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Monday,21-September-2026
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राजनीति

भव्य होगा प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास समारोह : मुख्यमंत्री

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 यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखपुर में बनने जा रहे प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास 28 अगस्त को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों होना प्रस्तावित है। शिलान्यास समारोह भव्य होगा और इसके लिए तैयारियों में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

गुरुवार को गोरखपुर से अयोध्या रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भटहट ब्लॉक के पिपरी में आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने दूरबीन से पूरे स्थल का गहन मुआयना किया। मानसून के मौसम में वहां पानी लगा देख उन्होंने कहा कि यथाशीघ्र यहां से पानी की निकासी हो जानी चाहिए। मौके पर मौजूद जिलाधिकारी विजय किरण आनंद ने बताया कि पानी निकासी का कार्य शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने शिलान्यास समारोह को लेकर तैयार रोड मैप का भी अवलोकन किया। निर्देश दिया कि समय से पूर्व सभी तैयारियां हो जानी चाहिए। जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप कार्यक्रम स्थल के समीप ही हेलीपैड निर्माण शुरू हो गया है। इस दौरान पिपराइच के विधायक महेन्द्रपाल सिंह व कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

गोरखपुर के भटहट ब्लॉक के पिपरी व तरकुलहा 52 एकड़ भूमि पर बनने जा रहे राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय में एक ही परिसर में आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी और योग चिकित्सा की पढ़ाई और उस पर शोध कार्य होगा। इन विधाओं से यहां चिकित्सा भी सुलभ होगी। योग सहित प्राकृतिक व परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने में लगी योगी सरकार का यह बड़ा कदम है। प्रदेश के आयुष विधा के 98 कॉलेज इस विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे। आयुष विद्यालय के निर्माण से किसानों को भी काफी फायदा होगा।

विश्वविद्यालय की निगरानी में वह औषधीय खेती के लिए प्रेरित होंगे। इस विश्वविद्यालय में आयुष इंस्टिट्यूट व रिसर्च सेंटर भी होगा। विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए 299.87 करोड़ रुपये की डीपीआर कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग ने बनाई है। शिलान्यास के तत्काल बाद इस विश्वविद्यालय के निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। सीएम योगी आयुष विश्वविद्यालय में महाविद्यालयों की संबद्धता एवं अन्य प्रशासनिक कार्य सत्र 2021-22 से एवं विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य सत्र 2022-23 से प्रारंभ करने के निर्देश पहले ही दे चुके हैं। गोरखपुर में इस विश्वविद्यालय के खुलने से पूर्वांचल की छह करोड़ से अधिक जनता को चिकित्सा का एक और बेहतर विकल्प मिलेगा। विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य मार्च 2023 तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय है।

राष्ट्रीय समाचार

एफडीआई के अगले चरण में सिर्फ निवेश नहीं, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर होना चाहिए फोकस: एसोचैम

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उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा सोमवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का अगला चरण केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल बनाने पर केंद्रित होना चाहिए जहां निवेश टिकाऊ बने, उसका विस्तार हो और वह देश के आर्थिक एवं औद्योगिक तंत्र के साथ गहराई से जुड़ सके।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में भारत का एफडीआई परिदृश्य काफी बदल गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2000-01 में 4 अरब डॉलर रहे कुल एफडीआई प्रवाह बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं। इसी अवधि में एफडीआई इक्विटी निवेश 2 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर हो गया।

अध्ययन में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2000-01 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच भारत को कुल मिलाकर 1.16 ट्रिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जबकि एफडीआई इक्विटी निवेश 791 अरब डॉलर रहा। यह रुझान वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण और एफडीआई नीति में क्रमिक उदारीकरण को दर्शाता है।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगला चरण निवेशकों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करना, संचालन करना और विस्तार करना अधिक आसान बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। साथ ही ऐसे निवेशों से देश को मिलने वाले व्यापक आर्थिक लाभों को भी मजबूत करना जरूरी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एफडीआई अब सेवाओं, विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में भारत के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सेवा क्षेत्र तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग एक-तिहाई हिस्सा आया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, रसायन, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय निवेश हुआ है।

एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एस.पी. शर्मा ने कहा कि एफडीआई केवल पूंजी ही नहीं लाता, बल्कि तकनीक, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क भी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश से देश में कितना मूल्य संवर्धन, रोजगार, निर्यात, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित होती है।

रिपोर्ट में एफडीआई को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें निवेशकों के लिए बेहतर आफ्टरकेयर व्यवस्था, सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना, भूमि लागत कम करना, भूमि उपलब्धता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स और उपयोगिता सेवाओं में सुधार, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा वित्त तक पहुंच को मजबूत करना शामिल है।

इसके अलावा, अध्ययन में प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) आधारित निवेश को बढ़ावा देने, निवेश के लिए तैयार औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।

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राष्ट्रीय समाचार

आदिवासी कल्याण घोटाला: कर्नाटक सीएम का बड़ा बयान, बोले- बेगुनाह को देना पड़ा इस्तीफा

