अंतरराष्ट्रीय
दवा कंपनियां मुनाफा बटोर रहीं लेकिन गरीबों की पहुंच से दूर है कोविड उपचार: WHO
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख का कहना है कि कोरोना महामारी की दवा बनाने वाली कंपनियां रिकॉर्डतोड़ मुनाफा कमा रही हैं लेकिन अब भी गरीबों की पहुंच से कोरोना उपचार दूर है।
डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ट्रेडोस गेब्रेसियस ने बुधवार को कहा कि दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के मामले और कोरोना के कारण होने वाली मौत के आंकड़े घटे हैं लेकिन ये रूझान पूरी कहानी बयान नहीं करते हैं।
उन्होंने कहा कि ओमीक्रॉन का वैरिएंट बीए.4 और बीए.5 अमेरिका तथा अफ्रीका में संक्रमण के मामले बढ़ा रहा है।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि अभी यह बताना जल्दबाजी होगी कि ये नये वैरिएंट ओमीक्रॉन के अन्य वैरिएंट की तुलना में अधिक घातक हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि लेकिन शुरूआती आंकड़े ये बताते हैं कि टीकाकरण से संक्रमण के कारण अधिक गंभीर रूप से बीमार पड़ने या मौत होने की संभावना घट जाती है।
उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी की शुरूआत में कोरोना टीके के महंगा होने से गरीब लोग जरूरी टीका नहीं ले पाये।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि एक तरफ दवा निर्माता रिकॉर्ड लाभ अर्जित करते रहे लेकिन कोरोना टीके की कम उपलब्धता और ऊंची कीमत की वजह से कुछ देश इसे खरीद ही नहीं पाये।
उन्होंने कहा कि यह नैतिक असफलता है। उन्होंने कहा कि हम इस तरह की जीवनरक्षक दवाओं की ऐसी कीमत स्वीकार नहीं कर सकते हैं, जो अमीरों के लिये उपलब्ध हों लेकिन गरीबों के लिये नहीं।
अमेरिका दवा कंपनी फाइजर ने इसी सप्ताह वित्तीय परिणाम जारी किया है, जिसके मुताबिक पहली तिमाही में उसका राजस्व गत साल की समान तिमाही की तुलना में 77 प्रतिशत बढ़कर 25.7 अरब डॉलर हो गया है।
कंपनी को कोविड के टीके से 13.2 अरब डॉलर तथा कोरोना संक्रमण के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों को दिये जाने वाले टैबलेट वैक्सलोविड से डेढ़ अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ है।
इसी तरह मॉडर्ना ने गत साल की पहली तिमाही में 1.7 अरब डॉलर की कोरोना वैक्सीन की बिक्री की थी लेकिन इस साल की पहली तिमाही में यह आंकड़ा तीन गुने से भी अधिक बढ़कर छह अरब डॉलर हो गया। कंपनी की कुल आय भी 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर 3.66 अरब डॉलर हो गई।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि फाइजर की पैक्सलोविड अब भी कम आय और मध्यम आयवर्ग वाले देशों में उपलब्ध नहीं है। दूसरी तरफ, ऐसी रिपोर्टें आई हैं कि अमेरिका के दवा खानों में करीब छह लाख पैक्सलोविड टैबलेट बेकार पड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण की पहचान करने में सक्षम लैब में कम निवेश के बीच शताब्दी की सबसे खराब महामारी के समय लोगों की जान बचाने वाले नवोन्मेषी उपचार तक जरूरतमंदों की पहुंच का न होना, स्वीकार्य नहीं है।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि हम ऐसी आग से खेल रहे हैं, जो हमें लगातार जला रही है।
उन्होंने कहा कि राजनीति प्रतिबद्धता की कमी, संचालन क्षमता की समस्याओं, वित्तीय बाधाओं, गलत जानकारी के कारण हिचकिचाहट की वजह से कोरोना वैक्सीन की मांग सीमित है।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि प्रत्येक देश में कम से कम 70 फीसदी आबादी का टीकाकरण जरूरी है। अन्य बीमारियों से ग्रसित या उच्च जोखिम वाले समूहों में शत प्रतिशत टीकाकरण जरूरी है। इसके अलावा परीक्षण भी बहुत जरूरी है और जीनोम सिक्वेंसिंग भी आवश्यक है। इससे पता चलता है कि वायरस कैसे बदल रहा है और आगे क्या हो सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
कमजोर वैश्विक संकेतों से गिरावट के साथ खुला शेयर बाजार, फाइनेंशियल स्टॉक्स पर दबाव

