राजनीति
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मंत्री के बेटे पर हत्या का मामला दर्ज, मरने वालों की संख्या 9 हुई
लखीमपुर खीरी में तिकुनिया पुलिस ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और 15 अन्य के खिलाफ लखीमपुर खीरी में हत्या और हिंसा भड़काने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। सोमवार को यहां मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। रविवार की हिंसा के बाद से लापता एक स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप का शव सोमवार को मुर्दाघर में मिला, जिसमें चार किसानों सहित मरने वालों की संख्या नौ हो गई।
संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के लखीमपुर खीरी के एक गांव में जाने का विरोध कर रहे किसानों को आशीष मिश्रा की गाड़ी ने टक्कर मार दी।
हालांकि, अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने काफिले पर हमला किया और एक ड्राइवर और दो भाजपा कार्यकर्ताओं सहित तीन अन्य की हत्या कर दी।
तिकुनिया में पीड़ित परिवारों से मिलने गई कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश पुलिस ने हरगांव थाना क्षेत्र में हिरासत में ले लिया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, किसानों ने सोमवार सुबह जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौरसिया को मांगों का एक चार्टर सौंपा, जिसमें केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने, उनके बेटे आशीष मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने, मृतकों के परिवारों को मुआवजा और परिजनों के लिए सरकारी नौकरी की मांग शामिल है।
महाराष्ट्र
मुंबई: राज ठाकरे ने ‘मिसिंग लिंक’ सुरंग रिसाव को लेकर फडणवीस पर निशाना साधा

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की ‘मिसिंग लिंक’ सुरंग में हाल ही में हुए पानी के रिसाव को लेकर राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला।महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को महायुति सरकार पर भावनात्मक बयानबाजी के पीछे अपनी नाकामियों को छिपाने का आरोप लगाया।
एमएनएस रेलवे कामगार सेना की वर्षगांठ के अवसर पर बोलते हुए मनसे प्रमुख ने विधानसभा में मुख्यमंत्री के बचाव पर सवाल उठाया और विपक्ष को इस मुद्दे का ‘राजनीतिकरण’ न करने की चेतावनी देने वाली उनकी टिप्पणी पर पलटवार किया।
विपक्ष की आलोचना पर मुख्यमंत्री फडणवीस की आपत्ति पर तंज कसते हुए राज ठाकरे ने कहा, “वाह! वे (देवेंद्र फडणवीस) कहते हैं कि इसे राजनीतिक रंग मत दो। जब कोई बोलता है, तो उनके लिए यह ‘राजनीति’ बन जाती है। विपक्ष में रहते हुए आप इतने सालों तक क्या कर रहे थे? पिछली सरकारों के खिलाफ आपने जो आंदोलन किए, क्या वे ‘राजनीति’ नहीं थे? अब जब आप पर दबाव बढ़ रहा है, तो आप कह रहे हैं कि विपक्ष राजनीति कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि मिसिंग लिंक पर सवाल उठाना महाराष्ट्र का अपमान कैसे हो सकता है?
2008 के रेलवे भर्ती आंदोलन को याद करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि उसी आंदोलन से मनसे को पहचान मिली और पार्टी का चुनाव चिन्ह भी रेल इंजन बना। रेलवे में मराठी युवाओं को रोजगार मिले, इसी उद्देश्य से आंदोलन किया गया था। महाराष्ट्र में रेलवे की भर्ती होने के बावजूद उसकी जानकारी उत्तर प्रदेश और बिहार के अखबारों में छपती थी, महाराष्ट्र के युवाओं तक नहीं पहुंचती थी। आंदोलन के बाद स्थानीय भाषा में परीक्षा देने की सुविधा शुरू हुई, जिससे हजारों मराठी युवाओं को नौकरी मिली।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि रेलवे की भर्ती, प्लेटफॉर्म पर स्टॉल आवंटन और रेलवे में कौन नौकरी कर रहा है, इस पर लगातार नजर रखें। ‘जागे रहो, सतर्क रहो, बेसावध मत रहो।’
मुख्यमंत्री के ‘देख लूंगा’ वाले बयान पर सवाल उठाते हुए मनसे अध्यक्ष ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। मुख्यमंत्री का हिंदी में दिया गया बयान महाराष्ट्र के विधायकों के लिए था या दिल्ली के नेताओं के लिए, यह भी सोचना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को जिम्मेदारी लेते हुए कहना चाहिए था कि वे मामले में हस्तक्षेप करेंगे और काम पूरा करवाएंगे।
राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई-पुणे का विकास पूरी तरह बिगड़ चुका है और इसे विकास बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री से अपील की कि फिलहाल सभी निर्माण कार्य रोककर पहले शहर की व्यवस्था सुधारें। उन्होंने कहा कि 1 मई को उद्घाटन हुआ और कुछ ही दिनों में टनल से पानी टपकने लगा और हिस्से गिरने लगे। आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण घटिया निर्माण हो रहा है और जनता को खराब सड़कें व अधूरे प्रोजेक्ट मिल रहे हैं। राज ठाकरे ने कहा कि 1800 के दशक में बने सीएसटी स्टेशन और पुराने पुल आज भी मजबूत हैं, जबकि नए प्रोजेक्ट कुछ ही समय में खराब हो रहे हैं।
राज ठाकरे ने राम मंदिर ट्रस्ट और चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर राम मंदिर में दान की रकम में चोरी हुई है तो इस पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि चोरी की बात करना धर्म का अपमान कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा के ही सांसद ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के 15 में से 12 ट्रस्टी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी दूसरी सरकार के समय ऐसी घटना होती तो भाजपा और आरएसएस बड़े आंदोलन करते।
राष्ट्रीय समाचार
केतन अग्रवाल हत्याकांड : पिता की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से न्याय की गुहार, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का आग्रह

