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ईरान को लेकर ट्रंप के संकेत के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई

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वॉशिंगटन, 8 अप्रैल : तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो सप्ताह के लिए रोकेंगे, जिससे ऊर्जा-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंकाएं कम हो गईं।

अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गए, जिससे हालिया बढ़त उलट गई। यह बढ़त होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास कई हफ्तों से जारी तनाव के कारण हुई थी, जो वैश्विक तेल परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने को यह जानकारी दी।

जर्नल के अनुसार, यह गिरावट ट्रंप की उस घोषणा के बाद आई जिसमें उन्होंने कहा कि यदि तेहरान जलडमरूमध्य को फिर से खोलता है तो वे ईरान पर हमले रोक देंगे।

शेयर बाजारों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों से जुड़े वायदा 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए, जो संकट से जुड़ी कई दिनों की अस्थिरता के बाद निवेशकों की राहत का संकेत है।

रिपोर्ट में कहा गया, “स्टॉक फ्यूचर्स तेजी से बढ़ रहे हैं और तेल की कीमतें गिर रही हैं, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए रोक देंगे।”

होरमुज़ जलडमरूमध्य, जिसके माध्यम से वैश्विक तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, इस संघर्ष का केंद्र रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने कई हफ्तों तक इस मार्ग को सीमित किया था, जिससे कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ीं।

जर्नल के अनुसार, ईरान के साथ समझौते की समयसीमा से पहले बाजारों में तनाव था क्योंकि व्यापारियों को डर था कि बड़े स्तर पर संघर्ष से खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

इसके बजाय, संभावित युद्धविराम की घोषणा से वैश्विक बाजारों में व्यापक तेजी आई। एशियाई शेयर बाजार भी चढ़े, जिसमें जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ बंद हुए।

निवेशकों ने ट्रंप की पहले की धमकियों को काफी हद तक बातचीत की रणनीति माना था। रिपोर्ट के अनुसार, “कुछ निवेशकों ने दांव लगाया था कि ट्रंप समयसीमा बढ़ा सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पिछले महीने कई बार किया है।”

हाल के हफ्तों में तेल की कीमतें इस आशंका के कारण बढ़ी थीं कि जलडमरूमध्य को बंद या गंभीर रूप से सीमित किया जा सकता है। यह मार्ग कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस जैसी महत्वपूर्ण आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।

तनाव कम होने से अन्य परिसंपत्तियों को भी समर्थन मिला। सोने की कीमतें बढ़ीं, जो अनिश्चितता को दर्शाती हैं जबकि शेयर बाजार में तेजी आई क्योंकि तत्काल संघर्ष का जोखिम घटा।

हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। प्रस्तावित दो सप्ताह का युद्धविराम इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलता है और दोनों पक्ष आगे तनाव नहीं बढ़ाते।

घोषणा के बाद भी खाड़ी के कुछ हिस्सों में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की खबरों ने इस विराम की स्थिरता पर सवाल उठाए।

व्यापक संघर्ष पहले ही ऊर्जा बाजारों को कई हफ्तों से प्रभावित कर चुका है। सीमित शिपिंग और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है।

अब यह दो सप्ताह का समय कूटनीति के जरिए स्थिति को स्थिर करने का अवसर देता है लेकिन व्यापारी अभी भी नीतिगत या सैन्य बदलावों को लेकर सतर्क हैं।

होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक बना हुआ है। इसमें कोई भी व्यवधान वैश्विक स्तर पर तुरंत प्रभाव डाल सकता है, खासकर बड़े आयातकों पर।

भारत के लिए, जो खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर है, तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से महंगाई, मुद्रा स्थिरता और समग्र आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

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हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।

इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।

अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”

वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।

सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय

चीनी राज्य परिषद ने ‘भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ की जारी

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बीजिंग, 10 अप्रैल : चीनी राज्य परिषद द्वारा जारी ‘चीन (भीतरी मंगोलिया) पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ 9 अप्रैल को सार्वजनिक की गई। इसके साथ ही चीन में पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्रों की कुल संख्या 23 हो गई है।

समग्र योजना भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र को सुधारों में अधिक स्वायत्तता प्रदान करती है, जिससे इसे प्रायोगिक परियोजनाएं संचालित करने और व्यापक क्षेत्रों में गहन स्तर पर मौलिक, एकीकृत और विशिष्ट अन्वेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

