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Tuesday,29-September-2026
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इस बार के बजट का मकसद कृषि क्षेत्र का पूर्ण आधुनिकीकरण: पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देकर कहा है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार के बजट में कृषि आबंटन बहुत अधिक है और इसका मकसद कृषि क्षेत्र का पूर्ण आधुनिकीकरण है।

मोदी ने गुरूवार को कहा कि केवल छह वर्षों में कृषि बजट कई गुना बढ़ा है और किसानों के लिए कृषि ऋण भी पिछले सात वर्षों में ढाई गुना बढ़ा है। इस बजट में जिन योजनाओं पर चर्चा की गई थी उनके लिए तैयारी की आवश्यकता है तथा इसके लिए मार्च के महीने का उपयोग किया जा सकता है। इसके बाद “नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन से इन्हें शुरू कर देना चाहिए।”

उन्होंने “केन्द्रीय बजट 2022 के कृषि क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव” पर एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा यदि यह सब ठीक से किया जाता है, तो बजट न केवल आंकड़ों में बदलाव ला सकता है बल्कि जीवन और कृषि में बदलाव लाने का एक प्रभावी साधन हो सकता है।

मोदी ने बजट के जिन सात महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया है उनमें गंगा के किनारे पांच किलोमीटर तक प्राकृतिक खेती ,हर्बल, औषधीय पौधों और बागवानी शामिल है। इसके अलावा कृषि और बागवानी विधियों में सुधार के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का समावेश; मिशन ऑयल पाम पर ध्यान केंद्रित करना और अन्य तिलहनों को भी प्रोत्साहित करना तथा कृषि वस्तुओं के परिवहन के लिए पीएम गति शक्ति संबंधी योजना भी है।

मोदी ने पिछले वर्षों में अपनी सरकार द्वारा किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि तीन साल पहले शुरू की गई पीएम किसान सम्मान निधि योजना से अब तक लगभग 11 करोड़ किसान लाभान्वित हुए हैं, जिनमें से अधिकांश छोटे किसान हैं और 1.7 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अब तक सरकार ने पिछले सात वर्षों में प्रणालियों में सुधार करके कृषि से संबंधित सभी चीजों, ‘बीज से बाजार तक’ की प्रक्रिया को और बेहतर किया है।

प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र से भी कृषि क्षेत्र में निवेश करने की अपील की और कई अवसरों का वर्णन किया है। उदाहरण के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड सरकार द्वारा तैयार किए जाते हैं और हर जगह निजी प्रयोगशालाएँ हो सकती हैं जहाँ किसान अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण करवा सकता है और उसके अनुसार उर्वरकों पर काम कर सकता है। उन्होंने कहा जिस प्रकार आज हमारे पास मानव स्वास्थ्य के लिए पैथोलॉजी प्रयोगशालाएं हैं उसी तरह हमें मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं के एक विशाल नेटवर्क की आवश्यकता है।

मोदी ने लागत को कम करने और उत्पादन में सुधार करने में मददगार सूक्ष्म सिंचाई जैसी उपलब्धियों का भी जिक्र किया जो पर्यावरण को बचाने में मददगार है। उन्होंने निजी क्षेत्र से अपील करते हुए कहा “आज के समय में पानी बचाना मानव जाति की सेवा है। प्रति बूंद अधिक फसल हमारा आदर्श वाक्य है। इस क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि इथेनॉल सम्मिश्रण, कृषि-स्टार्टअप, कृषि-अपशिष्ट प्रबंधन, रसद, कृषि उपज का परिवहन, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि के लिए ड्रोन और किराए पर कृषि उपकरण कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें अपार संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए निजी निवेशक, विशेष रूप से युवा उद्यमी प्रवेश कर सकते हैं।

राष्ट्रीय समाचार

भारत की औद्योगिक वृद्धि दर अगस्त में बढ़कर 8 प्रतिशत हुई, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर शीर्ष पर रहा

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भारत का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा है। इसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन करना था। यह जानकारी सोमवार को सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में दी गई।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अगस्त के दौरान 9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

आधिकारिक बयान के अनुसार, “रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने लगातार तीन महीनों में 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की है।”

