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नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर प्रस्तावित बिल पर वापस लिया गया फैसला

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काठमांडू, 10 फरवरी : ऑस्ट्रेलिया पहला ऐसा देश है जिसने 16 साल या उससे कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया। इसी क्रम में नेपाल भी सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए विचार कर रहा था और इस संबंध में एक बिल पेश किया गया। हालांकि, नेशनल असेंबली में प्रस्तावित अब इस बिल को वापस ले लिया गया।

नेपाल की मीडिया की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार एनए ने सोशल नेटवर्क के इस्तेमाल और मैनेजमेंट पर एक बिल को वापस लेने का फैसला एकमत से पास किया है। एनए के चेयरमैन नारायण दहल ने फैसले के लिए बिल पेश किया और बाद में बताया कि इसे एकमत से वापस ले लिया गया है।

बता दें, लेजिस्लेशन मैनेजमेंट कमेटी की चेयरपर्सन तुलसा कुमारी दहल ने पहले एनए मीटिंग में बिल पर कमिटी रिपोर्ट पेश की थी। कमेटी मीटिंग के दौरान 35 एनए सदस्यों ने 155 संशोधन प्रस्ताव फाइल किए। संचार और सूचना तकनीक मंत्रालय ने 3 फरवरी को बिल वापस लेने का फैसला किया था और इसके लिए संसद से अपील भी की थी।

नेपाल में 2025 में सोशल मीडिया पर बैन को लेकर ही बवाल मचा था, जिसका अंजाम जेन-जी आंदोलन के रूप में देखने को मिला। ऑस्ट्रेलिया के अलावा सोशल मीडिया पर बैन को लेकर आयरलैंड और डेनमार्क जैसे देश भी विचार कर रहे हैं।

बता दें, ऑस्ट्रेलिया ने 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू कर दिया, जिसका असर भी तेजी से देखने को मिला। ऑस्ट्रेलिया की तरह नेपाल समेत दुनिया के कई ऐसे देश हैं जो इस तरह का प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहे हैं।

इससे पहले यूरो न्यूज ने बताया था कि एक महीने के अंदर सोशल मीडिया कंपनियों ने नाबालिगों के लगभग 50 लाख अकाउंट हटा दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट रेगुलेटर ने बताया कि सोशल मीडिया कंपनियों ने 10 दिसंबर से लागू हुए कानून का पालन करने के लिए 16 साल से कम उम्र के लोगों के लगभग 4.7 मिलियन अकाउंट हटा दिए हैं।

ई-सेफ्टी कमिश्नर ने कहा कि इस सिलसिले में एक डाटा भी जारी किया गया। यह डाटा इस बात का शुरुआती संकेत है कि बड़े प्लेटफॉर्म 16 साल से कम उम्र के लोगों को अकाउंट रखने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं।

ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने कहा, “मैं इन शुरुआती नतीजों से बहुत खुश हूं। यह साफ है कि डिजिटल सुरक्षा की रेगुलेटरी गाइडेंस और प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ाव पहले से ही अच्छे नतीजे दे रहा है।”

ये आंकड़े कंप्लायंस पर पहला सरकारी डाटा हैं। इसके अनुसार, टेक कंपनियां नियमों का पालन करने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं। डेनमार्क जैसे दूसरे देश पहले से ही ऐसे ही कानूनों पर नजर रखे हुए हैं।

नॉर्डिक देशों ने नवंबर में घोषणा की थी कि उसने 15 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए सोशल मीडिया का एक्सेस ब्लॉक करने के लिए एक समझौता किया है। इसे 2026 के मध्य तक कानून बनाया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय

न्यूयॉर्क हत्या साजिश में निखिल गुप्ता ने कबूला जुर्म, जानिए कितने साल तक हो सकती है जेल

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वॉशिंगटन, 14 फरवरी : साल 2023 में निखिल गुप्ता न्यूयॉर्क में एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या कराने के लिए 15,000 डॉलर देने पर राजी हो गए थे। मैनहैटन की एक संघीय अदालत में पेश होकर उन्होंने यह बात खुद स्वीकार की। इस मामले में अमेरिका की संघीय जेल में अधिकतम 40 साल तक की सजा का प्रावधान है।

54 वर्षीय भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट में अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के सामने तीन आरोपों को स्वीकार किया। ये आरोप थे- भाड़े पर हत्या की साजिश, भाड़े पर हत्या, और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश।

