अपराध
मुंबई अपराध: माहिम स्थित सरस्वती मंदिर एजुकेशन ट्रस्ट में 75.5 लाख रुपये की सीबीएसई संबद्धता धोखाधड़ी के लिए पूर्व ट्रस्टी और सचिव पर मामला दर्ज
मुंबई: माहिम पुलिस ने सरस्वती मंदिर एजुकेशन ट्रस्ट, सेनापति बापट रोड, माहिम (पश्चिम) के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों के साथ-साथ दो निजी कंसल्टेंसी फर्मों के मालिक के खिलाफ कथित तौर पर कक्षा 9 और 10 के लिए सीबीएसई संबद्धता हासिल करने के लिए 75.50 लाख रुपये एकत्र करने और धोखाधड़ी करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।
आरोपियों की पहचान 69 वर्षीय पूर्व और वर्तमान सचिव संजय काशीनाथ सुखतनकर, 67 वर्षीय पूर्व समिति सदस्य मंगेश नारायण राजाध्यक्ष, 77 वर्षीय पूर्व ट्रस्टी अनिल पई कोकड़े, 79 वर्षीय पूर्व अध्यक्ष विनय भगवंत रेगे और परिभाषा एजुकेशनल सर्विसेज और शाश्वत सॉल्यूशंस की मालिक 43 वर्षीय अनुपमा खेतान के रूप में की गई है।
एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता 71 वर्षीय डॉ. मनोहर संजीव कामत, जो एक चिकित्सक और संस्थान के पूर्व उपाध्यक्ष (2015-2020) हैं, ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन ने लगभग एक दशक पहले सीबीएसई सेक्शन शुरू करने का फैसला किया और इसके लिए एक स्कूल भवन आरक्षित कर दिया। राज्य सरकार की अनुमति से कक्षा 8 तक कक्षाएं संचालित की गईं, लेकिन कक्षा 9 और 10 के लिए सीबीएसई से संबद्धता अनिवार्य है।
2018 में, जब पहला बैच कक्षा 8 में पहुँचा, तो सीबीएसई संबद्धता के लिए आवेदन जमा किया गया था। हालाँकि, बाद में समिति के कुछ सदस्यों ने दावा किया कि स्कूल सीबीएसई के बुनियादी ढाँचे के मानदंडों को पूरा नहीं करता है, जिससे अनुमोदन की संभावना कम हो गई है।
प्रबंधन समिति के दो सदस्यों मंगेश नारायण राजाध्यक्ष और मोहन नेरुलकर ने ट्रस्टी अनिल पई काकोड़े के साथ मिलकर बोर्ड को कथित तौर पर सूचित किया कि परिभाषा एजुकेशनल सर्विसेज और शाश्वत सॉल्यूशंस की मालिक अनुपमा खेतान, सीबीएसई संबद्धता हासिल करने में अनुभवी एक “एजेंट” होने के कारण, अनुमोदन में “सहायता” प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों को रिश्वत देनी पड़ सकती है।
तत्कालीन सचिव संजय सुखतंकर ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। उनकी सिफ़ारिश पर, प्रबंधन ने कथित तौर पर खेतान को 30 लाख रुपये का चेक जारी किया, जिसे लेखा और लेखा परीक्षा के उद्देश्यों के लिए एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया। छह महीने बाद, खेतान ने कथित तौर पर संबद्धता प्रक्रिया के लिए कागजी कार्रवाई शुरू की और सीबीएसई निरीक्षण अधिकारियों के दौरे की व्यवस्था की।
बाद में, उन्होंने कथित तौर पर “सेवा शुल्क” के रूप में चेक के माध्यम से 30 लाख रुपये और नकद में 15 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की। समिति के सदस्यों ने डॉ. कामत को सूचित किया कि ये भुगतान स्वीकृत हो गए हैं, और 17 अगस्त 2020 को प्रबंधन बैठक के कार्यवृत्त में उन्हें 15 लाख रुपये नकद भुगतान करने का निर्णय दर्ज किया गया। हालाँकि, ऑडिट रिपोर्ट में ऐसी कोई प्रविष्टि नहीं दिखाई दी, जिससे पता चलता है कि नकद भुगतान खातों से बाहर किया गया था।
इन भुगतानों के बावजूद, मार्च 2022 में, सीबीएसई ने स्कूल के संबद्धता अनुरोध को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया। दिसंबर 2021 में एक नव-नियुक्त समिति ने भी मामले की समीक्षा की और पुनः आवेदन किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
