राजनीति
असहमति को जानबूझ कर राष्ट्रविरोधी और आतंकवाद का रूप दिया गया: सोनिया
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर ‘राजनीतिक विरोधियों और सिविल सोसायटी के सदस्यों को निशाना बनाने’ को लेकर हमला किया है। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र चौराहे पर आ गया है, क्योंकि ‘असंतोष को आतंकवाद या ब्रांडेड राष्ट्र-विरोधी गतिविधि के रूप में देखा जाने लगा है’। एक अखबार में प्रकाशित और बाद में कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी किए गए एक लेख में उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है।
सोनिया गांधी ने कहा, “लेकिन सबसे खराब बात यह है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के सभी स्तंभ निशाने पर हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को दमन और धमकी के माध्यम से व्यवस्थित रूप से खत्म कर दिया गया है। असहमति को जानबूझकर ‘आतंकवाद’ या ‘राष्ट्र-विरोधी गतिविधि’ के रूप में ब्रांडेड किया जा रहा है।”
विपक्षी नेता ने कहा कि भारतीय सरकार ने हर जगह ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के खतरे का बहाना बनाकर लोगों का ध्यान ‘वास्तविक समस्याओं’ से हटा दिया है।
उन्होंने आगे कहा, “बेशक इन खतरों में से कुछ वास्तविक हैं और उनसे निपटा जाना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा जब भी देखती है कि कोई राजनीतिक विरोध हो रहा है, तो वह उसे भयावह साजिश कहने लगती है।”
सोनिया ने कहा कि मीडिया और ऑनलाइन ट्रोल फैक्ट्री के माध्यम से सिस्टम असंतुष्ट लोगों के पीछे जांच एजेंसियों को लगा देती है। उन्होंने लिखा, “कड़ी मेहनत से हासिल किए गए भारत के लोकतंत्र को खोखला किया जा रहा है।”
कांग्रेस नेता ने यह कहते हुए मोदी सरकार पर हमला किया कि “राज्य के प्रत्येक अंग जो संभवत: राजनीतिक विरोध को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), और यहां तक कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को पहले से ही दबा दिया गया है।”
उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वे अपने राजनीतिक विरोधियों को भारत देश के दुश्मन के रूप में प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा, “इस सेल्फ-सविर्ंग कदम ने भाजपा और उसकी राजनीति से सार्वजनिक रूप से असहमत किसी भी व्यक्ति और प्रदर्शनकारी के खिलाफ हमारे दंड संहिता में सबसे कठोर कानून के कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया। यह साल 2016 में भारत के सबसे अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में युवा छात्र नेताओं के खिलाफ राजद्रोह के आरोपों के साथ शुरू हुआ। उन्होंने इस क्रम को कई मामलों के साथ प्रसिद्ध कार्यकतार्ओं, विद्वानों और बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी के साथ जारी रखा है।”
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को सीएए विरोधी आंदोलन को ‘संगठित हिंसा’ बताया था, जिसके बाद सोनिया गांधी ने सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का बचाव किया।
उन्होंने कहा, “भाजपा विरोधी प्रदर्शनों को भारत विरोधी षड्यंत्रों के रूप में पेश करने का सबसे निंदनीय प्रयास को मोदी सरकार द्वारा सीएए और प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (सीएए-एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में देखा गया। मुख्य रूप से महिलाओं के नेतृत्व वाले सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शन ने दिखाया कि कैसे एक वास्तविक सामाजिक आंदोलन सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण राजनीति का जवाब शांति, समावेशी और एकजुटता के मजबूत संदेश के साथ दे सकता है।”
सोनिया गांधी ने कहा कि दिल्ली के शाहीन बाग और देश भर के अन्य अनगिनत स्थलों पर हुए विरोध प्रदर्शनों में यह देखा गया कि महिलाओं के लिए प्रमुख मंच को सुरक्षित करते हुए कैसे पुरुष सत्ता को सहायक भूमिका निभाने के लिए राजी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “यह प्रदर्शन, संविधान और प्रस्तावना, राष्ट्रीय ध्वज और हमारे स्वतंत्रता संग्राम सहित राष्ट्रीय प्रतीकों के अपने गौरवपूर्ण उपयोग के लिए भी उल्लेखनीय था।”
उन्होंने आगे कहा, “इस आंदोलन को राजनीतिक स्पेक्ट्रम में सिविल सोसायटी के कार्यकतार्ओं और संगठनों का व्यापक समर्थन मिला और उन्होंने भी विभाजनकारी सीएए-एनआरसी का विरोध किया। लेकिन मोदी सरकार ने इस आंदोलन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।”
