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Friday,28-August-2026
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राजनीति

आरएसएस में किसी की जाति नहीं पूछी जाती : नरेंद्र कुमार

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लखनऊ, 1 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार ने शनिवार को श्री गुरु वशिष्ठ न्यास द्वारा आयोजित विचार महाकुंभ ‘राम परिषद’ के प्रथम वैचारिक सत्र में ‘भारत निर्माण यात्रा के 100 वर्ष’ विषय पर बोलते हुए कहा कि संघ को जानने के लिए संघ से जुड़ना जरूरी है और इसके लिए जाति की कोई बाध्यता नहीं है।

नरेंद्र कुमार ने कहा कि संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। आज के मौजूदा परिवेश में संघ को सब जानना चाहते हैं। समाज के सभी वर्गों में ऐसी जिज्ञासा विकसित हुई है। संघ को समझने के लिए संघ के अंदर आना होगा। संघ को जानिए, यदि अच्छा लगे तो रुकिए, नहीं तो जाने के लिए कोई बाध्यता नहीं है। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती। हम इसके आधार पर अपना काम भी नहीं करते। इसका उल्लेख महात्मा गांधी ने भी स्वयं किया था।

उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना हिंदू समाज को जागृत एवं एकजुट करने के लिए की गई थी। समय-समय पर जो भी आवश्यकताएं आईं, संघ ने उसमें बदलाव किया है। इसी कारण आज हम 100 वर्ष पुराने सामाजिक संगठन बने हुए हैं। विचार, संगठन एवं कार्य ही संघ के तीन प्रमुख अंग हैं। भारत प्राचीनकाल से सनातन राष्ट्र है, हिंदू राष्ट्र है। इस विषय पर अनेक मत हैं, लेकिन संघ यह मानता है कि वेदकाल से ही भारत पुरातन हिंदू राष्ट्र है। इसी को आधार मानकर संघ काम करता है। समाज का उत्थान एवं उसका संगठन करना यानी व्यक्ति निर्माण करना और इससे राष्ट्र निर्माण होगा, यह संघ का मानना है। व्यक्ति निर्माण के लिए हमारी शाखा है। इसी से समाज और फिर राष्ट्र निर्माण हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन संघ का मुख्य कार्य है। हमने इसके लिए पंच निष्ठाएं तय की हैं, जिन पर संघ कार्य कर रहा है। समरसता एक विषय है। जाति विभेद आज भी बड़ी समस्या है। संघ का मानना है कि इसे समाप्त करना होगा। समाज में समरसता के लिए बहुत से महापुरुषों ने काम किए हैं। दुर्भाग्यवश अभी इसमें सफलता नहीं मिली है। हर गांव में एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान होना चाहिए। संघ ने इस दिशा में काम किया है। कुटुंब प्रबोधन दूसरा विषय है। आज परिवार टूट रहे हैं, छोटे हो रहे हैं। यह विकृति आ रही है। दुनिया हमसे यही व्यवस्था सीखना चाहती है। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। तीसरा विषय पर्यावरण है, हम प्रकृति का दोहन कर रहे हैं, इसके लिए पौधरोपण, जल की स्वच्छता और अनावश्यक दोहन बंद करना होगा। साथ ही प्लास्टिक कचरे से मुक्ति प्रमुख है।

उन्होंने कहा कि चौथा विषय स्व आधारित जीवन शैली है। देश को आजाद हुए 75 वर्ष हो चुके हैं। हमें अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं करना होगा। हर समस्या के लिए अंग्रेज दोषी नहीं हैं। हमें अपना स्व का जागरण करना होगा और अपनी समस्याएं स्वयं सुलझानी हैं। नागरिक कर्तव्य पांचवां विषय है, हम अपने अधिकारों के लिए तो हर जतन करते हैं, लेकिन संविधान में नागरिक कर्तव्य भी हैं। देश को आगे ले जाने के लिए नागरिक कर्तव्य जो सुनिश्चित किए गए हैं, उनका पालन भी करना चाहिए। संघ शताब्दी वर्ष पूर्ण होने पर हम इन पांच बातों को समाज के बीच ले जाना चाहते हैं। समाज को साथ लेकर और समाज के सहयोग से ही ये कार्य किए जाने हैं। यह समाज परिवर्तन के लिए आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष में हमने सुनिश्चित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर मंडल तक संघ का कार्य या शाखा चले, 10 हजार की आबादी पर संघ का काम हो। अभी हम पिछले एक वर्ष में 65 हजार नए स्थानों पर संघ का कार्य करने में सफल रहे हैं। करीब 40 संगठन विविध क्षेत्र में संघ की प्रेरणा से चलते हैं। लोग इन्हें संघ का आनुषंगिक संगठन कहते हैं। ये सभी संगठन स्वायत्त हैं। आज संघ के 50 लाख से अधिक प्रशिक्षित स्वयंसेवक समाज और देशहित का कार्य कर रहे हैं। वे सभी संघ के प्रचारक नहीं हैं। वे हमारी-आपकी तरह ही समाज के विविध क्षेत्रों में अपना काम कर रहे हैं, जो समाज की आवश्यकतानुसार उसकी समस्याओं का समाधान करते हैं।

