राष्ट्रीय
निवेशकों में टाटा सबसे भरोसेमंद समूह: सर्वेक्षण
इक्विटीमास्टर द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में टाटा समूह सबसे भरोसेमंद कॉर्पोरेट समूह के रूप में उभरा है। हालांकि, विभिन्न कॉरपोरेट समूहों की विश्वसनीयता का आंकलन करने वाले सर्वेक्षण में पाया गया कि हीरो, जिंदल, आरपीजी समूह और बाकी कॉर्पोरेट समूहों जैसी संस्थाओं पर साक्षात्कार किए गए लोगों की कुल संख्या में से केवल 5 प्रतिशत तक ही भरोसा किया जाता है।
इंडिपेंडेंट इक्विटी रिसर्च इनिशिएटिव इक्विटीमास्टर को भारत के 17 सबसे प्रसिद्ध कॉर्पोरेट समूहों से मिलकर बनाया गया था। इसमें कुल 5,274 लोगों ने हिस्सा लिया, जो कि इक्विटीमास्टर डॉट कॉम के विजिटर हैं।
यह सर्वेक्षण इस बात की अंतरदृष्टि देता है कि क्या बड़े कॉर्पोरेट समूह निवेशकों का विश्वास अर्जित करने में सक्षम हैं और कैसे विश्वास उनकी दीर्घकालिक सफलता और विकास में एक बड़ी भूमिका निभाता है। चुनाव परिणामों ने यह भी दिखाया था कि बेहतर निवेश सीधे प्रभावी कॉर्पोरेट प्रशासन से संबंधित हैं। इसलिए, उन कंपनियों में निवेश करना हमेशा समझदारी भरा होता है जो विश्वास की भावना पैदा करती हैं।
चुनाव परिणामों के बारे में सबसे खास बात यह है कि विजेता और बाकी कॉरपोरेट समूहों के बीच बहुत बड़ा अंतर है।
टाटा समूह को कुल मतों का 66.3 प्रतिशत प्राप्त हुआ है, जो कि 2013 में किए गए इस तरह के पिछले सर्वेक्षण में मिले मतों की संख्या (31.8 प्रतिशत) से दोगुने से भी अधिक है।
153 साल पुराने समूह के बाद एवी बिड़ला समूह और मुकेश अंबानी समूह क्रमश: 5.1 प्रतिशत और 4.7 प्रतिशत मतों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
वास्तव में, टाटा समूह को छोड़कर, अन्य 16 समूहों में से कोई भी प्रतिभागियों की कुल संख्या के 5 प्रतिशत से अधिक का विश्वास जीतने में सक्षम नहीं है, हालांकि इनमें से कई समूह 2013 में इक्विटीमास्टर के पिछले सर्वेक्षण से कुछ रैंक ऊपर गए हैं।
एवी बिड़ला, गोदरेज और टीवीएस समूह 2 रैंक ऊपर उठे हैं, मुकेश अंबानी समूह 6 रैंक ऊपर और राहुल बजाज समूह, जो चौथे स्थान पर आया है, पिछले पोल से नौ रैंक ऊपर चढ़ा है।
इस साल के चुनाव परिणामों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह था कि 2013 में 4.1 प्रतिशत के विरोध में केवल 2.3 प्रतिशत निवेशकों ने उपरोक्त श्रेणी में से किसी के लिए मतदान नहीं किया था।
यह बदलाव, हालांकि छोटा है, निवेशकों के भरोसे कॉर्पोरेट समूहों के प्रति खुलेपन को प्रकट करता है यदि बाद वाले ईमानदारी से इसे अर्जित करने का प्रयास करते हैं।
जिस समूह को सबसे कम वोट (0.8 प्रतिशत) मिले हैं, वह आरपीजी (राम प्रसाद गोयनका) समूह है, जो सिएट टायर्स के मालिक हैं।
परिणामों पर टिप्पणी करते हुए, इक्विटीमास्टर में अनुसंधान के सह प्रमुख राहुल शाह ने कहा, “अगर हम आज कंपनी के मूल्यांकन को देखें, तो एक फर्म के मूल्य का एक बढ़ता हुआ हिस्सा सद्भावना और प्रतिष्ठा जैसे अमूर्त में रहता है और जब अमूर्त को मूर्त बनाने की बात आती है, तो विश्वास से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा, “विशेषता कंपनी के नेतृत्व से संगठन के माध्यम से उसके बाहरी हितधारकों तक प्रवाहित होती है जो अंतत: लंबी अवधि में लाभप्रदता बढ़ाती है। हालांकि, अगर ध्यान नहीं दिया जाता है, तो विश्वास की कमी का विपरीत प्रभाव हो सकता है।”
इक्विटीमास्टर एक इक्विटी अनुसंधान पहल है जो भारतीय शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियों पर राय प्रदान करती है।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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