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Friday,10-July-2026
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महाराष्ट्र

शिवसेना ने गडकरी के लेटर-बम के बाद दागी सवालों की मिसाइल

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 केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को शिवसैनिकों को लेकर की गई शिकायत के साथ लिखे गए पत्र (लेटर बम) के कुछ दिनों बाद अब शिवसेना ने पूरी ताकत से पलटवार किया है।

दरअसल गडकरी ने पत्र में शिवसैनिकों पर नेशनल हाईवे के काम में अड़चन डालने का गंभीर आरोप लगाया है। गडकरी ने सीएम से जल्द दखल देने की मांग करते हुए काम और रोकने की चेतावनी भी दे डाली है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के सीएम उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र के सार्वजनिक होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है।

वाशिम जैसे कुछ स्थानों पर शिवसेना नेताओं और कार्यकर्ताओं पर ठेकेदारों या अधिकारियों को धमकी देने, तर्कहीन मांग करने का आरोप लगाते हुए, गडकरी ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर काम प्रभावित हो रहा है।

नागपुर के रहने वाले भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मंत्री ने वाशिम जिले में चल रहे कार्यों को रोकने की धमकी दी और यहां तक कि अगर इस तरह के कृत्यों पर लगाम नहीं लगाई गई तो महाराष्ट्र से भविष्य की सभी राजमार्ग परियोजनाओं को बंद कर दिया जाएगा।

गडकरी आमतौर पर मृदुभाषी होने के लिए जाने जाते हैं। उनके इस पत्र के कठोर लहजे से आहत ठाकरे ने तुरंत गृह मंत्री दिलीप वालसे-पाटिल से कहा कि वह पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय पांडे को इस मामले की जांच करने का निर्देश दें।

इसके साथ ही, शिवसेना के वरिष्ठ नेता किशोर तिवारी – जिन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है – ने गडकरी के लेटर बम के बदले अब सवालों की एक मिसाइल दागी है और उनकी ओर से पूछा गया है कि गडकरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने पहले के लिखे गए उस पत्र का प्रचार क्यों नहीं किया, जिसमें उन्होंने सड़क ठेकेदारों से ‘जबरन वसूली’ की मांग करते हुए पूरे भारत के भाजपा के राजनीतिक और निर्वाचित नेताओं का नाम लिया था।

गडकरी की शिकायत मुख्य रूप से चल रही राजमार्ग परियोजनाओं के वाशिम-अकोला खंड से संबंधित है, जहां उन्होंने कहा कि शिवसेना वर्कर्स ने सड़क निर्माण मशीनों को जला दिया है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शिवसेना के नेता और निर्वाचित प्रतिनिधि इस तरह के व्यवहार को दोहराते हैं तो परियोजनाओं को जारी रखना मुश्किल होगा।

जवाब में, वाशिम-यवतमाल से शिवसेना सांसद भावना गवली-पाटिल ने कहा कि गडकरी को गुमराह किया गया है और उन्होंने बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में स्थानीय बाधाएं हैं, जिनका वह पता लगा लेंगी।

यह दावा करते हुए कि अधिकांश राजनीतिक दल आकर्षक सड़क अनुबंधों में इस तरह की गतिविधियों में लिप्त हैं, तिवारी ने आरोप लगाया कि मंत्री और उनके परिवार की कंपनियों का भी सभी सड़क और टोल अनुबंधों में हाथ है।

उन्होंने कहा कि 2014 से ही, कुछ भाजपा नेताओं के प्रति निष्ठा के कारण ठेकेदार रोड-टोल के ठेके हड़प लेते हैं और मोटी कमीशन के लिए दिवालिया कंपनियों या ब्लैक लिस्टेड संस्थाओं को भी उप-ठेके देते हैं, लेकिन घटिया गुणवत्ता की शिकायतों के बाद, कई परियोजनाओं को रोक दिया गया।

