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Saturday,19-September-2026
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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, सुनवाई पूरी होने तक कृषि कानूनों पर रोक लग सकती है?

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Supreme-Court

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर डटे आंदोलनकारी किसानों को हटाने की मांग वाली याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल से पूछा कि क्या केंद्र सरकार हाल ही में लागू किए गए कृषि कानूनों पर तब तक रोक लगा सकती है, जब तक कि अदालत इस मामले की सुनवाई नहीं कर लेती? शीर्ष अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि जब तक गतिरोध खत्म करने के लिए कोई समाधान नहीं मिल जाता, तब तक पुलिस को प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाने वाला कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने अटॉर्नी जनरल (एजी) से कहा, “क्या आप अदालत को आश्वासन दे सकते हैं कि आप कानून को तब तक लागू नहीं करेंगे, जब तक हम इसकी सुनवाई कर रहे हैं।”

हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कानून को स्थगित (स्टे लगाने) करने की राय नहीं रख रहे हैं, बल्कि इसके बजाय वह केंद्र और किसान यूनियनों को फलदायी वार्ता की संभावना तलाशने का मौका दे रहे हैं।

पीठ ने यह बात भी स्पष्ट की कि वह विरोध जता रहे किसान यूनियनों की बात सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं करने जा रही है। इसके साथ ही पीठ ने एजी से पूछा कि क्या इस बीच कोई ऐसा आश्वासन है कि कोई अधिशासी कार्रवाई नहीं होगी?

एजी ने जवाब देते हुए कहा कि आप किस तरह की अधिशासी कार्रवाई की बात कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि ऐसा होता है तो फिर किसान वार्ता के लिए नहीं आएंगे। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने दोहराया कि वार्ता को प्रभावी बनाना है। शीर्ष अदालत के इस सुझाव पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताई।

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि किसान अड़े हुए हैं और जब तक सभी तीन कानूनों को रद्द नहीं किया जाता है, तब तक वे कोई वार्ता करना नहीं करना चाहते। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने जवाब दिया कि वे कहेंगे कि आप अड़े हुए हैं और इसीलिए शीर्ष अदालत इस पर चर्चा चाहती है।

पीठ ने यह भी कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे किसानों के खिलाफ पुलिस को किसी भी तरह का हिंसक तरीका नहीं अपनाना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हम कानून के खिलाफ विरोध करने, इसे संतुलित करने या रोकने संबंधी कोई सवाल नहीं उठाते। हमें यह देखने की जरूरत है कि यह किसी के जीवन को प्रभावित नहीं कर रहा हो।”

सीमाओं पर किसानों की नाकेबंदी के खिलाफ याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे पेश हुए।

पीठ ने कहा कि वह स्वीकार करते हैं कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है और अदालत उनके विरोध के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं करेगी, लेकिन वह निश्चित रूप से विरोध के तौर-तरीकों पर जरूर ध्यान देगी।

पीठ ने जोर दिया कि यदि किसान और सरकार एक-दूसरे से बात नहीं करते हैं तो कोई निष्कर्ष नहीं निकल सकता। पीठ ने अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल से कहा, “हम दोनों पक्षों को सुनने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाने ‘के बारे में सोच रहे हैं।” इस बीच, पीठ ने जोर देकर कहा कि केंद्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस किसी भी तरह की हिंसा में शामिल न हो।

पीठ ने जोर देकर कहा कि वह विरोध करने के अधिकार पर अंकुश नहीं लगा सकता। अदालत ने कहा कि कानून के खिलाफ विरोध करने का किसानों का अधिकार है, लेकिन यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इस अधिकार से अन्य नागरिकों के मौलिक अधिकार का हनन न हो।

पीठ ने बिना कोई आदेश पारित किए सुनवाई खत्म कर दी और पक्षकारों को अवकाश पीठ के समक्ष जोने की आजादी दे दी।