अदालत में शपथ के तहत गुप्ता ने कहा, “2023 के वसंत में, मैं किसी दूसरे व्यक्ति के साथ यूनाइटेड स्टेट्स में एक व्यक्ति की हत्या करवाने के लिए राज़ी हुआ था।” उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने 15,000 डॉलर नकद एक व्यक्ति को दिए थे, जो अमेरिका में मौजूद था। पूछताछ के दौरान गुप्ता ने माना कि उन्हें पता था कि जिस व्यक्ति को निशाना बनाया जाना था, वह न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में रहता है, जबकि पैसा मैनहैटन में दिया गया।

जज सारा नेटबर्न ने सिफारिश की कि जिला जज विक्टर मरेरो इस दोष स्वीकार को मंजूर करें। बाद में अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया। सजा सुनाने की तारीख 29 मई 2026 तय की गई है।

फेडरल कानून के तहत, गुप्ता को भाड़े पर हत्या करने और भाड़े पर हत्या करने की साजिश के लिए ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल की सज़ा हो सकती है, और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के लिए 20 साल तक की सज़ा हो सकती है- कुल मिलाकर ज़्यादा से ज़्यादा 40 साल की सज़ा। हालांकि, हर मामले में अधिकतम सजा ही दी जाए, यह जरूरी नहीं है। अदालत सजा तय करते समय अमेरिकी सेंटेंसिंग गाइडलाइंस का पालन करती है और अन्य कानूनी पहलुओं को भी देखती है। दोष स्वीकार करने के कारण गुप्ता को कुछ राहत भी मिल सकती है।

सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता, भविष्य में ऐसे अपराध रोकने की जरूरत, जनता की सुरक्षा और अन्य कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा। अभियोजन पक्ष ने कहा कि अगर मामला ट्रायल तक जाता तो वे एक गुप्त सूत्र, एक अंडरकवर अधिकारी (जो खुद को सुपारी किलर बता रहा था), व्हाट्सऐप मैसेज और कॉल रिकॉर्डिंग, मोबाइल फोन के सबूत और न्यूयॉर्क में 15,000 डॉलर दिए जाने का वीडियो अदालत में पेश करते।

चार्जशीट में कहा गया था कि गुप्ता ने अन्य लोगों के साथ मिलकर, जिनमें भारत के कैबिनेट सचिवालय के एक कर्मचारी का नाम भी शामिल था, न्यूयॉर्क में रह रहे एक सिख राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या की योजना बनाई थी। यह कार्यकर्ता खालिस्तान की मांग का समर्थन करता था।

गुप्ता ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि वह भारत के नागरिक हैं और उनका दोष स्वीकार करना संभवतः उन्हें अमेरिका से निष्कासित किए जाने का कारण बनेगा। अमेरिकी आव्रजन कानून के तहत ऐसे मामलों में देश से हटाना लगभग अनिवार्य होता है।

दोष स्वीकार करके गुप्ता ने एक लंबे और डिप्लोमैटिक रूप से सेंसिटिव ट्रायल से बचाव कर लिया, जिसमें अमेरिकी जमीन पर विदेशी साजिश के आरोपों की सुनवाई होती। अब अदालत को यह तय करना है कि उन्हें कितने समय के लिए जेल भेजा जाएगा। इसका फैसला 29 मई 2026 को सुनाया जाएगा।

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अंतरराष्ट्रीय

बांग्लादेश में बीएनपी की सरकार, भारत समेत दक्षिण एशिया पर क्या हो सकता है असर?

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नई दिल्ली, 13 फरवरी : बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को गिराए जाने के लगभग 18 महीनों के बाद गुरुवार को संसदीय चुनाव हुए। शुक्रवार को सामने आए परिणामों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। इससे साफ हो गया है कि बांग्लादेश में बीएनपी की बहुमत की सरकार बन रही है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि बीएनपी की सरकार आने के बाद बांग्लादेश के भारत और दक्षिण एशिया के साथ रिश्तों पर कैसा असर पड़ेगा।

बांग्लादेश की कमान बीएनपी के हाथों में आने के बाद दक्षिण एशिया में रणनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच क्या संबंध रहेंगे। शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद से बांग्लादेश में यूनुस की अंतरिम सरकार के शासन में भारत और बांग्लादेश के बीच काफी तनाव देखने को मिला।

