राजनीति
सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर वी.के. सिंह बोले, मैंने उनसे जनप्रतिनिधि होने का मतलब सीखा
केंद्रीय मंत्री जनरल वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की दिग्गज नेता रहीं सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर भावुक होकर उन्हें याद करते हुए कहा कि उन्होंने जनता के प्रतिनिधि होने का मतलब सुषमा स्वराज से ही सीखा है। मोदी सरकार में सुषमा स्वराज के साथ राज्य मंत्री के तौर पर कार्य कर चुके सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज को याद करते हुए 2014 की घटना का जिक्र किया, “बात 2014 की है, आपको याद होगा इराक में हमारे 39 हमवतन लापता हो गए थे। आईएसआईएस से भीषण युद्ध चल रहा था। पुलिस, कानून व्यवस्था के चिन्ह न्यूनतम ही थे। इस संकट में हमारे लापता हमवतनों से कोई संपर्क नहीं हुआ था। इराक में हमारे सूत्रों से अपुष्ट जानकारी मिल रही थी कि वे आईएसआईएस की कैद में ही कहीं थे। जैसे संकेत मिल रहे थे, उनसे सही आभास नहीं हो रहा था कि वे जीवित हैं या मार दिए गए हैं।”
“हमारे हमवतनों के परिवारवाले गुहार लगा रहे थे कि उन्हें खोजा जाए। सुष्मा जी ने उनकी विनती सुनी और कहा कि ये हमारे देश के लोग हैं। जब तक लेश मात्र भी संदेह है कि वे जीवित हो सकते हैं, उन्हें ढूंढ़ने के लिए हमें अपनी एड़ी-चोटी का जोर लगा देना चाहिए। अगर जीवित मिले तो हम सफल होंगे, नहीं तो उनके पार्थिव शरीर भी अगर स्वदेश आ सकेंगे तो उनके परिजन फिर भी संतोष कर पाएंगे।”
सिंह ने इस पूरे वाक्ये का विस्तार से जिक्र करते हुए लिखा, “सुषमा जी ने अलग-अलग देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत का सिलसिला शुरू किया। संकेत मिले कि हमारे लोग आईएसआईएस की कैद में हैं और अलग अलग स्थानों पर उनसे काम करवाया जा रहा है। 10 जुलाई, 2017 को इराकी प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि मोसुल आजाद हो गया। उसी दिन सुषमा जी ने मुझे फोन कर के कहा कि जनरल साहब आप इराक चले जाइए और हमारे लोगों का पता लगाइए। मैं इंदौर में था, वापस दिल्ली आया और रात को ऐरबिल के लिए रवाना हो गया। ऐरबिल, जो इराकी कुर्द के नियंत्रण में था, वहां से मोसुल पहुंचना आसान था। पर मैं वहां से मोसुल नहीं जा पाया, क्योंकि तब भी मोसुल में लड़ाई जारी थी और इराकी सेना ने जाने की अनुमति नहीं दी।”
सिंह ने आगे बताया कि कितनी कठिन परिस्थिति में वह बाद में मोसुल पहुंचे जहां दिन में भारतीयों को ढूंढ़ते थे और रात में अपने सहयोगियों के साथ एक छोटे से कमरे में फर्श पर सोते थे।
देशवासियों के प्रति सुषमा स्वराज की भावना का जिक्र करते हुए वी.के. सिंह ने आगे कहा, “सुषमा जी लगातार संपर्क में रहकर मुझसे जानकारी लेती थीं और हमारा उत्साहवर्धन करती थीं। हमें अंतत: अपने लोग तो मिले, मगर वह परिणाम नहीं मिला जिसकी आशा थी। उस समय सुषमा जी ने जिस ममता से मृतकों के परिवारों को ढाढस बंधाया, उसे देखकर मैं समझ पाया कि जनता का प्रतिनिधि होने का क्या अर्थ है। जनता का प्रतिनिधि होने का यह मतलब नहीं कि आप समाज से ऊपर उठ गए हैं। आप जनता से ऐसे जुड़ते हैं जैसे एक सामान्य आदमी के लिए जुड़ना कठिन है। वह सारा उत्तरदायित्व, वह भावनात्मक जुड़ाव, लोगों की परेशानियों की समझ आपके कंधों पर आती है, जिससे कोई भी साधारण व्यक्ति अपना संतुलन खो सकता है। परंतु सुषमा जी को जो लोग जानते हैं वे आपको बताएंगे कि उनके जैसा विनम्र, हंसमुख एवं निर्मल छवि वाला व्यक्ति अति दुर्लभ है।”
सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “मैं सौभाग्यशाली हूं कि उनकी छाया में मैंने जनता की सेवा के इस मार्ग पर चलना सीखा। मेरी यही चेष्टा है कि उनके आदर्शो का कुछ प्रतिशत तो कर के दिखा पाऊं, यही मेरी सफलता होगी। दिवंगत सुषमा स्वराज जी की पुण्यतिथि पर मेरा उन्हें प्रणाम।”
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, गुरुवार को सुनवाई की उम्मीद

दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वकील लक्ष्य सैनी और तुषार गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर लंबे समय से राजधानी में विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होने की उम्मीद है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि लोगों को विरोध-प्रदर्शन के लिए शहर से दूर स्थित वैकल्पिक जगहों पर भेजा जाता है, तो आम नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाना और विरोध दर्ज कराना मुश्किल हो सकता है। इससे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाने का खतरा है।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थलों की पहचान भी की है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा था कि वैकल्पिक स्थलों की पहचान सुप्रीम कोर्ट के पिछले सप्ताह के आदेश के अनुरूप की गई है। उन्होंने दलील दी कि शीर्ष अदालत ने उपयुक्त स्थलों की पहचान कर उन्हें निर्धारित करने को कहा था और अधिकारियों ने उसी के अनुसार कार्रवाई की है।
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को प्रदर्शन के लिए नए निर्धारित स्थलों के रूप में पेश किया है।
यह मामला भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब की उस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने दलील दी कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई किए जाने के बाद उदय भानु चिब की याचिका निष्फल हो गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि याचिका में उठाई गई अन्य मांगें अब भी विचारणीय हैं। उन्होंने इन मांगों पर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया।