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:28 पर सेंसेक्स 267 अंक या 0.34 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,686 और निफ्टी 34 अंक या 0.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,603 पर था।
शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव फाइनेंशियल स्टॉक्स में देखा जा रहा है। सूचकांकों में निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज टॉप लूजर्स था। निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी फार्मा और निफ्टी इन्फ्रा भी हरे निशान में थे। दूसरी तरफ निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस,एमएंडएम, एनटीपीसी, बीईएल, सन फार्मा, एसबीआई, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाइटन और आईटीसी हरे निशान में थे। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, इटरनल और अल्ट्राटेक सीमेंट लाल निशान में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 122 अंक या 0.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ 63,446 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 38 अंक या 0.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,839 पर था।
जानकारों ने कहा, “मार्केट में स्थिरता आ रही है और यह धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा है। निकट भविष्य में यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है, जिससे आगे ब्रेकआउट आ सकता है। पहली के नतीजों से कुछ अहम बातें सामने आई हैं, जिन्हें निवेशकों को ध्यान में रखना चाहिए, जिसमें पहली बात, फाइनेंशियल, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और टेलीकॉम जैसे सेक्टर की अधिकतर कंपनियों ने आय और मुनाफे में दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज की है। इससे उनके स्टॉक की कीमतों को मजबूती मिली है। दूसरा, आईटी सेक्टर को धीमी ग्रोथ और एआई के असर को लेकर चिंताओं का सामना करना पड़ा रहा है। तीसरा, मेटल्स और ऑयल जैसी कमोडिटीज के मामले में मिली-जुली स्थिति रही है।”
ज्यादातर एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला कारोबार हो रहा था। टोक्यो, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे। शंघाई, हांगकांग और जकार्ता हरे निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुआ था, जिसमें डाओ जोन्स 0.85 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ सपाट बंद हुआ।
व्यापार
सोने और चांदी में तेजी के साथ कारोबार, कीमतें एक प्रतिशत तक बढ़ीं

सोने और चांदी की शुरुआत मंगलवार को तेजी के साथ हुई और दोनों कीमती धातुओं में करीब एक प्रतिशत की बढ़त देखी गई।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,42,915 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,43,559 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
सुबह 9:50 पर यह 555 रुपए या 0.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,43,470 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। अब तक के कारोबार में सोने ने 1,43,365 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,43,915 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।
सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखी गई।
चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,16,746 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,18,143 रुपए प्रति किलो पर खुला।
फिलहाल यह 2,354 रुपए या 1.09 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,19,100 रुपए प्रति किलो पर खुला।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,18,143 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,19,896 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। कॉमेक्स पर सोना 0.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,113 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.98 प्रतिशत की बढ़त के साथ 59 डॉलर प्रति औंस पर था।