तिवारी ने गडकरी पर निशाना साधते हुए कहा, मेरे पास आपके समर्थकों की सूची है, यहां तक कि आपकी पिछली और वर्तमान कंपनियों के अलावा अन्य भाजपा राजनीतिक या निर्वाचित नेताओं के अलावा जो सड़क-टोल परियोजनाओं के नापाक सौदों में लगे हुए हैं और बैंकों के माध्यम से जनता के हजारों करोड़ रुपये लूट रहे हैं। क्या आप अपना पत्र पीएम, जनता को देंगे, जैसे कि आपने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को लिखा है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ट नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि अगर माहौल खराब रहा तो ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

पवार ने कहा कि चूंकि गडकरी ने सीएम को लिखा है, इसलिए सरकार जमीनी स्तर पर स्थिति की जांच करेगी, खासकर जब से ठाकरे ने हमेशा कहा है कि काम की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया जाएगा।

महाराष्ट्र

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार नहीं बल्कि भीड़तंत्र चला रहे: सामना में शिवसेना (यूबीटी)

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शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए उनकी सरकार पर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना में “भीड़तंत्र” चलाने और “वैश्विक स्तर का भ्रष्टाचार घोटाला” करने का आरोप लगाया है।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय में मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा विपक्ष के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई आक्रामक भाषा की आलोचना की गई। साथ ही आरोप लगाया गया कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के घाट खंड को बाईपास करने के लिए बनाई जा रही ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना की लागत में करीब 2,500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

संपादकीय के अनुसार, दो सुरंगों, आठ लेन की सड़क और दो पुलों वाली 13 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत 4,797.55 करोड़ रुपये थी। इसमें दावा किया गया कि सामान्य लागत वृद्धि को ध्यान में रखने पर भी परियोजना की लागत 5,500 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन अंतिम व्यय बढ़कर 7,180 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

संपादकीय में दावा किया गया कि परियोजना की लागत करीब 540 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर बैठती है और इसे “भ्रष्टाचार का विश्व रिकॉर्ड” बताया गया। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि पहली ही बारिश में परियोजना में भारी रिसाव शुरू हो गया। संपादकीय में टिप्पणी की गई कि यदि कोई इस परियोजना में कथित भ्रष्टाचार पर शोध करे तो वह “कैम्ब्रिज या ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट हासिल कर सकता है।”

संपादकीय में मुख्यमंत्री फडणवीस की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की गई कि उन्होंने कथित तौर पर जनता और विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा था, “हमारे भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना महाराष्ट्र की बदनामी है। राज्य की बदनामी करने वालों से मैं सख्ती से निपटूंगा।” इसमें मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में राज्य के खर्च पर सवाल उठाने वाले नागरिकों और विपक्षी नेताओं को “किराए के लोग” और अन्य अपमानजनक शब्दों से संबोधित करने की भी निंदा की गई।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने संपादकीय में कहा कि राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस प्रकार की भाषा किसी जनप्रतिनिधि की नहीं बल्कि “गुंडों” की भाषा है। पार्टी ने सवाल किया कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश की जा रही है।

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि इस तरह के भ्रष्टाचार से कमाए गए धन का इस्तेमाल विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त में किया जा रहा है। इसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री फडणवीस का राज्य से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है, बल्कि वे “मुगलों और अंग्रेजों” की तरह व्यवहार कर रहे हैं जिनकी एकमात्र नीति “लूट कर भाग जाना” थी।

संपादकीय में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्रियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि राज्य में सुसंस्कृत नेतृत्व की परंपरा रही है। इसमें राज्य के पहले मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण की बुद्धिमत्ता, संयम और राजनीतिक परिपक्वता की सराहना की गई।

संपादकीय में आगे कहा गया कि वसंतराव नाईक, वसंतदादा पाटिल, शरद पवार, विलासराव देशमुख, मनोहर जोशी और उद्धव ठाकरे सहित विभिन्न दलों के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखी और विधानसभा के मंच का इस्तेमाल विपक्ष को धमकाने या कथित रूप से भ्रष्ट लोगों का बचाव करने के लिए नहीं किया।

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महाराष्ट्र

पुणे बिल्डिंग हादसा: मलबे से एक शव बरामद, 9 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, राहत-बचाव अभियान जारी

