राजनीति
पूर्वी एशियाई देशों का प्रवेश द्वार होगा मणिपुर : प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि मणिपुर पूर्वी एशियाई देशों का प्रवेश द्वार होगा, जिसके लिए पूर्वोत्तर राज्य में रेलवे कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और पूर्वी एशियाई देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आसान संपर्क के माध्यम से मणिपुर को म्यांमार और थाईलैंड से जोड़ा जाएगा।
मोदी ने इम्फाल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, “वह दिन दूर नहीं जब मणिपुर की राजधानी को ब्रॉड गेज रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में मणिपुर में 40 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी लागू की जा रही हैं।”
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के महाप्रबंधक अंशुल गुप्ता ने पहले कहा था कि भारत को पड़ोसी म्यांमार से जोड़ने के उद्देश्य से एक नई ब्रॉड गेज रेलवे लाइन के निर्माण के लिए 111 किलोमीटर इंफाल-मोरेह खंड का अंतिम स्थान सर्वेक्षण शुरू किया गया है।
ओलंपियनों का जिक्र करते हुए (भारतीय मुक्केबाजी के दिग्गज एम.सी. मैरी कॉम और भारोत्तोलक मीराबाई चानू) प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने मणिपुर में भारत का पहला खेल विश्वविद्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार ने पहले ही राज्य में एक अनूठी खेल संस्कृति विकसित की है और मणिपुर देश के खेल केंद्रों में से एक होगा।”
मोदी ने कहा कि मणिपुर के लोगों की जनसांख्यिकी, संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने राज्य की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए इनर लाइन परमिट जारी किया है।
यह घोषणा करते हुए कि केंद्र और राज्य सरकार एमएसएमई क्षेत्रों का जोरदार समर्थन कर रही है, प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पाम तेल खेती मिशन भी शुरू किया है और इससे मणिपुर के किसानों को काफी हद तक मदद मिलेगी।
यह कहते हुए कि भाजपा सरकार ने मणिपुर में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं और परियोजनाएं शुरू की हैं।
भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा कि प्रदेश की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनाना बहुत जरूरी है।
मणिपुर में भाजपा सरकार की सफलता का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि पांच साल में पाइप से पानी के कनेक्शन 25,000 घरों से बढ़ाकर तीन लाख घरों तक किए गए और हजारों गुमराह युवा हिंसक गतिविधियों को छोड़कर जीवन की मुख्यधारा में आए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल त्रासदी : राष्ट्रपति पौडेल ने भारत का मदद के लिए जताया आभार

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने आपदा काल में भारत की मदद और पहुंचाई जा रही राहत सामग्री लिए दिल से धन्यवाद किया है।
पौडेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। आभार जताते हुए लिखा, नेपाल की सरकार और जनता की ओर से मैं भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आभार व्यक्त करता हूं। भारत सरकार की ओर से दिखाई गई चिंता, सहयोग और एकजुटता के लिए नेपाल सरकार और जनता की ओर से दिल से धन्यवाद।
दूसरे पोस्ट में उन्होंने आपदा में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के प्रति भी संवेदना जाहिर की। उन्होंने लिखा, “हम 26 अगस्त, 2026 की आपदा में भारतीय नागरिकों की मौत पर भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त करते हैं।”
नेपाल बाढ़ में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (शनिवार सुबह 10 बजे तक का अपडेट) के मुताबिक 626 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 2500 के करीब लापता हैं। बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। रसुवा, चितवन, धाडिंग, तनहुं, गोरखा, नुवाकोट और नवलपरासी ईस्ट (पूर्वी नवलपरासी) जैसी जगहों पर शव बरामद किए गए हैं।
