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Tuesday,06-October-2026
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केरल : स्थानीय निकाय चुनाव में जीत को कांग्रेस उम्मीदवार वैष्णव सुरेश ने ‘लोकतंत्र की जीत’ बताया

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तिरुवनंतपुरम, 13 दिसंबर: कांग्रेस उम्मीदवार वैष्णव सुरेश ने शनिवार को केरल लोकल चुनावों में अपनी जीत को ‘लोकतंत्र और सच्चाई की जीत’ बताया। कुछ दिन पहले अधिकारियों ने उनकी उम्मीदवारी को खारिज कर दिया था, लेकिन केरल हाई कोर्ट के दखल के बाद उनकी उम्मीदवारी बहाल कर दी गई थी।

सुरेश ने मौजूदा तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन पार्षद अंशु वामादेवन को हराया, जो अपनी मूल सीट छोड़कर मुट्टाडा सीट से चुनाव लड़ने आए थे, लेकिन पहली बार चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार से हार गए।

मुट्टाडा सीट, जब से बनी है, सीपीआई(एम) का गढ़ रही है। शुरुआती नतीजों से उनकी जीत का संकेत मिलते ही, वैष्णव ने कहा कि वह ‘बहुत खुश’ हैं और इस नतीजे को लोगों का साफ संदेश बताया।

उन्होंने कहा, “यह लोकतंत्र की जीत है। सच्चाई की हमेशा जीत होती है, और यहां भी ऐसा ही हुआ है। लोगों को पता था कि क्या हो रहा है। अच्छी लड़ाई लड़ी।”

तकनीकी कारणों से नामांकन पत्र जांच के दौरान खारिज होने के बाद वैष्णव की उम्मीदवारी ने पूरे राज्य का ध्यान खींचा था। इस फैसले से कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसने अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया और दावा किया कि यह खारिज करना राजनीतिक मकसद से किया गया था।

इसके बाद वैष्णव ने हाई कोर्ट का रुख किया, जिसने उनकी याचिका सुनने के बाद अधिकारियों को उनका नामांकन स्वीकार करने का आदेश दिया, जिससे उन्हें फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई। कानूनी लड़ाई, साथ ही उनकी कम उम्र ने वैष्णव को निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस अभियान का एक प्रमुख चेहरा बना दिया।

पार्टी नेताओं ने उनके मामले को संस्थागत अन्याय के उदाहरण के रूप में पेश किया और जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई बताया, उसके इर्द-गिर्द समर्थन जुटाया। अदालत के आदेश के बाद फिर से शुरू हुए उनके अभियान में शासन के मुद्दों के साथ-साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की सुरक्षा के बड़े विषय पर ध्यान केंद्रित किया गया।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि उनके पक्ष में आया फैसला न केवल कांग्रेस के लिए, बल्कि स्थानीय निकाय चुनावों के व्यापक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, जहां कई जगहों पर कानूनी चुनौतियां प्रमुखता से सामने आईं।

वैष्णव की जीत को कांग्रेस के लिए, खासकर युवाओं और पहली बार चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने इस नतीजे का स्वागत करते हुए कहा कि इसने न्यायपालिका और चुनावी प्रक्रिया दोनों में जनता के विश्वास को फिर से पक्का किया है।

उन्होंने मतदाताओं को ‘एक उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के वैध अधिकार से वंचित करने के प्रयासों को समझने’ के लिए भी श्रेय दिया।

वैष्णव के लिए, यह जीत कड़ी सार्वजनिक निगरानी में उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत है।

मतदाताओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, उन्होंने कहा कि वह उन पर जताए गए भरोसे को सही साबित करने के लिए काम करेंगी और स्थानीय मुद्दों को हल करने पर ध्यान केंद्रित करेंगी।

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नीट पेपर लीक मामला : दिल्ली की अदालत ने आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई

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नई दिल्ली, 6 जून। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 13 मई को सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया था।

आरोपी शुभम खैरनार की शनिवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई।

शुभम खैरनार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के नंदगांव का रहने वाला है। उसने मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से यह पेपर 10 लाख में खरीदा और इसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख में बेच दिया।

बता दें कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी सामने आई कि सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कल्याण के म्हारल क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा से भी पूछताछ की।

सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने म्हारल इलाके में छात्रा के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया। सूत्रों का दावा है कि संबंधित छात्रा नाशिक की एक अन्य छात्रा के संपर्क में थी, जिसकी जांच के दौरान उसका मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आया। इसी आधार पर सीबीआई ने उससे पूछताछ की है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। एजेंसियों की शुरुआती जांच में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया और अब इसे नए सिरे से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।

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कथित बांग्लादेशियों के जाली और फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों की जांच शुरू; किरीट सोमैया के आरोपों के बाद मुंबई पुलिस हरकत में।

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मुंबई: भाजपा नेता किरीट सौम्या ने मुंबई में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच भी एक्शन में आ गई है। मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक एसआईटी टीम बनाने को मंजूरी दे दी है और एक आदेश भी जारी किया है। किरीट सौम्या ने पहले इस मामले की जांच की मांग की थी। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने अब एक आदेश जारी कर यह जिम्मेदारी मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी को दी है, जो इन मामलों की जांच करेगी। मुंबई शहर से अब तक एक हजार से ज्यादा बांग्लादेशी अप्रवासियों को निकाला जा चुका है, इसके बावजूद किरीट सौम्या ने आरोप लगाया है कि शहर में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं और यह देश की अखंडता के लिए खतरा है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में धार्मिक नफरत फैलाना भी शुरू कर दिया है। मुंबई मुंबई पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट और शिकायत की जांच के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी बनाई है। इस एसआईटी के बारे में डिपार्टमेंटल ऑर्डर जारी करते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि इस टीम को जॉइंट पुलिस कमिश्नर क्राइम लक्ष्मी गौतम हेड करेंगी, जबकि एडिशनल कमिश्नर क्राइम मुंबई, एडिशनल कमिश्नर स्पेशल ब्रांच, डीसीपी डिटेक्शन क्राइम और असिस्टेंट कमिश्नर क्राइम इस टीम का हिस्सा हैं। ऑर्डर में कहा गया है कि यह एसआईटी टीम बड़े पैमाने पर फर्जी डॉक्यूमेंट्स और बर्थ सर्टिफिकेट में फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायतें सामने आने के बाद बनाई गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का मकसद डॉक्यूमेंट्स की जांच करके जरूरी एक्शन लेना है। यह ऑर्डर मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने जारी किया है।

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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

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मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।

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