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पुणे के पास पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी स्थित कचरा प्रबंधन संयंत्र में इमारत गिरने के बाद गुरुवार को राहत और बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों ने बताया कि मलबे से अब तक एक शव बरामद किया गया है, जबकि 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। कई एजेंसियों की टीमें अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं।

यह तीन मंजिला इमारत वेस्ट-टू-एनर्जी (कचरे से बिजली बनाने वाले) प्लांट के ऊपर बनी हुई थी। बुधवार दोपहर पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) का बड़ा ढेर इमारत पर गिर गया, जिससे पूरी इमारत ढह गई और करीब 18 लोग मलबे में दब गए।

हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर 7 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। इसके बाद देर रात 2 और लोगों को बचा लिया गया, जिससे अब तक बचाए गए लोगों की संख्या 9 हो गई है।

बचाव अभियान की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 5वीं बटालियन के कमांडेंट एसबी सिंह ने बताया कि गुरुवार की सुबह मलबे से एक शव बरामद किया गया है, जबकि दो अन्य का पता भी चल गया है।

उन्होंने कहा, “एनडीआरएफ अपनी पूरी कोशिश कर रही है। हमने हाथों से खुदाई कर एक संकरी जगह बनाई है और उसी रास्ते से अंदर पहुंच रहे हैं। अब तक तीन शवों का पता चल चुका है, जिनमें से एक को बाहर निकाल लिया गया है।”

उन्होंने बताया कि दूसरा शव दूर से दिखाई दे रहा है, लेकिन उसे निकालने में अभी समय लगेगा।

एसबी सिंह ने कहा कि बचाव अभियान बेहद कठिन है, क्योंकि इमारत पूरी तरह अस्थिर हो चुकी है और कभी भी दोबारा गिर सकती है। इससे बचावकर्मियों की जान को भी खतरा बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “हमारी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इमारत दोबारा न गिर जाए। अगर ऐसा हुआ तो बचावकर्मी भी मलबे में फंस सकते हैं। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि अंदर फंसे लोगों पर और मलबा न गिरे।”

उन्होंने बताया कि इमारत करीब 45 डिग्री तक झुक गई है, इसलिए अंदर पहुंचना बेहद मुश्किल है। बचावकर्मियों को संकरे रास्तों से रेंगते हुए अंदर जाना पड़ रहा है।

एनडीआरएफ अधिकारी ने बताया कि भारी मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनसे होने वाले कंपन से इमारत फिर गिर सकती है। इससे मलबे में फंसे लोगों और बचावकर्मियों दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है, इसलिए मलबा हाथों से धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “इसमें समय जरूर लगेगा, लेकिन हम पूरी कोशिश कर रहे हैं।”

एसबी सिंह ने यह भी बताया कि लाइफ डिटेक्टर, ध्वनि पहचान उपकरण (अकॉस्टिक सेंसर) और स्निफर डॉग्स जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अब तक मलबे के नीचे किसी जीवित व्यक्ति के होने के संकेत नहीं मिले हैं।

अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय एंटनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी के कई कर्मचारी इमारत में मौजूद थे। यह कंपनी पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के साथ मिलकर 14 मेगावाट के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का संचालन करती है।

पीसीएमसी ने शुरुआत में बताया था कि मलबे में 23 लोगों के फंसे होने की आशंका थी। इनमें से 5 लोग बचाव दल के पहुंचने से पहले ही खुद बाहर निकलने में सफल हो गए थे।

राहत और बचाव अभियान में एनडीआरएफ, भारतीय सेना, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम फायर ब्रिगेड, पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) फायर ब्रिगेड और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार काम कर रही हैं।

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महाराष्ट्र

मुंबई: राज ठाकरे ने ‘मिसिंग लिंक’ सुरंग रिसाव को लेकर फडणवीस पर निशाना साधा

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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की ‘मिसिंग लिंक’ सुरंग में हाल ही में हुए पानी के रिसाव को लेकर राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला।महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को महायुति सरकार पर भावनात्मक बयानबाजी के पीछे अपनी नाकामियों को छिपाने का आरोप लगाया।