इसके अलावा, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स’ रिपोर्ट में बताया गया कि 2026 की दूसरी तिमाही में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 1,269 टन पर स्थिर रही। वहीं, साल की पहली छमाही मांग सालाना आधार पर 2 प्रतिशत बढ़कर अनुमानित 2,522 टन (जिसकी कीमत 380 अरब डॉलर थी) हो गई है।
साल की दूसरी तिमाही में गोल्ड ईटीएफ, बार और सिक्कों में निवेश घटकर 262 टन रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह दूसरी तिमाही में गोल्ड-बैक्ड ईटीएफ से 45 टन की निकासी थी, हालांकि साल की पहली छमाही में ईटीएफ की मांग 18 टन के साथ थोड़ी सकारात्मक बनी रही। बार और सिक्कों में निवेश काफी हद तक स्थिर रहा; दूसरी तिमाही में इसमें साल-दर-साल सिर्फ 3 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि पहली छमाही की मांग पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 21 प्रतिशत ज्यादा रही, जिसकी वजह पहली तिमाही में हुई जबरदस्त मांग थी।
व्यापार
गोदरेज प्रॉपर्टीज का पहली तिमाही में मुनाफा 46 प्रतिशत घटा, रेवेन्यू में 85 प्रतिशत की बड़ी गिरावट

देश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी गोदरेज प्रॉपर्टीज ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी किए। इस दौरान कंपनी के मुनाफे और राजस्व में गिरावट दर्ज की गई।
जून तिमाही में कंपनी के समेकित शुद्ध लाभ (पीएटी) में तिमाही-दर-तिमाही 46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछली तिमाही के 650 करोड़ रुपए के मुकाबले 350 करोड़ रुपए रह गया।
वहीं, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के मुकाबले भी मुनाफा 41.7 प्रतिशत घटा है। एक साल पहले यह आंकड़ा 600 करोड़ रुपए था।
कंपनी की ऑपरेशनल आय यानी परिचालन से राजस्व में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। जून तिमाही में राजस्व घटकर 506 करोड़ रुपए रह गया, जबकि मार्च तिमाही में यह 3,458 करोड़ रुपए था। इस तरह तिमाही आधार पर राजस्व में 85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, सालाना आधार पर कंपनी का राजस्व 16.5 प्रतिशत बढ़ा है, क्योंकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 435 करोड़ रुपए था।
परिचालन स्तर पर भी कंपनी का प्रदर्शन दबाव में रहा। गोदरेज प्रॉपर्टीज ने अप्रैल-जून तिमाही में 285 करोड़ रुपए का ईबीआईटीडीए घाटा दर्ज किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ईबीआईटीडीए घाटा 243 करोड़ रुपए था। इसके अलावा, कंपनी की अन्य आय भी घटकर 839 करोड़ रुपए रह गई, जो एक साल पहले 1,186 करोड़ रुपए थी।
हालांकि, बिक्री और मांग के मोर्चे पर कंपनी को अच्छी सफलता मिली। जून तिमाही में कुल बुकिंग वैल्यू 8,651 करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि यह लगातार छठी तिमाही है जब कंपनी की बुकिंग्स 7,000 करोड़ रुपए से ऊपर रही हैं।
तिमाही के दौरान कंपनी ने 3,738 आवासीय इकाइयों (यूनिट्स) की बिक्री की। इनकी कुल बिक्री योग्य क्षेत्रफल 62 लाख वर्ग फुट (6.2 मिलियन स्क्वायर फीट) रहा।
बुकिंग्स के लिहाज से बेंगलुरु कंपनी का सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा, जहां से कुल बुकिंग्स का 44 प्रतिशत योगदान मिला। इसके बाद मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) का योगदान 21 प्रतिशत, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का 18 प्रतिशत, पुणे का 11 प्रतिशत और हैदराबाद का 5 प्रतिशत रहा।
तिमाही नतीजों के साथ कंपनी के निदेशक मंडल ने गोदरेज हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड में विलय को भी मंजूरी दे दी है। कंपनी का मानना है कि इससे कारोबारी ढांचे को और अधिक सरल और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
कमजोर वित्तीय नतीजों के बाद शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। बीएसई पर गोदरेज प्रॉपर्टीज का शेयर करीब 4 प्रतिशत गिरकर 1,992.80 रुपए के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। कंपनी का शेयर पिछले 52 हफ्तों में 2,351.60 रुपए के उच्चतम और 1,434 रुपए के न्यूनतम स्तर को छू चुका है।
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