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Thursday,16-July-2026
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राजनीति

एसआईआर विवाद : ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया

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नई दिल्ली, 4 फरवरी : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि हम इसका प्रैक्टिकल हल निकालने की कोशिश करेंगे। मामले में सोमवार को अगली सुनवाई होगी।

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वीएम पंचोली की बेंच ने बुधवार को ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम समाधान निकालेंगे। जो असली मतदाता हैं, उनका अधिकार कोई नहीं छीन सकता है। हम जिम्मेदारी से नहीं भागेंगे।

बेंच ने चुनाव आयोग से कहा कि नामों में गड़बड़ी के आधार पर मतदाताओं को नोटिस भेजते समय सावधानी बरतें।

ममता बनर्जी की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कोर्ट के उस आदेश पर सवाल उठाया, जिसमें चुनाव आयोग को मतदाता सूची में ऐसे नाम दिखाने के लिए कहा गया था, जिनमें लॉजिकल गड़बड़ियां थीं।

वकील श्याम दीवान ने कहा कि वोटर लिस्ट के फाइनल पब्लिकेशन के लिए 11 दिन बचे हैं और सुनवाई पूरी करने के लिए सिर्फ 4 दिन बचे हैं। श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि 8,300 माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं। संविधान में इनका कोई जिक्र नहीं है। मंजूर किए गए डॉक्यूमेंट्स की संख्या रिजेक्ट कर दी गई है। डोमिसाइल सर्टिफिकेट, आधार और ओबीसी सर्टिफिकेट में से कुछ भी स्वीकार नहीं किया जा रहा है। लोग 4 से 5 घंटे लंबी लाइनों में लगे हैं।

वकील ने कहा कि जिनके नाम को गड़बड़ी वाली कैटेगरी में डाला गया, उनका नाम न रखने के पीछे कोई कारण चुनाव आयोग ने जारी नहीं किया।

वकील श्याम दीवान ने दलील दी कि करीब 70 लाख लोगों के नाम में मामूली मिसमैच के चलते उनको नोटिस भेजा गया है। हम चाहते हैं कि नाम के स्पेलिंग में मामूली मिसमैच के चलते जिसको नोटिस भेजा गया है, वह नोटिस वापस लिया जाए।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद पेश हुईं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर में कई मुद्दों को उठाया। ममता बनर्जी बहस के दौरान बेंच के सामने खड़ी हुईं और स्वयं अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मैं साधारण परिवार से हूं। मैं बहुत महत्वपूर्ण नहीं हूं, लेकिन मैं सभी के लिए लड़ रही हूं।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाए कि एसआईआर से भेदभाव पैदा हो रहा है। अगर लड़की शादी के बाद पति का सरनेम लगा रही है, तो उनके नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल को टारगेट किया जा रहा है। 100 से ज्यादा लोग मर गए। कई बीएलओ ने आत्महत्याएं कीं।

सीजेआई ने ममता बनर्जी को संबोधित करते हुए कहा कि आधार कार्ड के बारे में हम फिलहाल कुछ नहीं बोल सकते, क्योंकि कोर्ट ने इस पर लंबी सुनवाई की है। नाम में गलती या स्पेलिंग को लेकर जो आपकी शिकायत है, उस पर हम चुनाव आयोग से पूछेंगे।

सीजेआई ने कहा कि हम चुनाव आयोग के अधिकारियों को कहेंगे कि नाम को लेकर हो रही इस समस्या को देखें।

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की तरफ से वकील राकेश द्विवेदी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि आयोग ने राज्य सरकार को कई बार लिखा कि क्लास 2 अधिकारियों को ईआरओ के तौर पर नियुक्त किया जाए।

वकील राकेश द्विवेदी ने पश्चिम बंगाल सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सिर्फ 80 अधिकारी दिए गए, इसीलिए हमने माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इसका प्रैक्टिकल हल निकालने की कोशिश करेंगे। सीजेआई ने कहा कि हम सोमवार को सुनवाई करेंगे। इसके साथ ही, ममता बनर्जी की याचिका पर आयोग से जवाब मांगा।

अपराध

ठाणे क्राइम ब्रांच ने सुलझाई बेरहम कत्ल की गुत्थी; दोस्त की हत्या कर शव के टुकड़े फेंकने के आरोप में दो भाई गिरफ्तार

