महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में भारी बारिश के मद्देनजर एनडीआरएफ ने तैनात की 7 टीमें
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश के मद्देनजर महाराष्ट्र में सात टीमों को तैनात किया है। एनडीआरएफ के अधिकारियों के अनुसार, सात सक्रिय टीमों में से तीन को मुंबई में, एक-एक नागपुर, लातूर, औरंगाबाद और उस्मानाबाद में सभी आवश्यक सुरक्षा उपकरण और जेमिनी बोट के साथ तैनात किया गया है।
अधिकारियों ने कहा, “भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसी स्थिति से लोगों को बचाने के लिए तैनात सभी सात टीमें जमीन पर सक्रिय हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि आगे जरूरत पड़ने पर स्टैंडबाय टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को अगले दो दिनों तक मराठवाड़ा क्षेत्र सहित कई हिस्सों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की थी।
राज्य के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बारिश और उसके बाद आई बाढ़ में 13 लोगों और 206 पशुओं की जान जा चुकी है।
लातूर और उस्मानाबाद में एनडीआरएफ की एक-एक टीम के अलावा जलगांव में राज्य आपदा मोचन बल की एक-एक टीम को तैनात किया गया है।
आईएमडी ने विदर्भ के पश्चिमी हिस्सों पर एक अच्छी तरह से चिह्न्ति कम दबाव के क्षेत्र के परिणामस्वरूप अगले दो दिनों के लिए उत्तर कोंकण, गुजरात और उत्तर मध्य महाराष्ट्र में मराठवाड़ा क्षेत्र सहित उत्तर मध्य महाराष्ट्र में भारी वर्षा की भविष्यवाणी की गई और चक्रवाती तूफान गुलाब के बाद 26 सितंबर को ‘गहरे अवसाद’ में कमजोर हो गया।
राष्ट्रीय मौसम ब्यूरो ने भी मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। इसका मतलब है कि अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना है।
चक्रवाती तूफान गुलाब ने 26 सितंबर को ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दी थी, जो कमजोर होकर गहरे दबाव में बदल गया था। इससे महाराष्ट्र के तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में तेज बारिश हुई थी।
एनडीआरएफ के अधिकारियों ने यह भी कहा कि ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चक्रवाती तूफान गुलाब के मद्देनजर तैनात टीमें जमीन पर सक्रिय हैं और दोनों राज्यों में सामान्य स्थिति बहाल करने में स्थानीय प्रशासन की मदद कर रही हैं।
महाराष्ट्र
पुणे बिल्डिंग हादसा: मलबे से एक शव बरामद, 9 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, राहत-बचाव अभियान जारी

पुणे के पास पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी स्थित कचरा प्रबंधन संयंत्र में इमारत गिरने के बाद गुरुवार को राहत और बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों ने बताया कि मलबे से अब तक एक शव बरामद किया गया है, जबकि 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। कई एजेंसियों की टीमें अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं।
यह तीन मंजिला इमारत वेस्ट-टू-एनर्जी (कचरे से बिजली बनाने वाले) प्लांट के ऊपर बनी हुई थी। बुधवार दोपहर पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) का बड़ा ढेर इमारत पर गिर गया, जिससे पूरी इमारत ढह गई और करीब 18 लोग मलबे में दब गए।
हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर 7 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। इसके बाद देर रात 2 और लोगों को बचा लिया गया, जिससे अब तक बचाए गए लोगों की संख्या 9 हो गई है।
बचाव अभियान की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 5वीं बटालियन के कमांडेंट एसबी सिंह ने बताया कि गुरुवार की सुबह मलबे से एक शव बरामद किया गया है, जबकि दो अन्य का पता भी चल गया है।