फरवरी 2022 में, खेतान को बातचीत के लिए बुलाया गया, जिसमें यह बात सामने आई कि उन्होंने संस्था से कथित तौर पर कुल 75 लाख रुपये लिए थे, लेकिन कोई ठोस काम नहीं किया गया। डॉ. कामत ने नए प्रबंधन को लिखित शिकायत देकर भ्रष्टाचार और धन के दुरुपयोग की जाँच की माँग की। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने माहिम पुलिस और चैरिटी कमिश्नर से संपर्क किया।
चैरिटी कमिश्नर द्वारा शुरू किए गए निरीक्षण के बाद, जाँच अधिकारी ने पाया कि ऑडिट रिपोर्ट में 21.60 लाख रुपये (2019-20) और 53.92 लाख रुपये (2020-21) “पेशेवर शुल्क” के रूप में दर्ज किए गए थे। चूँकि जाँच अधिकारी ऑडिट विशेषज्ञ नहीं होते, इसलिए शिकायतकर्ता को उचित कानूनी माध्यमों से विशेष ऑडिट कराने की सलाह दी गई।
डॉ. कामत की शिकायत और उसके बाद के निष्कर्षों के आधार पर, माहिम पुलिस ने आरोपी पदाधिकारियों और अनुपमा खेतान के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 34 (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जाँच जारी है।
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लोनी में पुलिस मुठभेड़ के बाद नकबजनी का आरोपी गिरफ्तार, 50 लाख के जेवर बरामद

उत्तर प्रदेश के लोनी थाना पुलिस ने वांछित एक आरोपी को पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के कब्जे से एक अवैध तमंचा, कारतूस और करीब 50 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि थाना लोनी क्षेत्र के निठोरा अंडरपास के पास संदिग्ध व्यक्ति और वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि नकबजनी की घटना में वांछित आरोपी मोटरसाइकिल से निठोरा की ओर आ रहा है। पुलिस टीम ने बाइक सवार को रुकने का इशारा किया, लेकिन उसने पुलिस को चकमा देकर भागने का प्रयास किया।
पुलिस ने पीछा किया तो भागते समय आरोपी की मोटरसाइकिल फिसल गई। पुलिस के मुताबिक इसके बाद आरोपी ने तमंचे से पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी और उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। घायल आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सचिन निवासी डबल टंकी के पास रूपनगर, लोनी, गाजियाबाद, उम्र करीब 28 वर्ष बताया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने 20 अगस्त 2026 की रात गिरि मार्केट, लोनी में एक घर में घुसकर चोरी करने की बात कबूल की है।
पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी किए गए सोने और चांदी के आभूषण बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा एक अवैध तमंचा, कारतूस भी बरामद हुआ है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ कमिश्नरेट गाजियाबाद के विभिन्न थानों में नकबजनी, चोरी, चोरी के माल की बरामदगी, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और आबकारी अधिनियम समेत करीब एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के गैंग को गिरफ्तार करने के लिए टीम का गठन किया जा रहा है,जो सचिन के बयान के आधार पर कार्रवाई करेगी और जल्द ही कई मामलों के खुलासे हो सकते है।
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दिल्ली पुलिस की कार्रवाई : जुआ, शराब और चोरी के 3 मामलों में 9 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 16 अगस्त: दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जुआ, अवैध शराब और चोरी के तीन मामलों में कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कैश, ताश के पत्ते और अवैध शराब भी बरामद की है।
खजूरी खास थाना पुलिस को शनिवार रात करीब 8 बजे सूचना मिली कि ई-ब्लॉक, श्री राम कॉलोनी, गली नंबर 2 के सामने कुछ लोग जुआ खेल रहे हैं। सूचना मिलते ही हेड कांस्टेबल रोहित, हेड कांस्टेबल जुबैर और कांस्टेबल प्रमोद ने एसएचओ को जानकारी देकर मौके पर छापा मारा।
