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Saturday,17-October-2026
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रूस के कामचटका क्षेत्र में भूकंप के जबरदस्‍त झटके, र‍िक्‍टर स्‍केल पर 6.9 दर्ज की गई तीव्रता

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रूस के कामचटका प्रायद्वीप क्षेत्र में शुक्रवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस क‍िए गए। रूस की विज्ञान अकादमी की भूभौतिकी सेवा की कामचटका शाखा के मुताबिक, र‍िक्‍टर स्‍केल पर भूकंप की तीव्रता 6.9 दर्ज की गई। भूकंप के कारण हुए नुकसान या हताहतों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के हवाले से समाचार एजेंसी स‍िन्‍हुआ ने बताया क‍ि शुक्रवार को 03:35 (स्‍थानीय समयानुसार) पर रूस के ओजर्नोव्स्की से 76 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र 143.2 किलोमीटर की गहराई पर था और शुरुआती आकलन के अनुसार यह 52.01 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 157.25 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था।

रूसी समाचार एजेंसी ‘टास’ की र‍िपोर्ट के अनुसार, भूकंप के झटके महसूस होने के बाद क्षेत्रीय प्रशासनिक केंद्र के कई निवासी एहतियात के तौर पर अपने घरों और अपार्टमेंट से बाहर निकल आए।

रिहायशी इमारतों के अंदर झूमर और लाइटें जोर-जोर से हिलने लगीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि भूकंप के झटके साफ तौर पर महसूस हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थानीय समयानुसार दोपहर 3:35 बजे आए ये झटके करीब एक मिनट तक जारी रहे।

एनडीटीवी की र‍िपोर्ट के अनुसार, भूकंप के तुरंत बाद कोई सुनामी अलर्ट जारी नहीं किया गया। अमेरिकी नेशनल सुनामी वार्निंग सेंटर ने कहा कि झटकों के बाद कोई खतरा नहीं है।

कामचटका प्रायद्वीप ‘रिंग ऑफ फायर’ में टेक्टोनिक बेल्ट पर स्थित है, जो प्रशांत महासागर के अधिकांश हिस्से को घेरे हुए है और भूकंपीय गतिविधियों का एक हॉटस्पॉट है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिका कंपनी निल्सन भारत को बना रही अपना प्रमुख ग्लोबल इनोवेशन सेंटर : रिपोर्ट

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अमेरिका की मीडिया एनालिटिक्स कंपनी निल्सन भारत को अपना प्रमुख ग्लोबल इनोवेशन सेंटर बना रही है। देश में कंपनी के 5,000 से अधिक कर्मचारी हैं, जो उसके दुनियाभर के कुल कर्मचारियों का लगभग आधा हिस्सा हैं। बेंगलुरु कंपनी का सबसे बड़ा केंद्र है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

मनीकंट्रोल का हवाला देते हुए डेली सन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निल्सन के ग्लोबल इनोवेशन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अब भारत से आता है। कंपनी ने यहां विज्ञापन संबंधी जानकारी जुटाने और उसका विश्लेषण करने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी अनिल गोयल ने कहा कि एआई खेल आयोजनों में ब्रांड की दृश्यता पर नजर रखने और विभिन्न मीडिया माध्यमों में बंटे दर्शकों की संख्या का आकलन करने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने में मदद करता है।

उन्होंने कहा कि कंपनी ने भारत में अपने परिचालन को इस तरह विकसित किया है कि देश उसका ‘ग्लोबल इनोवेशन सेंटर’ बने, न कि केवल एक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी)।

गोयल के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया, “पारंपरिक जीसीसी के विपरीत, जहां भारत स्थित टीमें विदेशों में मौजूद अपने समकक्षों के अधीन काम करती हैं, निल्सन की स्थानीय टीमें उत्पादों का नेतृत्व करती हैं, फैसले लेती हैं और वैश्विक ग्राहकों के साथ सीधे काम करती हैं।”

