राजनीति
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र कर पीएम मोदी बोले, ‘22 अप्रैल का बदला 22 मिनट में लिया’
बीकानेर, 22 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राजस्थान के बीकानेर में एक सभा को संबोधित करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि हमने 22 अप्रैल का बदला 22 मिनट में ले लिया।
पीएम मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “22 अप्रैल के हमले के जवाब में हमने 22 मिनट में आतंकियों के 9 सबसे बड़े ठिकाने तबाह कर दिए। दुनिया ने और देश के दुश्मनों ने भी देख लिया है कि जब सिंदूर बारूद बन जाता है तो नतीजा क्या होता है।”
उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने तीनों सेनाओं को खुली छूट दी। तीनों सेनाओं ने मिलकर ऐसा चक्रव्यूह रचा कि पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया। राजस्थान की ये वीर धरा हमें सिखाती है कि देश और देशवासियों से बड़ा और कुछ नहीं है। 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने धर्म पूछकर हमारी बहनों की मांग का सिंदूर उजाड़ दिया था। वो गोलियां पहलगाम में चली थी, लेकिन उन गोलियों से 140 करोड़ देशवासियों का सीना छलनी हुआ था। इसके बाद हर देशवासी ने एकजुट होकर संकल्प लिया था कि आतंकवादियों को मिट्टी में मिला देंगे। उन्हें कल्पना से भी बड़ी सजा देंगे। आज आपके आशीर्वाद से देश की सेना के शौर्य से हम सब उस प्रण पर खरे उतरे हैं।”
प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से निपटने के लिए तीन सूत्रों पर भी बात की। पीएम मोदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद से निपटने के तीन सूत्र तय कर दिए हैं। पहला- भारत पर आतंकी हमला हुआ तो करारा जवाब मिलेगा। समय हमारी सेनाएं तय करेंगी, तरीका भी हमारी सेनाएं तय करेंगी और शर्तें भी हमारी होंगी। दूसरा- एटम बम की गीदड़ भभकियों से भारत डरने वाला नहीं है। तीसरा- हम आतंक के आकाओं और आतंक की सरपरस्त सरकार को अलग-अलग नहीं देखेंगे, उन्हें एक ही मानेंगे। पाकिस्तान का ये खेल अब नहीं चलेगा।”
पीएम मोदी ने पाकिस्तान को भारी कीमत चुकाने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब भारत ने दो टूक साफ कर दिया है कि हर आतंकी हमले की पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ये कीमत पाकिस्तान की सेना और वहां की अर्थव्यवस्था चुकाएगी। पाकिस्तान ने अगर आतंकियों को एक्सपोर्ट करना जारी रखा तो उसको पाई-पाई के लिए मोहताज होना होगा। पाकिस्तान को भारत के हक का पानी नहीं मिलेगा। भारतीयों के खून से खेलना पाकिस्तान को अब महंगा पड़ेगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ये संयोग ही है कि 5 साल पहले जब बालाकोट में देश ने एयर स्ट्राइक की थी, उसके बाद मेरी पहली जनसभा राजस्थान में ही सीमा पर हुई थी। वीरभूमि का ही ये तप है कि ऐसा संयोग बन जाता है। अब इस बार जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ, तो उसके बाद मेरी पहली जनसभा फिर यहां बीकानेर में आप सभी के बीच हो रही है।
उन्होंने आगे कहा, “एयर स्ट्राइक के बाद मैं जब चुरू आया था, तो मैंने कहा था कि “सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा।” आज मैं राजस्थान की धरती से देशवासियों से बड़ी नम्रता से कहना चाहता हूं कि जो सिंदूर मिटाने निकले थे, उन्हें मिट्टी में मिलाया गया है। जो हिंदुस्तान का लहू बहाते थे, आज कतरे-कतरे का हिसाब चुकाया है। जो सोच चुके थे कि भारत चुप रहेगा, आज वो घरों में दुबके पड़े हैं। जो अपने हथियारों पर घमंड करते थे, आज वो मलबे के ढेर में दबे हुए हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “ये शोध-प्रतिशोध का खेल नहीं, ये न्याय का नया स्वरूप है। ये ‘ऑपरेशन सिंदूर’ है। ये सिर्फ आक्रोश नहीं है, ये समग्र भारत का रौद्र रूप है। ये भारत का नया स्वरूप है। पहले घर में घुसकर वार किया था, अब सीधा सीने पर प्रहार किया है। आतंक का फन कुचलने की यही नीति है, यही रीति है। यही भारत है, नया भारत है।”
महाराष्ट्र
एफडीए ने जोगेश्वरी में कॉस्मेटिक्स स्टोर पर बड़ी छापेमारी की, बिना लेबल वाला टॉयलेट सोप ज़ब्त किया