यह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर 23 में से 18 उद्योग समूहों ने अगस्त में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इस दौरान सबसे अधिक योगदान देने वाले तीन प्रमुख उद्योगों में मोटर वाहनों का विनिर्माण, जिसमें 25.2 प्रतिशत वृद्धि हुई, इलेक्ट्रिकल उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 30.9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, और मशीनरी एवं उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 25.3 प्रतिशत वृद्धि हुई, शामिल हैं।

बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में अगस्त के दौरान 12.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

हालांकि, खनन क्षेत्र में अगस्त के दौरान 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों के अनुसार, कैपिटल गुड्स, यानी कारखानों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के उत्पादन में अगस्त में 16.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। यह खंड अर्थव्यवस्था में हो रहे वास्तविक निवेश को दर्शाता है, जिसका आगे चलकर रोजगार और आय के सृजन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

अगस्त के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी के उत्पादन में भी 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि हुई। यह बढ़ती आय के बीच इन वस्तुओं की उपभोक्ता मांग में वृद्धि को दर्शाता है। वहीं, साबुन और कॉस्मेटिक्स जैसे कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स के उत्पादन में महीने के दौरान 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में भी 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि हाईवे, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं में सरकार के बड़े निवेश से प्रेरित रही। ऐसी परियोजनाएं बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के साथ-साथ समग्र आर्थिक विकास दर को बढ़ावा देती हैं।

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राजनीति

शरद पवार ने रखीं 17 मांगें, किसानों पर मंडराया बड़ा संकट: एनसीपी नेता अनीश गवांडे

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एनसीपी (एसपी) नेता अनीश गवांडे ने शरद पवार की बैठक, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद, सीजेपी के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को अनुमति नहीं दिए जाने, आईआईटी मुंबई के छात्र की मौत और प्रवेश वर्मा के थप्पड़ मारने के विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन सभी मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाबदेही की मांग की।

शरद पवार की बैठक को लेकर अनीश गवांडे ने कहा कि पवार साहब ने एक पत्र के जरिए 17 मांगें सामने रखी हैं। इनमें कर्ज माफी, बिजली बिल और सूखा प्रभावित किसानों को सहायता देने जैसी मांगें शामिल हैं। कुछ महीने पहले ही शरद पवार ने आशंका जताई थी कि अगर इस साल बारिश ठीक नहीं हुई तो देश और खासकर महाराष्ट्र के किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ईरान में हुए युद्ध के बाद यूरिया खाद की कमी की बात सामने आ रही है। ऐसे में अगर बारिश कम होती है तो किसानों के सामने और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने किसानों के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई।

गवांडे ने कहा कि बैठक में अन्य राजनीतिक मुद्दों के साथ चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर भी चर्चा होगी और आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जाएगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर गवांडे ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज पर इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं, ऐसे में तीनों चुनाव आयुक्तों को एक साथ सामने आकर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने फॉर्म-6 में हुए बदलाव, वोटर लिस्ट के केंद्रीकरण और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गवांडे ने इन प्रक्रियाओं को ‘असंवैधानिक और गैरकानूनी’ बताते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर को लेकर राज्य चुनाव अधिकारियों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। साथ ही, अपील की प्रक्रिया में भी सभी चुनाव आयुक्तों को विश्वास में नहीं लिया गया।

उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाएगा। कांग्रेस के अलावा सिविल सोसाइटी के लोग भी इस मुद्दे पर सामने आए हैं। मुंबई में 2 तारीख को विरोध-प्रदर्शन और 4 तारीख को शिवसेना तथा मनसे के साथ प्रदर्शन की बात कही गई है। चुनाव आयोग देश की महत्वपूर्ण स्वतंत्र संस्था है और उसके कामकाज को लेकर सवाल उठने पर नागरिकों को आवाज उठानी चाहिए।

