राष्ट्रीय समाचार
उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान और बिजली गिरने से 18 लोगों की मौत, सीएम योगी ने जारी किए निर्देश
उत्तर प्रदेश में बीते कुछ दिनों से कई हिस्सों में अति वर्षा, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही 24 पशुओं की भी जान चली गई है, जिससे ग्रामीण इलाकों में लोगों को और ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। सीएम योगी ने कहा कि सरकार इस कठिन समय में हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। सीएम ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि घायलों का तुरंत और उचित इलाज कराया जाए ताकि किसी भी तरह की लापरवाही न हो।
सीएम योगी ने राहत कार्यों को तेज करने के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी जिलाधिकारी (डीएम) खुद फील्ड में मौजूद रहें और राहत कार्यों की निगरानी करें। साथ ही जरूरत पड़ने पर तुरंत शासन से समन्वय बनाकर मदद पहुंचाई जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि अति वर्षा, आंधी और बिजली गिरने से हुई जनहानि, पशुहानि और घायलों को 24 घंटे के अंदर मुआवजा दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन को पूरी गंभीरता और तेजी के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज अचानक बदल रहा है। कहीं तेज बारिश हो रही है तो कहीं ओले गिर रहे हैं। मई जैसे गर्म महीने में इस तरह की बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है, खासकर गरीब और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और मुश्किल बन गई है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान भी कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान घरों में ही रहें और खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहें।
राष्ट्रीय समाचार
मध्य पूर्व में तनाव के बीच सोने और चांदी में सीमित दायरे में कारोबार

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मध्य पूर्व में तनाव के बीच सोने और चांदी में मंगलवार को सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है और दोनों कीमती धातु हल्की गिरावट के साथ लाल निशान में थे।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट सुबह 9:50 पर 14 रुपए या 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 1,49,325 रुपए पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,49,325 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,49,950 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।
चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 673 रुपए या 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,43,222 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,42,907 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,43,927 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,540 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 73.21 डॉलर प्रति औंस थी।
मध्य पूर्व में लगातार तनाव बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी सेना ने ईरान के 7 छोटे जहाजों को डुबो दिया है।
ट्रंप ने बताया कि यह हमला उस समय किया गया था, जब यह छोटे जहाज होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमला कर रही थीं। हालांकि, ईरान ने कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन दावा है कि हॉर्मुज पर उसका ही कंट्रोल है।
दूसरी तरफ, वैश्विक अस्थिरता के बीच डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार कमजोरी देखी जा रही है। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) के डेटा के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोरी के साथ खुला और फिर इसमें और गिरावट देखी गई। फिलहाल यह 26 पैसे की कमजोरी के साथ 95.33 पर बंद हुआ है।
राजनीति
तमिलनाडु : डीएमके को बड़ा झटका, 15 प्रमुख मंत्री हारे