केतन अग्रवाल हत्याकांड में पीड़ित परिवार ने शीघ्र न्याय की मांग करते हुए भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भावुक पत्र लिखा है। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने ईमेल के माध्यम से मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का आग्रह किया है।
अपने पत्र में विशाल अग्रवाल ने लिखा कि वह आग्रह किसी व्यवसायी या प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे पिता के रूप में कर रहे हैं जिसने अपने बेटे को खो दिया है। उन्होंने कहा कि केतन की नृशंस हत्या के बाद उनका पूरा परिवार गहरे सदमे में है और हर दिन एक ही सवाल उन्हें परेशान करता है कि उनके बेटे को न्याय आखिर कब मिलेगा?
उन्होंने पत्र में एक और व्यक्तिगत त्रासदी का जिक्र करते हुए बताया कि केतन की मौत के मात्र 20 दिनों के भीतर उनके पिता का भी निधन हो गया। उनके अनुसार, पोते की असमय मृत्यु का सदमा उनके पिता सहन नहीं कर सके और उनकी जान चली गई। उन्होंने कहा कि महज 20 दिनों के भीतर उन्होंने अपने बेटे और पिता, दोनों को खो दिया, जिससे पूरा परिवार बिखर गया।
राष्ट्रपति को संबोधित पत्र में विशाल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उनका परिवार किसी विशेष रियायत या विशेषाधिकार की मांग नहीं कर रहा है। उनकी केवल यही मांग है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए, ताकि न्याय में अनावश्यक देरी न हो और दोषियों को जल्द सजा मिल सके।
उन्होंने कहा कि न्याय में होने वाली देरी पीड़ित परिवार के दर्द को और गहरा कर देती है। साथ ही, यह भी जरूरी है कि समाज में यह संदेश जाए कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और अपराध करने वालों को समयबद्ध तरीके से सजा मिलती है।
पत्र के अंत में विशाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मामले पर व्यक्तिगत ध्यान देने और शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने की भावुक अपील की। उन्होंने लिखा कि उनका परिवार अपना सबकुछ खो चुका है और अब केवल न्याय ही उनकी अंतिम उम्मीद है। उन्होंने अनुरोध किया कि उनके बेटे के मामले को ‘सिर्फ एक और फाइल’ बनकर न रहने दिया जाए, बल्कि इसे संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ देखा जाए।
महाराष्ट्र
जब राज्य में मुस्लिम 11% हैं, तो यूनिफॉर्म सिविल कोड कमेटी में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है? रईस शेख ने कमेटी के पुनर्गठन की मांग की

RAIS SHAIKH
मुंबई: भिवंडी ईस्ट से समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने मांग की है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) एक्ट का ड्राफ्ट बनाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार (9 तारीख) को विधानसभा में जो कमेटी बनाई है, उसमें सभी माइनॉरिटी कम्युनिटी को सही रिप्रेजेंटेशन नहीं दिया गया है और इस कमेटी में मुस्लिम कम्युनिटी को रिप्रेजेंटेशन दिया जाना चाहिए। इस बारे में विधायक रईस शेख ने कहा कि महाराष्ट्र में माइनॉरिटी कम्युनिटी 20 परसेंट है। इसमें मुस्लिम, क्रिश्चियन, बौद्ध, जैन, सिख और पारसी छह कम्युनिटी शामिल हैं। इन कम्युनिटी में सबसे बड़ी संख्या सिर्फ मुस्लिम कम्युनिटी की है, जो राज्य की कुल आबादी का 11 परसेंट है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज विधानसभा में 7 मेंबर वाली कमेटी की घोषणा की। इसमें एक भी मुस्लिम रिप्रेजेंटेटिव को शामिल नहीं किया गया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड का सबसे ज़्यादा संबंध मुस्लिम कम्युनिटी से है। इस कोड को लेकर मुस्लिम कम्युनिटी में कन्फ्यूजन और डर है। इसलिए इस कमेटी में मुस्लिम कम्युनिटी को रिप्रेजेंटेशन देने की ज़रूरत है। राज्य सरकार मुस्लिम कम्युनिटी या पूरी माइनॉरिटी कम्युनिटी को भरोसे में लिए बिना यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू नहीं कर सकती। सरकार को इस कानून को लेकर एकतरफ़ा फ़ैसला नहीं लेना चाहिए। रईस शेख ने मांग की कि पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यों की कमेटी में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि को शामिल करके कमेटी को फिर से बनाया जाए। विधायक रईस शेख ने यह भी कहा कि हम इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलेंगे।
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