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आदिवासी कल्याण घोटाले के सिलसिले में कांग्रेस विधायक बी. नागेंद्र के कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफे का जिक्र करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि विपक्ष के दबाव के कारण सरकार को एक ‘बेगुनाह’ व्यक्ति से इस्तीफा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने भाजपा विधायकों की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपने उठाए गए मुद्दों पर चर्चा होने देने के बजाय विधानसभा की कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे।

उन्होंने यह बयान कर्नाटक विधानसभा में सूखा-स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने के फैसले का बचाव करते हुए दिया।

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने जोर देकर कहा कि इन मामलों पर उस ‘स्थगन प्रस्ताव’ के तहत चर्चा होनी चाहिए जिसे उन्होंने स्पीकर को सौंपा था।

नागेंद्र के इस्तीफे का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने विधानसभा में कहा कि हमने विपक्ष के दबाव में एक बेगुनाह व्यक्ति को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। मैंने ही उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। मैंने विपक्ष से पूछा कि वे उनके इस्तीफे की मांग क्यों कर रहे हैं। वे कुछ नहीं बोले और सदन की कार्यवाही में बाधा डाली। बाद में, उन्होंने विरोध मार्च भी निकाला। उन्हें करने दीजिए, लोकतंत्र में इसकी इजाजत है।

शिवकुमार ने कहा कि ‘काम रोको प्रस्ताव’ की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार ने उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला लिया था।

अशोका ने सरकार से उस प्रावधान के बारे में सवाल किया जिसके तहत विशेष सत्र बुलाया गया था और कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने कहा कि विपक्ष ने ‘काम रोको प्रस्ताव’ अभी पेश किया है, जबकि सरकार ने उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला लिया था।

शिवकुमार ने कहा कि विपक्ष ने पिछले मॉनसून सत्र में बाधा डाली थी और उन्हें एक मिनट भी बोलने नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए लिखित अनुरोध किया था, लेकिन बाद में कार्यवाही में बाधा डाली, जिससे सरकार को सत्र दो दिन कम करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि अब, मैंने एक विशेष सत्र बुलाया है। उससे पहले, मैंने सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के संबंध में विभिन्न जिलों का दौरा किया है। कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर हमारा रुख 27 सितंबर तक केंद्र को बताना है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, विशेष सत्र बुलाया गया है।

शिवकुमार ने कहा कि वह पिछली रिपोर्ट सीधे केंद्र को भेज सकते थे, लेकिन वह चाहते थे कि इन मुद्दों पर चुने हुए प्रतिनिधि चर्चा करें, न कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय बने।

उन्होंने कहा कि इस सत्र में सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा होनी चाहिए। यह सत्र लोगों की इच्छा के अनुसार बुलाया गया है।

उन्होंने बताया कि इन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए राज्य के चार डिवीजनों (कलबुर्गी, बेलगावी और चित्रदुर्ग शामिल) में विधायकों के साथ बैठकें की गई थीं।

शिवकुमार ने कहा कि 120 तालुकों को पहले ही सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है, जबकि अन्य 100 तालुकों को इसमें शामिल करने के लिए उनकी जांच की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों ने उन्हें किसानों पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के असर के बारे में बताया है और इसके संभावित नतीजों को गंभीर बताया।

उन्होंने कहा कि सांसदों, विधायकों और एमएलसी को बुलाया गया था और बैठकें की गई थीं।

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राजनीति

पीएम मोदी की पहल से 18,452 गांवों तक पहुंची बिजली, करोड़ों घरों को मिला कनेक्शन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर एक्स हैंडल ‘मोदी स्टोरी’ ने भारत में गांवों और घरों तक बिजली पहुंचाने की पहल को लेकर एक पोस्ट साझा किया है। पोस्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री बनने के समय देश के हजारों गांव अब भी बिजली से वंचित थे और बाद में विभिन्न योजनाओं के जरिए सभी गांवों तक बिजली पहुंचाई गई।

पोस्ट के मुताबिक, जब नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने, तब भारत के 18,452 गांवों में बिजली नहीं पहुंची थी। इसके बाद उन्होंने शेष सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का मिशन शुरू किया।

पोस्ट में कहा गया है कि दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत देश के सभी गांवों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण किया गया। इसके बाद सौभाग्य योजना के माध्यम से गांवों से आगे बढ़ते हुए घर-घर बिजली पहुंचाने का अभियान चलाया गया और 2.86 करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन दिए गए।

मोदी स्टोरी ने यह भी कहा कि इस पहल की शुरुआत प्रधानमंत्री बनने से पहले गुजरात में हो चुकी थी। पोस्ट के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने 2006 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ज्योतिग्राम योजना शुरू की, जिसके तहत 18,000 से अधिक गांवों तक बिजली पहुंचाई गई।

पोस्ट में दावा किया गया है कि इस योजना की उपलब्धियों से प्रभावित होकर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम गुजरात पहुंचे, एक ज्योतिग्राम गांव का दौरा किया और योजना को राष्ट्र को समर्पित किया।

पोस्ट के अनुसार, ज्योतिग्राम योजना के पहले 1,000 दिनों में करीब 20 लाख बिजली के खंभे लगाए गए, एक लाख किलोमीटर बिजली लाइन बिछाई गई और 18,000 से अधिक गांवों का विद्युतीकरण किया गया।

पोस्ट के अंत में इसे प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों की सेवा यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया गया है।

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