राजनीति
महाराष्ट्र सरकार ने वैध परमिट के साथ 24 घंटे तक उत्खनित रेत के परिवहन की अनुमति दी
मुंबई, 3 जुलाई। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को घोषणा की कि वैध परिवहन परमिट लेने के बाद उत्खनित रेत के परिवहन की अनुमति 24 घंटे तक दी जाएगी।
राज्य विधानसभा में अपने बयान में मंत्री ने कहा कि वर्तमान में रेत उत्खनन की अनुमति सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक है और उत्खनित रेत के परिवहन की अनुमति शाम 6 बजे के बाद उन लोगों को दी जाती है जिन्होंने वैध परिवहन परमिट लिया है। भारी यातायात के मद्देनजर कुछ शहरों में रेत परिवहन की अनुमति नहीं है। विभिन्न विकास परियोजनाओं को पूरा करने के लिए रेत की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन, शाम 6 बजे के बाद रेत परिवहन पर प्रतिबंध के कारण उत्खनित रेत के परिवहन के लिए उपलब्ध वाहनों का उपयोग पूरी तरह से नहीं हो रहा था।
उन्होंने विधानसभा को बताया कि अन्य राज्यों से परिवहन की जाने वाली रेत के लिए ऐसे प्रतिबंध लागू नहीं हैं, क्योंकि उन्हें शून्य रॉयल्टी पास के आधार पर 24 घंटे परिवहन की अनुमति है। उन्होंने कहा, “शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच रेत परिवहन की अनुमति नहीं होने के कारण राज्य में रेत का उपयोग पूरी तरह से नहीं हो पाता है। इसलिए सरकार ने सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक उत्खनित रेत के स्टॉक का अधिकतम उपयोग करने के लिए कुछ शर्तों का पालन करते हुए वैध परमिट प्राप्त करके 24 घंटे परिवहन की अनुमति देने का निर्णय लिया है। सरकार वैध परमिट प्राप्त करने की सुविधा प्रदान कर रही है जो 24 घंटे उपलब्ध रहेगी।” मंत्री बावनकुले ने कहा कि उत्खनित रेत और उसके स्टॉक पर जियो-फेंसिंग की जाएगी, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित विभिन्न शर्तों के तहत उत्खनित रेत के परिवहन के लिए तैनात वाहनों में सीसीटीवी और जीपीएस सेवाएं भी लगाई जाएंगी। मंत्री की यह घोषणा महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की रेत नीति 2025 में 24 घंटे रेत परिवहन की अनुमति देने या विनियमित करने का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। परिवहन परमिट और ई-पास द्वारा संचालित होता है, जो ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जारी किए जाते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से कानूनी वितरण के लिए तहसीलदारों द्वारा प्रबंधित किया जाता है। स्थानीय ग्राम पंचायतें और नगर परिषदें निर्माण के लिए रॉयल्टी दरों पर रेत प्राप्त कर सकती हैं, लेकिन उपलब्ध कराए गए डेटा में चौबीसों घंटे संचालन का कोई संदर्भ मौजूद नहीं है।
इसके अलावा, मंत्री ने विपक्ष को आश्वासन दिया कि सरकार हाल ही में घोषित नई रेत नीति पर चर्चा के लिए तैयार है।
यह नीति अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने और एक स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रेत उत्खनन, वितरण और परिवहन को विनियमित करने पर केंद्रित है। इसमें रेत समूहों के लिए ई-नीलामी, एम-सैंड (कृत्रिम रेत) को बढ़ावा देना और घरकुल योजना के तहत ग्रामीण आवास लाभार्थियों के लिए मुफ्त रेत (5 बैग तक) शामिल है।
मंत्री बावनकुले ने कहा कि नदी की रेत पर निर्भरता कम करने के लिए, नीति एम-सैंड (निर्मित रेत) को बढ़ावा देती है, जिसमें प्रति जिले 50 क्रशर इकाइयाँ अधिकृत हैं और सरकारी परियोजनाओं में अनिवार्य उपयोग (शुरुआत में 20 प्रतिशत, तीन वर्षों में 100 प्रतिशत तक बढ़ाना) है। इससे अप्रत्यक्ष रूप से परिवहन पर प्रभाव पड़ता है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर उत्पादित कृत्रिम रेत पर ध्यान केन्द्रित हो जाता है, जिससे परिवहन रसद में कमी आ सकती है।
राष्ट्रीय समाचार
सीबीआई की कार्रवाई: मुंबई की कंपनी पर 93 करोड़ के बैंक फ्रॉड का केस दर्ज, कई ठिकानों पर छापेमारी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई की एक कंपनी के खिलाफ 93 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इसी के साथ केंद्रीय जांच एजेंसी ने कंपनी के कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया।
दरअसल, सीबीआई ने मुंबई की एक कंपनी के खिलाफ 93.44 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड का मामला दर्ज किया है और मुंबई में हंजर बायोटेक एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टरों से जुड़ी कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
इसे लेकर सीबीआई ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि यह मामला 30 सितंबर को पंजाब नेशनल बैंक, एसएएम ब्रांच, मुंबई की शिकायत पर दर्ज किया। यह केस हंजर बायोटेक एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड, उसके डायरेक्टरों और गारंटर, अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अज्ञात प्राइवेट व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी की आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दर्ज किया गया है।
इन अपराधों के कारण शिकायतकर्ता बैंक को लगभग 93.44 करोड़ रुपए का कथित गलत नुकसान हुआ। आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश रची, अपनी संबंधित पार्टी के इनवॉइस पर 135 करोड़ रुपए का टर्म लोन लिया और उस पैसे को उन कामों में इस्तेमाल किया या दूसरी जगह भेज दिया, जिनके लिए मंजूरी नहीं मिली थी, जिससे बैंक को नुकसान हुआ।