मुंबई, 16 जुलाई, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए), ग्रेटर मुंबई डिवीजन की एक टीम ने मेसर्स जेके सोप बाजार, 10/11, कादिर इस्माइल एस्टेट, मोमिन कॉलोनी के पास, पटेल एस्टेट रोड, जोगेश्वरी (वेस्ट), मुंबई – 400102 में एक बड़ी रेड की। 14 जुलाई, 2026 को की गई कार्रवाई के दौरान, यह देखा गया कि दुकान में बिना लेबल वाला टॉयलेट सोप स्टोर करके बेचा जा रहा था। ज़ब्त किए गए साबुन में बैच/लॉट नंबर, बनने की तारीख, ‘पहले इस्तेमाल’ की तारीख, बनाने का लाइसेंस नंबर और बनाने वाले का नाम और पता जैसी कानूनी जानकारी नहीं थी। बिना ऐसी ज़रूरी लेबलिंग के कॉस्मेटिक्स बेचना कानून का उल्लंघन है। इस कार्रवाई के दौरान, लगभग 10,93,692 रुपये का टॉयलेट सोप ज़ब्त किया गया, और चल रही जांच के तहत एनालिसिस के लिए दो सैंपल लिए गए। इस मामले में आरोपी नबीउल्लाह है और उसके खिलाफ ज़रूरी कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है। “फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन लोगों की हेल्थ की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देता है। कानून के मुताबिक बिना लेबलिंग के किसी भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को बाज़ार में बेचना बहुत गंभीर मामला है। ऐसे प्रोडक्ट के सोर्स, क्वालिटी और सेफ़्टी को वेरिफ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, नियम तोड़ने वाले मैन्युफ़ैक्चरर, डिस्ट्रीब्यूटर और सेलर्स के ख़िलाफ़ सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” यह चेतावनी महाराष्ट्र राज्य के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर, तकाराम मांधे ने दी।
महाराष्ट्र
मुंबई रेलवे नेटवर्क में विस्तार प्रोजेक्ट को पूरा करने में बड़ी रुकावट, रेलवे की ज़मीन पर कब्ज़े की वजह से कई प्रोजेक्ट में देरी हो रही है, आर टी आई से पता चला

मुंबई; मुंबई शहर में रेलवे प्रोजेक्ट्स में देरी का एक बड़ा कारण रेलवे की ज़मीन पर कब्ज़ा है। इसके अधिग्रहण में देरी के कारण प्रोजेक्ट्स में देरी हुई है और उनके अनुमान भी बढ़ गए हैं, यह बात आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गिलगली द्वारा फाइल की गई एक आरटीआई जानकारी में सामने आई है। आरटीआई से पता चला है कि एमआरवीसी के दो बड़े रेल प्रोजेक्ट्स के लिए 1,574 कब्ज़ों की पहचान की गई है, जो करीब 17,000 स्क्वायर मीटर ज़मीन पर कब्ज़ा किए हुए हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गिलगली द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) एक्ट, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी से पता चला है कि मुंबई रेल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमआरडीसी) के दो बड़े रेल प्रोजेक्ट्स के लिए ज़मीन अधिग्रहण के दौरान कुल 1,574 कब्ज़ों की पहचान की गई थी। इनमें से अब तक 998 कब्ज़े हटा दिए गए हैं, जबकि करीब 17,068 स्क्वायर मीटर ज़मीन पर कब्ज़ा पाया गया। एमआरवीसी की तरफ से RTI एक्टिविस्ट अनिल गिलगली को 14 जुलाई, 2026 को दी गई जानकारी के मुताबिक, यह जानकारी कल्याण-बदलापुर तीसरी और चौथी रेल लाइन प्रोजेक्ट और ऐरोली-कोला एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़ी है।
कल्याण-बदलापुर तीसरी और चौथी रेल लाइन प्रोजेक्ट
एमआरवीसी के मुताबिक, कल्याण और बदलापुर के बीच सेंट्रल रेलवे की तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए ज़मीन अधिग्रहण के दौरान 706 कब्ज़ों की पहचान की गई। इनमें रेलवे की ज़मीन और नई अधिग्रहित ज़मीन पर बनी झोपड़ियाँ और दूसरे स्ट्रक्चर शामिल हैं। इनमें से 620 कब्ज़े हटा दिए गए हैं, जबकि करीब 9668 स्क्वायर मीटर ज़मीन पर कब्ज़े पाए गए। एमआरवीसी ने यह भी कहा कि हर कब्ज़ा अलग-अलग सालों में हुआ, इसलिए किसी खास साल की पहचान करना मुमकिन नहीं है। प्रोजेक्ट के लिए पहचाने गए कब्ज़े कल्याण और बदलापुर रेलवे स्टेशनों के बीच हैं। ऐरोली – कलवा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट
