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Tuesday,05-May-2026
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आरबीआई ने नए लिक्विडिटी कवरेज नियमों का प्रभाव जानने के लिए बैंकों से की बातचीत

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मुंबई, 24 जनवरी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस हफ्ते नए लिक्विडिटी कवरेज नियमों के प्रभावों को समझने के लिए बैंकों से बातचीत की।

नए नियमों को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं कि इससे अर्थव्यवस्था में क्रेडिट फ्लो पर नकारात्मक असर हो सकता है।

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों ने कुछ फीडबैक दिए हैं, नियमों को स्थगित करने और इन नियमों से संभावित नुकसान से निपटने के लिए वैकल्पिक तंत्र की मांग की थी।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब संजय मल्होत्रा ​​ने हाल ही में आरबीआई के नए गवर्नर के रूप में पदभार संभाला है। उन्होंने शक्तिकांत दास का स्थान लिया है, जिन्होंने दिसंबर में केंद्रीय बैंक के प्रमुख के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया था।

बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी एक बड़ी समस्या बन गई है। गुरुवार को बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी की कमी 3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। इससे निपटने के लिए आरबीआई पिछले हफ्ते वेरिएबल रेपो रेट का ऑक्शन शुरू कर चुका है।

आरबीआई ने 25 जुलाई को एक ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया था, जिसके अनुसार बैंकों को इस वर्ष 1 अप्रैल से अपने जोखिमों को कवर करने के लिए अधिक धनराशि अलग रखनी होगी।

आरबीआई ने कहा कि हाल के वर्षों में बैंकिंग में तेजी से बदलाव आया है। टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग ने तत्काल बैंक हस्तांतरण और निकासी की क्षमता को सुगम बनाया है, लेकिन इससे जोखिम में भी वृद्धि हुई है, जिसके लिए सक्रिय प्रबंधन की आवश्यकता है। इस कारण बैंकों में मजबूती बढ़ाने के लिए लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो (एलसीआर) फ्रेमवर्क की समीक्षा की गई है।

बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग सुविधाओं (आईएमबी) से युक्त खुदरा जमाओं के लिए अतिरिक्त 5 प्रतिशत धनराशि को रन-ऑफ फैक्टर के रूप में आवंटित करें।

राष्ट्रीय समाचार

नीट यूजी परीक्षा: 551 शहरों में 22.79 लाख से अधिक उम्मीदवार परीक्षा में होंगे शामिल

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राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) रविवार दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे (आईएसटी) तक एक ही शिफ्ट में नीट यूजी 2026 का आयोजन करने जा रही है, जिसमें सुचारू और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत व्यवस्थाएं की गई हैं।

दिव्यांग/दिव्यांग वर्ग सहित, क्षतिपूर्ति समय के पात्र उम्मीदवारों को शाम 6:00 बजे तक परीक्षा देने की अनुमति होगी।

इस वर्ष नीट यूजी परीक्षा बड़े पैमाने पर आयोजित की जा रही है, जिसमें लगभग 22.79 लाख पंजीकृत उम्मीदवार भाग ले रहे हैं। यह परीक्षा भारत के 551 शहरों और विदेशों के 14 शहरों में 5,432 से अधिक केंद्रों पर पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित की जाएगी, जिससे यह विश्व स्तर पर सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक बन गई है।

राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण (एनटीए) ने परीक्षा के लिए एक व्यापक प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। समन्वित प्रयासों के तहत 674 शहर समन्वयक संचालन की देखरेख कर रहे हैं जबकि स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित करने के लिए 6,000 से अधिक पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है। केंद्र अधीक्षक, निरीक्षक, जिला प्रशासन और पुलिस बल भी सक्रिय रूप से शामिल हैं।

उम्मीदवारों को रविवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे के बीच अपने-अपने केंद्रों पर पहुंचना अनिवार्य है। प्रवेश द्वार दोपहर 1:30 बजे सख्ती से बंद हो जाएंगे और किसी भी परिस्थिति में देर से आने वालों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। पारंपरिक या धार्मिक पोशाक या पूरी बाजू के कपड़े पहनने वालों को विस्तृत सुरक्षा जांच के लिए समय देने हेतु समय से पहले पहुंचने की सलाह दी गई है।

