राजनीति
उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान जारी, मोदी, शाह, राजनाथ, मनमोहन सिंह ने डाला वोट
देश के नए उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए संसद भवन परिसर में मतदान जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई केंद्रीय मंत्री और सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के सांसद अपना-अपना वोट डाल चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह 10 बजे सबसे पहले संसद पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं अस्वस्थ होने के कारण पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने व्हीलचेयर पर आकर अपना वोट दिया। राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित लोक सभा और राज्य सभा के कई सदस्यों ने अपना-अपना वोट डाला।
आपको बता दें कि, उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए सुबह 10 बजे से वोटिंग शुरू हो चुकी है और शाम 5 बजे तक इसके लिए वोट डाला जाना है। वोटिंग प्रक्रिया संपन्न होने के बाद शनिवार शाम ही मतगणना भी की जाएगी। शाम 7 बजे तक चुनावी रिजल्ट भी आ जाने की संभावना है।
देश के अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए मुख्य मुकाबला एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनकड़ और विपक्षी दलों की संयुक्त उम्मीदवार मार्गेट अल्वा के बीच हो रहा है।
उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों- लोक सभा और राज्य सभा के सांसदों को वोट डालने का अधिकार रहता है। इस लिहाज से देखा जाए तो उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए संसद के दोनों सदनों के कुल मिलाकर 788 सांसद वोट डाल सकते हैं।
आंकड़ो के लिहाज से देखा जाए तो एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनकड़ का चुनाव जीतना तय माना जा रहा है लेकिन राष्ट्रपति चुनाव की तर्ज पर ही भाजपा ज्यादा से ज्यादा सांसदों के वोट हासिल कर अपने उम्मीदवार को बड़े अंतर से जीत दिलाने की रणनीति पर काम कर रही है।
विपक्ष की एक बड़ी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति चुनाव से अलग रहने का फैसला किया है तो वहीं दूसरी तरफ बीजू जनता दल और वाईएसआर के साथ ही बहुजन समाज पार्टी ने भी एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा कर धनकड़ की एक बड़ी जीत को सुनिश्चित कर दिया है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी जारी, पीएमआई अप्रैल में 54.7 रहा

भारत में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अप्रैल में 54.7 रहा है, जो कि मार्च में 53.9 था। इसकी वजह नए ऑर्डर (निर्यात सहित) और रोजगार के अवसर में वृद्धि थी। यह जानकारी एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई डेटा में सोमवार को दी गई।
अप्रैल का डेटा दिखाता है कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और नए बिजनेस में तेजी जारी है। वहीं, निर्यात ब्राइट स्पॉट बना हुआ है और वृद्धि दर पिछले सितंबर से सबसे तेज रही है।
रिपोर्ट में कंपनियों ने संकेत दिया है कि मध्य पूर्व में तनाव के कारण महंगाई के दबाव में इजाफा हुआ है। इनपुट और आउटपुट दोनों में क्रमश: 44 और छह महीनों में सबसे तेज वृद्धि हुई है।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मध्य पूर्व संघर्ष के प्रभाव अधिक स्पष्ट होते जा रहे हैं, विशेष रूप से महंगाई के रूप में, जिससे इनपुट लागत अगस्त 2022 के बाद से सबसे तेज गति से बढ़ी है, और आउटपुट कीमतें छह महीनों में सबसे तेज दर से बढ़ी हैं।”
मार्च में 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 होने के बावजूद, मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) – जो नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ता वितरण समय और खरीद के स्टॉक के उपायों से प्राप्त समग्र स्थितियों का एक सूचक है – ने लगभग चार वर्षों में समग्र परिचालन स्थितियों में दूसरी सबसे धीमी सुधार का संकेत दिया।
सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने संकेत दिया कि विज्ञापन और मांग में स्थिरता ने बिक्री और उत्पादन को समर्थन दिया, लेकिन प्रतिस्पर्धी माहौल, मध्य पूर्व में युद्ध और ग्राहकों द्वारा लंबित कोटेशन को मंजूरी देने में अनिच्छा के कारण विकास बाधित हुआ।
भारतीय निर्माता विकास की संभावनाओं को लेकर आशावादी बने रहे। सकारात्मक भावना का समग्र स्तर मार्च से थोड़ा कम हुआ, हालांकि यह नवंबर 2024 के बाद से अपने दूसरे उच्चतम स्तर पर था।
राजनीति
शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा-सरकारी मशीनरी का ‘सायरन’ खामोश