गोयल ने कहा कि राजस्व के मामले में दूसरे बाजार भारत से आगे हैं, लेकिन भारतीय बाजार की तेज विकास दर के कारण यह कंपनी के उन शीर्ष 10 बाजारों में शामिल है, जहां विकास की सबसे अधिक संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि विज्ञापन सत्यापन और ब्रांड सुरक्षा पर केंद्रित कंपनी डबलवेरिफाई को शामिल किए जाने के बाद निल्सन की भारत में मौजूदगी और बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने भारत में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कुशल कर्मचारियों की बड़ी संख्या की भी सराहना की और कहा कि इससे यहां इनोवेशन संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के अवसर बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई का निल्सन के विज्ञापन विश्लेषण कारोबार पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। कंपनी भारत और अमेरिका सहित 30-40 प्रमुख बाजारों में टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट, पत्रिकाओं और आउटडोर मीडिया पर होने वाले विज्ञापन खर्च का आकलन करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, “पहले कंपनी सूचनाओं को संसाधित करने के लिए स्वचालन तकनीक और मैन्युअल काम के संयोजन पर निर्भर थी। उन कमियों को दूर करने के लिए 1,000 से अधिक कर्मचारी काम करते थे, जिन्हें तकनीक से हल नहीं किया जा सकता था।”

गोयल के अनुसार, एआई और बड़े भाषा मॉडल के इस्तेमाल से इन क्षेत्रों में मशीनों का योगदान पहले के 80-90 प्रतिशत से बढ़कर 97-98 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

रिपोर्टों में कहा गया है कि जैसे-जैसे अधिक उपभोक्ता फैसले लेने के लिए चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लॉड जैसे एआई टूल और एआई एजेंटों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसे-वैसे मीडिया खपत को मापने के पारंपरिक तरीकों के सामने नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

यूएस ट्रेजरी में चीन की घटी हिस्सेदारी, भारत की होल्डिंग बढ़कर 219 अरब डॉलर के पार

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यूएस ट्रेजरी में चीन की हिस्सेदारी अगस्त में तेजी से गिरी है, जबकि भारत की होल्डिंग में लगातार तीसरे महीने इजाफा दर्ज किया गया है। यह जानकारी अमेरिकी सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा में दी गई।

ट्रेजरी इंटरनेशनल कैपिटल (टीआईसी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि अगस्त के अंत में चीन की होल्डिंग्स जुलाई के 618 अरब डॉलर से घटकर 590.7 अरब डॉलर रह गई हैं। यह आंकड़ा एक साल पहले अगस्त 2025 में 699.7 अरब डॉलर पर था। यह दिखाता है कि बीते 12 महीनों में चीन की यूएस ट्रेजरी होल्डिंग्स में लगभग 109 अरब डॉलर की कमी आई है।

अगस्त में भारत की होल्डिंग्स जुलाई के 202.6 अरब डॉलर से बढ़कर 219.7 अरब डॉलर हो गई हैं, जो एक ही महीने में लगभग 17 अरब डॉलर की बढ़ोतरी को दिखाता है। इस साल अप्रैल में भारत की होल्डिंग्स गिरकर 181 अरब डॉलर के निचले स्तर पर आ गई थीं, लेकिन उसके बाद इनमें लगातार सुधार हुआ है और मई में ये 181.3 अरब डॉलर, जून में 186.4 अरब डॉलर और जुलाई में 202.6 अरब डॉलर तक पहुंच गईं। अब ये लगभग उसी स्तर पर वापस आ गई हैं, जहां एक साल पहले थीं।

ताजा आंकड़ों के बाद, दो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की होल्डिंग्स के बीच का अंतर, जो एक साल पहले लगभग 480 अरब डॉलर था, अब घटकर लगभग 371 अरब डॉलर रह गया है।

अमेरिकी ट्रेजरी की प्रमुख विदेशी धारकों की सूची में, भारत 14वें स्थान पर है। इस सूची में हांगकांग 261.5 अरब डॉलर के साथ भारत से आगे है, जबकि नॉर्वे 214 अरब डॉलर के साथ भारत के ठीक पीछे है।

जापान 1,068.3 अरब डॉलर की होल्डिंग के साथ सबसे बड़ा विदेशी धारक बना हुआ है, हालांकि जुलाई में इसकी होल्डिंग 1,103.9 अरब डॉलर थी। यूनाइटेड किंगडम 1,009.5 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। चीन (मुख्य भूमि) तीसरे स्थान पर है। इसके बाद बेल्जियम 490.5 अरब डॉलर, कनाडा 464.6 अरब डॉलर, केमैन आइलैंड्स 463 अरब डॉलर और लक्जमबर्ग 448.2 अरब डॉलर का स्थान है।