दिशा-निर्देशों के अनुसार, उम्मीदवारों को उपस्थिति के लिए प्रवेश पत्र, वैध मूल फोटो पहचान पत्र और दो पासपोर्ट साइज की तस्वीरें साथ लाना अनिवार्य है। परीक्षा हॉल के अंदर केवल अनुमत वस्तुएं ही ले जाने की अनुमति है। इनमें पारदर्शी पानी की बोतल शामिल है जबकि मधुमेह रोगी दवाएं या केले, सेब या संतरे जैसे फल ले जा सकते हैं।

मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर, वॉलेट, आभूषण, धातु की वस्तुएं और खाद्य पैकेटों पर सख्त प्रतिबंध अब भी लागू हैं।

एनटीए ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे परीक्षा केंद्र का पता केवल मानचित्रों पर निर्भर रहने के बजाय एडमिट कार्ड से सत्यापित करें क्योंकि मानचित्र कभी-कभी गलत स्थान दिखा सकते हैं। यात्रा और मौसम संबंधी सलाह जारी की गई है, जिसमें उम्मीदवारों से अपने आने-जाने की योजना बनाने का आग्रह किया गया है।

अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, एनटीए ने कहा कि यह परीक्षा पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता और दक्षता के साथ, देश भर की राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और स्थानीय अधिकारियों के सहयोग से आयोजित की जाएगी।

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राष्ट्रीय समाचार

हैदराबाद में 6,000 लोगों ने एक साथ किया भुजंगासन, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज उपलब्धि

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तेलंगाना के कान्हा शांति वनम में 6,000 से ज्‍यादा योग प्रेमियों ने एक साथ ‘भुजंगासन’ किया। एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि एक ही समय पर यह आसन करने वाले लोगों की सबसे बड़ी भीड़ के तौर पर उनका नाम ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हो गया है।

आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव और केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस एशियाई रिकॉर्ड को बनाने में प्रतिभागियों का नेतृत्व किया।

‘योग महोत्सव’ के लिए हजारों उत्साही लोग इकट्ठा हुए, जो अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की 50-दिन की उलटी गिनती की शुरुआत का प्रतीक था। इस कार्यक्रम का आयोजन आयुष मंत्रालय के तहत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा किया गया था।

केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने कहा कि योग केवल भारत की प्राचीन विरासत ही नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक अनमोल उपहार है। आज दुनिया भर के नेता, पेशेवर और आम लोग योग का अभ्यास करते हैं और इससे लाभ उठाते हैं।

उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए हमें एक स्वस्थ, शांतिपूर्ण और अनुशासित समाज का निर्माण करना होगा। योग आज की आधुनिक चुनौतियों, जैसे तनाव, अस्वस्थ जीवनशैली और प्रदूषण का एक व्यावहारिक और किफायती समाधान प्रदान करता है।

रेड्डी ने कहा कि हैदराबाद, जिसे पहले से ही नवाचार और प्रौद्योगिकी के लिए विश्व स्तर पर पहचान मिली हुई है, उसे अब योग और समग्र कल्याण के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में भी उभरना चाहिए।

जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग समग्र कल्याण के लिए एक वैश्विक आंदोलन बन गया है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देता है।

उन्होंने कल्याण और स्वास्थ्य पर्यटन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि योग ने कल्याण और समग्र स्वास्थ्य सेवा के वैश्विक केंद्र के रूप में देश की पहचान को और मजबूत किया है।

हाल ही में शुरू की गई ‘योग 365’ पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि योग 365 अभियान के माध्यम से, आयुष मंत्रालय, हैबिल्ड और एमडीएनआईवाई के सहयोग से, नागरिकों को योग को अपने दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

21 जून तक 100-दिवसीय निःशुल्क योग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका लक्ष्य 1 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना और ‘योग मित्र’ प्रमाणन प्रदान करना है।

