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Saturday,17-October-2026
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भारत और आईओएम ने प्रवासन और रोजगार के अवसरों पर की चर्चा

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विदेश मंत्रालय (एमईए) की सचिव (सीपीवी और ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) महानिदेशक एमी पोप ने शुक्रवार को नई द‍िल्‍ली में बैठक की। इस दौरान वैश्विक प्रवासन और लोगों की आवाजाही के रुझानों पर चर्चा हुई। साथ ही बदलते माहौल में भारत के लिए नए अवसरों को बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।

विदेश मंत्रालय ने ‘एक्‍स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने वैश्विक प्रवासन और लोगों की आवाजाही के नए रुझानों पर विचार-विमर्श किया और इस बात पर चर्चा की कि भारत इन परिस्थितियों का बेहतर लाभ कैसे उठा सकता है।

इससे पहले गुरुवार को एमी पोप ने नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे से मुलाकात की।

बैठक में कौशल की मान्यता (स्किल्स रिकग्निशन), नैतिक भर्ती (एथिकल रिक्रूटमेंट) और ऐसे वैध रोजगार मार्गों पर चर्चा हुई जो श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उन्हें बेहतर अवसर प्रदान करें।

मुलाकात के बाद एमी पोप ने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “कौशल लोगों के लिए नए अवसर खोल सकता है, लेकिन लोगों की आवाजाही सुरक्षित होनी चाहिए और उससे लोगों को फायदा मिलना चाहिए। आज श्रम मंत्री शोभा करंदलाजे के साथ हमने कौशल की मान्यता, नैतिक भर्ती और सुरक्षित रोजगार मार्गों पर व्यावहारिक सहयोग को लेकर चर्चा की।”

एमी पोप ने चेन्नई में उन श्रमिकों से भी मुलाकात की जिन्हें आईओएम के मोबाइल वर्कर रिसोर्स सेंटरों के माध्यम से सहायता मिलती है।

उन्होंने कहा, “चेन्नई में मैंने ऐसे कामगारों से मुलाकात की जिन्हें आईओएम वहां मदद पहुंचा रहा है जहां वे रहते और काम करते हैं। सही समय पर सही जानकारी किसी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है। निजी क्षेत्र के सहयोग से संयुक्त राष्ट्र का प्रवासन संगठन और अधिक कामगारों तक यह सहायता पहुंचा रहा है।”

इस साल मई में, न्यूयॉर्क में आयोजित इंटरनेशनल माइग्रेशन रिव्यू फोरम 2026 के दौरान, विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भी एमी पोप से मुलाकात की थी।

उस बैठक में नियमित और सुरक्षित प्रवासन के अवसर बढ़ाने, उन्हें विविध बनाने तथा भारत में ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर माइग्रेशन और आईओएम की गतिविधियों के कार्यान्वयन पर चर्चा हुई थी। कीर्ति वर्धन सिंह ने उस समय कहा था कि भारत सुरक्षित, व्यवस्थित और कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

कुल मिलाकर, हाल की बैठकों में भारत और आईओएम ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती श्रमिक गतिशीलता और कौशल आधारित रोजगार के अवसरों का लाभ उठाते हुए, लोगों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन व्यवस्था विकसित की जाए।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

यूएस ट्रेजरी में चीन की घटी हिस्सेदारी, भारत की होल्डिंग बढ़कर 219 अरब डॉलर के पार

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यूएस ट्रेजरी में चीन की हिस्सेदारी अगस्त में तेजी से गिरी है, जबकि भारत की होल्डिंग में लगातार तीसरे महीने इजाफा दर्ज किया गया है। यह जानकारी अमेरिकी सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा में दी गई।

ट्रेजरी इंटरनेशनल कैपिटल (टीआईसी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि अगस्त के अंत में चीन की होल्डिंग्स जुलाई के 618 अरब डॉलर से घटकर 590.7 अरब डॉलर रह गई हैं। यह आंकड़ा एक साल पहले अगस्त 2025 में 699.7 अरब डॉलर पर था। यह दिखाता है कि बीते 12 महीनों में चीन की यूएस ट्रेजरी होल्डिंग्स में लगभग 109 अरब डॉलर की कमी आई है।