विपक्षी दल की नेता ने आगे कहा, “इसके बजाय उन्होंने इसे कमजोर करना चुना और इसे दिल्ली के चुनाव में विभाजनकारी मुद्दा बना दिया। एक गांधीवादी सत्याग्रह के लिए वित्त राज्य मंत्री और गृह मंत्री सहित भाजपा के नेताओं ने हमले के लिए अपमानजनक बयानबाजी और हिंसक बयान का इस्तेमाल किया। दिल्ली भाजपा के अन्य नेताओं ने सार्वजनिक रूप से प्रदर्शनकारियों पर हमला करने की धमकी दी। सत्तारूढ़ पार्टी ने ऐसी परिस्थितियों का निर्माण किया, जिससे पूर्वोत्तर दिल्ली में हिंसा भड़की। फरवरी में होने वाले ये दंगे कभी नहीं होते अगर सरकार ने उन्हें रोकने की कोशिश की होती।”
मोदी सरकार पर अपना हमला जारी रखते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि कई महीनों तक केंद्र ने अपने प्रतिशोध को आगे बढ़ाते हुए यह दावा किया कि विरोध प्रदर्शन भारत के खिलाफ एक साजिश थी। उन्होंने कहा, “परिणाम स्वरूप मामले में करीब 700 प्राथमिकी दर्ज की गई, सैकड़ों से पूछताछ की गई और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्जनों को हिरासत में लेकर पक्षपाती जांच की गई।”
उन्होंने आगे कहा, “भाजपा के असंतुष्ट और सिविल सोसायटी के कार्यकतार्ओं के साथ मतभेद हो सकते हैं। यहां तक कि उन्हीं कार्यकतार्ओं ने अक्सर कांग्रेस सरकारों के खिलाफ भी विरोध किया है। लेकिन उन्हें सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने वाले राष्ट्र-विरोधी षड्यंत्रकारियों के रूप में पेश करना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि प्रख्यात अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों, सामाजिक प्रचारकों और यहां तक कि बहुत वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं, जिनमें एक पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल हैं, उन्हें दिल्ली पुलिस जांच में तथाकथित खुलासे को लेकर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा, “यह इस बात को दर्शाता है कि भाजपा परिणामों की परवाह किए बिना, अपनी सत्तावादी रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए ²ढ़ निश्चित है।”
उन्होंने हाथरस कांड का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ‘दलित लड़की के साथ दुष्कर्म, गैरकानूनी दाह संस्कार और न्याय मांग रहे पीड़ित परिवार के विरोध’ को लेकर असहिष्णु और अलोकतांत्रिक मानसिकता किसी से छिपी नहीं रही। उन्होंने आगे कहा, “यूपीए सरकार ने निर्भया मामले को कैसे संभाला उसे देखते हुए उप्र सरकार की प्रतिक्रिया एकदम उलट थी।”
उन्होंने कहा, “हमारे संविधान और स्वतंत्रता आंदोलन द्वारा कल्पित यह राष्ट्र तभी पनपेगा जब लोकतंत्र और इसकी भावना का पालन किया जाएगा।”
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी ने बल प्रयोग को बताया गलत, बातचीत से समाधान की अपील

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को गलत बताते हुए राज्य सरकार से छात्रों की बात सुनने और बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने की अपील की।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि झारखंड में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल का इस्तेमाल गलत है। छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है। उन्होंने झारखंड सरकार से छात्रों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की अपील की।
इससे पहले भी राहुल गांधी ने झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों का समर्थन किया था। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से फोन पर बातचीत कर उनकी समस्याएं जानी थीं और उनकी मांगों के प्रति समर्थन जताया था।
इधर, झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड में जंतर-मंतर जैसी बर्बरता और संवादहीनता की स्थिति नहीं बनी है। सरकार ने छात्रों के आंदोलन से पहले ही मामले में कार्रवाई शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच, गिरफ्तारियों और डिजिटल समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जांच जारी है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई दोषी बच न पाए।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि भर्ती व्यवस्था में मौजूद कमियों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सीधी नजर है। उन्होंने कहा कि छात्रों को व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया गया है। उनके अनुसार, सरकार ने छात्रों से दोबारा बातचीत का आग्रह किया है और वह संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने भाजपा पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। मंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट रुख है कि समस्याओं का समाधान संवाद से ही निकाला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने भी माना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर राज्य सरकार ने सकारात्मक कार्रवाई की है। यह कदम कई अन्य राज्यों में देखने को नहीं मिला है। मंत्री ने कहा कि विधानसभा के मौजूदा सत्र में भी सरकार छात्रों के मुद्दे को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पहले से तय था और सरकार ने उनसे बातचीत की कोशिश की थी, लेकिन छात्र इसके लिए तैयार नहीं हुए।