मंत्री ने घोषणा की कि अगला ‘योग महोत्सव’ मध्य प्रदेश के खजुराहो में आयोजित किया जाएगा, जो आईडीवाई 2026 की 25-दिवसीय उलटी गिनती का प्रतीक होगा। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत, वास्तुकला और कल्याण परंपराओं के संगम का प्रतीक होगा।

मंत्री ने जापान के ओसाका में आयोजित ‘वर्ल्‍ड एक्सपो 2025’ के दौरान छह महीने तक योग सत्र आयोजित करने के लिए ‘मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान’ और ‘योग प्रमाणन बोर्ड’ के प्रयासों की भी सराहना की।

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव, मोनालिसा दास ने संस्थान के योगदान को स्वीकार करते हुए कहा कि कान्हा शांति वनम उस शांति और संतुलन को दर्शाता है जिसे योग विकसित करने का प्रयास करता है। इस सभा का उद्देश्य स्वास्थ्य और एकता की दिशा में एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन को प्रज्वलित करना है।

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राष्ट्रीय समाचार

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी से चेन्नई में खाने-पीने के दाम बढ़ने की संभावना

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कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के दाम में वृद्धि के बाद शहर भर के रेस्तरां में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई गई है, जिससे होटल-रेस्तरां और आम जनता दोनों पर काफी प्रभाव पड़ सकता है।

इससे रेस्टोरेंट को बढ़ते परिचालन खर्चों से निपटने में मुश्किल हो रही है। जिसके चलते आने वाले दिनों में इडली, डोसा जैसे सामान्य नाश्ते की कीमतों में भी 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।

उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, पोंगल की एक थाली जिसकी कीमत वर्तमान में 80 हजार है, बढ़कर लगभग 115 रुपए हो सकती है, जबकि डोसे की कीमतें 150 रुपए से बढ़कर 200 रुपए से अधिक हो सकती हैं।

यह उछाल 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भारी वृद्धि के बाद आया है, जिसकी चेन्नई में कीमतें 3,200 रुपए से ऊपर पहुंच गई हैं। इसके विपरीत, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं है। इस वजह से व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए लागत का अंतर और भी बढ़ गया है।

रेस्तरां संचालकों का कहना है कि इस वृद्धि के कारण अतिरिक्त खर्चों को वहन करने के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है, जिससे उन्हें यह बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

कई प्रतिष्ठान रोजाना का खाना पकाने के लिए एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर हैं, कुछ प्रतिष्ठान प्रतिदिन 5 से 10 सिलेंडर तक खपत करते हैं। परिणामस्वरूप ऐसे व्यंजनों की तैयारी कम कर दी है जो गैस की ज्यादा खपत से बनते है।

हालांकि कुछ रेस्तरां ने बिजली से खाना पकाने के विकल्पों की ओर रुख करने पर विचार किया है, लेकिन बिजली की महंगी दरों ने भी अधिकांश के लिए इस बदलाव को आर्थिक रूप से अव्यवहार्य बना दिया है।

आतिथ्य सत्कार क्षेत्र वित्तीय दबाव को कम करने के लिए बिजली दरों में कमी और कर रियायतों सहित राहत उपायों की मांग कर रहा है। इसका असर सिर्फ रेस्टोरेंट तक ही सीमित नहीं है। निजी हॉस्टल और पेइंग गेस्ट आवास भी बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं, क्योंकि वे खाना पकाने के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों आपूर्ति पर निर्भर हैं।

हालांकि, तेल कंपनियों द्वारा ऐसे कई ऑपरेटरों को औपचारिक रूप से वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है, जिससे उन्हें निजी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता है।

इसके चलते आपूर्ति अनियमित हो गई है और कुछ मामलों में कमी के दौरान कीमतें काफी बढ़ गई हैं।

उद्योग से जुड़े हितधारकों का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने या क्षेत्र विशेष को आर्थिक राहत देने के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे न केवल आम उपभोक्ताओं के लिए खाद्य वस्तुएं महंगी हो जाएंगी, बल्कि लघु एवं मध्यम श्रेणी के खाद्य उद्यमों के अस्तित्व पर भी संकट गहरा सकता है।

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