अगस्त में भारत की होल्डिंग्स जुलाई के 202.6 अरब डॉलर से बढ़कर 219.7 अरब डॉलर हो गई हैं, जो एक ही महीने में लगभग 17 अरब डॉलर की बढ़ोतरी को दिखाता है। इस साल अप्रैल में भारत की होल्डिंग्स गिरकर 181 अरब डॉलर के निचले स्तर पर आ गई थीं, लेकिन उसके बाद इनमें लगातार सुधार हुआ है और मई में ये 181.3 अरब डॉलर, जून में 186.4 अरब डॉलर और जुलाई में 202.6 अरब डॉलर तक पहुंच गईं। अब ये लगभग उसी स्तर पर वापस आ गई हैं, जहां एक साल पहले थीं।

ताजा आंकड़ों के बाद, दो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की होल्डिंग्स के बीच का अंतर, जो एक साल पहले लगभग 480 अरब डॉलर था, अब घटकर लगभग 371 अरब डॉलर रह गया है।

अमेरिकी ट्रेजरी की प्रमुख विदेशी धारकों की सूची में, भारत 14वें स्थान पर है। इस सूची में हांगकांग 261.5 अरब डॉलर के साथ भारत से आगे है, जबकि नॉर्वे 214 अरब डॉलर के साथ भारत के ठीक पीछे है।

जापान 1,068.3 अरब डॉलर की होल्डिंग के साथ सबसे बड़ा विदेशी धारक बना हुआ है, हालांकि जुलाई में इसकी होल्डिंग 1,103.9 अरब डॉलर थी। यूनाइटेड किंगडम 1,009.5 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। चीन (मुख्य भूमि) तीसरे स्थान पर है। इसके बाद बेल्जियम 490.5 अरब डॉलर, कनाडा 464.6 अरब डॉलर, केमैन आइलैंड्स 463 अरब डॉलर और लक्जमबर्ग 448.2 अरब डॉलर का स्थान है।

यूएस ट्रेजरी ने बताया कि अगस्त में 199.8 अरब डॉलर का नेट टीआईसी इनफ्लो हुआ। इसमें कहा गया है, “विदेशी निवासियों ने अगस्त में दीर्घकालिक अमेरिकी सिक्योरिटीज में अपनी होल्डिंग बढ़ाई, उनकी शुद्ध खरीदारी 300.7 अरब डॉलर रही।” वहीं दूसरी ओर, “विदेशी निवासियों ने अमेरिकी ट्रेजरी बिलों में अपनी होल्डिंग 47.8 अरब डॉलर कम कर दी।”

ट्रेजरी के अनुसार, सितंबर महीने के आंकड़ों को कवर करने वाली अगली टीआईसी रिपोर्ट 18 नवंबर को जारी की जाएगी।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने मार्को रुबियो से उठाई उइगरों की सुरक्षा की मांग

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वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (डब्‍ल्‍यूयूसी) ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अपील की है कि अगले सप्ताह उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान वह मध्य एशिया में रह रहे उइगर समुदाय की बढ़ती असुरक्षा और चीन की सीमाओं के बाहर होने वाले दबाव और दमन के मुद्दे को उठाएं।

डब्‍ल्‍यूयूसी के अनुसार, मध्य एशिया एक तरफ उन उइगरों के लिए शरणस्थली बनी है, जो चीन के शिनजियांग क्षेत्र में कथित उत्पीड़न से बचकर आए हैं, लेकिन दूसरी तरफ यहां भी वे निगरानी, धमकी, मनमानी हिरासत और चीन वापस भेजे जाने जैसे खतरों का सामना कर रहे हैं।

संगठन ने कहा कि उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों में रहने वाले उइगर लंबे समय से दबाव झेल रहे हैं। उनका कहना है कि बीजिंग इन देशों से उइगरों की राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के खिलाफ सहयोग की मांग करता रहा है।

डब्‍ल्‍यूयूसी ने याद दिलाया कि अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 2019 में मध्य एशियाई नेताओं के साथ बैठक के दौरान सार्वजनिक रूप से उइगरों का मुद्दा उठाया था और उनसे उइगरों को चीन वापस न भेजने की अपील की थी। उन्होंने 2020 में कजाकिस्तान की यात्रा के दौरान भी यही चिंता दोहराई थी।