ऐरोली – कलवा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन खरीदने के दौरान, 868 कब्ज़ों की पहचान की गई। इनमें रेलवे की ज़मीन और नई खरीदी गई ज़मीन पर हुए कंस्ट्रक्शन शामिल थे। अब तक 378 कब्ज़े हटाए जा चुके हैं, जबकि करीब 7400 वर्ग मीटर ज़मीन पर कब्ज़ा पाया गया। ये कब्ज़े दीघा गांव और कलवा स्टेशन के बीच हैं। एमआरवीसी ने यह भी साफ़ किया कि सभी कब्ज़े अलग-अलग सालों में हुए थे।
दोबारा कब्ज़ों की जानकारी नहीं
आरटीआई एप्लीकेशन में यह भी पूछा गया कि कब्ज़े हटाने के बाद कितने इलाकों में फिर से कब्ज़ा हो गया। एमआरवीसी ने जवाब दिया कि इससे जुड़ी जानकारी नहीं है।
अनिल गिलगली ने ज़रूरी सवाल उठाए।
आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गिलगली ने कहा कि मुंबई में रेलवे प्रोजेक्ट्स में कब्ज़े एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में देरी, लागत बढ़ने और सरकारी पैसे पर ज़्यादा बोझ की एक बड़ी वजह अतिक्रमण है। सिर्फ़ कब्ज़े हटाना काफ़ी नहीं है। रेलवे और एमआरवीसी को यह पक्का करना चाहिए कि हटाए गए इलाकों में दोबारा कोई अतिक्रमण न हो। इसके लिए रेगुलर मॉनिटरिंग, सुरक्षा उपाय और जवाबदेही ज़रूरी है।
गिलगली ने यह भी मांग की कि सभी रेल प्रोजेक्ट्स के लिए ज़मीन अधिग्रहण, अतिक्रमण, पुनर्वास और अतिक्रमण हटाने में हुई प्रगति की जानकारी समय-समय पर एक पब्लिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि पारदर्शिता बढ़े और नागरिकों को रियल-टाइम जानकारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि मुंबई के तेज़ी से बढ़ते रेल नेटवर्क के लिए ज़मीन का होना बहुत ज़रूरी है। अगर अतिक्रमण को ठीक से कंट्रोल नहीं किया गया, तो भविष्य में कई पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है। इसलिए, सरकार, रेलवे और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन को मिलकर इसका पक्का हल निकालना चाहिए।
अपराध
ठाणे क्राइम ब्रांच ने सुलझाई बेरहम कत्ल की गुत्थी; दोस्त की हत्या कर शव के टुकड़े फेंकने के आरोप में दो भाई गिरफ्तार

ठाणे, 16 जुलाई: अपराध की दुनिया में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए ठाणे क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को एक बेहद बेरहम मर्डर केस की गुत्थी सुलझा ली है। इस मामले में दो सगे भाइयों ने कथित तौर पर अपने ही एक करीबी दोस्त की हत्या कर दी, उसके शव के टुकड़े-टुकड़े किए और उन्हें अलग-अलग सुनसान जगहों पर फेंक दिया।
यह मामला तब सामने आया जब उल्हासनगर यूनिट-4 क्राइम ब्रांच के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर राजेश गज्जल को एक गोपनीय सूचना मिली। सूचना के मुताबिक, ऑटो-रिक्शा चालक भाइयों—फैज मलीम (24) और अल्बान मलीम (23)—ने मुंब्रा के रहने वाले अपने दोस्त अमन शेख (23) की हत्या कर दी थी। जानकारी में आगे यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित का गला रेता, उसके शरीर को टुकड़ों में काटा और सबूत मिटाने के इरादे से उन टुकड़ों को अलग-अलग जगहों पर ठिकाने लगा दिया।
इस खुफिया जानकारी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए और ठाणे पुलिस कमिश्नर आशुतोष डुम्बरे के निर्देशों पर, एडिशनल पुलिस कमिश्नर पंजाबराव उगले, डिप्टी पुलिस कमिश्नर अमर सिंह जाधव और असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर शेखर बागड़े के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में सीनियर पीआई राजेश गज्जल, एपीआई श्रीरंग गोसावी और हेड कांस्टेबल गणेश गावड़े शामिल थे।
पुलिस ने दोनों आरोपी भाइयों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उनसे कड़ी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान, भाइयों ने कथित तौर पर कबूल किया कि 13 जुलाई 2026 की रात को उन्होंने अमन शेख का गला रेतकर उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद, उन्होंने शव को क्षत-विक्षत कर सिर, हाथ और पैरों को अलग कर दिया और अपराध को छिपाने के लिए अवशेषों को खराड़ी गांव के सुनसान इलाकों में फेंक दिया।
जांच अधिकारी अब इस हत्याकांड के पीछे के मकसद का पता लगाने, बाकी के सभी सबूतों को बरामद करने और हत्या तक ले जाने वाले घटनाक्रम को दोबारा रीक्रिएट करने में जुटे हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच चल रही है।
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