एमएनएस रेलवे कामगार सेना की वर्षगांठ के अवसर पर बोलते हुए मनसे प्रमुख ने विधानसभा में मुख्यमंत्री के बचाव पर सवाल उठाया और विपक्ष को इस मुद्दे का ‘राजनीतिकरण’ न करने की चेतावनी देने वाली उनकी टिप्पणी पर पलटवार किया।

विपक्ष की आलोचना पर मुख्यमंत्री फडणवीस की आपत्ति पर तंज कसते हुए राज ठाकरे ने कहा, “वाह! वे (देवेंद्र फडणवीस) कहते हैं कि इसे राजनीतिक रंग मत दो। जब कोई बोलता है, तो उनके लिए यह ‘राजनीति’ बन जाती है। विपक्ष में रहते हुए आप इतने सालों तक क्या कर रहे थे? पिछली सरकारों के खिलाफ आपने जो आंदोलन किए, क्या वे ‘राजनीति’ नहीं थे? अब जब आप पर दबाव बढ़ रहा है, तो आप कह रहे हैं कि विपक्ष राजनीति कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि मिसिंग लिंक पर सवाल उठाना महाराष्ट्र का अपमान कैसे हो सकता है?

2008 के रेलवे भर्ती आंदोलन को याद करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि उसी आंदोलन से मनसे को पहचान मिली और पार्टी का चुनाव चिन्ह भी रेल इंजन बना। रेलवे में मराठी युवाओं को रोजगार मिले, इसी उद्देश्य से आंदोलन किया गया था। महाराष्ट्र में रेलवे की भर्ती होने के बावजूद उसकी जानकारी उत्तर प्रदेश और बिहार के अखबारों में छपती थी, महाराष्ट्र के युवाओं तक नहीं पहुंचती थी। आंदोलन के बाद स्थानीय भाषा में परीक्षा देने की सुविधा शुरू हुई, जिससे हजारों मराठी युवाओं को नौकरी मिली।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि रेलवे की भर्ती, प्लेटफॉर्म पर स्टॉल आवंटन और रेलवे में कौन नौकरी कर रहा है, इस पर लगातार नजर रखें। ‘जागे रहो, सतर्क रहो, बेसावध मत रहो।’

मुख्यमंत्री के ‘देख लूंगा’ वाले बयान पर सवाल उठाते हुए मनसे अध्यक्ष ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। मुख्यमंत्री का हिंदी में दिया गया बयान महाराष्ट्र के विधायकों के लिए था या दिल्ली के नेताओं के लिए, यह भी सोचना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को जिम्मेदारी लेते हुए कहना चाहिए था कि वे मामले में हस्तक्षेप करेंगे और काम पूरा करवाएंगे।

राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई-पुणे का विकास पूरी तरह बिगड़ चुका है और इसे विकास बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री से अपील की कि फिलहाल सभी निर्माण कार्य रोककर पहले शहर की व्यवस्था सुधारें। उन्होंने कहा कि 1 मई को उद्घाटन हुआ और कुछ ही दिनों में टनल से पानी टपकने लगा और हिस्से गिरने लगे। आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण घटिया निर्माण हो रहा है और जनता को खराब सड़कें व अधूरे प्रोजेक्ट मिल रहे हैं। राज ठाकरे ने कहा कि 1800 के दशक में बने सीएसटी स्टेशन और पुराने पुल आज भी मजबूत हैं, जबकि नए प्रोजेक्ट कुछ ही समय में खराब हो रहे हैं।

राज ठाकरे ने राम मंदिर ट्रस्ट और चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर राम मंदिर में दान की रकम में चोरी हुई है तो इस पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि चोरी की बात करना धर्म का अपमान कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा के ही सांसद ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के 15 में से 12 ट्रस्टी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी दूसरी सरकार के समय ऐसी घटना होती तो भाजपा और आरएसएस बड़े आंदोलन करते।

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