महाराष्ट्र

बीएमसी ने गणपति विसर्जन के लिए 383 से ज़्यादा कृत्रिम झीलें उपलब्ध कराई हैं।

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मुंबई मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) एडमिनिस्ट्रेशन महाराष्ट्र के सरकारी त्योहार गणेश उत्सव को इको-फ्रेंडली तरीके से मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें विसर्जन जुलूस के लिए कई तरह की सुविधाएं और इंतज़ाम शामिल हैं। हाई कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, बीएमसी ने इस साल छह फीट ऊंची मूर्तियों के विसर्जन के लिए 383 से ज़्यादा आर्टिफिशियल झीलें बनाई हैं। इसके अलावा, छह फीट से ज़्यादा ऊंची मूर्तियों के विसर्जन के लिए 67 नेचुरल जगहों पर कई तरह की सुविधाएं दी गई हैं। आम लोगों के बीच पर्यावरण बचाने का मैसेज फैलाने के मकसद से, इस साल ‘एक गणपति, एक पेड़’ पहल शुरू की गई है, जिसका आइडिया मेयर रितु तावड़े ने दिया था। बीएमसी ने मुंबई में विसर्जित की जाने वाली कुल गणेश मूर्तियों के बराबर पेड़ लगाने का वादा किया है। ‘एक गणपति, एक पेड़’ के कॉन्सेप्ट के तहत, भगवान गणेश के आने से लेकर विसर्जन तक का त्योहार पर्यावरण बचाने की कोशिशों के साथ जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, मूर्ति विसर्जन सेरेमनी को आसानी से चलाने के लिए 25,000 से ज़्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरी व्यवस्था की गई है। इस साल, गणेश उत्सव 14 सितंबर, 2026 को शुरू हुआ। मुंबई की मेयर रितु तावड़े, डिप्टी मेयर संजय घाडी, म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े और एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (ईस्टर्न सबर्ब्स) डॉ. अविनाश ढाकने की गाइडेंस में, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने पूरे मुंबई में, और खासकर विसर्जन वाली जगहों पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। विसर्जन के रास्तों से रुकावटें हटाने, सड़कों पर गड्ढों और नाली के ढक्कनों को ठीक करने और पेड़ों की डालियों को काटने जैसे काम पूरे हो चुके हैं। समुद्र के किनारों और नेचुरल और आर्टिफिशियल विसर्जन वाली जगहों पर स्टील प्लेट, राफ्ट, क्रेन, एम्बुलेंस, लाइफगार्ड, ‘निर्मलिया’ (पूजा के बाद बचे फूल और दूसरी चीजें) कलेक्शन बॉक्स, कंट्रोल रूम, ऑब्जर्वेशन टावर, लाइटिंग का इंतज़ाम, टेम्पररी टॉयलेट और ज़रूरी मैनपावर जैसी कई सुविधाएं और सर्विस दी गई हैं।

एक गणपति; एक पेड़
गणपति भक्ति, आस्था और सामाजिक मेलजोल का त्योहार है। इस त्योहार के ज़रिए लोगों तक पर्यावरण बचाने का मैसेज पहुँचाने के मकसद से, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने इस साल जितनी गणेश मूर्तियाँ विसर्जित की जाएँगी, उतने ही पेड़ लगाने का वादा किया है। ‘एक गणपति – एक पेड़’ पहल का आइडिया मेयर रितु तावड़े ने दिया था। इस पहल का मकसद त्योहार के दौरान, भगवान गणेश के आने से लेकर विसर्जन तक, पर्यावरण बचाना है, जिसमें हर विसर्जित मूर्ति के लिए एक पेड़ लगाया जाएगा, जिससे मुंबई के हरे-भरे भविष्य में योगदान मिलेगा। गणेश उत्सव के ज़रिए, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने लोगों की भागीदारी से मुंबई को हरा-भरा, सुंदर और इको-फ्रेंडली बनाने का वादा किया है, साथ ही पेड़ लगाने, पेड़ों की सुरक्षा और पर्यावरण बचाने के बारे में जागरूकता भी पैदा की है।
इस साल, भगवान गणेश की मूर्तियों के विसर्जन के लिए 67 नेचुरल विसर्जन की जगहें (जिनमें 44 बीच/जेटी और 23 नेचुरल झीलें शामिल हैं) और 383 आर्टिफिशियल विसर्जन की जगहें उपलब्ध कराई गई हैं। इन जगहों पर ये इंतज़ाम किए गए हैं: 1,194 स्टील प्लेट, 23 जर्मन राफ्ट, 34 क्रेन, 85 एम्बुलेंस, 10 मोटर बोट, 498 ‘निर्मलिया’ (पूजा का प्रसाद/सामान) इकट्ठा करने वाले बर्तन, 326 ‘निर्मलिया’ डंपर, 261 रिसेप्शन सेंटर, 228 कंट्रोल रूम, 75 ऑब्ज़र्वेशन टावर, 1,132 लाइफ़गार्ड, 6,052 फ़्लडलाइट/सर्चलाइट और 489 टेम्पररी टॉयलेट। इसके अलावा, लगभग 25,000 नगर निगम के अधिकारी और अलग-अलग वॉलंटरी ऑर्गनाइज़ेशन ड्यूटी पर रहेंगे।