इसमें 19 सुधार और नवाचार उपायों की रूपरेखा दी गई है, जिनमें सीमा व्यापार में नवाचार और विकास, अंतरराष्ट्रीय रसद सेवाओं को मजबूत करना, वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के रूपांतरण और अनुप्रयोग की दक्षता में सुधार करना और विभिन्न क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान का विस्तार करना शामिल है।

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अंतरराष्ट्रीय

वेंस की पाकिस्तान यात्रा से पहले सुरक्षा को लेकर चिंता, सालों बाद यूएस के किसी शीर्ष अधिकारी का पाक दौरा

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नई दिल्ली, 10 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते के अंत में पाकिस्तान में बातचीत होने वाली है। अमेरिका की तरफ से इस बैठक में शामिल होने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने डेलिगेशन के साथ इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति के इस दौरे से संबंधित सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं हैं। सालों के बाद अमेरिका का कोई आला अधिकारी पाकिस्तान का दौरा कर सकता है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान के दौरे को लेकर गहरी चिंता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सुरक्षा चिंता की वजह से वेंस को पाकिस्तान ना जाने की सलाह दी है।

फिलहाल यह कन्फर्म नहीं है कि जेडी वेंस इस बैठक में शामिल होने जाएंगे या नहीं, लेकिन व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद जाएंगे।

किसी भी अमेरिकी अधिकारी के लिए पाकिस्तान के दौरे पर जाने से पहले उनके लिए सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद है। पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों की सक्रियता की वजह से वहां पर किसी भी दूसरे देश के नेता की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता है।

वेंस ऐसे समय में पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं, जब अमेरिका ने खुद इस देश के लिए ‘लेवल 3: यात्रा पर पुनर्विचार करें’ की एडवाइजरी जारी की हुई है। इसकी मुख्य वजह आतंकवाद, अपराध और अशांति का खतरा है।

इसके अलावा अमेरिका ने हाल ही में लाहौर और कराची के वाणिज्य दूतावास से गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से हटा लिया गया था। यही सब कारण हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी के कोई भी नेता या अधिकारी पाकिस्तान जाने से बचते हैं।

पाकिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों और दूतावास पर हमले की कई घटनाएं इतिहास में सामने आई हैं। ताजा मामला, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देखने को मिला था, जब उग्र भीड़ ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को घेरा और उसमें तोड़फोड़ की। इसके बाद पेशावर में अमेरिकी कांसुलेट बंद कर दिया गया और कराची और लाहौर में वीजा सेवाएं निलंबित हुईं।

आतंकवाद और सुरक्षा कारणों की वजह से अब तक केवल पांच अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ही पाकिस्तान का दौरा किया, जिनमें ड्वाइट डी. आइजनहावर, लिंडन बी. जॉनसन, रिचर्ड निक्सन, बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश शामिल हैं। 2006 के बाद किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया।

हालांकि, इसके पीछे एक कारण अमेरिका में हुए 26/11 का वो हमला भी है। अमेरिका को संदेह था कि इस हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी है। हालांकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा। फिर अमेरिका ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी दूरी आई।

इसके अलावा, पाकिस्तान में चीन का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यह भी एक कारण हो सकता है कि अमेरिका इस देश से दूरी बनाकर रखे हुए है। वहीं 2011 के बाद पहली बार अमेरिकी के किसी शीर्ष अधिकारी का पाकिस्तान का दौरा होने वाला है।

द संडे गार्जियन के अनुसार, सिक्योरिटी प्लानर्स ने आने वाले डेलिगेशन की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मोटरकेड सिस्टम तैयार करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट के लॉजिस्टिक्स टीम और इक्विपमेंट लेकर आने के बाद तैयारियां और तेज हो गईं। इस तरह के बड़े इंतजाम इस दौरे की सांकेतिक अहमियत और युद्ध के समय की डिप्लोमेसी से जुड़े असली सुरक्षा खतरों, दोनों को दिखाते हैं।

बीते दिन पाकिस्तान में ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने ईरानी डेलिगेशन के पाकिस्तान पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी दी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।

ईरानी राजदूत ने अपने पोस्ट में अमेरिकी वार्ताकारों के साथ सीजफायर के मुद्दे पर बातचीत के लिए ईरान के एक डेलिगेशन के पाकिस्तान आने की घोषणा की थी। यह पोस्ट पहले रेजा अमीरी मोगादम के सोशल मीडिया हैंडल पर थी, जो अब नजर नहीं आ रही है। इसकी पीछे की वजह सुरक्षा से संबंधित हो सकती है।

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