मौसम वैज्ञानिक, पहाड़ और ग्लेशियर विशेषज्ञ अचानक आई बाढ़ के कारणों की जांच कर रहे हैं। नेपाल सेना समेत कई स्वयंसेवक बाढ़ पीड़ितों को बचाने और घायलों की तलाश करने के काम में लगे हैं। ज्यादातर बचाव उड़ानें रसुवा, तिमुरे, त्रिशूली और धुंचे इलाकों पर केंद्रित हैं।
आपदा काल में भारत अपने पड़ोसी देश की हरसंभव मदद कर रहा है।
बाढ़ पीड़ित लोगों के लिए अब तक 57.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। शुक्रवार रात 10 टन राहत सामग्री की एक और खेप काठमांडू पहुंची। राहत सामग्री के साथ 11 सदस्यीय चिकित्सकों और पैरामेडिक्स टीम भी नेपाल भेजी गई है। सुरंग में जारी बचाव अभियान का जायजा लेने के लिए एक विशेष बचाव दल भी पहुंचा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि भारतीय टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं। उन्होंने 21 भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल सेना का आभार भी जताया।
राष्ट्रीय समाचार
लाल किला ब्लास्ट केसः एनआईए की चार्जशीट पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, 9 सितंबर को अगली सुनवाई

दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट मामले में जांच अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गई है। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। कोर्ट के इस कदम के बाद मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।
एनआईए ने अपनी जांच के आधार पर कुल 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में उमर उन नबी (मृतक), आमिर राशिद अली, जासिर बिलाल वानी, मुजम्मिल, आदिल अहमद राथर, मुफ्ती इरफान अहमद, शाहीन, सोयाब, बिलाल और यासिर अहमद डार समेत 13 आरोपी शामिल हैं। एजेंसी ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और जुटाए गए सबूतों के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका का विवरण चार्जशीट में दर्ज किया है।
जांच के मुताबिक, उमर-उन-नबी की ब्लास्ट में मौत हो चुकी है, जबकि मामले से जुड़ा एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। एनआईए ने इस पूरे मामले की जांच दिल्ली तक सीमित नहीं रखी। एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों और इलाकों में जांच की। इस दौरान आरोपियों के संभावित संपर्कों और कथित साजिश की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की गई।
जांच के दौरान 588 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त किए गए सामान को भी केस का हिस्सा बनाया गया है। इन सबूतों के आधार पर एनआईए ने ब्लास्ट से जुड़े घटनाक्रम, आरोपियों की कथित भूमिका और उनके बीच संभावित संपर्क को अदालत के सामने रखा है।
इससे पहले अदालत ने अहलमद को मुख्य और सप्लीमेंट्री चार्जशीट की जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। मौजूदा अदालत ने उसी आदेश का पालन करने को कहा है। साथ ही विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया है कि वह एक संक्षिप्त सारणी तैयार करें, जिसमें हर आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों का जिक्र हो, ताकि अदालत को चार्जशीट पर संज्ञान लेने में आसानी हो।
अदालत ने यह भी नोट किया कि उकाशा, फैजल, आशिम और उस्मान के खिलाफ आगे की जांच लंबित है। एनआईए को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है कि इस लंबित जांच के बावजूद मामले में आगे की कार्यवाही की जा सकती है या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिकी एयरक्राफ्ट पार्ट्स की रूस में तस्करी, फ्लोरिडा जूरी ने रूसी नागरिक को ठहराया दोषी

अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि फ्लोरिडा में रहने वाले एक रूसी नागरिक को रूस और उसकी सरकारी एयरलाइन ‘एरोफ्लोट’ को 9,00,000 डॉलर से ज्यादा कीमत के अमेरिकी एयरक्राफ्ट पार्ट्स (हवाई जहाज के पुर्जे) गैर-कानूनी रूप से निर्यात करने का दोषी ठहराया गया है।
फ्लोरिडा के दक्षिणी जिले की एक फेडरल जूरी ने मुकदमे के बाद 62 वर्षीय अलेक्जेंडर मामोनोव को सभी 12 आरोपों में दोषी पाया।
इन आरोपों में ‘एक्सपोर्ट कंट्रोल रिफॉर्म एक्ट’ का उल्लंघन करने की साजिश, नियंत्रित सामानों का गैर-कानूनी निर्यात, तस्करी करने की साजिश, तस्करी, निर्यात की गलत जानकारी देना और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश शामिल थी।
अमेरिकी जिला जज कैथलीन विलियम्स ने मामोनोव को सजा सुनाने के लिए 20 नवंबर की तारीख तय की है। न्याय विभाग ने यह नहीं बताया कि उसे अधिकतम क्या सजा मिल सकती है।
अभियोजकों ने बताया कि एरोफ्लोट के पूर्व कर्मचारी मामोनोव ने इस निर्यात योजना में शामिल होने से पहले रूस से दक्षिण फ्लोरिडा आकर रहना शुरू किया था।
न्याय विभाग के अनुसार, उसने इग्नात वाकोरिन (एक रूसी नागरिक जो अभी भी फरार है) के साथ मिलकर अमेरिका में सप्लायर्स से एयरक्राफ्ट पार्ट्स हासिल किए और उन्हें रूस भेजा। इन दोनों पर अप्रैल 2025 में एक साथ आरोप लगाए गए थे।
अभियोजकों द्वारा बताए गए अदालती दस्तावेजों और गवाही के अनुसार, यह योजना तब शुरू हुई जब फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े हमले के बाद अमेरिका ने रूस को निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे।
वाणिज्य विभाग ने एक अस्थायी डिनायल ऑर्डर भी जारी किया था, जिसके तहत एरोफ्लोट को अमेरिका में बने सामान लेने से रोक दिया गया था।
अभियोजकों ने कहा कि मामोनोव और वाकोरिन ने अमेरिकी सप्लायर्स से यह कहकर पार्ट्स की असली मंजिल छिपाई कि ये पार्ट्स चीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भेजे जाएंगे।
न्याय विभाग ने बताया कि इसके बजाय एयरक्राफ्ट पार्ट्स रूस और एरोफ्लोट को भेजे गए।
एफबीआई के काउंटरइंटेलिजेंस और जासूसी-रोधी विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर रोमन रोजाव्स्की ने कहा, “मामोनोव ने अमेरिकी सप्लायर्स से पार्ट्स की मंज़िल के बारे में झूठ बोलकर रूस को लगभग दस लाख डॉलर के एविएशन पार्ट्स गैर-कानूनी रूप से निर्यात किए और सभी आरोपों में दोषी ठहराया जाना उसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराता है।”
रोजाव्स्की ने कहा कि एफबीआई प्रतिबंधों और निर्यात-नियंत्रण कानूनों को लागू करने को प्राथमिकता देना जारी रखेगी।
उन्होंने कहा, “यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो हमारे दुश्मनों तक अमेरिकी टेक्नोलॉजी की तस्करी करने के बारे में सोच रहे हैं।” अमेरिकी अटॉर्नी जेसन रेडिंग क्विनोन्स ने कहा कि इस फैसले से यह साबित होता है कि तीसरे देशों के जरिए एक्सपोर्ट कंट्रोल से बचने की कोशिशों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, “रूस साउथ फ्लोरिडा के रास्ते अपनी खरीद करके अमेरिकी प्रतिबंधों और एक्सपोर्ट कंट्रोल से बच नहीं सकता।”
क्विनोन्स ने आगे कहा, “आप शिपिंग लेबल पर गलत डेस्टिनेशन (गंतव्य) डालकर अमेरिकी एक्सपोर्ट कानूनों को खत्म नहीं कर सकते।”
अभियोजक ने कहा कि मामोनोव ने लगभग 1 मिलियन डॉलर के एयरक्राफ्ट पार्ट्स के एक्सपोर्ट को छिपाने के लिए गलत डेस्टिनेशन और फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन का इस्तेमाल किया था।
यूक्रेन पर हमले के बाद वाशिंगटन ने रूस पर बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों में एयरक्राफ्ट, एविएशन कंपोनेंट्स और अन्य उत्पाद शामिल हैं, जिनके बारे में अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे रूसी सैन्य क्षमताओं या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उद्योगों को मदद पहुंचा सकते हैं।
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