तमिलनाडु में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में डीएमके को चुनावी मोर्चे पर एक बड़ा झटका लगा है; पार्टी ने जिन 164 सीटों पर सीधे चुनाव लड़ा था, उनमें से वह केवल 59 सीटें ही जीत पाई और विपक्ष में चली गई।
चुनावों में डीएमके, तमिलगा वेट्री कजगम और एआईएडीएमके के बीच जबरदस्त त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला, जिसमें टीवीके की मजबूत लहर के चलते सत्ताधारी पार्टी अपना दबदबा कायम रखने में नाकाम रही।
चुनाव के नतीजे खासकर इसलिए चौंकाने वाले थे क्योंकि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, कई वरिष्ठ मंत्री और यहां तक कि विधानसभा अध्यक्ष भी हार गए; यह पूरे राज्य में सत्ता-विरोधी लहर का एक मजबूत संकेत था।
हारने वाले प्रमुख नेताओं में स्वास्थ्य मंत्री एम. सुब्रमण्यम सैदापेट से लगभग 28,500 वोटों से हार गए, जबकि स्कूली शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी तिरुवेरुम्बुर से चुनाव हार गए।
मंत्री टी.आर.बी. राजा मन्नारगुडी से हार गए, और मंत्री मूर्ति मदुरै पूर्व से 16,500 से ज्यादा वोटों से चुनाव हार गए।
वित्त मंत्री पी.टी.आर. पलानीवेल त्यागराजन को मदुरै मध्य से अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा, जहां एक बहुकोणीय मुकाबले में टीवीके के उम्मीदवार ने जीत हासिल की।
वरिष्ठ मंत्रियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों में झटके लगे; के.के.एस.एस.आर. रामचंद्रन अरुप्पुकोट्टई से हार गए और थंगम थेन्नारासु को अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा।
वरिष्ठ नेता दुरई मुरुगन काटपाडी से 7,600 से ज्यादा वोटों से हार गए, जबकि मंत्री मुथुसामी इरोड पश्चिम से 22,000 से ज्यादा वोटों से चुनाव हार गए।
मंत्री नासर (अवाडी), मतिवेंधन (रासीपुरम), आर. राजेंद्रन (सेलम उत्तर), गांधी (रानीपेट) और सामिनाथन (कांगेयम) भी चुनाव हारने वालों में शामिल थे।
अलंदूर में, टी.एम. अनबरसन 25,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव हार गए।
सबसे करीबी मुकाबलों में से एक तिरुपत्तूर में देखने को मिला, जहां मंत्री पेरियाकरुप्पन सिर्फ एक वोट से चुनाव हार गए; यह चुनाव की बेहद प्रतिस्पर्धी प्रकृति को दर्शाता है।
व्यापक हार के बावजूद, डीएमके नेतृत्व का एक हिस्सा अपनी सीटें बचाने में कामयाब रहा।
उदयनिधि स्टालिन चेपॉक से 7,300 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीते, जबकि मंत्री शेखरबाबू ने हार्बर से जीत हासिल की। के.एन. नेहरू ने तिरुचिरापल्ली पश्चिम सीट बरकरार रखी, और आई. पेरियासामी ने अथूर में जबरदस्त जीत दर्ज की।
चक्रपाणि ने ओडनछत्रम से आसानी से जीत हासिल की, जबकि ई.वी. वेलू ने तिरुवन्नामलाई सीट बहुत कम अंतर से बचाई।
मंत्री एम.आर.के. पन्नीरसेल्वम, मैय्यनाथन, सी.वी. गणेशन और के. चेझियान भी जीतने वालों में शामिल थे; इनके अलावा तिरुचेंदुर से अनीता राधाकृष्णन और अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से रघुपति, शिवशंकर और राजकन्नप्पन ने भी जीत हासिल की।
ये नतीजे तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक निर्णायक बदलाव का संकेत हैं; टीवीके के उभरने से वोट डालने के पारंपरिक तरीके काफी बदल गए हैं और डीएमके और एआईएडीएमके, दोनों का दबदबा कमजोर पड़ा है।
हालांकि डीएमके अपने कुछ ही मंत्रियों को जीत दिलाने में कामयाब रही, लेकिन उसके कई बड़े नेताओं की हार से यह साफ जाहिर होता है कि सत्ता में रहने के बाद अब विपक्ष की भूमिका निभाने की तैयारी कर रही इस पार्टी के सामने आगे कई चुनौतियां हैं।
राजनीति
बंगाल चुनाव : सुजापुर में टीएमसी की बड़ी जीत, सबीना यास्मीन ने कांग्रेस गढ़ में फिर मारी बाजी

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल सुजापुर विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है। 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की उम्मीदवार और राज्य सरकार में मंत्री सबीना यास्मीन ने शानदार जीत दर्ज करते हुए कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है।
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सबीना येस्मीन को कुल 1,12,795 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अब्दुल हन्नान को 60,287 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अभिजीत रजक 20,066 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
सुजापुर विधानसभा सीट (सीट नंबर 53) का राजनीतिक इतिहास काफी समृद्ध और दिलचस्प रहा है। 1957 में गठित इस सीट को लंबे समय तक कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता रहा। दिग्गज कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए.बी.ए. गनी खान चौधरी (बरकत दा) के परिवार का इस क्षेत्र पर वर्षों तक प्रभाव रहा। 1967 से 1977 तक गनी खान चौधरी की लगातार जीत, और बाद में रूबी नूर, मौसम नूर और ईशा खान चौधरी जैसे नेताओं ने इस विरासत को आगे बढ़ाया।
हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार इस किले में सेंध लगाते हुए जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में मोहम्मद अब्दुल गनी ने टीएमसी को ऐतिहासिक सफलता दिलाई थी। 2026 में पार्टी ने रणनीतिक बदलाव करते हुए उनकी जगह मोथाबाड़ी की पूर्व विधायक और मंत्री सबीना यास्मीन को चुनावी मैदान में उतारा और यह दांव पूरी तरह सफल साबित हुआ।
इस बार सुजापुर में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला, जिसमें टीएमसी की सबीना यास्मीन, कांग्रेस के अब्दुल हन्नान और भाजपा के अभिजीत रजक आमने-सामने थे। मालदा को पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, ऐसे में यह मुकाबला खास तौर पर टीएसी और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया था।
जनसांख्यिकीय दृष्टि से यह सीट काफी अहम है। सुजापुर एक अल्पसंख्यक (मुस्लिम) बहुल क्षेत्र है, जहां के मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
सुजापुर विधानसभा क्षेत्र ‘मालदा दक्षिण’ लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, टीएमसी की यह बड़ी जीत इस बात का संकेत है कि पार्टी ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
सबीना यास्मीन की निर्णायक जीत न सिर्फ उनके व्यक्तिगत राजनीतिक कद को मजबूत करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर लिया है।
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