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Wednesday,08-December-2021
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महाराष्ट्र

शिवसेना का केंद्र पर वार, यास गया मगर बंगाल की खाड़ी में मंडरा रहा अहंकार का ‘तूफान’

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पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच चल रही खींचतान के बीच शिवसेना ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘अहंकार का तूफान’ अब भी बंगाल की खाड़ी में मंडरा रहा है और केंद्र की ओर से राज्यों पर दबाव डालना गलत है। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में कहा गया है कि केंद्र को राजनीतिक जीत और हार को लेकर वृहद नजरिया अपनाना चाहिए क्योंकि इसके अभाव में देश की एकता को नुकसान पहुंच सकता है। शिवसेना ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्रियों मनमोहन सिंह, राजीव गांधी, पी वी नरसिंह राव और अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में केंद्र और राज्यों के बीच संघर्ष की चिंगारी नहीं भड़कती थी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बुलाई बैठक में शामिल न होकर आपदा प्रबंधन कानून का कथित तौर पर उल्लंघन करने के लिए 31 मई को बंदोपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। शिवसेना ने कहा, ‘चक्रवात यास आया और चला गया लेकिन अहंकार का तूफान अब भी बंगाल की खाड़ी पर मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राज्य के दौरे के दौरान बुलाई चक्रवात समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तो उपस्थित नहीं रहीं, बंदोपाध्याय भी शामिल नहीं हुए।’ शिवसेना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्र ने बंदोपाध्याय को ‘प्रतिनियुक्ति’ पर दिल्ली बुला लिया तो बनर्जी ने उनका इस्तीफा ले लिया और उन्हें अपना मुख्य सलाहकार बना लिया। केंद्र ने अब बंदोपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया और धमकी दी कि अगर इसका जवाब नहीं दिया गया तो मामला दर्ज किया जाएगा।

शिवसेना ने कहा ‘नौकरशाह बंगाल कैडर के हैं और वह मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। वह प्रधानमंत्री की बैठक में शामिल नहीं हुए क्योंकि वह उस समय चक्रवात को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ एक अन्य बैठक में थे। ऐसे झगड़े में वरिष्ठ नौकर शाहों की हालत सैंडविच जैसी हो जाती है।’ संपादकीय में कहा गया है, ‘नौकरशाह अपराधी कैसे हो सकता है अगर वह अपने राज्य के मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन कर रहा है तो … ? अगर वह प्रधानमंत्री की बैठक में शामिल होते तो राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करती।’ महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ दल ने कहा, ‘केंद्र का राज्यों पर दबाव डालना गलत है। हमारी एक संघीय व्यवस्था है। उन राज्य सरकारों का अपमान करना गलत है जिनकी राजनीतिक विचारधारा केंद्र से मेल नहीं खाती।’ पार्टी ने कहा, ‘नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में छह आरोपी हैं। चार को गिरफ्तार कर लिया गया है और दो अन्य को गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि वे दोनों भाजपा में शामिल हो गए। क्या संविधान ने केंद्र को इस तरीके से काम करने की शक्तियां दी हैं?’ उसने कहा, ‘केंद्र बंदोपाध्याय को सजा देकर ममता बनर्जी को सबक सिखाना चाहता है। यह देश की नौकरशाही को धमकी है। यह अहंकार की पराकाष्ठा है। केंद्र को राजनीतिक हार और जीत के लिए व्यापक दृष्टिकोण रखना चाहिए।’

महाराष्ट्र

कांग्रेस के बिना कोई अलग फ्रंट संभव नहीं : संजय राउत

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शिवसेना सांसद संजय राउत ने मंगलवार शाम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की।

ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा शिवसेना और कांग्रेस के रिश्ते अब राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रगाढ़ हो रहे हैं। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद संजय राउत ने कहा, राहुल गांधी से लंबी बात हुई है .. और जो बातचीत हुई है स्वभाविक है, राजनीतिक है . सब कुछ ठीक है। राहुल गांधी मुंबई आने वाले हैं, एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। फिलहाल ये पूरी तरह से तय नहीं हुआ है। उम्मीद है कि 27-28 दिसंबर को राहुल मुंबई आएंगे। उनकी उद्धव से मुलाकात हो सकती है।

संजय राउत ने कहा कि राहुल गांधी को आगे आना चाहिए बाकी पार्टी से बात करने के लिए। कांग्रेस के बिना कोई अलग फ्रंट संभव नहीं।

इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान को लेकर शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ ने तीखा संपादकीय लिखा था। सामना के संपादकीय में लिखा गया था, “कांग्रेस को राष्ट्रीय राजनीति से दूर रखना और इसके बिना संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के समानांतर विपक्षी गठबंधन बनाना सत्तारूढ़ बीजेपी और फासीवादी ताकतों को मजबूत करने जैसा है। यह सही है कि ममता बनर्जी ने बंगाल में कांग्रेस, वामपंथी दल का सफाया कर दिया है लेकिन कांग्रेस को राष्ट्रीय राजनीति से बाहर रखना एक तरह से मौजूदा फासीवादी ताकतों को मजबूत करना और बढ़ावा देना ही है।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन की सरकार है। ऐसे में संजय राउत का राहुल गांधी से मुलाकात करना कांग्रेस के लिए एक नया सहारा है। खासतौर पर ऐसे समय में जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी के राजनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर लगातार कांग्रेस पार्टी पर निशाना साध रहे हैं। साथ ही पार्टी का विस्तार करने के लिए लगातार टीएमसी में कांग्रेस के नेताओं को शामिल कराया जा रहा है।