सीबीआई की ओर से की गई तलाशी के दौरान जांच से जुड़े बैंक के जरूरी दस्तावेज और प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद और जब्त किए गए। वहीं, कंपनी की ओर से की गई साजिश की पूरी हद का पता लगाने, सरकारी कर्मचारियों और प्राइवेट व्यक्तियों सहित इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की पहचान करने और लोन के पैसे का आखिर में कहां इस्तेमाल हुआ, यह पता लगाने के लिए जांच जारी है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
फ्लाईदुबई फ्लाइट में घायल पायलट कैप्टन स्मित की हालत में सुधार, भारत ने यूएई सरकार का जताया आभार

यूएई से इजरायल जा रहे अमीराती विमान फ्लाईदुबई फ्लाइट एफजेड1073 के कॉकपिट में बुधवार को हुई घटना में घायल भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का यूएई में इलाज चल रहा है। यूएई में भारतीय दूतावास ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।
दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, ”भारतीय बहादुर कैप्टन स्मित का बेहतरीन इलाज चल रहा है और वे तेजी से ठीक हो रहे हैं। हम उनके परिवार और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं और उनके जल्द ठीक होने में मदद कर रहे हैं। उनकी देखभाल के लिए हम यूएई सरकार का धन्यवाद करते हैं। हम भी उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने वालों के साथ शामिल हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार से बात की थी। उन्होंने स्मित मच्छार से उनका हालचाल जाना और जल्द स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने कहा कि आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, बल्कि यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात यह है कि आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है।
पीएम मोदी ने स्मित मच्छार से कहा कि पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है। महामृत्युंजय के जाप चल रहे हैं। आपकी हिम्मत, धैर्य और सूझबूझ ने लोगों की जान बचाई है। आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले लोग नहीं है, बल्कि जान बचाने वाले लोग हैं।
स्मित ने पीएम मोदी से कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि आपसे मेरी बात होगी।” स्मित के भावुक होने पर पीएम मोदी ने कहा, “आपने इतना बड़ा काम किया है कि हर देशवासी और पूरी दुनिया के लोग आपको देखने, आपसे बात करने के लिए आतुर हैं। आपने सचमुच में पूरे देश का नाम रोशन किया है।”
पीएम मोदी ने कहा कि भारत आपका स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक है। उन्होंने कहा, “अगर ऐसा (आप सभी की जान न बचाते) न करते तो पता नहीं, पूरे देश और भारत के पायलटों पर क्या-क्या बीतती। सभी पायलटों को किस तरह से देखा जाता। आपने सभी को बचा लिया है।”
इस दौरान पीएम मोदी ने सऊदी और यूएई सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन सरकारों ने स्मित की बहुत देखभाल की। मैं उनका बहुत आभारी हूं।
फ्लाइट में हुए हादसे के दौरान कैप्टन स्मित ने बहादुरी और साहस का काम था। हमलावर साथी पायलट के हमले के बाद गर्दन और हाथों में गंभीर चोट लगने के बावजूद वह रेंगते हुए आगे बढ़े, कॉकपिट खोला और इजरायली लोगों को अंदर मौजूद आतंकवादी पर काबू पाने का मौका दिया।
राष्ट्रीय समाचार
एआईएमई 2026 में भारतीय नौसेना के जहाज सह्याद्रि और कुलिश की भागीदारी संपन्न

भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश ने फिलीपींस में आयोजित बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास एआईएमई 2026 में अपनी भागीदारी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस अभ्यास की थीम “भरोसे की नींव, समुद्र में एकजुट” यानी “विश्वास में जड़ें, समुद्र में एकजुट” थी।
एआईएमई 2026 के दौरान भारतीय नौसेना के जहाजों ने हार्बर और सी फेज में विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। अभ्यास का उद्देश्य पेशेवर संवाद, संचालन संबंधी समन्वय और समुद्री प्रशिक्षण के जरिए भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच सहयोग और आपसी तालमेल को मजबूत करना था।
अभ्यास के उद्घाटन समारोह के बाद हार्बर फेज आयोजित किया गया। इसमें प्रमुख अधिकारियों के बीच संवाद, खेल गतिविधियां, योग, सामुदायिक संपर्क और विशेषज्ञ स्तर पर विचार-विमर्श जैसी गतिविधियां शामिल रहीं। इसके अलावा टेबल-टॉप एक्सरसाइज, ऑपरेशनल सिंक्रोनाइजेशन और प्री-सेल ब्रीफ के जरिए समुद्री चरण के लिए योजनाओं और तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
सी फेज के दौरान आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश ने विभिन्न समन्वित समुद्री अभ्यासों में हिस्सा लिया। इनमें मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर), विजिट-बोर्ड-सर्च-सीजर (वीबीएसएस) और अंडरवे रीप्लेनिशमेंट ड्रिल शामिल थीं।
इसके अलावा हेलीकॉप्टर से जुड़े अभ्यासों में क्रॉस-डेक लैंडिंग, वर्टिकल रीप्लेनिशमेंट और केसवैक (घायल या बीमार लोगों को चिकित्सा निकासी) ड्रिल भी की गईं। इन गतिविधियों के जरिए भाग लेने वाली समुद्री सेनाओं के बीच संचालन संबंधी समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा मिला।
एआईएमई 2026 के हार्बर और सी फेज ने भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने के साथ समुद्री सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाया। इससे प्रभावी समुद्री साझेदारी को और मजबूती मिली।
आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश की इस भागीदारी ने भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और महासागर के विजन के अनुरूप साझेदार समुद्री सेनाओं के साथ निरंतर सहयोग और जुड़ाव के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित किया।
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