उन्होंने बताया कि महाकुंभ में संघ की एक संस्था सक्षम ने नेत्रकुंभ लगाया था। करीब ढाई लाख लोगों की आंखों की निःशुल्क जांच की। डेढ़ लाख लोगों को चश्मे दिए। वहीं, 16 हजार लोगों की आंखों के ऑपरेशन किए गए। ये ऑपरेशन देश के दो सौ चिकित्सालयों में किए गए। यह पूरा कार्य निःशुल्क और समाज के सहयोग से हुआ। इसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया।

राष्ट्रीय समाचार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बच्चों के साथ मनाया रक्षाबंधन, बोलीं- ‘भाई-बहन के रिश्ते से कहीं बढ़कर है राखी का महत्व’

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पूरे भारत में शुक्रवार को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अलग-अलग स्कूलों और संगठनों के बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का महत्व भाई-बहन के रिश्ते से कहीं बढ़कर है।

राष्ट्रपति ने बच्चों के साथ विशेष रक्षाबंधन समारोह की झलकियां शेयर कीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “रक्षाबंधन का महत्व भाई-बहन के रिश्ते से कहीं बढ़कर है। राखी का पवित्र धागा परिवार के सदस्यों, दोस्तों और यहां तक कि पेड़ों पर भी बांधा जा सकता है, जो प्यार और देखभाल के बंधन का प्रतीक है।”

पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बच्चों से पेड़-पौधों की देखभाल करने का भी आग्रह किया।

इससे पहले, रक्षाबंधन पर राष्ट्रपति ने देशवासियों के नाम संदेश जारी किया। उन्होंने सभी भारतीयों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “रक्षा-बंधन की पावन परंपरा, प्राचीन काल से, हमारी उपासना और संस्कृति का अंग रही है। श्रद्धापूर्वक हाथ पर बांधे गए धागे को, रक्षा हेतु पवित्र सूत्र- बंधन, यानी रक्षा-बंधन माना गया है। अनेक श्लोकों और मंत्रों में, ‘रक्षै, मा चल, मा चल’ इन शब्दों में अनुरोध किया जाता है कि ‘हे रक्षा रूपी बंधन, तुम सदैव अचल रहो।'”

उन्होंने कहा, “समय के साथ, रक्षा-बंधन, बहन की रक्षा के लिए भाई के हाथ पर राखी बांधने के भावपूर्ण सामाजिक पर्व के रूप में लोकप्रिय हुआ। यह पर्व भाई-बहनों, मित्रों तथा परिवार और समाज के विभित्र सदस्यों के बीच आत्मीयता, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व के भाव को सुदृढ़ करता है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन के हर रिश्ते की नींव विश्वास, संवेदनशीलता और परस्पर सहयोग पर आधारित होती है। उन्होंने आह्वान किया कि रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर हम समाज और देश की रक्षा के लिए संकल्प लें। साथ ही, इसी भावना के साथ विकसित भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ते रहें।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

नेपाल में बाढ़ से तबाही के बीच चीन में भूकंप, सिचुआन में 5.1 तीव्रता के झटके, 47 ग्लेशियर झीलों पर बढ़ा खतरा

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चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में शुक्रवार को भूकंप के झटके महसूस क‍िए गए। लोंगचांग शहर में दोपहर 1:13 बजे 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप की गहराई लगभग 13 किमी थी। फिलहाल नुकसान या हताहत की कोई जानकारी नहीं है।

चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर (सीईएनसी) के अनुसार, चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत के लोंगचांग शहर में शुक्रवार दोपहर 1:13 बजे (बीजिंग समय) 5.1 तीव्रता का भूकंप आया।