इसके साथ ही बांग्लादेश में पाकिस्तान को एंट्री मिल गई। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में आईएसआई की सक्रियता भी बढ़ी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसका मकसद भारत के खिलाफ इन युवाओं का इस्तेमाल करना है।

जिस तरह से यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ दोस्ती में गहराई आई है, बीएनपी के आने से इसमें कुछ बदलाव देखने को जरूर मिलेगा। बीएनपी भारत के साथ अपने राजनयिक और कूटनीतिक संबंध बेहतर करने का प्रयास करेगी। बीएनपी की वापसी से दोनों देशों के बीच सीमा, अवैध आव्रजन और जल बंटवारे (जैसे तीस्ता) जैसे मुद्दे फिर प्रमुख बन सकते हैं।

इससे पहले पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध काफी अच्छे थे। हालांकि, अवामी लीग से पूर्व जब खालिदा जिया के नेतृत्व में बीएनपी का शासन था, तब भारत और बांग्लादेश के बीच कड़वाहट देखने को मिली थी। लेकिन, तारिक रहमान के हाथ में सत्ता की कमान होने के बाद इसमें थोड़ा बदलाव जरूर हो सकता है।

चीन की अगर बात करें, तो उसकी हमेशा से ही चटगांव पोर्ट पर नजर रही है। यूनुस के शासन में यह खबरें भी सामने आ रही थी कि बांग्लादेश के सभी बड़े पोर्ट का संचालन चीन के हाथों में सौंप दिया जाएगा। अगर ऐसा हो जाता, तो चीन भविष्य में भारत के लिए मुसीबतें खड़ी कर सकता था।

बीएनपी सरकार चीन के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सहयोग को और बढ़ा सकती है। इससे दक्षिण एशिया, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।

उम्मीद की जा रही है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंधों में कुछ नरमी आ सकती है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन प्रभावित होगा। भारत के लिए यह सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। यदि आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो अस्थिरता का असर पड़ोसी देशों तक महसूस हो सकता है।

भारत के पूर्वोत्तर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सतर्कता बढ़ सकती है। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा पर इसकी सफलता निर्भर करेगी।

भारत के लिए बांग्लादेश एक बड़ा निर्यात बाजार है। नीतिगत बदलाव से कारोबारी माहौल प्रभावित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बीएनपी की वापसी के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच हालात में सुधार की संभावनाएं हैं, लेकिन अगर जमात-ए-इस्लामी की वापसी होती तो यह भारत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता था।

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व्यापार

आईटी शेयरों में भारी बिकवाली का असर, सेंसेक्स 558 अंक फिसलकर बंद

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मुंबई, 12 फरवरी : आईटी स्टॉक्स में बिकवाली के चलते भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 558.72 अंक या 0.66 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 83,674.92 और निफ्टी 146.65 अंक या 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,807.20 पर था।

इन दौरान निफ्टी आईटी भारी दबाव में रहा और यह 5.51 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। बड़े आईटी शेयर कोफोर्ज 6.50 प्रतिशत, ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर 6.28 प्रतिशत, टेक महिंद्रा 5.98 प्रतिशत, इन्फोसिस 5.84 प्रतिशत और एलटीआई माइंडट्री 5.51 प्रतिशत और टीसीएस 5.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी (1.45 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (1.31 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल एंड गैस (1.19 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (0.68 प्रतिशत), निफ्टी एनर्जी (0.56 प्रतिशत) और निफ्टी एफएमसीजी (0.51 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

दूसरी तरफ निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.73 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (0.40 प्रतिशत) और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.38 प्रतिशत) की तेजी के साथ बंद हुआ।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 283.70 अंक या 0.47 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 60,470.85 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 110.90 अंक या 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,344.10 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, बीईएल, एसबीआई, टाइटन, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, भारती एयरटेल और टाटा स्टील गेनर्स थे। टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक, एमएंडएम, एचयूएल, इटरनल, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक लूजर्स थे।

एलकेपी सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे ने कहा कि सूचकांक की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई थी और दिन के दौरान यह लगातार दबाव में रहा। दिन के दौरान निफ्टी ने 25,750 से लेकर 25,850 की रेंज में कारोबार किया।

उन्होंने आगे कहा कि बड़ी गिरावट के बावजूद इंडेक्स 20 डीएमए से ऊपर बना हुआ है। तेजी की स्थिति में 26,000 रुकावट का काम करेगा, जबकि 25,750 से लेकर 25,500 का स्तर सपोर्ट जोन होगा।

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