उन्होंने कहा, “एनडीआरएफ अपनी पूरी कोशिश कर रही है। हमने हाथों से खुदाई कर एक संकरी जगह बनाई है और उसी रास्ते से अंदर पहुंच रहे हैं। अब तक तीन शवों का पता चल चुका है, जिनमें से एक को बाहर निकाल लिया गया है।”
उन्होंने बताया कि दूसरा शव दूर से दिखाई दे रहा है, लेकिन उसे निकालने में अभी समय लगेगा।
एसबी सिंह ने कहा कि बचाव अभियान बेहद कठिन है, क्योंकि इमारत पूरी तरह अस्थिर हो चुकी है और कभी भी दोबारा गिर सकती है। इससे बचावकर्मियों की जान को भी खतरा बना हुआ है।
उन्होंने कहा, “हमारी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इमारत दोबारा न गिर जाए। अगर ऐसा हुआ तो बचावकर्मी भी मलबे में फंस सकते हैं। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि अंदर फंसे लोगों पर और मलबा न गिरे।”
उन्होंने बताया कि इमारत करीब 45 डिग्री तक झुक गई है, इसलिए अंदर पहुंचना बेहद मुश्किल है। बचावकर्मियों को संकरे रास्तों से रेंगते हुए अंदर जाना पड़ रहा है।
एनडीआरएफ अधिकारी ने बताया कि भारी मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनसे होने वाले कंपन से इमारत फिर गिर सकती है। इससे मलबे में फंसे लोगों और बचावकर्मियों दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है, इसलिए मलबा हाथों से धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “इसमें समय जरूर लगेगा, लेकिन हम पूरी कोशिश कर रहे हैं।”
एसबी सिंह ने यह भी बताया कि लाइफ डिटेक्टर, ध्वनि पहचान उपकरण (अकॉस्टिक सेंसर) और स्निफर डॉग्स जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अब तक मलबे के नीचे किसी जीवित व्यक्ति के होने के संकेत नहीं मिले हैं।
अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय एंटनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी के कई कर्मचारी इमारत में मौजूद थे। यह कंपनी पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के साथ मिलकर 14 मेगावाट के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का संचालन करती है।
पीसीएमसी ने शुरुआत में बताया था कि मलबे में 23 लोगों के फंसे होने की आशंका थी। इनमें से 5 लोग बचाव दल के पहुंचने से पहले ही खुद बाहर निकलने में सफल हो गए थे।
राहत और बचाव अभियान में एनडीआरएफ, भारतीय सेना, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम फायर ब्रिगेड, पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) फायर ब्रिगेड और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार काम कर रही हैं।
महाराष्ट्र
मुंबई: राज ठाकरे ने ‘मिसिंग लिंक’ सुरंग रिसाव को लेकर फडणवीस पर निशाना साधा

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की ‘मिसिंग लिंक’ सुरंग में हाल ही में हुए पानी के रिसाव को लेकर राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला।महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को महायुति सरकार पर भावनात्मक बयानबाजी के पीछे अपनी नाकामियों को छिपाने का आरोप लगाया।
एमएनएस रेलवे कामगार सेना की वर्षगांठ के अवसर पर बोलते हुए मनसे प्रमुख ने विधानसभा में मुख्यमंत्री के बचाव पर सवाल उठाया और विपक्ष को इस मुद्दे का ‘राजनीतिकरण’ न करने की चेतावनी देने वाली उनकी टिप्पणी पर पलटवार किया।
विपक्ष की आलोचना पर मुख्यमंत्री फडणवीस की आपत्ति पर तंज कसते हुए राज ठाकरे ने कहा, “वाह! वे (देवेंद्र फडणवीस) कहते हैं कि इसे राजनीतिक रंग मत दो। जब कोई बोलता है, तो उनके लिए यह ‘राजनीति’ बन जाती है। विपक्ष में रहते हुए आप इतने सालों तक क्या कर रहे थे? पिछली सरकारों के खिलाफ आपने जो आंदोलन किए, क्या वे ‘राजनीति’ नहीं थे? अब जब आप पर दबाव बढ़ रहा है, तो आप कह रहे हैं कि विपक्ष राजनीति कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि मिसिंग लिंक पर सवाल उठाना महाराष्ट्र का अपमान कैसे हो सकता है?