पुलिस को देखकर आरोपी भागने लगे, लेकिन टीम ने छह लोगों को पकड़ लिया। मौके से एक ताश की गड्डी और 10,440 रुपए बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपियों में हनीफ (60), आशिफ (29), मोहम्मद सलीम (30), राजू, (60), हनीफ (38), और मोहम्मद सलीम (40) शामिल हैं।
इस मामले में थाना खजूरी खास में एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान किसी की भी कोई पुरानी संलिप्तता नहीं मिली। आगे की जांच जारी है।
इसी तरह सोनिया विहार पुलिस ने शनिवार शाम 6:30 बजे गश्त के दौरान बेदी गैस एजेंसी के पास एक खाली प्लॉट में एक महिला को संदिग्ध हालत में खड़े देखा। तलाशी लेने पर उसके बैग से 30 बीयर, 30 हाफ और 49 क्वार्टर की अलग-अलग ब्रांड की अवैध शराब की बोतलें मिलीं।
सूचना पर हेड कांस्टेबल राज हसन और महिला कांस्टेबल यास्मीन मौके पर पहुंचीं और 52 वर्षीय महिला को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि आरोपी पहले भी इसी तरह के एक मामले में शामिल रह चुकी है। थाना सोनिया विहार में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस शराब सप्लाई के स्रोत का पता लगा रही है।
वहीं तीसरे मामले में 3 अगस्त को ताशन जैन ने शिकायत दी थी कि हर्ष विहार, मेन 20 फुटा रोड स्थित उनकी दुकान से लगभग 35,000 रुपए चोरी हो गए हैं। इस पर ई-एफआईआर दर्ज की गई थी।
एसएचओ इंस्पेक्टर तेज दत्त गौर के नेतृत्व में एसआई संदीप, एएसआई गिरीश, हेड कांस्टेबल गौरव, हेड कांस्टेबल कुंदन और हेड कांस्टेबल भूपेंद्र की टीम ने सबूत जुटाकर दो संदिग्धों को पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म कबूल किया और उनकी निशानदेही पर 10,000 रुपए बरामद हुए।
गिरफ्तार आरोपियों में आर्यन (18) और सनी (18) के नाम शामिल हैं। तीनों मामलों में पुलिस आगे की जांच कर रही है।
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दिल्ली-एनसीआर में ‘सबवेंशन स्कीम’ के नाम पर घर खरीदारों से धोखाधड़ी, ईडी ने की छापेमारी

दिल्ली-एनसीआर में दो बिल्डर-बैंक नेक्सस मामलों के सिलसिले में गुरुवार को ईडी ने तलाशी अभियान चलाया। इन मामलों में ‘सबवेंशन स्कीम’ के जरिए घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की गई थी।
ईडी के मुताबिक, ये मामले एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े हैं। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ये जांच, ईसीआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। ये ईसीआईआर, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) की ओर से दर्ज दो एफआईआर पर आधारित थीं। ये एफआईआर, सुप्रीम कोर्ट की ओर से हिमांशु सिंह बनाम भारत संघ और अन्य में 29 अप्रैल, 2025 को पारित आदेश के पालन में दर्ज की गई थीं।
सीबीआई की जांच से पता चला कि बिल्डरों ने ‘सबवेंशन स्कीम’ के नाम पर घर खरीदारों/निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की थी। यह भी पता चला कि बिल्डरों ने ‘कब्जा मिलने तक कोई ईएमआई नहीं’ वाली स्कीम शुरू की थीं, जिसके तहत घर खरीदारों ने हाउसिंग लोन लिए और प्रोजेक्ट्स में फ्लैट/अपार्टमेंट बुक किए, हालांकि कई वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें फ्लैट/अपार्टमेंट का कब्जा नहीं दिया गया, जिससे घर खरीदारों को नुकसान हुआ।
12 अगस्त को एक और मामले में रायपुर में ईडी ने कार्रवाई की थी। ईडी ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के सिलसिले में रामगोपाल अग्रवाल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी के तौर पर बंद रामगोपाल अग्रवाल को 11 अगस्त को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने उसे सात दिन यानी 18 अगस्त तक ईडी की कस्टडी में भेजा है।
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