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ठाणे, 16 जुलाई: अपराध की दुनिया में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए ठाणे क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को एक बेहद बेरहम मर्डर केस की गुत्थी सुलझा ली है। इस मामले में दो सगे भाइयों ने कथित तौर पर अपने ही एक करीबी दोस्त की हत्या कर दी, उसके शव के टुकड़े-टुकड़े किए और उन्हें अलग-अलग सुनसान जगहों पर फेंक दिया।
यह मामला तब सामने आया जब उल्हासनगर यूनिट-4 क्राइम ब्रांच के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर राजेश गज्जल को एक गोपनीय सूचना मिली। सूचना के मुताबिक, ऑटो-रिक्शा चालक भाइयों—फैज मलीम (24) और अल्बान मलीम (23)—ने मुंब्रा के रहने वाले अपने दोस्त अमन शेख (23) की हत्या कर दी थी। जानकारी में आगे यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित का गला रेता, उसके शरीर को टुकड़ों में काटा और सबूत मिटाने के इरादे से उन टुकड़ों को अलग-अलग जगहों पर ठिकाने लगा दिया।
इस खुफिया जानकारी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए और ठाणे पुलिस कमिश्नर आशुतोष डुम्बरे के निर्देशों पर, एडिशनल पुलिस कमिश्नर पंजाबराव उगले, डिप्टी पुलिस कमिश्नर अमर सिंह जाधव और असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर शेखर बागड़े के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में सीनियर पीआई राजेश गज्जल, एपीआई श्रीरंग गोसावी और हेड कांस्टेबल गणेश गावड़े शामिल थे।
पुलिस ने दोनों आरोपी भाइयों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उनसे कड़ी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान, भाइयों ने कथित तौर पर कबूल किया कि 13 जुलाई 2026 की रात को उन्होंने अमन शेख का गला रेतकर उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद, उन्होंने शव को क्षत-विक्षत कर सिर, हाथ और पैरों को अलग कर दिया और अपराध को छिपाने के लिए अवशेषों को खराड़ी गांव के सुनसान इलाकों में फेंक दिया।
जांच अधिकारी अब इस हत्याकांड के पीछे के मकसद का पता लगाने, बाकी के सभी सबूतों को बरामद करने और हत्या तक ले जाने वाले घटनाक्रम को दोबारा रीक्रिएट करने में जुटे हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच चल रही है।

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राष्ट्रीय समाचार

सरकार ने कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता 2027 मानदंड का मसौदा जारी किया, आम जनता से मांगे सुझाव

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विद्युत मंत्रालय ने गुरुवार को पक्षकारों से परामर्श के लिए कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता 2027 मानदंड (सीएएफई-III) का मसौदा जारी किया। ये मानदंड 2027-28 से 2031-32 के दौरान भारत में बिक्री के लिए विनिर्मित या आयातित एम1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू करने का प्रस्ताव है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, मसौदा मानदंड एम1 श्रेणी के वाहनों पर लागू होंगे। एम1 श्रेणी में ऐसे यात्री वाहन शामिल हैं, जिनमें चालक के अलावा अधिकतम आठ लोगों के बैठने की क्षमता होती है। इसमें निजी उपयोग के लिए बेची जाने वाली सभी हैचबैक, सेडान और एसयूवी शामिल हैं। इस श्रेणी में वाणिज्यिक मालवाहक वाहन और बसें शामिल नहीं हैं।

मौजूदा सीएएफई-II (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी) मानदंडों की अवधि 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने की संभावना है। इसके बाद सीएएफई-III नियम लागू हो सकते हैं।

सीएएफई-III के तहत अनुपालन का आकलन दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण तीन वर्षों का होगा, जबकि दूसरा चरण शेष दो वर्षों का होगा। प्रत्येक वर्ष के साथ ईंधन दक्षता के लक्ष्य और अधिक कड़े होते जाएंगे।

बिजली मंत्रालय के अधीन ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) की निगरानी में तैयार किए गए सीएएफई-III का उद्देश्य वित्त वर्ष 2032 तक वाहन बेड़े के औसत उत्सर्जन को मौजूदा स्तर से घटाकर काफी कम करना है।