दिल्ली पुलिस के वकील ने नोटिस जारी करने की मांग का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति महाजन ने याचिका में उठाई गई तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले सक्षम अधिकारियों से राजधानी में शांतिपूर्ण और वैध विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने और उन्हें निर्धारित करने पर विचार करने को कहा था। शीर्ष अदालत ने इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया था।
राजनीति
सुप्रिया सुले ने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर जताई चिंता, केंद्र से रिहाई की मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी तथा उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।
सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “जंतर-मंतर पर तिरंगा थामना कोई अपराध नहीं है। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर चिंताजनक है। मैं गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप करने और उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हूं।”
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए। असहमति लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर भारतीय को बिना भय के अपनी आवाज उठाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर अतिक्रमण के मामले में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जानकारी के अनुसार, सौरव दास को तिहाड़ जेल नंबर-2 और आशुतोष रांका को जेल नंबर-4 में रखा गया है। वहीं, इसी मामले में गिरफ्तार किए गए अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
सीजेपी नेताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिष्ट हेला ने बताया कि अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। उन्होंने दावा किया कि यह आदेश पर्याप्त न्यायिक विचार किए बिना पारित किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने केवल आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह मान लिया कि आरोपी कुछ कर सकते हैं और इसी आधार पर उन्हें पांच दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोगों को ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने और तिरंगा लहराने के लिए जेल भेजा जाना चिंताजनक है।
पुलिस के अनुसार, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर पुलिस बैरिकेड्स पार करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। तीनों नेता चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान बनाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
सऊदी अरब में भारतीयों की तादाद ठीक-ठाक, दूतावास कर रहा हरसंभव मदद : विदेश मंत्रालय

भारत ने सऊदी अरब पर हो रहे मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक नागरिक या सार्वजनिक ठिकानों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। बिगड़ते हालात के भारतीय दूतावास की तरफ से अपने नागरिकों को पहुंचाई जा रही हरसंभव मदद का भी उल्लेख किया।
बुधवार को पाक्षिक प्रेस ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए हमले को लेकर कहा, “सऊदी अरब पर कई हमले हुए हैं। कल अरामको मुख्यालय पर भी हमला हुआ। हम सऊदी अरब में आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हुए ऐसे सभी हमलों की निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए। ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हम सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं, और हमें उम्मीद है कि इस इलाके में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।”
प्रवक्ता ने वहां रह रहे भारतीयों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब में हमारा दूतावास भारतीय समुदाय के लगातार संपर्क में है और उनकी भलाई के लिए एडवाइजरी जारी की है। हवाई अड्डों पर हमलों के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय एयरलाइंस, खासकर रियाद, दम्मम, मदीना और जेद्दा से आने-जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। लेकिन कुछ सऊदी एयरलाइंस आ जा रही हैं। दूतावास यात्रियों और फंसे हुए लोगों को ताजा जानकारी दे रहा है। कह सकते हैं कि विकल्प तो हैं लेकिन साथ में दिक्कतें भी मौजूद हैं।”
हवाई अड्डे हमले में पीड़ितों, भारतीय प्रवासियों और धार्मिक यात्रा को लेकर पूछे सवाल पर जायसवाल ने कहा, “10 अक्टूबर के हमले में 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की दुर्भाग्य से मौत हो गई। परिवार की इच्छानुसार, दूतावास की मदद से रियाद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाकी 11 घायलों में से तीन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि आठ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से चार आईसीयू में हैं। दूतावास के अधिकारी लगातार उनसे मिल रहे हैं और पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं। वहां भारतीय प्रवासियों और यात्रियों की संख्या ठीक-ठाक है और हम विदेश में अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा की खातिर हर संभव मदद करने को तत्पर हैं।”
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