सीईएनसी की ओर से जारी जानकारी के हवाले से ‘चाइना डेली’ ने बताया क‍ि भूकंप का केंद्र 29.23 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 105.22 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। सीईएनसी के अनुसार, यह भूकंप 13 किलोमीटर की गहराई पर आया। फिलहाल भूकंप से हुए नुकसान या किसी हताहत की तत्काल जानकारी सामने नहीं आई है।

ये घटना ऐसे समय हो रही है जब चीन के पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ के कारण भारी तबाही मची हुई है। इस जल आपदा का कुछ असर चीन में भी हुआ है। ऐसे में भूकंप की दस्‍तक ने लोगों की च‍िंता बढ़ा दी है।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) और नेपाल सरकार के वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार, 47 ग्लेशियल झीलों को ‘संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झीलें’ (पीडीजीएलएस) के रूप में चिन्हित किया गया है। चेतावनी दी गई है कि इन झीलों से कभी भी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लोफ) आ सकता है, जो नेपाल की नदी प्रणालियों में विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकता है। ऐसे में भूकंप तबाही का एक बड़ा कारण बन सकता है।

इन 47 झीलों में से 21 नेपाल में स्थित हैं, जबकि 25 झीलें तिब्बत में हैं और सीमा पार की श्रेणी में आती हैं। ये झीलें उन नदियों के ऊपरी हिस्से में स्थित हैं जो दक्षिण की ओर बहते हुए नेपाल में प्रवेश करती हैं, इसलिए ये नीचे बसे समुदायों और बुनियादी ढांचे के लिए संभावित खतरा पैदा करती हैं।

नेपाल के भोटेकोसी नदी में 26 अगस्‍त को आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। यह बाढ़ तब आई जब भोटेकोसी नदी की सहायक नदी ‘ल्हेन्डे’ का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण रुक गया। इसके बाद सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे गांव प्रभावित हुआ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इलाके में बारिश नहीं हुई थी, इसलिए लोगों को इस आपदा के आने का कोई अंदाजा नहीं था। बाढ़ आने के समय लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लगे हुए थे।

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राष्ट्रीय समाचार

उपराष्ट्रपति ने बच्चों संग तो ओम बिरला ने लाड़ली बहनों संग मनाया त्योहार, नितिन नवीन को महिला कार्यकर्ताओं ने बांधी राखी

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पूरे भारत में शुक्रवार को राखी का त्योहार मनाया गया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बच्चों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार बनाया, जबकि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी में ‘लाड़ली’ बहनों के साथ रक्षाबंधन मनाया। वहीं, इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने राखी बांधी।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाया। बच्चों ने उपराष्ट्रपति को राखी बांधी, जो प्यार, भरोसे और सुरक्षा के खूबसूरत बंधन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ संवाद करने से उपराष्ट्रपति भवन में गर्मजोशी और खुशी का माहौल रहा, जिससे यह त्योहार का मौका वाकई खास बन गया।

वहीं, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी की ‘लाड़ली बहनों’ के साथ रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया। इस अवसर पर बहन वीरांगना मधुबाला ने भी रक्षा-सूत्र बांधा।

ओम बिरला ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “कलाई पर बंधी यह राखी केवल स्नेह और विश्वास की डोर नहीं, बल्कि नारी सम्मान, स्वाभिमान और सुरक्षित भविष्य के प्रति संकल्प का पवित्र प्रतीक है। बहनों का स्नेह मेरे लिए आशीर्वाद है और उनके सुख-दुख में सदैव सहभागी बनना मेरा दायित्व।”

उन्होंने कहा कि हमारी बहनें परिवार की आत्मीय धुरी होने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण की सशक्त आधारशिला भी हैं। ईश्वर से कामना है कि मेरी हर बहन का जीवन सम्मान, प्रसन्नता और आत्मनिर्भरता से परिपूर्ण हो तथा उनके सपनों को निरंतर नई ऊंचाइयां मिलें। स्नेह, विश्वास और अटूट अपनत्व के इस पावन पर्व रक्षाबंधन की सभी बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं।

उधर, भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने नितिन नवीन से मुलाकात की और उन्हें राखी बांधी। नितिन नवीन ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “भरोसे और स्नेह का एक पवित्र धागा। मैं उन भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं का आभारी हूं, जिन्होंने आज मेरे नई दिल्ली स्थित आवास पर मुझे राखी बांधी।”

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