानक अग्रवाल ने सीधे तौर पर पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ पर हमला किया था, उन्हें इससे बचना चाहिए था, वहीं पार्टी को कार्रवाई करने से पहले उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए था। इस कार्रवाई से यही संदेश गया है कि पार्टी ने एकतरफा फैसला लिया है। यह स्थिति पार्टी के लिए अच्छी नहीं है क्योंकि आने वाले समय में नगरी निकाय और पंचायत के चुनाव होने वाले हैं। इससे पार्टी में बिखराव ही बढ़ेगा न कि एकजुटता आएगी।

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राजनीति

राहुल गांधी को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने वीर सावरकर पर टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले को किया रद्द

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को रद्द किया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने शुक्रवार को यह फैसला दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस मामले में राहुल गांधी पर मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी। प्रक्रिया में इस कमी पर ध्यान देते हुए शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही और जारी किए गए समन को रद्द कर दिया।

यह मामला 2022 में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी के महाराष्ट्र में दिए गए विवादित बयान से जुड़ा है। इसमें उन्होंने वीर सावरकर को ‘अंग्रेजों का नौकर’ बताया था। साथ ही, कांग्रेस सांसद ने कहा था कि सावरकर ‘अंग्रेजों से पेंशन लेते थे।’

वकील नृपेंद्र पांडे ने इसको लेकर निकली अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने राहुल गांधी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए (दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत आरोप लगाए थे।

नृपेंद्र पांडे का दावा था कि ये टिप्पणियां समाज में नफरत फैलाने के इरादे से की गई थीं। पांडे की शिकायत में यह भी कहा गया था कि महात्मा गांधी ने पहले सावरकर को देशभक्त माना था। जून 2023 में, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पांडे की शिकायत खारिज कर दी, जिसके बाद वकील नृपेंद्र पांडे ने सेशंस कोर्ट में इसे चुनौती दी।

सेशंस कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और मामले को वापस मजिस्ट्रेट कोर्ट भेज दिया। इसके बाद, दिसंबर 2024 में निचली अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ पहली नजर में आईपीसी 153(ए) और 505 के तहत केस मानते हुए उन्हें समन जारी किया था। इसी मामले में 4 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य, न मानने पर लाइसेंस होगा निलंबित

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महाराष्ट्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाले टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। राज्य सरकार ने महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (थर्ड अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 जारी करते हुए यह बड़ा फैसला लिया है।

नए नियमों के तहत अब इलेक्ट्रॉनिक मीटर से चलने वाली टैक्सियों के अधिकृत चालकों और परमिट धारकों दोनों के लिए मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान होना जरूरी होगा।

सरकार ने महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स नियम, 1989 में संशोधन किया है। नियम 4 में ‘पूर्ववृत्त’ शब्द के बाद ‘और मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान’ जोड़ा गया है। नियम 22 का हाशिया बदलकर ‘इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगी मोटर कैब के चालकों के लिए अतिरिक्त नियम’ कर दिया गया है।

सबसे अहम बदलाव नियम 24 में किया गया है। इसके तहत अब हर अधिकृत टैक्सी चालक को मराठी का कार्यसाधक ज्ञान होना अनिवार्य है।

अगर किसी चालक के पास मराठी का ज्ञान नहीं है तो लाइसेंसिंग अथॉरिटी एक महीने का नोटिस देगी। इस एक महीने में चालक को मराठी सीखनी होगी। अगर तय समय में चालक नियम का पालन नहीं करता है तो लाइसेंसिंग अथॉरिटी लिखित कारण दर्ज कर कार्रवाई कर सकती है।

इसके तहत पहले ड्राइविंग लाइसेंस पर अधिकृतता तीन महीने तक निलंबित की जा सकती है। इसके बाद भी अनुपालन न होने पर उचित सुनवाई के बाद चालक का अधिकृत परमिट रद्द भी किया जा सकता है।

सरकार ने नियम 78 और नियम 85 में भी बदलाव किए हैं। नए प्रावधान के अनुसार अब टैक्सी परमिट के नवीनीकरण के लिए भी मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य होगा। प्राधिकरण के संतुष्ट होने पर ही इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली टैक्सी का परमिट रिन्यू किया जाएगा।