आर्टिफ़िशियल झीलों में छह फ़ीट से नीचे की मूर्तियों का विसर्जन
हाई कोर्ट के 20 अगस्त, 2026 के निर्देशों के अनुसार, 24 जुलाई, 2025 का आदेश पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) पर आख़िरी फ़ैसला आने तक ज़रूरी है। इसलिए, 6 फीट तक ऊंची भगवान गणेश की मूर्तियों को आर्टिफिशियल झीलों में विसर्जित करना ज़रूरी है और नगर निगम ने इसके लिए ज़रूरी इंतज़ाम किए हैं। इस पहल के बारे में ज़रूरी पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन भी शुरू किए गए हैं। मुंबई में 278 जगहों पर 383 से ज़्यादा आर्टिफिशियल तालाब
इको-फ्रेंडली ‘गणेश उत्सव’ को बढ़ावा देने और आर्टिफिशियल तालाबों में मूर्ति विसर्जन को बढ़ावा देने के लिए, मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने 278 जगहों पर 383 से ज़्यादा आर्टिफिशियल तालाब बनाए हैं। इसके अलावा, नगर निगम प्रशासन 6 फीट से ज़्यादा ऊंची मूर्तियों के लिए 67 नेचुरल विसर्जन पॉइंट पर ज़रूरी सुविधाएं देगा।
स्वराज्य भूमि (गुड़गांव चौपाटी) पर 12 आर्टिफिशियल तालाब
स्वराज्य भूमि, जिसे ‘गुड़गांव चौपाटी’ के नाम से जाना जाता है, मुंबई में सबसे ज़्यादा गणेश मूर्ति विसर्जन का हब है। शहर भर के पब्लिक ‘मंडलों’ और घरों से मूर्तियां विसर्जन (पानी में विसर्जन) के लिए यहां लाई जाती हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में मस्जिद के पास विस्फोट, 15 लोगों की मौत; 50 से अधिक घायल

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में शुक्रवार को पुलिस लाइंस क्षेत्र स्थित एक मस्जिद के पास हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो गए। यह धमाका जुमे की नमाज के दौरान हुआ, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया जियो न्यूज के मुताबिक, जिला मुख्यालय (डीएचक्यू) अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ताहिर अली शाह ने बताया कि अस्पताल में 15 शव और 50 से अधिक घायल लोगों को लाया गया है। घायलों में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, विस्फोट मस्जिद के पास हुआ, जिससे वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया। धमाके की वजह से मस्जिद का बाहरी हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसकी एक दीवार भी ढह गई।

घटना के तुरंत बाद पुलिस लाइंस क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुट गए। अधिकारियों के मुताबिक, बचाव अभियान जारी है।

यह विस्फोट ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान में, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में, कानून-व्यवस्था से जुड़े कर्मियों को निशाना बनाकर हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

इससे पहले 10 सितंबर को बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के कंक क्षेत्र में एक पुलिस चौकी पर अज्ञात हमलावरों ने हमला किया था, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई थी और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हुआ था। हमले के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया था।

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज की मासिक सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में पाकिस्तान में 199 आतंकी हमले दर्ज किए गए, जबकि जुलाई में इनकी संख्या 144 थी। अगस्त के हमलों में 158 लोगों की मौत हुई और 181 लोग घायल हुए।

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राजनीति

प्रधानमंत्री मोदी 19 सितंबर को ग्लोबल एनवायरनमेंट कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 सितंबर को ‘पर्यावरण और जलवायु की गतिशीलता का भविष्य’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी अहम चुनौतियों और न्यायिक दृष्टिकोणों पर चर्चा की शुरुआत होगी।

आधिकारिक बयान के अनुसार, दिल्ली में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में 17 देशों के जज और न्यायिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। वे पॉलिसी बनाने, उसे लागू करने और उसके पालन में आने वाली कमियों जैसी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे और पर्यावरण से जुड़े कामकाज (गवर्नेंस) और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करेंगे।

बयान में कहा गया है कि इस सम्मेलन में पर्यावरण विशेषज्ञ, भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राज्य न्यायिक अकादमियों, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों (एसईएसी), राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरणों (एसईआईएए), राज्य वेटलैंड प्राधिकरणों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

यह सम्मेलन न्यायिक दृष्टिकोण और पर्यावरण से जुड़े कामकाज के तरीकों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी अहम चुनौतियों जैसे पॉलिसी बनाने, उसे लागू करने और उसके पालन में कमियों पर बातचीत को बढ़ावा देगा और पर्यावरण से जुड़े कामकाज और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करेगा।

इससे पहले, ‘नीले आसमान के लिए स्वच्छ हवा के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के मौके पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन जस्टिस (रिटायर्ड) प्रकाश श्रीवास्तव ने स्वच्छ हवा को विलासिता की चीज नहीं बल्कि एक बुनियादी जरूरत बताया था। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण एक जटिल चुनौती है क्योंकि यह राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानता।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ‘स्वच्छ वायु दिवस 2026’ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस श्रीवास्तव ने कहा, “विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं बल्कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता बनाए रखते हुए साथ-साथ चल सकते हैं।”

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के चेयरपर्सन ने इस बात पर जोर दिया कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ पर्यावरण में रह सकें।

जस्टिस श्रीवास्तव ने कहा, “स्थानीय निकायों को नागरिकों को जागरूक करके प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही रोकने की कोशिश करनी चाहिए; समस्या से निपटने के लिए नवीनतम तकनीकों को अपनाना चाहिए और समस्या के समाधान के लिए सभी को शामिल करने वाले और ‘पूरे समाज’ के दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए।”

पर्यावरण सचिव तन्मय कुमार ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुसार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों वाले, समन्वित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना रही है। इस कार्यक्रम के दौरान, पर्यावरण मंत्रालय ने ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ (एनसीएपी) के तहत सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को भी सम्मानित किया। इन्हें 5वें ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ के तहत रैंकिंग दी गई थी।

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