2008 के रेलवे भर्ती आंदोलन को याद करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि उसी आंदोलन से मनसे को पहचान मिली और पार्टी का चुनाव चिन्ह भी रेल इंजन बना। रेलवे में मराठी युवाओं को रोजगार मिले, इसी उद्देश्य से आंदोलन किया गया था। महाराष्ट्र में रेलवे की भर्ती होने के बावजूद उसकी जानकारी उत्तर प्रदेश और बिहार के अखबारों में छपती थी, महाराष्ट्र के युवाओं तक नहीं पहुंचती थी। आंदोलन के बाद स्थानीय भाषा में परीक्षा देने की सुविधा शुरू हुई, जिससे हजारों मराठी युवाओं को नौकरी मिली।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि रेलवे की भर्ती, प्लेटफॉर्म पर स्टॉल आवंटन और रेलवे में कौन नौकरी कर रहा है, इस पर लगातार नजर रखें। ‘जागे रहो, सतर्क रहो, बेसावध मत रहो।’
मुख्यमंत्री के ‘देख लूंगा’ वाले बयान पर सवाल उठाते हुए मनसे अध्यक्ष ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। मुख्यमंत्री का हिंदी में दिया गया बयान महाराष्ट्र के विधायकों के लिए था या दिल्ली के नेताओं के लिए, यह भी सोचना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को जिम्मेदारी लेते हुए कहना चाहिए था कि वे मामले में हस्तक्षेप करेंगे और काम पूरा करवाएंगे।
राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई-पुणे का विकास पूरी तरह बिगड़ चुका है और इसे विकास बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री से अपील की कि फिलहाल सभी निर्माण कार्य रोककर पहले शहर की व्यवस्था सुधारें। उन्होंने कहा कि 1 मई को उद्घाटन हुआ और कुछ ही दिनों में टनल से पानी टपकने लगा और हिस्से गिरने लगे। आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण घटिया निर्माण हो रहा है और जनता को खराब सड़कें व अधूरे प्रोजेक्ट मिल रहे हैं। राज ठाकरे ने कहा कि 1800 के दशक में बने सीएसटी स्टेशन और पुराने पुल आज भी मजबूत हैं, जबकि नए प्रोजेक्ट कुछ ही समय में खराब हो रहे हैं।
राज ठाकरे ने राम मंदिर ट्रस्ट और चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर राम मंदिर में दान की रकम में चोरी हुई है तो इस पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि चोरी की बात करना धर्म का अपमान कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा के ही सांसद ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के 15 में से 12 ट्रस्टी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी दूसरी सरकार के समय ऐसी घटना होती तो भाजपा और आरएसएस बड़े आंदोलन करते।
महाराष्ट्र
जब राज्य में मुस्लिम 11% हैं, तो यूनिफॉर्म सिविल कोड कमेटी में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है? रईस शेख ने कमेटी के पुनर्गठन की मांग की

RAIS SHAIKH
मुंबई: भिवंडी ईस्ट से समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने मांग की है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) एक्ट का ड्राफ्ट बनाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार (9 तारीख) को विधानसभा में जो कमेटी बनाई है, उसमें सभी माइनॉरिटी कम्युनिटी को सही रिप्रेजेंटेशन नहीं दिया गया है और इस कमेटी में मुस्लिम कम्युनिटी को रिप्रेजेंटेशन दिया जाना चाहिए। इस बारे में विधायक रईस शेख ने कहा कि महाराष्ट्र में माइनॉरिटी कम्युनिटी 20 परसेंट है। इसमें मुस्लिम, क्रिश्चियन, बौद्ध, जैन, सिख और पारसी छह कम्युनिटी शामिल हैं। इन कम्युनिटी में सबसे बड़ी संख्या सिर्फ मुस्लिम कम्युनिटी की है, जो राज्य की कुल आबादी का 11 परसेंट है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज विधानसभा में 7 मेंबर वाली कमेटी की घोषणा की। इसमें एक भी मुस्लिम रिप्रेजेंटेटिव को शामिल नहीं किया गया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड का सबसे ज़्यादा संबंध मुस्लिम कम्युनिटी से है। इस कोड को लेकर मुस्लिम कम्युनिटी में कन्फ्यूजन और डर है। इसलिए इस कमेटी में मुस्लिम कम्युनिटी को रिप्रेजेंटेशन देने की ज़रूरत है। राज्य सरकार मुस्लिम कम्युनिटी या पूरी माइनॉरिटी कम्युनिटी को भरोसे में लिए बिना यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू नहीं कर सकती। सरकार को इस कानून को लेकर एकतरफ़ा फ़ैसला नहीं लेना चाहिए। रईस शेख ने मांग की कि पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यों की कमेटी में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि को शामिल करके कमेटी को फिर से बनाया जाए। विधायक रईस शेख ने यह भी कहा कि हम इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलेंगे।
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