मुंबई पुलिस द्वारा 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रस्तावित सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने पर भी गवांडे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महात्मा गांधी के दांडी मार्च का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी किसी अनुमति का सवाल नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विरोध-प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं देना अपना सामान्य रवैया बना लिया है। विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने मराठा आरक्षण, चुनाव आयोग और पुणे में एमपीएससी छात्रों के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में अनुमति नहीं दी जाती, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ पक्ष के कार्यक्रमों को अनुमति मिलती है। जनता इसे अन्याय के रूप में देख रही है और लोग अनुमति मिले या नहीं मिले, विरोध के लिए सड़कों पर उतरेंगे।

आईआईटी मुंबई के छात्र की मौत के मामले पर अनीश गवांडे ने छात्र आत्महत्या को राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति बताया। उन्होंने 2024 के एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उस साल 14,500 छात्रों ने आत्महत्या की, जो 2014 के करीब 8,000 के आंकड़े से 80 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने आईआईटी में पिछले 20 वर्षों के दौरान 170 से अधिक छात्रों की आत्महत्या का भी दावा किया। गवांडे ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए संस्थानों में काउंसलरों की संख्या बढ़ाने और जातिगत भेदभाव के खिलाफ प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके साथ सरकार को बातचीत करनी चाहिए और उन्हें राजनीतिक विरोधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

प्रवेश वर्मा से जुड़े थप्पड़ विवाद पर गवांडे ने इसे गलत बताते हुए कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी आम नागरिक को सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मारना अपराध है। किसी भी व्यक्ति को अपने हाथ में कानून लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने भाजपा से प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि अगर पार्टी खुद को अलग तरह की पार्टी मानती है तो उसे अपने नेता के खिलाफ कार्रवाई करके यह दिखाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हो तो पुलिस को भी मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी आम नागरिक पर हाथ उठाना गलत है, खासकर तब जब ऐसा करने वाला व्यक्ति विधायक या किसी महत्वपूर्ण पद पर हो।

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राजनीति

थप्पड़ मारने वाले मंत्री को गिरफ्तार कराएं पीएम मोदी, जेन-जी का दिल जीत जाएंगे : केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तिलक नगर में जेन-जी के एक युवक को थप्पड़ मारने की घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्री प्रवेश वर्मा को गिरफ्तार करा दें और खराब सड़क निर्माण के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करें, तो इससे देश के युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेन-जी से जुड़ने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं, लेकिन उन्हें यह सोचना चाहिए कि युवा उनसे क्यों नहीं जुड़ रहे हैं।

उन्होंने तिलक नगर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले रेखा गुप्ता सरकार की ओर से बनाई गई एक सड़क को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए थे। केजरीवाल के मुताबिक, लोगों ने सड़क की गुणवत्ता दिखाते हुए बताया कि वह हाथ से ही टूट रही थी। इसी दौरान वहां मंत्री प्रवेश वर्मा भी मौजूद थे। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने वाले लोगों में मौजूद जेन-जी के एक युवक को मंत्री ने खींचकर थप्पड़ मारा।

उन्होंने सवाल किया कि जब किसी सरकार का मंत्री सार्वजनिक रूप से किसी युवा के साथ इस तरह का व्यवहार करेगा तो देश का जेन-जी प्रधानमंत्री से कैसे जुड़ेगा। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें युवाओं से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने या अन्य गतिविधियों के बजाय भ्रष्टाचार और गलत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी यदि अपने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करते हैं और सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार करने वालों को गिरफ्तार कराते हैं, तो उन्हें युवाओं से जुड़ने के लिए अलग से प्रयास करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश का जेन-जी ईमानदारी और स्पष्ट कार्रवाई की उम्मीद करता है। केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस पर ऊपर से दबाव है और इसी वजह से मंत्री को बचाने की कोशिश की जा रही है।

केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक तरफ युवाओं को अपने साथ जोड़ना चाहते हैं और दूसरी तरफ ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करते तो यह विरोधाभास पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि जेन-जी सरकार से ईमानदारी और सीधे तरीके से कार्रवाई की अपेक्षा करता है।

गौरतलब है कि तिलक नगर में सड़क की गुणवत्ता को लेकर सामने आई घटना के बाद मंत्री प्रवेश वर्मा और युवक से जुड़े थप्पड़ प्रकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और संबंधित मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

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