संगठन का कहना है कि अब मार्को रुबियो के पास भी एक महत्वपूर्ण मौका है कि वह इसी तरह उइगरों के अधिकारों के समर्थन में अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराएं।

डब्‍ल्‍यूयूसी ने रुबियो से मांग की कि वह मध्य एशियाई सरकारों से कहें कि उइगरों को जबरन चीन न भेजा जाए। संगठन का कहना है कि चीन लौटाए जाने पर उन्हें उत्पीड़न, मनमानी हिरासत, यातना और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है।

संगठन ने आग्रह किया कि अमेरिका मध्य एशिया के देशों पर दबाव डाले कि वे उइगरों की निगरानी करने, उन्हें डराने-धमकाने, हिरासत में लेने या उनकी आवाज दबाने से जुड़े चीनी अनुरोधों को स्वीकार न करें। खासकर तब, जब वे सिर्फ अपने राजनीतिक विचार, शांतिपूर्ण सामाजिक गतिविधियां, धार्मिक आस्था या विदेश में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क बनाए रखते हों।

पिछले महीने डब्‍ल्‍यूयूसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से भी अपील की थी कि 24 सितंबर को राष्ट्रपति शी चिनप‍िंग की अमेरिका यात्रा के दौरान शिनजियांग में उइगरों के कथित नरसंहार और विदेशों में रह रहे उइगर समुदाय पर चीनी अधिकारियों के दबाव का मुद्दा उठाया जाए।

डब्‍ल्‍यूयूसी के अध्यक्ष तुर्गुनजान अलाउडुन ने कहा, “शी चिनप‍िंग की वाशिंगटन यात्रा केवल उइगर नरसंहार की निंदा करने तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने का एक अहम अवसर है। अमेरिका लंबे समय से उइगर लोगों का मजबूत और मुखर समर्थक रहा है, और डोनाल्ड ट्रंप को इस अवसर का उपयोग कर यह समर्थन जारी रखना चाहिए।”

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

जी-20 बैठक में शाम‍िल होना चाहता है रूस, पुतिन का स्वागत करूंगा : ट्रंप

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस ने इस साल अमेरिका की मेजबानी में होने वाली जी20 बैठकों में शाम‍िल होने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।

व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या पुतिन जी20 बैठक में शामिल होने वाले हैं। इस पर ट्रंप ने कहा, “नहीं, उन्होंने सिर्फ शाम‍िल होने इच्‍छा जताई है। मुझे नहीं पता कि पुतिन खुद आएंगे या नहीं लेकिन अगर वे आते हैं तो मैं जरूर उनका स्वागत करूंगा।”

ईंधन की कीमतों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने खुद जी20 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जी20 बैठकों में रूस के प्रतिनिधि पहले भी शामिल होते रहे हैं।

अमेरिका 2026 में जी20 की अध्यक्षता कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 30 और 31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेंगे। इसके बाद 14 और 15 दिसंबर को ट्रंप फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोरल में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।

रूस और भारत दोनों जी20 के सदस्य हैं। इससे पहले भारत ने सितंबर 2023 में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।

ट्रंप ने कहा कि वह चीन और रूस दोनों के साथ परमाणु समझौता करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने माना कि उन्हें नहीं लगता कि ऐसा इस साल हो पाएगा।

यूक्रेन युद्ध को लेकर जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह भूल गए हैं कि युद्ध की शुरुआत पुतिन ने की थी, तो उन्होंने कहा, “देखिए, मुझे सभी बातें पता हैं। किसी समय मैं सारी जानकारी सार्वजनिक करूंगा। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह युद्ध खत्म होना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “औसतन हर महीने करीब 25,000 सैनिक मारे जा रहे हैं। पिछले महीने यह संख्या 32,000 थी। मैं दोनों पक्षों से बात करता हूं। मुझे लगता है कि दोनों इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं और मेरा पूरा ध्यान इसी पर है कि यह युद्ध समाप्त हो।”

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने यूक्रेन की ओर से ‘स्टारशील्ड’ के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध लगाया है, तो उन्होंने साफ कहा, “नहीं, हमने ऐसा बिल्कुल नहीं किया है।”

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