अंतरराष्ट्रीय
पीएम मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी ली, सेना प्रमुखों से की मुलाकात
नई दिल्ली, 10 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर नजर बनाए हुए हैं। शनिवार को इसी सिलसिले में उन्होंने एक महत्वपूर्ण बैठक की अगुवाई की।
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी शामिल रहे।
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत ने पाकिस्तान के ड्रोन हमलों को पूरी तरह से विफल कर दिया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को इस दौरान पाकिस्तान द्वारा किए गए हमले, भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई और सैन्य तैयारियों की पूरी जानकारी दी गई।
प्रधानमंत्री लगातार हर घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। बीते 24 घंटे में प्रधानमंत्री मोदी की सेना प्रमुखों और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ यह दूसरी और महत्वपूर्ण बैठक है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को भी ऐसी ही एक बैठक की अध्यक्षता की थी।
इससे पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पाकिस्तान के साथ जारी तनाव पर सैन्य अधिकारियों ने कहा कि उधमपुर, पठानकोट, आदमपुर और भुज एयरबेस को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने मिसाइलें दागीं और अस्पताल तथा स्कूल को निशाना बनाया गया। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने एयर फोर्स स्टेशन सिरसा और एयर फोर्स स्टेशन सूरतगढ़ के शनिवार सुबह की फोटो दिखाईं और कहा कि ये सुरक्षित हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया, “पाकिस्तानी सेना पश्चिमी सीमाओं पर लगातार हमले कर रही है, उसने भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए ड्रोन, लंबी दूरी के हथियार, युद्धक हथियार और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया है। भारत ने कई खतरों को नाकाम कर दिया, लेकिन पाकिस्तान ने 26 से अधिक स्थानों पर हवाई मार्ग से घुसपैठ करने की कोशिश की। पाकिस्तान ने पंजाब के वायुसेना बेस को निशाना बनाने के लिए रात 1:40 बजे हाई-स्पीड मिसाइलों का इस्तेमाल किया। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कूलों पर भी हमला किया।”
यह भी बताया गया, “पाकिस्तान की इन हरकतों के बाद तुरंत जवाबी हमले का एक्शन लिया गया। रफीकी, मुरीद, चकलाला, रहमयार खान पर पाक सैन्य ठिकानों पर सटीक हथियारों और लड़ाकू जेट से हमला किया गया। सियालकोट का एयरबेस भी टारगेट किया गया।”
व्यापार
सोने में बड़ी तेजी की संभावना, बुल केस में साल के अंत तक 5,600 डॉलर और चांदी 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है: रिपोर्ट