यूएस ट्रेजरी ने बताया कि अगस्त में 199.8 अरब डॉलर का नेट टीआईसी इनफ्लो हुआ। इसमें कहा गया है, “विदेशी निवासियों ने अगस्त में दीर्घकालिक अमेरिकी सिक्योरिटीज में अपनी होल्डिंग बढ़ाई, उनकी शुद्ध खरीदारी 300.7 अरब डॉलर रही।” वहीं दूसरी ओर, “विदेशी निवासियों ने अमेरिकी ट्रेजरी बिलों में अपनी होल्डिंग 47.8 अरब डॉलर कम कर दी।”

ट्रेजरी के अनुसार, सितंबर महीने के आंकड़ों को कवर करने वाली अगली टीआईसी रिपोर्ट 18 नवंबर को जारी की जाएगी।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने मार्को रुबियो से उठाई उइगरों की सुरक्षा की मांग

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वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (डब्‍ल्‍यूयूसी) ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अपील की है कि अगले सप्ताह उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान वह मध्य एशिया में रह रहे उइगर समुदाय की बढ़ती असुरक्षा और चीन की सीमाओं के बाहर होने वाले दबाव और दमन के मुद्दे को उठाएं।

डब्‍ल्‍यूयूसी के अनुसार, मध्य एशिया एक तरफ उन उइगरों के लिए शरणस्थली बनी है, जो चीन के शिनजियांग क्षेत्र में कथित उत्पीड़न से बचकर आए हैं, लेकिन दूसरी तरफ यहां भी वे निगरानी, धमकी, मनमानी हिरासत और चीन वापस भेजे जाने जैसे खतरों का सामना कर रहे हैं।

संगठन ने कहा कि उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों में रहने वाले उइगर लंबे समय से दबाव झेल रहे हैं। उनका कहना है कि बीजिंग इन देशों से उइगरों की राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के खिलाफ सहयोग की मांग करता रहा है।

डब्‍ल्‍यूयूसी ने याद दिलाया कि अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 2019 में मध्य एशियाई नेताओं के साथ बैठक के दौरान सार्वजनिक रूप से उइगरों का मुद्दा उठाया था और उनसे उइगरों को चीन वापस न भेजने की अपील की थी। उन्होंने 2020 में कजाकिस्तान की यात्रा के दौरान भी यही चिंता दोहराई थी।

संगठन का कहना है कि अब मार्को रुबियो के पास भी एक महत्वपूर्ण मौका है कि वह इसी तरह उइगरों के अधिकारों के समर्थन में अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराएं।

डब्‍ल्‍यूयूसी ने रुबियो से मांग की कि वह मध्य एशियाई सरकारों से कहें कि उइगरों को जबरन चीन न भेजा जाए। संगठन का कहना है कि चीन लौटाए जाने पर उन्हें उत्पीड़न, मनमानी हिरासत, यातना और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है।

संगठन ने आग्रह किया कि अमेरिका मध्य एशिया के देशों पर दबाव डाले कि वे उइगरों की निगरानी करने, उन्हें डराने-धमकाने, हिरासत में लेने या उनकी आवाज दबाने से जुड़े चीनी अनुरोधों को स्वीकार न करें। खासकर तब, जब वे सिर्फ अपने राजनीतिक विचार, शांतिपूर्ण सामाजिक गतिविधियां, धार्मिक आस्था या विदेश में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क बनाए रखते हों।

पिछले महीने डब्‍ल्‍यूयूसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से भी अपील की थी कि 24 सितंबर को राष्ट्रपति शी चिनप‍िंग की अमेरिका यात्रा के दौरान शिनजियांग में उइगरों के कथित नरसंहार और विदेशों में रह रहे उइगर समुदाय पर चीनी अधिकारियों के दबाव का मुद्दा उठाया जाए।

डब्‍ल्‍यूयूसी के अध्यक्ष तुर्गुनजान अलाउडुन ने कहा, “शी चिनप‍िंग की वाशिंगटन यात्रा केवल उइगर नरसंहार की निंदा करने तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने का एक अहम अवसर है। अमेरिका लंबे समय से उइगर लोगों का मजबूत और मुखर समर्थक रहा है, और डोनाल्ड ट्रंप को इस अवसर का उपयोग कर यह समर्थन जारी रखना चाहिए।”

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