शिवसेना के उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने सोमवार को महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ केंद्र सरकार ने देशभर में मोबाइल फोन पर इमरजेंसी सायरन टेस्ट करके लोगों को आपदा की चेतावनी देने की कोशिश की, वहीं महाराष्ट्र में जब महिलाओं और छोटी बच्चियों के साथ रोजाना बलात्कार और अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं, तो सरकारी मशीनरी का ‘सायरन’ खामोश है।
दरअसल, शिवसेना गुट के मुखपत्र ‘सामना’ में सोमवार को छपे एक संपादकीय में पुणे जिले के भोर तहसील के नसरापुर में चार साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या की घटना का जिक्र किया गया है। इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में भारी गुस्सा फैल गया। गुस्साए लोग बच्ची का शव सड़क पर लेकर आए और आरोपी को तुरंत उनके हवाले करने की मांग करने लगे ताकि वे खुद न्याय कर सकें, लेकिन इसके बजाय पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया।
लेख में कहा गया है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने ‘मिसिंग लिंक’ टनल प्रोजेक्ट के उद्घाटन के दौरान लगे ट्रैफिक जाम के लिए जनता से माफी मांगी। नसरापुर, चाकन और नागपुर में छोटी बच्चियों के साथ हुए अमानवीय यौन अत्याचार गृह विभाग की विफलता को दर्शाते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री को राज्य की सभी छोटी बच्चियों और उनकी माताओं से माफी मांगनी चाहिए।
संपादकीय में कहा गया है कि भोर तालुका के नसरापुर गांव में, चार साल की एक बच्ची से बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई। पुणे में अत्याचार और हत्या की घटनाएं चिंताजनक रूप से तेजी से बढ़ रही हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री के अपने शहर नागपुर में भी अत्याचार का शिकार हुई महिलाओं की दिल दहला देने वाली चीखें सुनी जा सकती हैं। सांगली में भी इसी तरह के अत्याचार के मामले सामने आए हैं। महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों को लेकर सरकार निष्क्रिय बनी हुई है और अपराधियों को अब कानून का कोई डर नहीं रहा।
आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री फडणवीस राज्य के गृह मंत्री के तौर पर पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। वह राज्य की कानून-व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय दूसरे राज्यों में राजनीतिक प्रचार में व्यस्त रहे। इसमें पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु के दौरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि महाराष्ट्र की छवि चमकाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। राज्य के भीतर भ्रष्टाचार और अपराध बढ़ रहे हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुकी है।
लेख में भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा गया है कि जब पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में भाजपा ने जोरदार विरोध किया था, तब महाराष्ट्र में हो रही घटनाओं पर वे राजनीति न करने की सलाह दे रहे हैं यानी जहां विपक्ष शासित राज्य होता है, वहां विरोध तेज होता है, लेकिन अपने राज्य में ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साध ली जाती है।
संपादकीय में यह भी सवाल उठाया गया है कि सरकार बार-बार फास्ट ट्रैक कोर्ट और फांसी की सजा की बात करती है, लेकिन वास्तव में कितने दोषियों को सजा मिली है। जनता का गुस्सा बढ़ रहा है और लोग पूछ रहे हैं कि सिर्फ बयानबाजी से क्या बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी?
लेख में सरकार की ‘लड़की बहन योजना’ पर भी तंज कसा गया है, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता दी जाती है। सवाल उठाया गया है कि क्या सिर्फ 1,500 रुपए देने से सरकार को उन महिलाओं की बेटियों की सुरक्षा की अनदेखी करने का लाइसेंस मिल जाता है?”
संपादकीय में कहा गया है कि अगर किसी को इन घटनाओं का असली जिम्मेदार ठहराना हो तो वह गृह विभाग और राज्य सरकार की व्यवस्था है, जो कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है।
लेख के अनुसार यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवता और महिलाओं की गरिमा का सवाल है। सरकार से मांग की गई है कि वह सिर्फ ट्रैफिक या प्रशासनिक मुद्दों पर माफी मांगने के बजाय महाराष्ट्र की महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में असफल रहने के लिए सार्वजनिक माफी मांगे।
राष्ट्रीय समाचार
विधानसभा उपचुनाव: रुझान में पांच राज्यों की 7 सीटों पर भाजपा को बढ़त, बारामती से सुनेत्रा पवार आगे

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ कर्नाटक, नागालैंड, त्रिपुरा गुजरात और महाराष्ट्र की सात सीटों पर हुए उपचुनावों की मतगणना हो रही है। शुरुआती रुझान में 7 में से 5 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं जबकि महाराष्ट्र की बारामती सीट से महायुति उम्मीदवार और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार आगे चल रही है। वहीं, कर्नाटक की बागलकोट सीट पर कांग्रेस आगे चल रही है।
चुनाव आयोग के अनुसार, महाराष्ट्र की बारामती सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) उम्मीदवार सुनेत्रा पवार 53,250 वोटों से आगे चल रही हैं। अजित पवार का निधन 28 जनवरी 2026 को एक विमान हादसे में निधन हो गया था।
इसके अलावा रुझान में महाराष्ट्र की राहुरी सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अक्षय कर्डिले 29,675 वोटों से आगे चल रहे हैं, जबकि दूसरे नंबर पर एनसीपी (शरदचंद पवार) के मोकाटे गोविंद खांडू हैं। यह उपचुनाव शिवाजी कर्डिले के निधन के बाद हो रहा है। भाजपा ने इस सीट से उनके बेटे अक्षय कर्डिले को चुनावी मैदान में उतारा है।
कर्नाटक की दावणगेरे साउथ में भाजपा के श्रीनिवास टी दसाकरियप्पा 8539 वोटों से आगे चल रहे हैं जबकि कांग्रेस के सामर्थ शमनूर मल्लिकार्जुन दूसरे नंबर पर हैं। इसके अलावा बागलकोट से कांग्रेस के उमेश हुल्लप्पा मेती 9969 वोटों से आगे चल रहे हैं, वहीं भाजपा के चरंतीमठ वीरभद्राया दूसरे स्थान पर हैं।
त्रिपुरा की धर्मनगर से भाजपा के जाहर चक्रवर्ती 13,988 वोटों से आगे हैं, जबकि कांग्रेस के चयन भट्टाचार्य पीछे चल रहे हैं।
गुजरात की उमरेठ सीट से भाजपा के हर्षदभाई गोविंदभाई परमार करीब 21 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं, जबकि दूसरे नंबर पर कांग्रेस के उम्मीदवार भृगु राज सिंह चौहान हैं।
इसके साथ ही, नगालैंड की कोरिडांग सीट से भाजपा उम्मीदवार दाओचिर आई इम्चेन 1,599 वोटों से आगे हैं। हलांकि इस बार जीत का ताज किसके सिर पर सजेगा? यह तस्वीर पूरी तरह से शाम तक साफ हो पाएंगी।
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