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों की दिशा और कीमती धातुओं की मांग को लेकर जारी बहस के बीच एक नई रिपोर्ट ने सोने और चांदी को लेकर बेहद आशावादी अनुमान जताया है। मोनार्क पीएमएस की रिपोर्ट के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में वर्ष 2026 के अंत तक सोना 5,000 डॉलर से 5,600 डॉलर प्रति औंस और चांदी 95 डॉलर से 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट ने इस सबसे सकारात्मक परिदृश्य या ‘बुल केस’ की संभावना 25 प्रतिशत बताई है। इसके अनुसार, यदि अमेरिकी श्रम बाजार में कमजोरी आती है, फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ती है और वास्तविक प्रतिफल (रियल यील्ड) में गिरावट शुरू होती है, तो सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
इसके साथ ही संस्थागत निवेशकों द्वारा फिर से कीमती धातुओं में निवेश बढ़ाना और चांदी की भौतिक आपूर्ति में तंगी लौटना भी इस तेजी के लिए जरूरी माना गया है।
हालांकि रिपोर्ट का सबसे संभावित परिदृश्य ‘बेस केस’ है, जिसे 55 प्रतिशत संभावना दी गई है। इस स्थिति में वर्ष 2026 के अंत तक सोना 4,300 डॉलर से 4,700 डॉलर प्रति औंस और चांदी 70 डॉलर से 85 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकती है। यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर तक ब्याज दरों को स्थिर रखेगा, ऊर्जा कीमतें सामान्य होंगी, वास्तविक प्रतिफल स्थिर रहेंगे और दुनिया के केंद्रीय बैंक प्रति तिमाही लगभग 250 टन सोने की खरीद जारी रखेंगे।
रिपोर्ट में एक ‘बेयर केस’ परिदृश्य भी प्रस्तुत किया गया है, जिसकी संभावना 20 प्रतिशत आंकी गई है। यदि फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है तथा महंगाई में कमी मांग की कमजोरी में बदल जाती है, तो सोना 3,400 डॉलर से 3,900 डॉलर प्रति औंस और चांदी 45 डॉलर से 55 डॉलर प्रति औंस के दायरे में आ सकती है।
मोनार्क पीएमएस के मुताबिक, सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान में अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी मुद्रास्फीति-संरक्षित प्रतिभूतियों (टीआईपीएस) का वास्तविक प्रतिफल है, जो 2.41 प्रतिशत पर बना हुआ है। चूंकि सोना किसी प्रकार का ब्याज या प्रतिफल नहीं देता, इसलिए ऊंचे वास्तविक प्रतिफल निवेशकों के लिए एक प्रतिस्पर्धी विकल्प बन जाते हैं और सोने की मांग पर दबाव डाल सकते हैं।
वहीं चांदी के बुनियादी कारकों को रिपोर्ट ने काफी मजबूत बताया है, जिसके अनुसार, चांदी का बाजार लगातार छठे वर्ष घाटे की स्थिति में है। वर्ष 2021 से अब तक लगभग 762 मिलियन औंस चांदी सतही भंडार से निकल चुकी है, जबकि वैश्विक खनन उत्पादन पिछले एक दशक से लगभग स्थिर बना हुआ है। इससे भविष्य में मांग बढ़ने पर कीमतों में तेज उछाल की संभावना बन सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि चांदी की मांग बढ़ती है तो सीमित भौतिक उपलब्धता कीमतों को और तेजी से ऊपर ले जा सकती है। कॉमेक्स बाजार में कागजी दावों की तुलना में उपलब्ध भौतिक चांदी का अनुपात अभी लगभग 5.6 गुना है, जो आपूर्ति संबंधी दबाव की संभावनाओं को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “सोने-चांदी का अनुपात भी सामान्य हो गया है, जो जनवरी में 46 गुना से शिखर से बढ़कर आज लगभग 69 गुना हो गया है, जो इसके 21वीं सदी के औसत के करीब है।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में चांदी ने अपनी पहले की बढ़त का बड़ा हिस्सा गंवा दिया है और अब यह सोने की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती दिखाई देती है।
राष्ट्रीय समाचार
बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही

अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा।
आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है।
बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है।
आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं।
अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है।
आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं।
वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं।
इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं।
हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए।
साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए।
टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है।
इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें।
इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है।
जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
यूपीआई लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हुई : केंद्र

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई)पर वार्षिक लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गई है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में इनकी संख्या 1.78 करोड़ थी। यह जानकारी वित्त मंत्रालय की ओर से सोमवार को दी गई।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से 25 अगस्त, 2016 को यूपीआई को लॉन्च किया था। आज के समय में यह देश के डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ बन गया है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यूपीआई लेनदेन की कुल वैल्यू वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 2016-17 में 0.07 लाख करोड़ रुपए थी। यह बीते एक दशक में करीब 4,000 गुना की बढ़ोतरी दिखाता है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई के बड़े पैमाने, भरोसे और इंटरऑपरेबिलिटी को दुनिया भर में पहचान मिली है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने इसे ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है। 2025 तक, दुनिया भर में होने वाले रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत थी।
2026 में यूपीआई की ग्रोथ की रफ्तार और तेज हो गई है। मई में पहली बार यूपीआई लेनदेन की संख्या 2,300 करोड़ के आंकड़े को पार कर 2,320 करोड़ पर पहुंच गई। इसके बाद जुलाई में प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड 2,366 करोड़ लेनदेन हुए, जो इसके दस साल के सफर में सबसे अधिक मासिक लेनदेन का आंकड़ा है।
संस्थागत भागीदारी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। यूपीआई पर लाइव बैंकों की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 44 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 हो गई, जिसमें पब्लिक सेक्टर बैंक, प्राइवेट बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि मर्चेंट पेमेंट में यूपीआई को काफी ज्यादा अपनाया गया है। कुल लेनदेन की संख्या में पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन का हिस्सा 63 प्रतिशत था, जबकि कुल लेनदेन वैल्यू में पर्सन-टू-पर्सन का योगदान 71 प्रतिशत था।
डेटा से यह भी पता चलता है कि रोजमर्रा के छोटे-मोटे भुगतान के लिए यूपीआई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। वित्त वर्ष 26 में लगभग 86 प्रतिशत पी2एम लेनदेन 500 रुपए से कम के थे, जबकि 59 प्रतिशत पी2पी लेनदेन भी 500 रुपए से कम के थे।
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