महाराष्ट्र
मुंबई: पुलिस ऑपरेशन के दौरान सांताक्रूज डकैती का रहस्य सुलझा, बैंक में चोरी के पैसे जमा करने वाले व्यक्ति की भी पहचान हुई, एक गिरफ्तार

मुंबई: सांताक्रूज इलाके में हुई लूट की गुत्थी सुलझाने के बाद पुलिस ने 76.36 लाख रुपये के कैश और दूसरे गहने ज़ब्त करने का दावा किया है। जानकारी के मुताबिक, 20 जून से 27 जून के बीच सांताक्रूज इलाके के जुहू तारा रोड पर एक घर में एक अनजान चोर लूट के इरादे से घुसा और अलमारी में रखे गहने, कैश और सोने के बिस्किट लेकर फरार हो गया। इस मामले में पुलिस ने टेक्निकल जांच के दौरान दरभंगा के रहने वाले 26 साल के आरोपी चंदन कमलेश मुखिया को गिरफ्तार किया। उसका ट्रांजिट रिमांड लिया गया और उसे मुंबई में पेश किया गया। इस मामले में एक और फरार आरोपी की तलाश की जा रही है। जांच में पता चला है कि फरार आरोपी की मदद से चोर ने अपने जान-पहचान वाले कैलाश शाह से पैसे और चोरी की प्रॉपर्टी से ज़मीन खरीदने को कहा था। इसलिए कैलाश शाह ने कैश इकट्ठा करके एक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया। जांच में पुलिस को पता चला कि कैलाश शाह ने चोरी के 46.31 लाख रुपये इकट्ठा किए थे, इसलिए पुलिस ने उसे नोटिस जारी किया है। 200 ग्राम सोने के गहने और रोलेक्स घड़ियां भी बरामद की गई हैं। यह ऑपरेशन मुंबई के एडिशनल कमिश्नर अभिनव देशमुख और डीसीपी मोहित कुमार गर्ग के गाइडेंस में किया गया, जबकि सांताक्रूज के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर दत्तात्रेय मसवेकर ने इस चोरी की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय समाचार
एसबीआई भर्ती 2026: जूनियर एसोसिएट्स के 1,538 पदों पर आवेदन जारी, जानें योग्यता और सैलरी

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एससी/एसटी/ओबीसी बैकलॉग रिक्तियों के लिए विशेष भर्ती अभियान के तहत क्लर्क कैडर में जूनियर एसोसिएट्स (कस्टमर सपोर्ट और सेल्स) के कुल 1,538 पदों को भरने के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके रिक्तियों की घोषणा की है।
एसबीआई की ओर से जूनियर एसोसिएट्स (कस्टमर सपोर्ट और सेल्स) पोस्ट के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के आधार पर जारी 1,538 रिक्तियों में आंध्र प्रदेश में 88, कर्नाटक में 120, मध्य प्रदेश में 134, छत्तीसगढ़ में 26, ओडिशा में 111, चंडीगढ़ यूटी में 22, जम्मू एवं कश्मीर यूटी में 42, हिमाचल प्रदेश में 11, पंजाब में 18, तमिलनाडु में 65, तेलंगाना में 32, राजस्थान में 106, पश्चिम बंगाल में 55, उत्तर प्रदेश में 31, महाराष्ट्र में 165, दिल्ली में 17, गुजरात में 289, असम में 39, त्रिपुरा में 22, बिहार में 12 और झारखंड में 133 पद शामिल हैं। इनमें एससी के 207, एसटी के 1,219 और ओबीसी के 112 पद शामिल हैं।
इन सभी रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 27 अगस्त तक की गई है। एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपना रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन या केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। वहीं, जिन उम्मीदवारों के पास इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री (आईडीडी) सर्टिफिकेट है, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आईडीडी पास करने की तारीख 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले की हो। इसी के साथ जूनियर एसोसिएट्स पोस्ट के लिए वे लोग भी आवेदन कर सकते हैं, जो लोग अपने ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष/सेमेस्टर में हैं, बशर्ते कि प्रोविजनल रूप से चुने जाने पर उन्हें 31 दिसंबर 2026 को या उससे पहले ग्रेजुएशन परीक्षा पास करने का सबूत देना होगा।
आवेदकों की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 अप्रैल के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन ऑनलाइन टेस्ट (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) और चुनी हुई स्थानीय भाषा के टेस्ट के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 24,050 से 64,480 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो ओबीसी के लिए 750 रुपए तय किया गया है। वहीं, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी/एक्सएस/डीएक्सएस श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी जाएगी।
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