राजनीति
आज आएंगे यूपी बोर्ड के नतीजे, मुख्यमंत्री ने बढ़ाया हौसला
यूपी बोर्ड आज हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम घोषित करने जा रहा है। 12 बजे लखनऊ से इसकी घोषणा होगी। पहले यह प्रयागराज मुख्यालय से घोषित होता रहा है। इस बार परंपरा तोड़कर राजधानी से होगा। परिणाम को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने बच्चों का हौसला बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ट्वीटर के माध्यम से लिखा कि “मेरे प्यारे बच्चों, आज यूपी बोर्ड का परीक्षाफल आना है। वैसे परीक्षा व परीक्षाफल आत्म विश्लेषण का माध्यम मात्र है। अत: प्रत्येक परीक्षाफल को सहजतापूर्वक स्वीकार करना ही श्रेष्ठ है। प्रभु श्री राम की कृपाा से आप सभी को मनोनुकूल परीक्षाफल की प्राप्ति हो।”
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 का परिणाम दोपहर 12.00 बजे लखनऊ में घोषित होगा। लोक भवन के मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा परीक्षा परिणाम की घोषणा करेंगे। यह पहला मौका होगा लखनऊ में पहली बार हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम घोषित होगा।
परीक्षार्थियों को वेबसाइट पर परिणाम देखने के लिए डेढ़ घंटे का और इंतजार करना होगा।
कोरोना संकट के कारण इस बार छात्र-छात्राओं को डिजिटल अंक पत्र और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के अंक व प्रमाण पत्र को वेबसाइट से डाउनलोड कर स्कूलों से छात्रों को वितरित किए जाएंगे। डिजिटल अंक पत्र और प्रमाण पत्र तीन दिनों के अंदर स्कूलों के प्रधानाचार्य के माध्यम से छात्रों को मिल जाएगा।
ज्ञात हो कि बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में कुल 5611072 विद्यार्थी पंजीत थे और इसमें से 480591 विद्यार्थी परीक्षा में अनुपस्थित रहे। ऐसे में 5130481 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। 18 फरवरी से शुरू हुईं बोर्ड परीक्षाएं छह मार्च को खत्म हुई थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या 1,300 के पार

नेपाल में पिछले हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,300 के पार पहुंच गई है। हर गुजरते दिन के साथ अलग-अलग जिलों में शव बरामद किए जा रहे हैं।
नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार ग्यारहवें दिन तक (शनिवार सुबह 8 बजे तक) 1,344 शव बरामद किए जा चुके हैं।
मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि 4,886 लोग (जिनमें 606 विदेशी भी शामिल हैं) अभी भी लापता हैं। इस बाढ़ ने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा दिया और मध्य नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर के आस-पास लोगों की जान-माल को भारी नुकसान पहुंचाया।
माना जा रहा है कि लापता लोगों में से बड़ी संख्या उन लोगों की है जो इन दो नदी कॉरिडोर पर बने 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे हुए हैं; वहां बचाव कार्य जारी है।
शुक्रवार को रसुवा जिले में 60 एमडब्ल्यू के अपर त्रिशूली 3ए प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा बचाया गया। नेपाल सरकार ने कहा कि लापता लोगों को खोजने के लिए बचाव कार्य जारी है, साथ ही शवों को निकालने, उनकी पहचान करने और राहत कार्यों में भी टीम सदस्य जुटे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने बाढ़ पीड़ित इलाकों में खोज और बचाव अभियान तेज कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि अब तक 8,962 लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 1,552 विदेशी शामिल हैं।
बरामद शवों की पहचान करने की कोशिशें भी तेज कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, 1,260 मृतकों और मृतकों के 1,012 रिश्तेदारों से डीएनए सैंपल लिए गए हैं, जिससे कुल सैंपल की संख्या 2,272 हो गई है।
नेपाल पुलिस ने खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए 7,912 कर्मियों को तैनात किया है। पुलिस के 65 कर्मी इस आपदा का शिकार हुए हैं, जबकि 25 अभी भी लापता हैं।
बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के आस-पास के बुनियादी ढांचे और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। बचाव और राहत कार्य पूरा होने के बाद नेपाल इनके पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग कर रहा है।
राजनीति
शिक्षक दिवस पर अखिलेश का योगी सरकार पर हमला, बोले- ‘बंद स्कूल खुलेगा, तो पीडीए पढ़ेगा’