नए ढांचे के तहत, कंप्लायंस क्रेडिट की कीमत 2,500 रुपए प्रति क्रेडिट तय की गई है, जो हर वर्ष 500 रुपए बढ़ेगी। अनुपालन अवधि समाप्त होने के बाद इस्तेमाल न किए गए क्रेडिट स्वतः समाप्त हो जाएंगे और जो वाहन निर्माता तय मानकों को पूरा नहीं कर पाएंगे, उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है, हालांकि जुर्माने की विस्तृत राशि का अभी उल्लेख नहीं किया गया है। वहीं, सालाना 1,000 से कम वाहन बेचने वाले निर्माताओं को इन नियमों से छूट मिलेगी।

मसौदे के पहले के संस्करणों पर उद्योग जगत की राय अलग-अलग रही है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने इस प्रस्ताव को संतुलित बताया है, जबकि कुछ वाहन निर्माताओं ने छोटी पेट्रोल कारों के लिए राहत की मांग की है और कुछ ने इस श्रेणी के लिए अलग नियम बनाए जाने का विरोध किया है।

मंत्रालय ने इस मसौदे पर हितधारकों और आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए हैं। सुझाव ऊर्जा संरक्षण प्रभाग के अवर सचिव को नई दिल्ली स्थित मंत्रालय के कार्यालय में भेजे जा सकते हैं या ई-मेल के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं।

सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 6 अगस्त, 2026 निर्धारित की गई है। बयान में कहा गया है कि मसौदा मानदंड जल्द ही बिजली मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) की वेबसाइटों पर भी अपलोड किए जाएंगे।

एम1 श्रेणी के वाहन सीएएफई मानदंडों के तहत कड़े ईंधन दक्षता और उत्सर्जन लक्ष्यों के दायरे में आते हैं। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से इन मानदंडों को समय-समय पर अपडेट किया जाता है।

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राष्ट्रीय समाचार

ई20 पेट्रोल विवाद: उपभोक्ता के पक्ष में देश का पहला फैसला, रायपुर कोर्ट ने कंपनी को वाहन बदलने का दिया आदेश

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ई20 पेट्रोल से वाहन में खराबी को लेकर आए देश के पहले फैसले में अदालत ने उपभोक्ता को राहत पहुंचाई है। कार मालिक ने आरोप लगाया था कि ई20 पेट्रोल ने उसकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद रायपुर जिला उपभोक्ता अदालत ने कार मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है। साथ ही, अदालत ने कंपनी और संबंधित पक्षकारों को कार मालिक की शिकायत को देखते हुए वाहन बदलने या निर्धारित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।

रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में परिवाद की ऑनलाइन 12 मार्च 2025 को की गई थी, जबकि इसका पंजीयन 16 अप्रैल 2025 को हुआ। 14 जुलाई को आयोग ने अपना आदेश जारी किया।

उपभोक्ता प्रेमराज देवता ने आरोप लगाया था कि उनकी मारुति ग्रैंड विटारा कार में ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद बार-बार समस्याएं आने लगीं। शिकायत में इंजन संबंधी परेशानी, परफॉर्मेंस के खराब होने, मिसफायरिंग और लगातार माइलेज घटने जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया। उपभोक्ता का कहना था कि ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद वाहन की समस्या दूर नहीं हुई, जबकि कई बार सर्विस सेंटर में जांच और मरम्मत कराई गई।

आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने माना कि ई20 पेट्रोल के संबंध में उपभोक्ता के पास व्यवहारिक रूप से अन्य ईंधन विकल्प उपलब्ध नहीं था, क्योंकि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर यही ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा था।

आयोग ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे उपभोक्ता की कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई ई20 ईंधन समर्थित कार आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। अगर निर्धारित अवधि में वाहन नहीं बदला जाता है, तो विपक्षी पक्षकारों को वाहन की कीमत और संबंधित खर्चों का भुगतान (कुल राशि 20,50,494) करना होगा।

आयोग ने यह भी आदेश दिया कि संबंधित पक्षकारों को मानसिक क्षति और वाद व्यय की राशि भी अदा करनी होगी। आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए एक लाख रुपए और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपए का भुगतान करने को कहा है। आदेश में कहा गया कि राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर नहीं किया जाता है, तो भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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