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Thursday,05-November-2026
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यूपी की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन रहा एमएसएमई सेक्टर

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 सूक्ष्म, लघु व मध्यम दर्जे के उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के मामले में उत्तर प्रदेश देश में एक नया रिकार्ड बना रहा है। हर जिले में नई-नई एमएसएमई इकाइयों की स्थापना हो रही है। कोरोना के वैश्विक संकट के दौरान भी इस सेक्टर में करीब डेढ़ लाख नई इकाइयां इस सेक्टर में लगाई गई। विभिन्न बैंकों से मिले आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष एक अप्रैल से 21 सितंबर तक 1,54,691 लोगों ने 11702.37 करोड़ रुपए का लोन लिया है। यह आंकड़े यह भी बताते हैं कि बीते साढ़े चार वर्षो में सरकार की नीतियों से मिली मदद के चलते राज्य में 82 लाख से अधिक एमएसएमई को लोन दिया गया है। इसके विपरीत अखिलेश की सरकार में वर्ष 2016-17 में 6,35,583 एमएसएमई को लोन मिला था।

राज्य में एमएसएमई सेक्टर द्वारा दिखाए गए उत्साह को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब इस सेक्टर में अधिक से अधिक निवेश लाने के लिए एमएसएमई पार्क की स्थापना करने को मंजूरी दी है। इसके तहत यमुना एक्सप्रेस वे विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर 29 और 32 में सूबे का पहला एमएसएमई पार्क स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा जल्दी ही आगरा, कानपुर, मुरादाबाद, वाराणसी, आजमगढ़ और गोरखपुर में भी ऐसे ही पार्क बनाए जाएंगे। इन छह जिलों में एमएसएमई इकाइयों की भारी तादाद है, पार्क की स्थापना से एमएसएमई इकाइयों को लाभ होगा।

अधिकारियों के अनुसार इस सेक्टर पर प्रदेश सरकार के दिए जा रहे विशेष ध्यान के चलते ही कोरोना संकट के दौरान भी कोई एमएसएमई इकाई बंद नहीं हुई। तब सरकार के जीवन और जीविका को बचाने के लिए इंडस्ट्रियल लॉकडाउन नहीं किया। सरकार का यह फैसला सूबे की एमएसएमई इकाइयों के लिए संजीवनी साबित हुआ है। सूबे के नए उद्यमियों ने इस त्रासदी में भी उद्यमिता का परिचय देते हुए नई इकाइयां स्थापित की।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष बीते एक अप्रैल से 21 सितंबर तक 1,54,691 लोगों ने 11702.37 करोड़ रुपए का लोन लिया है। इसमें 1,51,878 एमएसएमई ने 10723.41 करोड़ रुपए का लोन लिया है, जबकि 2813 एमएसएमई ने इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (इसीएलजीएस) के तहत 978.96 करोड़ रुपए का लोन लिया है।

कोरोना संक्रमण की पहली लहर में भी एमएसएमई इकाइयों ने मास्क, पीपीई किट और सेनेटाइजर बनाकर अपनी उपयोगिता को साबित किया था। इस बार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, थर्मल स्कैनर, यूवी चैंबर, वेंटिलेटर आदि उपकरण बनाने की दिशा में सूबे के एमएसएमई उद्यमियों का प्रयास मेक इन इंडिया की परिकल्पना को साकार करता है।

सरकार के आंकड़े इसे उजागर करते हैं कि राज्य में रोजगार मुहैया कराने के लिहाज से कृषि क्षेत्र के बाद एमएसएमई सबसे महत्वपूर्ण सेक्टर है। एमएसएमई की संख्या के लिहाज से देश में यूपी की हिस्सेदारी 14.2 प्रतिशत है। एमएसएमई सेक्टर के माध्यम से प्रदेश लगातार तीन वर्षों से 1.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है। आगरा, कानपुर, मुरादाबाद, वाराणसी, आजमगढ़ और गोरखपुर में एमएसएमई इकाइयों की भारी तादाद है।

वित्त वर्ष 2016-17 में सपा सरकार के दौरान 6,35,583 एमएसएमई को लोन दिया गया था। साल 2017 में सत्ता परिवर्तन होते ही योगी सरकार में वित्त वर्ष 2017-18 में 7,87,572 एमएसएमई को लोन दिया गया। वित्त वर्ष 2018-19 में 10,24,265 उद्यमियों और 2019-20 में 17,45,472 लोन दिए गए हैं। वित्त वर्ष 2020-21 में एक अप्रैल 2020 से 18 मार्च 2021 तक 13,52,255 उद्यमियों को लोन दिए गए हैं जबकि 01 अप्रैल से 21 सितंबर तक 1,54,691 लोगों ने 11702.37 करोड़ रुपए का लोन मुहैया कराया गया है।

अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने बताया कि एमएसएमई सेक्टर यूपी की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन रहा है। इसके चलते बहुत मात्रा में लोगों को रोजगार मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप यही सेक्टर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर का बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राजनीति

असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”

मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”

उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।

आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।

इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।

सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।

यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।

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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

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सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।

सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।

सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।

सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।

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राजनीति

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।

उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।

बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।

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