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शिक्षक दिवस पर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में बंद किए गए प्राथमिक विद्यालयों को फिर से खोलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही शोषित, वंचित, गरीब और पीड़ित समाज में सामाजिक-राजनीतिक चेतना और जागरूकता पैदा कर सकती है।
इसी संदेश के साथ समाजवादी पार्टी शुक्रवार को प्रदेश के बंद प्राथमिक विद्यालयों में ‘पाठशाला पुकारे’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पार्टी का नारा है— ‘बंद स्कूल खुलेगा, तो पीडीए पढ़ेगा।’
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्टर जारी कर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा कि उप्र में जो 26 हज़ार प्राथमिक विद्यालय भाजपा सरकार ने बंद किए हैं, उन सभी स्कूलों में समाजवादी पार्टी आज शिक्षक दिवस 5 सितंबर के दिन ‘पाठशाला पुकारे’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जिसका मूल उद्देश्य ये संदेश देना है कि ‘बंद स्कूल खुलेगा, तो पीडीए पढ़ेगा’।
सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि इस कार्यक्रम के पीछे मूल भावना ये है कि शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए क्योंकि शिक्षा से ही शोषित-वंचित, गरीब-पीड़ित समाज में वो सामाजिक-राजनीतिक चेतना और जागरूकता आएगी जो प्रभुत्ववादियों के वर्चस्व को चुनौती देकर भेदभाव को खत्म करेगी, बराबरी लाएगी और समता-समानता पर आधारित ‘सामाजिक न्याय का राज’ लाकर सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाएगी, हमारे ‘बंधु राष्ट्र’ के संकल्प को साकार कर दिखाएगी।
इसके पहले अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में उनकी सरकार बनने पर बंद किए गए 26 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को फिर से खोला जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देने के बजाय सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है, जिसका सबसे अधिक असर पीडीए वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा से ही वंचित और पिछड़े समाज में जागरूकता और सामाजिक चेतना पैदा होगी तथा बराबरी और सामाजिक न्याय की दिशा मजबूत होगी।
राष्ट्रीय समाचार
शिक्षक दिवस पर राहुल गांधी और खड़गे ने दी शुभकामनाएं, डॉ. एस राधाकृष्णन को किया नमन

शिक्षक दिवस पर लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दी और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर याद किया।
राहुल गांधी ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें सादर नमन। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को हार्दिक शुभकामनाएं। अपने ज्ञान, सेवा और समर्पण से आप छात्रों का भविष्य संवारते हैं और देश की आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते हैं। आपका योगदान अमूल्य है।”
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया और पोस्ट में लिखा, “आज भारत की शिक्षा व्यवस्था हमारे सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हमें मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी है, जहां हर छात्र को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एक उज्ज्वल भविष्य मिले।”
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “शिक्षक ही लोगों की सोच को आकार देते हैं, उनमें अच्छे संस्कार डालते हैं और हमारे देश के भविष्य की नींव रखते हैं। शिक्षक दिवस पर हम उन सभी शिक्षकों का सम्मान करते हैं, जिनका ज्ञान, धैर्य और समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता है। हम भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन को भी श्रद्धांजलि देते हैं, जो एक महान दार्शनिक, शिक्षक और राजनेता थे। उनकी बुद्धिमत्ता हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।”
बता दें कि डॉ. राधाकृष्णन का योगदान शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा रहा है। साल 1948 में उनकी अध्यक्षता में ‘विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग’ का गठन किया गया था, जिसने स्वतंत्र भारत में उच्च शिक्षा की रूपरेखा तैयार की और ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ (यूजीसी) की स्थापना की मजबूत सिफारिश की थी।
1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति बने, लेकिन इसके बाद भी उनका जीवन बेहद सादा रहा। कहा जाता है कि जब वे राज्यसभा के सभापति थे, तो सदन में तीखी बहस होने पर वे अचानक संस्कृत के श्लोक या बाइबिल की पंक्तियां पढ़ने लगते थे, जिससे तनाव भरा माहौल तुरंत शांत हो जाता था।
1962 में जब उन्होंने राष्ट्रपति का पद संभाला, तो उनके कुछ पुराने छात्रों और दोस्तों ने 5 सितंबर को उनका जन्मदिन बड़े स्तर पर मनाने की इजाजत मांगी। इस पर उन्होंने बड़ी विनम्रता से जवाब दिया, जो उनके महान चरित्र का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने कहा था, “मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय, यदि 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।” तभी से हर साल 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
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