राज्य सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच संवाद को आसान बनाना है। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में लोग मराठी बोलते हैं। ऐसे में टैक्सी चालकों का स्थानीय भाषा जानना जरूरी है ताकि यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सके और उन्हें दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

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राष्ट्रीय समाचार

ग्लोबल स्पेस मार्केट का 10 फीसदी हिस्सा हासिल कर सकता है भारत : अमेरिकी वाणिज्य विभाग

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अगले सात सालों में ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत की हिस्सेदारी पांच गुना बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि पॉलिसी में सुधार और अमेरिका के साथ करीबी रिश्तों से भारत के प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री की वृद्धि में तेजी आएगी। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने दी है।

अभी ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है। लेकिन विभाग के इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन ने अपने अगस्त के ‘एयरोस्पेस एंड डिफेंस एक्सपोर्टर अलर्ट’ में अनुमान लगाया है कि अगले पांच से सात सालों में यह हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।

विभाग ने कहा, “भारत का प्राइवेट सेक्टर स्पेस इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और भारत सरकार के निजीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों से इंटरनेशनल स्पेस कंपनियों के लिए भी मौके बनेंगे।” इस अलर्ट में भारत के स्पेस सेक्टर को “मार्केट ऑफ द मंथ” बताया गया है। इसमें अमेरिकी कंपनियों के लिए सैटेलाइट सिस्टम, एडवांस्ड स्पेसफ्लाइट, कनेक्टिविटी, मैन्युफैक्चरिंग और संबंधित टेक्नोलॉजी में निवेश के मौकों पर जोर दिया गया।

1963 में भारत के पहले रॉकेट लॉन्च के समय से ही अमेरिका और भारत स्पेस के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। वह रॉकेट अमेरिका में बना ‘नाइक-अपाचे’ था। तब से यह साझेदारी वैज्ञानिक आदान-प्रदान, संयुक्त वर्किंग ग्रुप और मिलकर किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स के जरिए बढ़ी है। नासा और अमेरिकी कंपनियों ने इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) को टेक्नोलॉजी और पार्ट्स भी सप्लाई किए हैं।

विभाग ने कहा कि भारत के नए स्पेस स्टार्टअप्स अमेरिका में अपने कामकाज और मैन्युफैक्चरिंग की मौजूदगी को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। फरवरी 2026 में ‘बिजनेस काउंसिल फॉर इंटरनेशनल अंडरस्टैंडिंग’ ने ‘इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन’ से सर्टिफाइड अमेरिकी कमर्शियल स्पेस मिशन की बेंगलुरु यात्रा का नेतृत्व किया। अलर्ट में इसे सफल बताया गया है।

विभाग ने कहा, “स्पेस अमेरिका और भारत के बीच सहयोग का एक अहम क्षेत्र है, जिससे व्यापार, टेक्नोलॉजी और संयुक्त नीतिगत प्रयासों के ज़रिए दोनों देशों को फायदा होता है।” व्यावसायिक संबंध ‘अमेरिका-इंडिया सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ के जरिए विकसित किए जा रहे हैं। अलर्ट के अनुसार, 2025 में शुरू की गई ‘ट्रस्ट’ पहल से भी सहयोग मजबूत हुआ है।

‘कमर्शियल स्पेस सब-वर्किंग ग्रुप’ का नेतृत्व संयुक्त रूप से अमेरिकी वाणिज्य विभाग और भारत के अंतरिक्ष विभाग द्वारा किया जाता है। इसका मकसद दोनों देशों की कंपनियों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करना है। इसके काम में बाजार तक पहुंच, खरीद, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) और निर्यात नियंत्रण शामिल हैं। फरवरी 2025 में दोनों देशों के नेताओं के संयुक्त बयान में अंतरिक्ष अन्वेषण, सुरक्षा और पेशेवर आदान-प्रदान में और मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया गया था।

वाणिज्य विभाग ने भारत में प्रवेश करने की इच्छुक अमेरिकी कंपनियों से 7 से 9 सितंबर तक होने वाले ‘बेंगलुरु स्पेस एक्सपो’ में शामिल होने का आग्रह किया। यह कार्यक्रम उद्योग के नेताओं और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाएगा और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी क्षमताएं दिखाने का मौका देगा।

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