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र कांग्रेस: भारत में पहले से लागू है पुतिन का ‘गवर्नेंस मॉडल’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यात्रा पर कटाक्ष करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस ने कहा है कि भारत में कॉरपोरेट्स की तुलना में अतिथि गणमान्य व्यक्ति का ‘गवर्नेंस मॉडल’ पहले से ही काम कर रहा है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव सचिन सावंत ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के नेतृत्व में रूसी व्यवसायी उस देश के तीन ‘कार्डिनल रूल्स’ का पालन कर रहे हैं।

सावंत ने ट्वीट कर कहा, “ये हैं: विपक्ष को कोई दान नहीं, सरकार की आलोचना नहीं और विपक्ष को कोई समर्थन नहीं। भारत में इन्हीं शर्तों का पालन कॉरपोरेट्स द्वारा किया जा रहा है।”

पिछले हफ्ते भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को सौंपे गए नए प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट (पीईटी) वित्तीय का हवाला देते हुए, कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों को केवल 95.64 प्रतिशत का चौंका देने वाला दान दिया है, जबकि बाकी (एक मामूली 4.36 प्रतिशत) विपक्ष की झोली में गया है।

सावंत ने 2020-2021 में कुल 245.70 करोड़ रुपये के दान के बारे में कहा, पीईटी ने भाजपा को 209 करोड़ रुपये का दान दिया और उसके दो सहयोगियों- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जनता दल (यूनाइटेड) को 25 करोड़ रुपये और केंद्रीय मंत्री पीके पारस के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी को 1 करोड़ रुपये का दान दिया।

दूसरी ओर, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल के लिए एक समान राशि के साथ सिर्फ 2 करोड़ रुपये मिले।

हालांकि, यूपीए और महाराष्ट्र दोनों में कांग्रेस की सहयोगी, शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 5 करोड़ रुपये मिले, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी को 1.70 करोड़ रुपये मिले।

सावंत ने कहा, “पीईटी द्वारा अन्य सभी दलों की अनदेखी की गई.. पिछले कुछ वर्षों में, विपक्षी दलों को कॉरपोरेट चंदे में भारी गिरावट आई है, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगियों के लिए अभूतपूर्व रूप से बढ़ोत्तरी देखने को मिली है।”

उन्होंने तर्क दिया कि चुनावी बांड विपक्षी दलों को कॉरपोरेट फंडिंग के लिए भूखा रखने के इरादे से तैयार किए गए थे, लेकिन “जब कोई समान अवसर नहीं है, तो लोकतंत्र अच्छे आकार में नहीं हो सकता है।”

सावंत ने तीखे स्वर में कहा, “मोदी सरकार का संविधान दिवस मनाना एक पाखंडी कृत्य था, क्योंकि इन्होंने खुद लोकतंत्र और संविधान दोनों को कमजोर किया है।”

दिलचस्प बात यह है कि जनता निर्वाचक इलेक्टोरल ट्रस्ट, एबीजी इलेक्टोरल ट्रस्ट, ट्रायम्फ इलेक्टोरल ट्रस्ट और न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट जैसे अन्य लोगों ने 2020-2021 की अवधि के लिए किसी भी राजनीतिक दल को ‘शून्य’ योगदान घोषित किया है।

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महाराष्ट्र

राहुल गांधी से मिलने से पहले संजय राउत ने ‘एमवीए को मिनी यूपीए’ घोषित किया

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के साथ मंगलवार को मुलाकात से पहले शिवसेना सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने घोषणा की है कि ‘महा विकास अघाड़ी सरकार एक मिनी-यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलायंस की तरह है।’ यह सरकार अच्छा काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या शिवसेना यूपीए में शामिल हो रही है? क्या वह उत्तर प्रदेश, गोवा और अन्य राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का समर्थन करेगी?

राउत ने बताया, “कांग्रेस एमवीए में शिवसेना और राकांपा के साथ सत्ता में है और राज्य सरकार बहुत अच्छा कर रही है। हम एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम के आधार पर काम करते हैं। यूपीए या यहां तक कि एनडीए के समान जहां अलग-अलग विचारों वाले दल राष्ट्रीय के लिए एक साथ आते हैं। “

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में, दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में कई वैचारिक मतभेद थे और कुछ ने अयोध्या में राम मंदिर का विरोध भी किया लेकिन सभी ने मिलकर काम किया।

राउत ने आग्रह किया, “एमवीए में समान न्यूनतम कार्यक्रम पर काम करने वाले अलग-अलग विचारों वाले तीन दल भी हैं। यह एक प्रयोग है और एमवीए एक मिनी-यूपीए की तरह है। इस तरह के प्रयोगों को देश में कहीं और अनुकरण किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि यूपीए हो या विपक्षी दल, उन्हें आगे आ कर विकल्प मुहैया कराना चाहिए और यह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राकांपा अध्यक्ष शरद पवार दोनों का दृष्टिकोण है।

राहुल गांधी के साथ अपनी आगामी मुलाकात पर, उन्होंने कहा कि शिवसेना अपने सहयोगियों के साथ बातचीत में दृढ़ता से विश्वास करती है और वे महाराष्ट्र, एमवीए के कामकाज और पूरे देश के भविष्य के विषय पर चर्चा करेंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या शिवसेना यूपीए में शामिल होगी और एकजुट होकर विभिन्न राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी, राउत ने कहा कि इन सभी मुद्दों के लिए सीएम ठाकरे सभी कारकों पर विचार करने और एमवीए भागीदारों के साथ चर्चा करने के बाद अंतिम निर्णय लेंगे।

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